टीम एबीएन, चाईबासा/ रांची। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दरअसल, राहुल गांधी के खिलाफ चाईबासा के एमपी-एमएलए कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी किया है। अदालत ने राहुल गांधी को 26 जून को अदालत में पेश होने को कहा है।
गौरतलब है कि 28 मार्च 2018 को कांग्रेस के अधिवेशन में भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ भाषण दिया था। उनके इस भाषण को लेकर भाजपा नेता प्रताप कुमार ने राहुल गांधी के खिलाफ चाईबासा सीजेएम अदालत में 9 जुलाई 2018 को मानहानि की अर्जी दायर की थी।
आरोप है कि आल इंडिया कांग्रेस कमेटी के अधिवेशन नई दिल्ली में सांसद राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि भाजपा में कोई भी हत्यारा अध्यक्ष बन सकता है। चोरों का गिरोह है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में 38.44 करोड़ के शराब घोटाला मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो यानी एसीबी ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही है। इसी कड़ी में जांच एजेंसी द्वारा शिकंजे में लिये गये आरोपियों को गुरुवार को न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया है।
एसीबी ने 21 मई को जेएसबीसीएल के पूर्व जीएम (आपरेशन्स एंड फाइनांस) सुधीर कुमार, जेएसबीसीएल के वर्तमान जीएम फाइनांस सुधीर कुमार दास और मार्शन कंपनी के प्रतिनिधि नीरज कुमार सिंह को पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया था।
आज तीनों को एसीबी की विशेष अदालत में पेश करने के बाद 3 जून तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इससे पहले 20 मई को पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव सह पूर्व उत्पाद सचिव विनय कुमार चौबे और संयुक्त उत्पाद सचिव गजेंद्र सिंह को पूछताछ के बाद जेल भेजा गया था। ब्यूरो के सूत्रों का कहना है कि बहुत जल्द सभी को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जायेगी।
टीम एबीएन, कोडरमा। शादी का झांसा देकर लड़की से दुष्कर्म (यौन शोषण) किये जाने के एक मामले की सुनवाई करते हुए, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय संजय कुमार चौधरी की अदालत ने आरोपी जुबेर अंसारी, 29 वर्ष, पिता नसीम अंसारी, ग्राम- पुरनाडीह, थाना- चंदवारा, जिला- कोडरमा निवासी को 376 आईपीसी के तहत तहत दोषी पाते हुए 10 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 25000 जुर्माना लगाया। जुर्माना की राशि नहीं देने पर 4 माह अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
मामला वर्ष 2023 का है। इसे लेकर भुक्तभोगी युवती ने चंदवारा थाना कांड संख्या 22/ 2023 दर्ज कराया गया था। जिसमें उसने कहा था कि जब उसके घर में कोई नहीं था जुबेर अंसारी उसके घर में आया और उसके साथ दुष्कर्म किया। मना करने पर कहा कि तुमसे मैं निकाह कर लूंगा। इस प्रकार जुबेर शादी का झांसा देकर उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया। जिससे वह गर्भवती हो गयी। निकाह की बात करने पर वह निकाह करने से इनकार कर दिया। इसके लिए पंचायती भी हुई थी।
अभियोजन का संचालक लोक अभियोजक शिवशंकर राम एवं अधिवक्ता सुधीर कुमार ने किया। इस दौरान सभी 6 गवाहों का परीक्षण कराया गया। कार्रवाई के दौरान अपराध की गंभीरता को देखते हुए लोक अभियोजक शिव शंकर राम ने न्यायालय से अभियुक्त को अधिक से अधिक सजा देने का आग्रह किया।
वहीं बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता आत्मानंद कुमार पांडेय ने दलीलें पेश करते हुए बचाव किया। अदालत ने सभी गवाहों और साक्षयो का अवलोकन करने के उपरांत अभियुक्त को 376 आईपीसी के तहत के तहत दोषी पाते हुए 10 वर्ष सश्रम कारावास की सजा मुकर्रर की और जुर्माना लगाया।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड हाइकोर्ट ने राज्य में गैर मजरुआ खास जमीन की खरीद-बिक्री से रोक हटा दी है। हाइकोर्ट ने राजस्व, निबंधन व भूमि सुधार विभाग के उस आदेश को खारिज कर दिया है, जिसमें गैर मजरुआ खास जमीन के निबंधन पर रोक लगायी गयी थी। विभाग के इस आदेश से राज्य भर के वैसे रैयत परेशान थे, जिनकी जमीन गैर मजरुआ खास खाते की है।
राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के तत्कालीन सचिव कमल किशोर सोन ने 26 अगस्त, 2015 को अधिसूचना जारी कर आदेश दिया था कि हस्तांतरण विलेख का निबंधन निबंधन अधिनियम 1908 की उपयुक्त धारा 22 क के अधीन लोकनीति के विरुद्ध है।
इस आदेश के बाद झारखंड में केसरेहिंद भूमि, गैर मजरुआ आम भूमि, वनभूमि, जंगल समेत अन्य विभागों के लिए अर्जित सरकारी भूमि के साथ-साथ गैर मजरुआ खास जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी गयी थी। आदेश के खिलाफ कई लोगों ने झारखंड हाइकोर्ट में याचिका दायर कर दी। याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव व न्यायाधीश राजेश शंकर की डबल बेंच ने फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार की जारी अधिसूचना रद्द कर दी।
भूमि सुधार विभाग के आदेश के खिलाफ झारखंड हाइकोर्ट में कई रिट याचिकाएं दायर की गयीं। रांची की सीएनडीटीए नामक कंपनी, जमशेदपुर की मेसर्स वीएसआरएस कंस्ट्रक्शन, गिरिडीह के भगवती देवी व वीरेंद्र नारायण देव और धनबाद के विनोद अग्रवाल याचिका दायर करनेवालों में शामिल थे।
रिट याचिका-5088/2018, 630/2019, 2479/2019, 7526/2023 और 1121/2024 पर एक साथ सुनवाई करते हुए झारखंड हाइकोर्ट की डबल बेंच ने अपना फैसला सुनाया।
इस आदेश के बाद झारखंड में केसरेहिंद भूमि, गैर मजरुआ आम भूमि, वनभूमि, जंगल समेत अन्य विभागों के लिए अर्जित सरकारी भूमि के साथ-साथ गैर मजरुआ खास जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी गयी थी।
आदेश के खिलाफ कई लोगों ने झारखंड हाइकोर्ट में याचिका दायर कर दी। याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव व न्यायाधीश राजेश शंकर की डबल बेंच ने फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार की जारी अधिसूचना रद्द कर दी।
भूमि सुधार विभाग के आदेश के खिलाफ झारखंड हाइकोर्ट में कई रिट याचिकाएं दायर की गयीं। रांची की सीएनडीटीए नामक कंपनी, जमशेदपुर की मेसर्स वीएसआरएस कंस्ट्रक्शन, गिरिडीह के भगवती देवी व वीरेंद्र नारायण देव और धनबाद के विनोद अग्रवाल याचिका दायर करनेवालों में शामिल थे।
रिट याचिका-5088/2018, 630/2019, 2479/2019, 7526/2023 और 1121/2024 पर एक साथ सुनवाई करते हुए झारखंड हाइकोर्ट की डबल बेंच ने अपना फैसला सुनाया।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमस रामचंद्र राव ने सीनियर डीएसपी से एसपी के पद पर प्रोन्नति पर लगी रोक को हटा दी है। एकलपीठ ने 26 मार्च को प्रमोशन देने पर रोक लगा दी थी। इसके खिलाफ प्रार्थियों ने खंडपीठ में अपील की थी।
इस संबंध में रजतमणि वाखला एवं अन्य ने एकलपीठ में याचिका दायर की थी। प्रार्थियों की ओर से अदालत को बताया था कि सरकार ने डीएसपी पद पर तैनात नौ अधिकारियों को एसपी में प्रोन्नति देने के लिए सूची भेजी है। यह सूची गलत है। सूची में तीन डीएसपी शिवेंद्र, राधाप्रेम किशोर, मुकेश महतो का भी नाम शामिल है।
इन तीनों पर आपराधिक मामले चल रहे हैं। इनके खिलाफ सीबीआई जांच चल रही है और सीबीआई ने तीनों के खिलाफ आरोप पत्र भी दाखिल कर दिया है। दागी डीएसपी का नाम प्रोन्नति के लिए सरकार ने भेजा है, जबकि जिन अधिकारियों पर कोई आरोप नहीं है उनका नाम प्रोन्नति के लिए नहीं भेजा गया है।
नियमों के अनुसार जिस अधिकारी पर आपराधिक मामला चल रहा है उसका नाम प्रोन्नति के लिए नहीं भेजा जा सकता। सुनवाई के बाद अदालत ने सरकार और संघ लोक सेवा आयोग को नियुक्ति प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने का निर्देश दिया था।
इसके खिलाफ खंडपीठ में याचिका दायर की गयी थी। खंडपीठ में प्रार्थियों की ओर से कहा गया कि प्रमोशन पर रोक लगाने का आदेश उचित नहीं है। सुनवाई के बाद अदालत ने रोक हटा ली।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय रिजर्व बैंक ने 2 मई 2025 को एक प्रेस विज्ञप्ति में देश के पांच प्रमुख बैंकों पर कुल 2.52 करोड़ का मौद्रिक जुर्माना लगाने की जानकारी दी। यह कार्रवाई बैंकों द्वारा विभिन्न नियामकीय नियमों का उल्लंघन करने पर की गयी है। आइये जानते हैं कि किन बैंकों पर कितना जुर्माना लगा और इसके पीछे की असली वजह क्या है?
नहीं, यह जुर्माना ग्राहकों पर सीधे असर नहीं डालता। यह जुर्माना बैंकों की प्रशासनिक या प्रक्रियात्मक लापरवाहियों पर लगाया जाता है, न कि किसी ग्राहक की गलती पर। हालांकि, यदि आप इन बैंकों के ग्राहक हैं, तो यह जानना जरूरी है कि बैंक आपकी जानकारी और लेनदेन को सुरक्षित रखने में कितना सतर्क है।
टीम एबीएन, झुमरी तिलैया। कोडरमा में हजारीबाग भ्रष्टाचार निरोधक दस्ते ने शुक्रवार को एक हल्का कर्मचारी को घूस लेते गिरफ्तार किया। सदर अंचल के हल्का कर्मचारी सुरेंद्र प्रसाद को अंचल कार्यालय के पास से 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते पकड़ा गया। सुरेंद्र 2026 के जनवरी में सेवानिवृत्त होने वाले थे।
बेकोबार निवासी बहादुर राणा ने एसीबी में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि उनकी दो भूमि है। एक खाता संख्या 68 में 5 एकड़ 62 डिसमिल और दूसरी खाता संख्या 294 में 91 डिसमिल है।
इसको को पंजी-2 में ऑनलाइन दर्ज कराने के लिए जनवरी 2023 में आवेदन किया था। कोई कार्रवाई नहीं होने पर फरवरी 2025 में उपायुक्त को पुनः आवेदन दिया गया। इसके बाद हल्का कर्मचारी सुरेंद्र प्रसाद ने बहादुर राणा से 50 हजार रुपए की मांग की। बहादुर राणा ने एसीबी से संपर्क किया।
पहली किस्त के रूप में 10 हजार रुपए देने की बात हुई
एसीबी ने योजना बनाकर 45 हजार रुपए में सौदा तय करवाया। पहली किस्त के रूप में 10 हजार रुपए देने की बात हुई। एसीबी ने आवेदक को मार्क किए गए नोट दिए। जैसे ही कर्मचारी ने रिश्वत ली, एसीबी ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
डोमचांच अंचल से कोडरमा अंचल किया गया था ट्रांसफर
हल्का 5 के कर्मचारी सुरेंद्र प्रसाद 2004 में सतगांवां अंचल में बतौर हल्का कर्मचारी का प्रभार लिया था। इसके बाद कोडरमा जिले के अलग-अलग अंचलों में लगातार सेवा में रहे। कोडरमा सदर अंचल में यह इनका तीसरा टर्म था। अभी हाल में तीन महीने पूर्व ही इनका तबादला डोमचांच अंचल से कोडरमा अंचल किया गया था।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड उच्च न्यायालय में राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) के निदेशक डॉ राजकुमार को हटाये जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति दीपक रौशन की एकल पीठ ने तत्काल प्रभाव से 17 अप्रैल 2025 के आदेश को स्थगित कर दिया है।
इसके अलावा न्यायालय ने राज्य सरकार एवं अन्य को नोटिस जारी करने व शपथ पत्र के माध्यम से जबाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले की विस्तृत सुनवाई अगले मंगलवार 6 मई को होगी।
उल्लेखनीय है कि रिम्स निदेशक डॉ राजकुमार को स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने 17 अप्रैल 2025 को देर रात आदेश निकाल कर तत्काल प्रभाव से रिम्स निदेशक पद से हटा दिया था। इसके बाद रिम्स की डीन डॉ शशिबाला सिह ने 18 अप्रैल 2025 को अपराह्न तीन बजे कार्यकारी व्यवस्था के तहत रिम्स की प्रभारी निदेशक का पदभार ग्रहण कर लिया था।
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