टीम एबीएन, रांची। जेपीएससी परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर सीबीआई ने शनिवार को न्यायधीश पीके शर्मा की अदालत में आरोप पत्र दायर किया। इसमें कुल 37 लोगों को आरोपी बनाया गया है।
दरअसल, परीक्षा में गड़बड़ी की सीबीआई जांच 12 साल से अधिक समय से चल रही है। लेकिन यह अभी तक पूरी नहीं हुई। इसे लेकर झारखंड हाईकोर्ट में कई बार सुनवाई भी हुई है। वहीं, अदालत ने जांच में हो रही देरी को लेकर सीबीआई से जवाब तलब भी कर चुकी है। हालांकि, जांच एजेंसी पहले मामले की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर चुकी है।
दरअसल, प्रथम और द्वितीय जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में गड़बड़ी का मामला सामने आया था। इस मामले को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने 2012 को सीबीआई जांच का आदेश दिया। परीक्षा में नियुक्त पदाधिकारियों के वेतनमान पर रोक लगा दिया गया था। बाद में हाईकोर्ट के इस फैसले को चुनौती दी गयी। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने राहत देते हुए इस फैसले को पलट दिया।
कुछ दिन पहले हुई सुनवाई में झारखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस मामले को दूसरे सक्षम बेंच में भेजने का निर्देश दिया था।बुद्धदेव उरांव द्वारा दायर जनहित याचिका में अप्रैल में हुई सुनवाई के दौरान बताया गया कि 12 साल से अधिक बीत जाने के बाद भी सीबीआई ने जांच प्रक्रिया पूरी नहीं की। न ही इस मामले में आरोप पत्र दायर किया गया। जिस पर सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि गड़बड़ी मामले की जांच अब तक जारी है।
टीम एबीएन, कोडरमा। षडयंत्र रच हत्या करने के एक मामले की सुनवाई करते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय अजय कुमार सिंह की अदालत ने शुक्रवार को आरोपी पति बंटी साव, पिता शुकर साव, कटाडीह, जयनगर, वर्तमान पता- तीन नंबर कॉलोनी आम बागान, रेलवे फाटक, आसनसोल वेस्ट बंगाल, जिला- वर्धमान एवं ससुर शुकर साव पिता - स्वर्गीय चोकन साव को 302, एवं 201 आईपीसी के तहत दोषी पाते हुए आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनायी है। साथ ही 20,000 रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना की राशि नहीं देने पर 1वर्ष अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
मामला वर्ष 2022 का है। इसे लेकर चंदवारा थाना कांड संख्या 59/ 2022 एवं ST- 126/2023 दर्ज किया गया था। अभियोजन का संचालक लोक अभियोजक पीपी एंजेलिना वारला ने किया। इस दौरान सभी गवाहों का परीक्षण कराया गया। लोक अभियोजक पीपी एंजेलिना वारला ने कार्रवाई के दौरान अपराध की गंभीरता को देखते हुए, न्यायालय से अभियुक्त को अधिक से अधिक सजा देने का आग्रह किया।
वहीं बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता प्रकाश मोदी ने दलीलें पेश करते हुए बचाव किया। अदालत ने सभी गवाहों और साक्षयो का अवलोकन करने के उपरांत अभियुक्त को दोषी पाते हुए सजा मुकर्रर की और जुर्माना लगाया। इसे लेकर मृतक के पिता महादेव साव ने चंदवारा थाना में मामला दर्ज कराया था।
थाना को दिये आवेदन में कहा था कि उसकी पुत्री की शादी 2009 को बंटी साव पिता शुक्र साव के साथ हिंदू रीति रिवाज से हुई थी। कुछ दिनों तक वह ससुराल में ठीक से रही। उसके बाद उसे ससुरालवालों द्वारा दहेज के लिए उसे प्रताड़ित किया जाने लगा। पंचायती भी हुई लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इसी बीच उसे एक पुत्री व दो पुत्र हुआ।
जब हम लोग छठ करने का प्रोग्राम बनाये तो उनकी छोटी पुत्री ने बताया कि आप छठ कैसे करोगे। गांव की एक महिला ने बताया कि आपकी पुत्री की हत्या कर दी गयी है। यह जानकारी मिलने के बाद वे लोग तुरंत अपनी पुत्री के ससुराल पहुंचे और पूछताछ की तो उसके दामाद ने बताया कि आपकी पुत्री की हत्या कर जवाहर घाटी में फेंक दिये हैं। आपको जो करना है कर लीजिये।
तब हम लोग चंदवारा थाना पहुंचे। वहां पर मेरी पुत्री की फोटो दिखायी गयी। इसे हम लोगों ने पहचाना। 14/01/2023 को मामला दर्ज कराते हुए आरोपियों पर उचित कार्रवाई करने की गुजारिश की थी। ढाई माह पूर्व पानी में तैरता हुआ मिला मऊथा लाश कोडरमा- चंदवारा थाना के चौकीदार महेंद्र यादव को 1/8/2022 को गुप्त सूचना मिली थी कि जवाहर घाटी में एक अज्ञात लड़की का लाश है।
जिसकी सूचना पर उन्होंने थाना प्रभारी को सूचना देते हुए घटनास्थल गये। वहां पहुंचा तो देखा कि जवाहर घाटी में बन रहे नये पुल के नीचे एक अज्ञात लड़की का लाश पड़ा हुआ है। जिसका दोनों हाथ दुपट्टा से बंधा हुआ है और मुंह में कपड़ा डाला हुआ। चोट का निशान भी है। जिससे प्रतीत होता है कि लड़की के साथ मारपीट कर हत्या कर, लाश छुपाने के उद्देश्य घाटी में फेंक दिया गया है। इसे लेकर उसके द्वारा थाना में एक मामला दर्ज कराया गया था।
टीम एबीएन, रांची। हेमंत सोरेन को झारखंड हाईकोर्ट से एक और झटका लगा है। हाईकोर्ट ने प्रोविजनल बेल वाली उनकी याचिका को खारिज कर दिया है। हेमंत सोरेन की तरफ से उनके चाचा के निधन पर श्राद्धकर्म में शामिल होने के लिए प्रोविजनल बेल की मांग की गयी थी।
मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय की अदालत में हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने हेमंत सोरेन की याचिका को खारिज करते हुए किसी भी तरह का प्रोविजनल बेल देने से इनकार कर दिया है।
हालांकि हाईकोर्ट ने कहा है कि हेमंत सोरेन अपने चाचा के श्राद्धकर्म में 6 मई को शामिल हो सकते हैं। लेकिन इस दौरान वह पुलिस कस्टडी में ही रहेंगे और उसी दिन जेल वापस लाया जायेगा। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि श्राद्धकर्म में शामिल होने के क्रम में हेमंत सोरेन न तो मीडिया से बात करेंगे और न ही किसी तरह का राजनीतिक भाषण देंगे।
झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता धीरज कुमार ने बताया कि हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज करते हुए औपबंधिक जमानत देने से इनकार किया है। वह 6 मई को अपने चाचा के श्राद्धकर्म में जा सकेंगे लेकिन इस दौरान पुलिस कस्टडी में ही रहेंगे।
आपको बता दें कि पिछले शनिवार को रांची में झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन के बड़े भाई राजाराम सोरेन का निधन हो गया। वह 84 वर्ष के थे। निधन के बाद उनके पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव नेमरा ले जाया गया। पार्थिव शरीर को उनके दिवंगत भाई लालू सोरेन के पुत्र दयानंद सोरेन ने मुखाग्नि दी।
इस दौरान मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन, मंत्री मिथिलेश ठाकुर, विधायक बसंत सोरेन, रूपी सोरेन और कल्पना सोरेन भी मौजूद थीं। उन्हीं के श्राद्धकर्म में शामिल होने के लिए हेमंत सोरेन की ओर से प्रोविजनल बेल देने का आग्रह किया गया था, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रदेश में बाल विवाह की मौजूदा स्थिति को चिंताजनक बताते हुए राजस्थान हाई कोर्ट ने तत्काल सुनवाई के बाद अंतरिम आदेश जारी कर राज्य सरकार से कहा है कि वह अक्षय तृतीया के मद्देनजर यह सुनिश्चित करे कि कहीं भी बाल विवाह नहीं होने पाए। साथ ही, आदेश में कहा गया है कि बाल विवाह को रोकने में विफलता पर पंचों-सरपंचों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
हाई कोर्ट का यह फौरी आदेश जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस की जनहित याचिका पर आया है। इन संगठनों ने अपनी याचिका में इस वर्ष 10 मई को अक्षय तृतीया के मौके पर बड़े पैमाने पर होने वाले बाल विवाहों को रोकने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी।
न्यायमूर्ति शुभा मेहता और पंकज भंडारी की खंडपीठ ने याचियों द्वारा बंद लिफाफे में सौंपी गई अक्षय तृतीया के मौके पर होने वाले 54 बाल विवाहों की सूची पर गौर करने के बाद राज्य सरकार को इन विवाहों पर रोक लगाने के लिए बेहद कड़ी नजर रखने को कहा है। यद्यपि इस सूची में शामिल नामों में कुछ विवाह पहले ही संपन्न हो चुके हैं लेकिन 46 विवाह अभी होने बाकी हैं।
खंडपीठ ने कहा कि सभी बाल विवाह निषेध अफसरों से इस बात की रिपोर्ट मंगाई जानी चाहिए कि उनके अधिकार क्षेत्र में कितने बाल विवाह हुए और इनकी रोकथाम के लिए क्या प्रयास किये गये। आदेश में यह भी कहा गया कि राज्य सरकार सुनिश्चित करे कि सूची में शामिल जिन 46 बच्चों के विवाह होने हैं, वे नहीं होने पायें।
खंडपीठ ने यद्यपि इस बात का संज्ञान लिया कि राज्य सरकार के प्रयासों से बाल विवाहों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आयी है, फिर भी काफी कुछ किया जाना बाकी है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (2019-21) के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में 20-24 आयु वर्ग की 25.4 प्रतिशत लड़कियों का विवाह उनके 18 साल की होने से पहले ही हो गया था जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा 23.3 प्रतिशत है।
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा- बाल विवाह वह घृणित अपराध है जो सर्वत्र व्याप्त है और जिसकी हमारे समाज में स्वीकार्यता है। बाल विवाह के मामलों की जानकारी देने के लिए पंचों व सरपंचों की जवाबदेही तय करने का राजस्थान हाई कोर्ट का यह फैसला ऐतिहासिक है।
पंच व सरपंच जब बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक होंगे तो इस अपराध के खिलाफ अभियान में उनकी भागीदारी और कार्रवाइयां बच्चों की सुरक्षा के लिए लोगों के नजरिए और बर्ताव में बदलाव का वाहक बनेंगी। बाल विवाह के खात्मे के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदम पूरी दुनिया के लिए एक सबक हैं और राजस्थान हाई कोर्ट का यह फैसला इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस पांच गैरसरकारी संगठनों का एक गठबंधन है जिसके साथ 120 से भी ज्यादा गैरसरकारी संगठन सहयोगी के तौर पर जुड़े हुए हैं जो पूरे देश में बाल विवाह, बाल यौन शोषण और बाल दुर्व्यापार जैसे बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर काम कर रहे हैं।
हाई कोर्ट का यह आदेश ऐसे समय आया है जब अक्षय तृतीया के मौके पर बाल विवाह के मामलों में खासी बढ़ोतरी देखने को मिलती है और जिसे रोकने के लिए सरकार के साथ जमीनी स्तर पर काम कर रहे तमाम गैरसरकारी संगठन हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। इससे संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से भी संपर्क कर सकते हैं।
एबीएन स्पोर्ट्स डेस्क। महेंद्र सिंह धोनी के साथ हुए फर्जीवाड़े मामले में रांची के सिविल कोर्ट में सुनवाई हुई। न्यायिक दंडाधिकारी राज कुमार पांडेय के कोर्ट में सुनवाई के बाद 4 मई की अगली तारीख दी गयी है।
सिविल कोर्ट में सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद न्यायालय की तरफ से अरका स्पोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, सौम्या दास और मिहिर दिवाकर के वकील को यह निर्देश दिया गया कि अगली तारीख को खुद या अपने वकील के माध्यम से अपना पक्ष रखें।
पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोनों पक्षों को सभी दस्तावेज न्यायालय के समक्ष पेश करने के लिए कहा था, जो अब तक नहीं रखा गया है। इसलिए कोर्ट ने दोनों पक्षों को अगली तारीख तक सारे दस्तावेज पेश करने का सख्त आदेश दिया। धोनी की तरफ से यह शिकायत उनके करीबी माने जाने वाले सीमांत लोहानी ने करायी है।
धोनी की ओर से यह आरोप लगाया गया है कि मिहिर दिवाकर और सौम्या दास के द्वारा उनसे 15 करोड़ रुपये की फर्जीवाड़ा की गयी है। शिकायत दर्ज होने के बाद 5 जनवरी को कोर्ट में सुनवाई हुई थी, जिसके बाद कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए दोनों के खिलाफ समन जारी कर दिया था।
बता दें कि अरका स्पोर्ट्स लिमिटेड नाम की कंपनी बनाकर मिहिर दिवाकर सौम्या दास और महेंद्र सिंह धोनी पूरे देश में क्रिकेट अकादमी खोलना चाहते थे। जिसमें कई तरह की कागजी समझौते किये गये थे।
लेकिन क्रिकेट अकादमी खोलने के दौरान मिहिर दिवाकर और सौम्या दास के द्वारा नियमों की धज्जियां उड़ायी गयी। जिसके बाद महेंद्र सिंह धोनी ने करार को तोड़ दिया। लेकिन सौम्या दास और मिहिर दिवाकर ने करार टूटने के बाद भी कई जगहों पर क्रिकेट अकादमी खोलने का काम चालू रखा।
जिसको देखते हुए महेंद्र सिंह धोनी ने दोनों को कानूनी नोटिस भेजा और धोनी की ओर से सीमांत लोहानी ने पूरे मामले पर कोर्ट में केस किया। मामले में शिकायतकर्ता की तरफ से धारा 420, धारा 406, धारा 467, धारा 468, धारा 471 और धारा 120 बी के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। मुंबई में बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के घर के बाहर गोलीबारी के मामले में हरियाणा में एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक एक अधिकारी के मुताबिक संदिग्ध गिरफ्तार किये गये दो आरोपियों में से एक से संबंधित था और सभी घटना से पहले और बाद में लगातार संपर्क में थे।
अधिकारी ने बताया कि ऐसा माना जा रहा है कि हिरासत में लिया गया संदिग्ध जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के छोटे भाई अनमोल बिश्नोई से निर्देश ले रहा था। अनमोल बिश्नोई ने सोशल मीडिया पोस्ट में इस घटना की जिम्मेदारी ली थी। मंगलवार को पुलिस ने कहा कि जांच में गिरफ्तार दोनों को काम पर रखने में लॉरेंस बिश्नोई गिरोह की भूमिका का संकेत मिला है।
14 अप्रैल को सलमान खान के गैलेक्सी अपार्टमेंट घर के बाहर गोलीबारी में शामिल होने के आरोप में दो संदिग्धों, 24 वर्षीय विक्की साहब गुप्ता और 21 वर्षीय सागर जोगेंद्र पाल को मंगलवार तड़के गुजरात के भुज में गिरफ्तार किया गया था। अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार किये गये आरोपी बिहार से हैं और हिरासत में लिये गये संदिग्धों को अपनी गतिविधियों के बारे में जानकारी देते थे और इंटरनेट का इस्तेमाल कर कॉल किये जाते थे।
अधिकारी ने कहा कि अपराध को अंजाम देने के बाद पाल और गुप्ता मुंबई से भुज के लिए रवाना हो गये, जबकि आरोपियों ने सूरत के पास बातचीत के लिए जिस मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे थे उसका सिम कार्ड बदल दिया। पुलिस ने जांच के दौरान कहा, पुलिस को गुमराह करने के लिए आरोपियों ने बार-बार अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया। लेकिन उन्होंने संचार के दौरान उसी नंबर का इस्तेमाल किया।
अधिकारी ने कहा कि इसके तुरंत बाद, संदिग्ध का पता लगाया गया और उसे हरियाणा में हिरासत में लिया गया और पूछताछ के लिए मुंबई लाया गया। हालांकि, अभी तक संदिग्ध को गिरफ्तार नहीं किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले पुलिस ने कहा था कि गिरफ्तार आरोपियों पाल और गुप्ता को सलमान खान के घर पर शूटिंग के लिए करीब 1 लाख रुपये दिये गये थे और काम के बाद और पैसे देने का वादा किया गया था।
टीम एबीएन, रांची। पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की जमानत याचिका पर पीएमएलए कोर्ट में सुनवाई हुई। मंगलवार को कोर्ट में सुनवाई के दौरान हेमंत सोरेन के वकील ने बेल के लिए दी गई अर्जी के बाद आग्रह किया कि उनके मुवक्किल को जमानत दी जाए।
वहीं ईडी के वकील की तरफ से न्यायाधीश के समक्ष यह आग्रह किया गया कि हेमंत सोरेन को जमानत नहीं दिया जाए क्योंकि अभी उन पर लगे आरोपों को लेकर छानबीन जारी है।
दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद न्यायाधीश ने ईडी को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। पीएमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश राजीव रंजन ने ईडी को निर्देश देते हुए कहा कि जांच एजेंसी को ऐसा क्यों लगता है कि उन्हें अभी बेल नहीं दिया जाए। पीएमएलए कोर्ट की तरफ से 23 अप्रैल को सुनवाई की अगली तारीख रखी गई है।
23 अप्रैल को पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के मामले पर सुनवाई के बाद ये स्पष्ट हो पाएगा की उन्हें बेल दिया जाए या अभी जांच को देखते हुए उन्हें जेल में ही रखना सही होगा। किसी भी एजेंसी की तरफ से यदि किसी को भी गिरफ्तार किया जाता है तो फिर बेल पिटीशन की पहली सुनवाई पर कोर्ट की तरफ से जांच एजेंसी को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया जाता है।
इसी को देखते हुए हेमंत सोरेन मामले में भी पीएमएलए कोर्ट के न्यायाधीश ने ईडी की टीम को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद 23 अप्रैल को मामले पर सुनवाई की जाएगी।
टीम एबीएन, रांची। अगर कोई रामनवमी के दौरान सोशल मीडिया का फायदा उठाकर सांप्रदायिक तनाव या किसी अन्य तरह की अफवाह फैलाता है तो वह सीधे सलाखों के पीछे जायेगा, इसलिए जरूरी है कि पहले सोशल मीडिया पर पोस्ट की जांच करें और फिर उन पर विश्वास करें। प्रशासन ने इसे लेकर गाइडलाइन जारी की है।
त्योहारों के दौरान कई ऐसे तत्व होते हैं जो समाज में सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने की कोशिश करते हैं ताकि माहौल खराब हो और किसी दूसरे पक्ष को फायदा मिले। रामनवमी त्योहार को देखते हुए पुलिस भी ऐसे तत्वों को बख्शने के मूड में नहीं है।
झारखंड पुलिस के प्रवक्ता सह आईजी ऑपरेशन अमोल वेणुकांत होमकर ने बताया कि रामनवमी त्योहार को देखते हुए सबसे ज्यादा फोकस सोशल मीडिया पर रहेगा, इसके लिए सभी जिलों में सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल का गठन किया गया है, मॉनिटरिंग सेल बिल्कुल हाईटेक है। राज्य के विभिन्न जिलों से आने वाली सूचनाएं मुख्यालय स्थित नियंत्रण कक्ष में एकत्र की जायेंगी।
उन्होंने बताया कि राज्य के सभी जिलों के एसएसपी, एसपी और डीसी को अपने-अपने सोशल मीडिया सेल द्वारा जारी दिशा-निर्देशों को लोगों के साथ-साथ महावीरी अखाड़ों और अन्य शांति समितियों को साझा करने का निर्देश दिया गया है।
सोशल मीडिया पर नजर रखने के लिए जो मॉनिटरिंग सेल बनाया गया है वह काफी हाईटेक है। उदाहरण के तौर पर अगर कोई किसी अनजान सर्वर से मैसेज वायरल करता है, तो इसकी जानकारी तुरंत मॉनिटरिंग सेल के जरिए साइबर टीम को दे दी जायेगी। सोशल मीडिया के अलग-अलग विंग के लिए अलग-अलग टीमें बनायी गयी हैं। व्हाट्सएप, फेसबुक और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म पर नजर रखी जा रही है।
झारखंड पुलिस के प्रवक्ता आईजी अमोल वेणुकांत होमकर ने बताया कि सोशल मीडिया को लेकर जिलों के डीसी और एसपी को एक दर्जन से अधिक निर्देश जारी किये गये हैं। उनसे शहर के प्रमुख चौराहों पर सोशल मीडिया से संबंधित साइन लगाने और हेल्पलाइन नंबर भी जारी करने के निर्देश दिये गये हैं।
क्या बोले आइजी
आईजी अमोल होमकर के मुताबिक, समाज में अफवाह फैलाने के लिए कई तरह के मैसेज फैलाये जाते हैं। ऐसे में आम लोगों से अपील की गयी है कि वे तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम या अपने स्थानीय थाने में फोन कर इसकी जानकारी दें, सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों के बारे में पुलिस से बात करें और पुलिस से पूछें कि क्या यह जानकारी सही है। इसी क्षण से सामाजिक तत्वों के खतरनाक मंसूबे विफल हो जायेंगे।
रामनवमी पर सोशल मीडिया के जरिए किसी भी तरह की कोई अफवाह न फैलायी जा सके, इसके लिए सभी जिलों में दिशा-निर्देश भी जारी किये गये हैं। सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरें फैलाने वालों की जानकारी देने के लिए जिला स्तर पर फोन नंबर भी जारी किये गये हैं। गाइडलाइंस में आम लोगों से भी कहा गया है कि वे कभी भी कोई भड़काऊ संदेश प्रचारित न करें।
अगर उनके मोबाइल पर कोई आपत्तिजनक मैसेज आता है तो वह इसकी सूचना पुलिस को अवश्य दें। गाइडलाइंस में यह भी बताया गया है कि मैसेज को एक जगह से दूसरी जगह भेजने वाला भी उतना ही दोषी है जितना मैसेज बनाने वाला भी, इसलिए इस सबमें सावधानी बरतें।
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