एबीएन न्यूज नेटवर्क, लातेहार। झारखंड विधिक सेवा प्रधिकार के निर्देष पर 27 अप्रैल को व्यवहार न्यायालय लातेहार में विशेष लोक आदालत का आयोजन किया जायेगा। इसके लिए प्री लोक आदालत सिटिंग 21 अप्रैल से शुरू किया जायेगा। इस विशेष लोक आदालत में चेक बाउंस और बिजली से संबधित लंबित वादों का निपटारा किया जायेगा।
कुल लंबित वादों का 20 प्रतिषत स अधिक वादों का निपटारा का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए लातेहार व्यवहार न्यायालय में तैयारी शुरू कर दी यी है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार सिंह ने न्यायिक पदाधिकारियों की बैठक कर निपटारे योग्य वादों को चिन्हीत करने एवं दोनों पक्षों के लोगों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिये, जिससे कि विशेष लोक आदालत को सफल बनाया जा सके।
मेडिएटर, पीएलवी संग सचिव की हुई बैठक
विशेष लोक आदालत की सफलता को लेकर जिला विधिक सेवा प्रधिकार परिसर में सचिव स्वाति विजय उपाध्याय के नेतृत्व में मेडिएटर एवं पारा लीगल वोलिएंटर की बैठक की गयी। इसमें लोक आदालत में ज्यादा से ज्यादा वादों का निपटारा कैसे हो इसपर मंथन किया गया। कुल लंबित वादों का 20 प्रतिषत से ज्यादा वादों के निपटारा करने में सबकी भागीदारी सुनिश्चित की गयी एवं विशेष लोक आदालत को सफल बनाने की अपील की गयी।
बैठक में अधिवक्ता अनिल कुमार ठाकुर, पंकज कुमार संजय कुमार, लाल अरविंद नाथ शाहदेव, सुनील कुमार, नवीन गुप्ता, बनवारी प्रसाद, वासुदेव पांडेय, देवेंद्र कुमार द्विवेदी, प्रदीप उपाध्याय, नरोत्तम पांडेय, मिथिलेश कुमार, सविता साहू, संतोष रंजन, अरविंद गुप्ता, कुमार अमित, विक्रांत सिंह, धीरेंद्र शुक्ला, प्रमोद कुमार पांडेय, अब्दुल सलाम, रमन कुमार महतो, स्वप्निल कुमार सिंह, कौशल किशोर पांडेय, आभाष कुमार, अशोक कुमार सिंह, रितु रानी, रजनीश भूषण और अमित कुमार गुप्ता, हरिओम पाण्डेय, कौशल पाण्डेय, उज्जवल पाण्डेय, श्याम किशोर पाण्डेय, बिपिन पाण्डेय, बदरू दोजा, सब्दर अली, प्रज्ञा सिंह, मनोज मिश्रा, आर्यन कुमार, आदि मौजूद थे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में लोक सभा चुनाव 19 अप्रैल से सात चरणों में होंगे। 4 जून को चुनाव परिणाम की घोषणा होगी। अगर आप एक वास्तविक मतदाता है और किसी कारण से आपके पास वोटर आईडी कार्ड नहीं है तो भी आप वोट डाल सकते हैं।
पिछले महीने जारी एक आदेश में, चुनाव आयोग ने कहा कि जो मतदाता अपना वोटर आईडी कार्ड प्रस्तुत करने में सक्षम नहीं हैं, उन्हें अपनी पहचान स्थापित करने के लिए वैकल्पिक फोटो पहचान दस्तावेजों में से एक प्रस्तुत करना होगा।
दिखाना होगा इनमें से कोई एक डॉक्यूमेंट
अगर आपके पास वोटर आईडी कार्ड नहीं है तो अपना वोट डालने के लिए चुनाव अधिकारी को आधार कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, बैंक या डाकघर द्वारा जारी फोटोयुक्त पासबुक, श्रम मंत्रालय द्वारा जारी स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के तहत भारत के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी स्मार्ट कार्ड में से कोई एक दिखाना होगा।
इसके अलावा भारतीय पासपोर्ट, फोटो के साथ पेंशन दस्तावेज, केंद्र या राज्य सरकारों या कर्मचारियों को जारी किये गये फोटो के साथ सेवा आई-कार्ड, सांसदों, विधायकों और जारी किये गये आधिकारिक पहचान पत्र, और सामाजिक न्याय मंत्रालय द्वारा जारी अद्वितीय विकलांगता आई-कार्ड भी स्वीकार किये जायेंगे।
कोई भी वास्तविक मतदाता वोट देने के अधिकार से वंचित न रहे, यह सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग ने राज्य चुनाव अधिकारियों से कहा है कि वे लिपिकीय या वर्तनी संबंधी त्रुटियों को नजरअंदाज करें, बशर्ते मतदाता की पहचान वोटर आई-कार्ड के माध्यम से स्थापित की जा सके।
इसमें यह भी कहा गया है कि किसी अन्य विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी द्वारा जारी वोटर आईडी कार्ड को पहचान के लिए स्वीकार किया जायेगा, बशर्ते कि वोटर का नाम उस मतदान केंद्र की मतदाता सूची में हो जहां वह आया है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने रांची में सड़क जाम और ट्रैफिक के खराब सिस्टम पर नाराजगी जाहिर की है। मंगलवार यानी आज (2 अप्रैल) को एक पीआईएल पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पुलिस और रांची नगर निगम की भूमिका पर सवाल खड़े किये हैं और इस मामले में जवाब देने के लिए रांची के ट्रैफिक एसपी को बुधवार को सशरीर उपस्थित होने को कहा है।
अदालत ने रांची नगर निगम के अधिवक्ता से जानना चाहा कि शहर में जाम की समस्या क्यों बनी रहती है? ट्रैफिक सिग्नल खराब क्यों हैं? मेन रोड, कोकर एवं अन्य जगहों पर मल्टी स्टोरी पार्किंग की व्यवस्था अब तक क्यों नहीं की गयी? ट्रैफिक रूल्स का उल्लंघन करने वाले चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस क्यों नहीं सस्पेंड किये जाते हैं?
इस पर रांची नगर निगम की ओर से बताया गया कि पहले की तुलना में ट्रैफिक सिस्टम बेहतर हुआ है और ट्रैफिक रूल्स का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माने की रकम भी बढ़ायी गयी है। शहर में फ्लाईओवर का निर्माण कार्य चल रहा है। इस वजह से जाम की समस्या रहती है। दिसंबर 2024 तक फ्लाईओवर का काम पूरा होने के बाद लोगों को जाम की समस्या से निजात मिलेगी।
कोर्ट ने नगर निगम के जवाब पर असंतुष्टि जाहिर की और ट्रैफिक एसपी को इन सवालों पर जवाब बुधवार को देने को कहा है।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, बारियातू (लातेहार)। लोकसभा चुनाव 2024 को निष्पक्ष व भयमुक्त बनाने को लेकर पुलिस प्रशासन संकल्पित है। इसी क्रम में शुक्रवार की सुबह अंतरजिला सीमा क्षेत्र (लातेहार-चतरा) के बारियातू थाना गेट के समीप चेकपोस्ट पर वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस ने बड़ी मात्रा में नकदी बरामद की है। ये जांच अभियान बालूमाथ अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी आशुतोष कुमार सत्यम की मॉनिटरिंग में बारियातू थाना प्रभारी राजा दिलावर के नेतृत्व में किया जा रहा है।
जांच अभियान के दौरान एक कार (जेएच 02बीएम-3719) से 21 लाख 95 हजार रुपये कैश बरामद किये गये। एसडीपीओ आशुतोष कुमार सत्यम ने जानकारी दी कि लातेहार पुलिस अधीक्षक अंजनी अंजन के निर्देश पर लोकसभा चुनाव-2024 में धनबल व नशे की रोकथाम को लेकर 22 मार्च से लगातार चेकपोस्ट पर जांच अभियान जारी है।
शुक्रवार की सुबह सिमरिया से बालूमाथ की ओर जा रही एक कार की तलाशी ली गयी। इसमें रखे काले रंग के बैग से नकद 21 लाख 95 हजार रुपये बरामद किये गये। उन्होंने बताया कि इसे जब्त करते हुए इसकी सूचना वरीय पुलिस पदाधिकारी, अनुवीक्षण कमेटी व आयकर विभाग को दी गयी है। यह पैसा किसका है, किस काम का है।
सभी बिंदुओं पर जांच जारी है। अगर किसी व्यक्ति को 50 हजार रुपये से अधिक कैश ले जाना है, तो उसे अपने पहचान पत्र के अलावा पैसे निकालने से संबंधित पर्ची और पैसे कहां इस्तेमाल होंगे। इसका प्रमाण भी रखना होगा। मौके पर निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी सह बीडीओ नंदकुमार राम के अलावा सहायक अवर निरीक्षक द्वारिका नाथ पांडेय व सशस्त्र बल के जवान शामिल थे।
एसडीपीओ ने बताया कि आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद से अब तक लातेहार पुलिस ने कुल 26 लाख 11 हजार रुपये नकद बरामद किये हैं। इसके अलावा करीब तीन करोड़ 60 लाख रुपये मूल्य की अफीम, डोडा, नार्कोटिक्स ड्रग्स व गांजा आदि भी जब्त किया जा चुका है। कुल पांच हथियार (आग्नेयास्त्र) व 19 जिंदा कारतूस भी पुलिस ने बरामद किया है। आचार संहिता के बाद से यह जब्ती पुलिस के लिए बड़ी उपलब्धि है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा सत्र की कार्यवाही में शामिल नहीं होने पर हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। वहीं, इसके लिए सुनवाई 1 अप्रैल को होगी।
जानकारी के मुताबिक हेमंत सोरेन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि जेल में बंद जनप्रतिनिधियों को सत्र के दौरान शामिल होने की अनुमति मिलती है। हाई कोर्ट और ईडी कोर्ट में इससे संबंधित अदालतों के आदेश को पेश भी किया गया था, लेकिन हाई कोर्ट ने उनकी याचिका स्वीकार नहीं की और खारिज कर दी।
याचिका में हेमंत सोरेन ने मांग करते हुए कहा, आने वाले दिनों में आहूत होने वाले विधानसभा के सत्र में उन्हें शामिल होने की अनुमति दी जाए। इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट से हेमंत सोरेन ने हाई कोर्ट के आदेश को रद्द करने का आग्रह किया है।
बता दें कि फरवरी में झारखंड विधानसभा सत्र के दौरान हेमंत सोरेन ने ईडी कोर्ट से सदन में शामिल होने के लिए कहा था, लेकिन ईडी कोर्ट ने अनुमति नहीं दी, जिसके बाद हेमंत सोरेन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट से भी पूर्व सीएम को सदन में शामिल होने की अनुमति नहीं मिल पायी थी।
टीम एबीएन, रांची। मनी लॉन्ड्रिंग केस में पूर्व सीएम हेमंत सोरेन की न्यायिक हिरासत बढ़ी, चार अप्रैल तक जेल में रहेंगे। मनी लॉन्ड्रिंग केस में पूर्व सीएम हेमंत सोरेन की न्यायिक हिरासत बढ़ी, चार अप्रैल तक जेल में रहेंगे।
इससे पहले, 15 फरवरी को पीएमएलए कोर्ट ने सोरेन को 22 फरवरी तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। बाद में उनकी न्यायिक हिरासत 21 मार्च तक बढ़ा दी थी। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के तुरंत बाद 31 जनवरी को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोरेन का गिरफ्तार कर लिया था।
तब से सोरेन रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय जेल में बंद हैं। ईडी ने सोरेन को 31 जनवरी को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत कथित भूमि घोटाला मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था।
इससे पहले उन्होंने ईडी की हिरासत में झारखंड के राज्यपाल को सीएम पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया था। ईडी ने इससे पहले हेमंत सोरेन के ठिकानों पर छापा मारा था और दावा किया था कि उसने झामुमो प्रमुख के कब्जे से 36 लाख रुपये से अधिक की नकदी बरामद की है।
साथ ही कथित तौर पर धोखाधड़ी से हासिल की गयी भूमि से जुड़े दस्तावेज भी बरामद किए हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी का कहना है कि पूर्व सीएम ने कथित तौर पर 8.5 एकड़ जमीन आपराधिक आय से हासिल की थी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। स्टेट बैंक आफ इंडिया के चेयरमैन ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक इलेक्टोरल बांड से जुड़ी सारी जानकारी आज चुनाव आयोग को उपलब्ध करा दी गयी है।
स्टेट बैंक के चेयरमैन दिनेश कुमार खारा ने कहा कि इस जानकारी में इलेक्टोरल बांड का नंबर, इलेक्टोरल बांड की कीमत, पार्टी का नाम, पार्टी के बैक अकाउंट की आखिरी चार डिजिट नंबर, भुनाए गए बांड की कीमत और नंबर शामिल है।
स्टेट बैंक ने हलफनामे में कहा है कि साइबर सुरक्षा के मद्देनजर राजनीतिक पार्टी का पूरा बैंक खाता नंबर, पार्टी और बांड खरीदने वाले की केवाईसी डिटेल्स सार्वजनिक नहीं की गयी है। इस जानकारी के अलावा कोई और जानकारी स्टेट बैंक ने अपने पास नहीं रखी है।
सुप्रीम कोर्ट ने 18 मार्च को स्टेट बैंक को खरीदे गये और कैश कराये गये बांड नंबरों का पूरा ब्यौरा चुनाव आयोग को देने और चुनाव आयोग को उसे प्रकाशित करने का आदेश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने स्टेट बैंक के चेयरमैन से कहा था कि भविष्य में किसी विवाद की गुंजाइश को खत्म करने के लिए वो 21 मार्च को 5 बजे तक कोर्ट में हलफनामा दायर कर साफ करें कि उनके पास उपलब्ध सारी जानकारी चुनाव आयोग को दे दी गयी है। निर्वाचन आयोग स्टेट बैंक से जानकारी मिलते ही उसे तुरंत अपनी वेबसाइट पर डालेगा।
इससे पहले 16 मार्च को सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने इलेक्टोरल बांड मामले में सीलबंद डाटा निर्वाचन आयोग को सौंप दिया था। इस डाटा में 2019 और नवंबर, 2023 में दिए गए इलेक्टोरल बांड का ब्योरा है। सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय बेंच ने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री को निर्देश दिया था कि वो 2019 और नवंबर 2023 के डाटा की कॉपी कर उसकी मूल प्रति निर्वाचन आयोग को सौंप दे।
कोर्ट ने 15 मार्च को निर्वाचन आयोग की अर्जी पर सुनवाई करते हुए सवाल उठाया था कि स्टेट बैंक की ओर से निर्वाचन आयोग को दिये गये आंकड़ों में बांड नंबर का उल्लेख नहीं किया गया है, जबकि इसका साफ आदेश था। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान बेंच ने स्टेट बैंक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने प्रमोशन में आरक्षण के खिलाफ दायर एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि प्रमोशन में आरक्षण झारखंड सरकार आज से नहीं दे सकती है। जब तक की झारखंड सरकार सुप्रीम कोर्ट के जरनैल सिंह जजमेंट 1, 2 एवं एम नागराज के केस में जो दिए गए दिशा-निर्देश के आलोक में नयी नियमावली नहीं बनाती।
हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस एस चंद्रशेखर और जस्टिस नवनीत कुमार की खंडपीठ में इस मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा गया था कि झारखंड सरकार का 31 मार्च 2003 का संकल्प गलत है। क्योंकि इसमें सुप्रीम कोर्ट के एम नागराज जजमेंट एवं जरनैल सिंह जजमेंट में जो गाइडलाइन दिया गया था उसका पालन नहीं किया गया है।
अदालत ने 2003 से लंबित इस याचिका को मंगलवार को निष्पादित कर दिया। अपने फैसले में अदालत ने कहा है कि झारखंड सरकार का 31 मार्च 2003 का संकल्प अब प्रभावी नहीं होगा। जब तक नियमावली, गाइडलाइन, एग्जिक्यूटिव इंस्ट्रक्शन सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट एम नागराज एवं जनरैल सिंह जजमेंट 1 व 2 के आलोक में नहीं लाए जाते।
दरअसल वर्ष 2003 में राज्य सरकार ने सड़क निर्माण विभाग में पदस्थापित एसटी-एसटी कैटगरी के जूनियर इंजीनियर को असिस्टेंट इंजीनियर के पद पर प्रमोशन दिया था। जबकि सामान्य जाति को इसका लाभ नहीं मिला था। सरकार के इस आरक्षण -प्रमोशन के विरोध में झारखंड हाईकोर्ट में रघुवंश प्रसाद सिंह, जय किशोर दत्ता, गणेश प्रसाद समेत 37 से अधिक लोगों ने अगल-अलग समय में रिट याचिका दाखिल की थी।
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