एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना/ रांची। सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लालू प्रसाद यादव की जमानत रद्द करने के लिए अपनी याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने की मांग की।
सुप्रीम कोर्ट चारा घोटाला मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता लालू प्रसाद यादव को झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा दी गई जमानत को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका को सूचीबद्ध करने पर सहमत हो गया है। सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में 25 अगस्त को सुनवाई होगी।
वहीं इस मामले पर बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव का कहना है, ...हम कोर्ट में अपना पक्ष रखेंगे। वे हमें कितना भी परेशान करें, कुछ नहीं होगा। हमें स्पष्ट है कि हमें क्या करना है। कोई भी उनसे डरने वाला नहीं है। ...हम लड़ेंगे और जीतेंगे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने मणिपुर हिंसा मामलों की जांच के लिए बुधवार को विभिन्न रैंक की 29 महिला अधिकारियों सहित 53 अधिकारियों को तैनात किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
सीबीआई ने बताया कि तीन उप महानिरीक्षक रैंक के अधिकारी राज्य में हिंसा के मामलों की जांच के लिए अपनी-अपनी टीम का नेतृत्व करेंगे, जिनमें महिला अधिकारी लवली कटियार और निर्मला देवी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी संयुक्त निदेशक घनश्याम उपाध्याय को रिपोर्ट करेंगे जो विभिन्न मामलों में जांच की निगरानी करेंगे।
3 मई को राज्य में पहली बार जातीय हिंसा भड़कने के बाद से 160 से अधिक लोग मारे गये हैं, और कई सौ लोग घायल हुए हैं। बहुसंख्यक मेइती समुदाय की अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में आदिवासी एकजुटता मार्च आयोजित किए जाने के दौरान यह हिंसा भड़की थी।
मणिपुर की कुल आबादी में मेइती समुदाय के लोगों की संख्या लगभग 53 प्रतिशत है और वे ज्यादातर इम्फाल घाटी में रहते हैं, जबकि आदिवासी नगा और कुकी समुदाय के लोगों की संख्या 40 प्रतिशत है और वे ज्यादातर पहाड़ी जिलों में रहते हैं।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में मनी लांड्रिग और जमीन घोटाले की चल रही जांच में ईडी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सीएम हेमंत सोरेन को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है। मंगलवार को सुबह से ही ईडी दफ्तर की गितिविधि बढ़ी हुई थी। दोपहर बाद ईडी ने सीएम हेमंत सोरेन को पूछताछ के लिए नोटिस भेज दिया है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लेकर राजधानी से बड़ी खबर है, प्रवर्तन निदेशालय ने सीएम हेमंत सोरेन को दूसरा समन जारी करते हुए पूछताछ के लिए ईडी दफ्तर बुलाया है। हालांकि सीएम को दोबारा बुलाये जाने की आधिकारिक पुष्टि नही हो पाई है।
6 मई 2022 को ईडी ने मनरेगा घोटाले में राज्य की तत्कालीन खान सचिव पूजा सिंघल और उनके सहयोगियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान ईडी को 19.41 करोड़ मिले थे। जांच के बाद ईडी ने बताया था कि जब्त पैसों में अधिकांश राशि राज्य के बड़े राजनीतिज्ञों और नौकरशाहों की है।
इसके बाद आठ जुलाई 2022 को ईडी ने अवैध खनन के मामले में मुख्यमंत्री के बरहेट विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा और उनके सहयोगियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस मामले में ईडी ने 19 जुलाई 2022 को पंकज मिश्रा को मास्टरमाइंड बताते हुए गिरफ्तार किया था।
बाद में ईडी ने 25 अगस्त को सत्ता के गलियारे में चर्चित रहे प्रेम प्रकाश, सीए जे जयपुरिया के ठिकानें पर छापेमारी की। इस दौरान प्रेम के यहां से सीएम हाउस में तैनात दो सिपाहियों की एके 47 और 60 कारतूस बरामद किये थे, जबकि जयपुरियार के यहां से संपत्ति और निवेश से जुड़े कच्चे कागजात व फाइलें बरामद की गयी थीं।
वहीं रवि केजरीवाल ने एजेंसी को जो बयान दिया था, उसमें हेमंत सोरेन का जिक्र किया गया था, बाद में रवि केजरीवाल के बयान के सत्यापन में भी कई चीजें ईडी की जानकारी में आयी थीं, जिसके बाद सीएम को ईडी ने पहली बार 1 नवंबर 2022 को समन भेज 3 नवंबर को हाजिर होने को कहा था।
उस दौरान मुख्यमंत्री ने पत्र भेजकर ईडी से समय मांग लिया था लेकिन उसके बाद ईडी ने सीएम को दोबारा समन भेजा और फिर 17 नवम्बर 2022 को सीएम ईडी दफ्तर में हाजिर हुए थे। पिछली बार सीएम हेमंत सोरेन को अवैध खनन मामले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने अपने दफ्तर बुलाया था।
17 नवंबर को सीएम हेमंत सोरेन से करीब नौ घंटे तक पूछताछ हुई थी। उस दिन हेमंत सोरेन अपने भाई बसंत सोरेन के साथ दोपहर करीब 12 बजे ईडी के दफ्तर पहुंचे थे। दिनभर चली मुलाकात के बाद करीब 9 बजे कल्पना सोरेन ईडी दफ्तर पहुंची और उन्हें अपने साथ लेकर घर गयीं।
ईडी की छापेमारी के बारे में तब सीएम हेमंत सोरेन ने आरोप लगाया था कि यह सरकार को अस्थिर करने की कोशिश है। उन्होंने ये भी आरो लगाया था कि जब से सरकार बनी है तब से उनके खिलाफ षड्यंत्र रचा जा रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने यहां तक कहा था कि सत्तापक्ष के विधायकों के घर ही छापेमारी होती है। उन्होंने राज्यपाल पर भी राजनीति संरक्षण देने की बात कही थी।
तब पूछताछ के लिए ईडी की पटना और दिल्ली कार्यालय से वरिष्ठ अधिकारी रांची पहुंचे थे, सीएम से पूछताछ को लेकर राजभवन और भाजपा आॅफिस में भी सुरक्षा सख्त कर दी गयी थी। इसके अलावा हिनू चौक से होटल ग्रीन एकर्स तक धारा 144 लगा दिया गया था। पूरे रांची में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये थे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को वाराणसी के विवादित ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने की अनुमति के खिलाफ मस्जिद समिति ने गुरुवार को उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
शीर्ष अदालत के समक्ष दायर अपनी विशेष अनुमति याचिका में अंजुमन इंतजामिया मस्जिद समिति वाराणसी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा 03 अगस्त गुरुवार को पारित आदेश पर रोक लगाने की मांग की।
मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त की। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता एम निज़ामुद्दीन पाशा ने पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए तत्काल सुनवाई की गुहार लगायी थी।
शीर्ष अदालत के समक्ष श्री पाशा ने सर्वेक्षण पर तत्काल रोक लगाने की गुहार लगाते हुए कहा- मैंने विशेष अनुमति याचिका ईमेल कर दी है... उन्हें (सर्वेक्षण) जारी न रखने दें। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने जवाब दिया- हम इस पर तुरंत विचार करेंगे।
मस्जिद का प्रबंधन करने वाली इस समिति ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के कुछ घंटों के भीतर ही शीर्ष न्यायालय का रुख किया। उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के उस फैसले पर मुहर लगा दी थी, जिसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को ज्ञानवापी परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने की अनुमति दी गयी थी।
समिति ने अपनी विशेष अनुमति याचिका में दलील दी है कि उच्च न्यायालय के आदेश को इस तरह के अभ्यास से उत्पन्न गंभीर जोखिमों के कारण रद्द किया जा सकता है, जिसके पूरे देश में परिणाम हो सकते हैं।
याचिका में पिछले साल एक सर्वेक्षण के लिए एक आयुक्त नियुक्त किये जाने पर पूरे मुद्दे की अत्यधिक मीडिया कवरेज और सांप्रदायिक रंगों का हवाला दिया गया है।
इस आधार पर यह भी दावा किया गया कि ऐसी यह पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के प्रावधानों के बिल्कुल खिलाफ थी।
इस अधिनियम के तहत 15 अगस्त 1947 को प्रचलित धार्मिक स्थानों के स्वरूप को बनाये रखना अनिवार्य कर दिया था। उच्च न्यायालय ने 03 अगस्त को वाराणसी जिला अदालत के 21 जुलाई के आदेश के खिलाफ समिति की याचिका खारिज कर दी, जिसमें यह पता लगाने के लिए सर्वेक्षण का आदेश किया गया था कि क्या मस्जिद पहले से मौजूद मंदिर पर बनायी गयी थी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद परिसर से जुड़े मामले में गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला आया है। हाईकोर्ट ने परिसर में हो रहे अरक के सर्वे को जारी रखने के निर्देश दिए हैं। मुस्लिम पक्ष ने इस सर्वे के खिलाफ अपील की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया है।
अब अदालत के फैसले के बाद ज्ञानवापी में सर्वे तुरंत शुरू होगा। हिन्दू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कोर्ट के फैसले पर बयान दिया है कि अदालत ने सर्वे को मंजूरी दी है। एएसआई ने अपना हलफनामा दे दिया है और अदालत का आदेश आ गया है, ऐसे में अब कोई सवाल नहीं बनता है। वकील ने बताया कि अदालत ने मुस्लिम पक्ष की दलीलों को खारिज किया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली करीब दो दर्जन याचिकाओं पर बुधवार को पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने नियमित सुनवाई शुरू कर दी।
मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की संविधान पीठ के समक्ष याचिकाकर्ताओं की ओर से मुख्य अधिवक्ता के तौर पर कपिल सिब्बल ने बहस की शुरुआत की।
वरिष्ठ अधिवक्ता श्री सिब्बल ने दलील देते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 के विशेष प्रावधान को संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से नहीं, बल्कि एक राजनीतिक अधिनियम द्वारा हटाया गया था।
याचिकाकर्ता मोहम्मद अकबर लोन का प्रतिनिधित्व करने वाले श्री सिब्बल ने याचिकाकर्ताओं की ओर से मुख्य अधिवक्ता के तौर पर दलील देते हुए कहा कि पूर्ववर्ती जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के विशेष प्रावधान को एक राजनीतिक अधिनियम द्वारा हटाया गया था, न कि संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से।
इस पर संविधान पीठ की अगुवाई करते हुए न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने उनसे पूछा कि क्या एक निर्वाचित विधानसभा के लिए अनुच्छेद 370 को निरस्त करना संभव है, जिसने पूर्ववर्ती राज्य जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा दिया था।
श्री सिब्बल ने कहा कि अनुच्छेद 356 का उद्देश्य (जिसके तहत किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है) एक अस्थायी स्थिति है और इसका उद्देश्य लोकतंत्र को नष्ट करना नहीं है।
श्री सिब्बल ने पीठ के समक्ष कहा कि अनुच्छेद 370 के खंड 3 में कल्पना की गई थी कि संविधान सभा को अनुच्छेद 370 को निरस्त करने में भूमिका निभानी चाहिए।
इस पर, पीठ ने कहा कि भारत के प्रभुत्व की संप्रभुता की स्वीकृति सभी इरादों और उद्देश्यों के लिए पूर्ण थी और जम्मू और कश्मीर की संविधान सभा ने केवल कुछ विधायी विषयों पर कुछ अधिकार सुरक्षित रखे थे।
श्री सिब्बल ने जवाब दिया कि अनुच्छेद 370 के खंड 3 में संविधान सभा का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है, जो अनुच्छेद 370 को निरस्त करने में भूमिका निभाने की उसकी मंशा को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि अदालत को उस ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य को देखना होगा, जिसमें उन्होंने (जम्मू कश्मीर) विलय पत्र पर हस्ताक्षर किये थे। उन्होंने कहा कि इस बात पर कोई विवाद नहीं करता कि वे भारत में एकीकृत हैं लेकिन संवैधानिक प्रावधान के अधीन हैं।
श्री सिब्बल ने कहा कि यह उनके लिए एक ऐतिहासिक क्षण था, क्योंकि शीर्ष अदालत इस बात का विश्लेषण करेगा कि 06 अगस्त, 2019 को इतिहास को क्यों उछाला गया और क्या संसद द्वारा अपनायी गयी प्रक्रिया लोकतंत्र के सिद्धांतों और इच्छाशक्ति के अनुरूप थी और यह भी कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को चुप कराया जा सकता है।
अनुच्छेद 370 के संबंध में ऐतिहासिक फैसले की वैधता पर सवाल उठाने वाली करीब 23 याचिकाओं पर सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी।
टीम एबीएन, रांची। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार की देर रात कारोबारी विष्णु अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया है।
विष्णु अग्रवाल पर दस्तावेज में जालसाजी कर जमीन खरीद- बिक्री करने का आरोप है।एक अगस्त को एमपी-एमएलए के विशेष न्यायाधीश की अदालत में उसे पेश किया जायेगा।
टीम एबीएन, रांची। दस्तावेज जालसाजी कर जमीन की खरीद बिक्री मामले के आरोपी विष्णु अग्रवाल से 31 जुलाई को पूछताछ होगी। ईडी ने समन भेज कर उन्हें पूछताछ के लिए रांची स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में हाजिर होने का निर्देश दिया है।
इससे पहले ईडी द्वरा जारी किये गये समन के आलोक में उन्होंने अलग नाम पर हाजिर होने में असमर्थता जताते हुए समय की मांग की थी। 17 जुलाई को हाजिर होने के लिए भेजे गये समन के बदले उन्होंने अपनी बीमारी के नाम पर समय मांगा था।
ईडी ने उनके आवेदन पर विचार करने के बाद 26 जुलाई को हाजिर होने के लिए समन भेजा। लेकिन उन्होंने हाजिर होने के बदले धार्मिक कार्यों में व्यस्त होने के नाम पर समय मांगा।
ईडी ने उन्हें फिर समय दिया और समन जारी कर 31 जुलाई को हाजिर होने का निर्देश दिया। बताया जाता है कि वह अपने पैतृक गांव में यज्ञ करवा रहे थे। 29 जुलाई को यज्ञ समाप्त होने की सूचना है।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse