एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्र ने मंगलवार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा कि गंभीर बीमारियों से ग्रस्त 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों को कोविड-19 टीके की एहतियाती खुराक (तीसरी खुराक) लगाते समय चिकित्सक से प्राप्त कोई प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने या सौंपने की आवश्यकता नहीं होगी। ऐसे व्यक्तियों से अपेक्षा की जाती है कि वे एहतियाती खुराक या तीसरी खुराक लेने का निर्णय लेने से पहले अपने चिकित्सक की सलाह लें। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लिखे पत्र में, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा कि चुनाव वाले राज्यों में चुनाव ड्यूटी पर तैनात किए जाने वाले कर्मियों को अग्रिम पंक्ति के कर्मियों की श्रेणी में शामिल किया जाएगा। भूषण ने कहा कि एहतियाती खुराक (प्रीकॉशन डोज) के लिए ऐसे लाभार्थियों की पात्रता दूसरी खुराक के लेने की तारीख पर आधारित होगी, जैसा कि कोविन प्रणाली में दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि एहतियाती खुराक दूसरी खुराक लेने की तारीख से नौ महीने या 39 सप्ताह पूरे होने पर ली जा सकती है। उन्होंने बताया कि कोविन एहतियाती खुराक के लिए पात्र सभी लोगों को संदेश भेजेगा, जो डिजिटल टीकाकरण प्रमाणपत्रों में दिखाई देगा। भूषण ने मंगलवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से एक कार्यशाला की अध्यक्षता की, जिसमें 15-18 आयु वर्ग के लिए टीकाकरण और स्वास्थ्यकर्मियों, अग्रिम पंक्ति के कर्मियों और गंभीर बीमारियों से ग्रस्त 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को एहतियाती तीसरी खुराक दिये जाने के संबंध में समीक्षा की गई। एक जनवरी से कोविन पर करवाएं पंजीकरण : उन्होंने कहा कि 15-18 वर्ष के आयु वर्ग के लोगों को केवल कोवैक्सीन दी जानी है और टीके की अतिरिक्त खुराक सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजी जाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अगले कुछ दिनों में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ कोवैक्सीन की आपूर्ति का कार्यक्रम साझा करेगी। भूषण ने कहा कि संभावित लाभार्थी या तो एक जनवरी से कोविन पर अपना पंजीकरण करा सकते हैं या तीन जनवरी से टीकाकरण शुरू होने पर केन्द्र में जाकर पंजीकरण करा सकते हैं। जिनका जन्म 2007 या उससे पहले हुआ है, वही लोग इस श्रेणी के तहत टीकाकरण के लिए पात्र होंगे। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, टीकाकरण के संबंध में सभी स्थापित प्रोटोकॉल का पालन 15-18 वर्ष आयु वर्ग के लिए किया जाना है। वे 28 दिनों के बाद ही दूसरी खुराक के लिए पात्र होंगे। भुगतान व फ्री टीके दोनों विकल्प में मौजूद : भूषण ने एक पत्र में कहा, सभी नागरिक अपनी आयु की स्थिति के बावजूद सरकारी टीकाकरण केंद्रों पर मुफ्त कोविड-19 टीकाकरण के हकदार हैं। उन्होंने कहा कि जो भुगतान करने की क्षमता रखते हैं वे निजी अस्पतालों के टीकाकरण केंद्रों में जाकर भी टीका लगवा सकते हैं। उन्होंने कहा कि निजी केंद्र पर प्रत्येक टीके के लिए पहले घोषित मूल्य लाभार्थियों के इन समूहों के लिए लागू रहेगा। ऐसे सभी स्वास्थ्यकर्मी और अग्रिम पंक्ति के कर्मी, जो किसी भी कारण से वर्तमान में कोविन पर नागरिकों के रूप में पंजीकृत हैं और 60 वर्ष से कम आयु के हैं, उन्हें एहतियाती खुराक का लाभ उठाने के लिए उचित रूप से एचसीडब्ल्यू / एफएलडब्ल्यू को अपना दर्जा प्राप्त करना होगा। हालांकि, ऐसा करने के लिए उन्हें निर्धारित प्रारूप में रोजगार प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। ये दिशा-निर्देश तीन जनवरी से लागू होंगे और समय-समय पर इनकी समीक्षा की जाएगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में कोरोना के दो और वैक्सीन को मंजूरी मिल गई है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने कोवोवैक्स और कोर्बीविकेस को आपात स्थिति के लिए मंजूरी दी है। इसके अलावा एंटीवायरल दवा Molnupiravir को भी मंजूरी दी गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने ट्वीट कर यह जानकारी दी है। स्वास्थ्य मंत्री मंडाविया ने कहा कि कॉर्बेवैक्स वैक्सीन भारत का पहला स्वदेशी रूप से विकसित RBD प्रोटीन सब-यूनिट वैक्सीन है। इसे हैदराबाद स्थित फर्म बायोलॉजिकल-ई में बनाया गया है। यह भारत में विकसित हुआ तीसरा टीका है। वहीं, कोवोवैक्स का निर्माण पुणे स्थित फर्म सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा किया जाएगा। बता दें कि भारत में अभी तक कोरोना की आठ वैक्सीन को मंजूरी मिल चुकी है। इसमें भारत की स्वदेशी निर्मित वैक्सीन कोविशिल्ड और कोवाक्सिन भी शामिल हैं। भारत में सबसे ज्यादा कोविशिल्ड की खुराकें लगाई गई हैं। इस दोनों वैक्सीन को विश्व स्वास्थ संगठन की ओर से भी मंजूरी मिल चुकी है। इसके अलावा भारत में रूस की स्पुतनिक वी, स्पुतनिक लाइट, अमेरिकी की फाइजर की कोरोना वैक्सीन और जॉनसन एंड जॉनसन को भी आपात स्थिति के लिए अनुमति दी जा चुकी है। इसके अलावा जायडस कैडिला वैक्सीन की खुराक भी लोग ले रहे हैं।
रांची। झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने मॉब लिंचिंग अधिनियम को लेकर अपना पक्ष रखा। इसके लिए उन्होंने केंद्र की भाजपानीत सरकार को जिम्मेवार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया, भाजपा देश को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहती है। मॉब लिंचिग रोधी अधिनियम हिंदू, मुस्लिम या आदिवासी अधिनियम नहीं है क्योंकि भीड़ का कोई चेहरा नहीं होता। भाजपा (जो रावण की तरह है) के केंद्र की सत्ता में आने और (उसके द्वारा) देश के सामाजिक तानाबाना को नष्ट करने वाला माहौल बनाने के बाद हम यह कानून लाने को मजबूर हुए। इस बीच, राज्य के जमशेदपुर से प्राप्त एक खबर के मुताबिक, स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने सोमवार को पूर्वी सिंहभूम जिले में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक बैठक कर कोविड-19 महामारी की तीसरी लहर से निपटने के इंतजाम की समीक्षा की। एक अधिकारी ने बताया कि उन्होंने कहा कि कोविड-19 के ओमीक्रोन स्वरूप के मामले बढ़ने के बीच तीसरी लहर आने की स्थिति में महामारी से निपटने की पूरी तैयारी करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को 15 से 18 साल के बच्चों के वैक्सिनेशन को लेकर गाइडलाइंस जारी की हैं। इसी के साथ 60 साल से ऊपर के बीमार लोगों और हेल्थकेयर-फ्रंटलाइन वर्कर्स के लिए भी प्रिकॉशन डोज की रूपरेखा का एलान किया गया है। कोविन एप के फीचर्स में क्या बदलाव किए जाएंगे : हेल्थकेयर वर्कर्स, फ्रंटलाइन वर्कर्स और 60 साल से ऊपर के बीमारी से पीड़ित बुजुर्गों के लिए सभी हेल्थकेयर वर्कर्स, फ्रंटलाइन वर्कर्स और 60 साल से ऊपर के बीमारी से पीड़ित बुजुर्गों को कोरोना का डोज बुक करने की सुविधा उनके पुराने अकाउंट से ही मिल जाएगी। प्रावधान के मुताबिक, जिन लोगों को कोरोना की दूसरी डोज लगे कम से कम नौ महीने हो गए होंगे उन्हें ही कोविन सिस्टम पर प्रिकॉशन डोज के लिए योग्य माना जाएगा। अगर योग्य लाभार्थियों की प्रिकॉशन डोज का समय आ गया है, तो उन्हें इस बारे में याद दिलाने के लिए कोविन सिस्टम की तरफ से खुद एसएमएस भेजा जाएगा। वैक्सिनेशन के लिए आॅनलाइन या सीधे टीकाकरण केंद्र पर जाकर रजिस्ट्रेशन और अपॉइंटमेंट बुक कराए जा सकते हैं। जिन लोगों को कोरोना की प्रिकॉशन डोज दी जाएगी, उनके कोरोनावायरस वैक्सिनेशन सर्टिफिकेट में इसकी पूरी जानकारी मुहैया होगी। 15-18 साल वाले नए लाभार्थियों के लिए 15 साल से ऊपर के सभी किशोर कोविन पर रजिस्टर कर सकेंगे। दूसरे शब्दों में समझें तो जिन भी लोगों का जन्म 2007 से पहले हुआ है, वो टीके के लिए पात्र माने जाएंगे। लाभार्थी खुद ही रजिस्टर कर सकते हैं। आॅनलाइन तरीके से किसी के कोविन पर पहले से बने अकाउंट से भी या फिर अपना एक नया अकाउंट बनाकर। हालांकि, नए अकाउंट के लिए उन्हें किसी यूनीक नंबर से रजिस्टर करना होगा। यह सुविधा फिलहाल सभी नागरिकों के लिए दी गई है। इस तरह के लाभार्थी टीकाकरण केंद्र पर भी सत्यापन कराकर रजिस्ट्रेशन और अपॉइंटमेंट ले सकते हैं। इस तरह के लाभार्थियों के लिए टीकाकरण का विकल्प सिर्फ कोवाक्सिन है, क्योंकि 15-17 आयु वर्ग के लिए फिलहाल सिर्फ इसी वैक्सीन को आपात इस्तेमाल की मंजूरी मिली है।
एबीएन डेस्क। 5 दिन बाद यानी 1 जनवरी से ATM से कैश निकालना और जमा करना महंगा पड़ने वाला है। बैंक ग्राहक एटीएम से कैश ट्रांजेक्शन के लिए पहले जितना भुगतान कर रहे थे, अब उससे अधिक भुगतान करना होगा। एक जनवरी 2022 से ग्राहकों को फ्री एटीएम ट्रांजैक्शन लिमिट पार करने पर ज्यादा भुगतान करना होगा। जून में ही भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों को 1 जनवरी 2022 से मुफ्त मासिक सीमा से अधिक नकद और गैर-नकद एटीएम लेनदेन के लिए शुल्क बढ़ाने की अनुमति दी थी। एक्सिस बैंक ने कहा, RBI के दिशा-निर्देशों के अनुसार, एक्सिस बैंक या अन्य बैंक के एटीएम में 01-01-22 से मुफ्त सीमा से ऊपर का वित्तीय लेनदेन शुल्क ₹21 + GST होगा। वर्तमान में बैंक ATM या कैश रिसाइक्लिर मशीन से कैश और नॉन-कैश ट्रांजेक्शन करने पर महीने में पहले 5 वित्तीय ट्रांजेक्शन फ्री होते हैं। इसके बाद 20 रुपये प्रति वित्तीय ट्रांजेक्शन का चार्ज लगता है। लेकिन 1 जनवरी 2022 से यह चार्ज 21 रुपये प्रति वित्तीय ट्रांजेक्शन होगा। उन्हें मेट्रो शहरों में दूसरे बैंक के एटीएम से 3 ट्रांजेक्शन और नॉन-मेट्रो शहरों में दूसरे बैंक के एटीएम से 5 ट्रांजेक्शन अभी की तरह मुफ्त मिलती रहेंगी। ग्राहक अपने स्वयं के बैंक एटीएम से हर महीने पांच मुफ्त लेनदेन (वित्तीय और गैर-वित्तीय लेनदेन सहित) के लिए पात्र बने रहेंगे। वे मेट्रो सिटी में अन्य बैंक के एटीएम से तीन और गैर-मेट्रो केंद्रों में पांच मुफ्त लेनदेन भी कर सकेंगे। बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों को ATM के जरिए तय मुफ्त मंथली लिमिट से ज्यादा बार रकम निकालने या अन्य लेन-देन करने पर ज्यादा चार्ज वसूल की इजाजत दे दी थी। अब 1 जनवरी 2022 से एटीएम से पैसा निकालने या जमा करने की फ्री सीमा के बाद ज्यादा चार्ज वसूल किया जाएगा।
एबीएन डेस्क। अगर नहीं लिया है दोनों डोज तो भरना होगा इतना जुर्माना… ओमिक्रॉन के बढ़ते खतरे के बीच मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की तरह हरियाणा में भी नाइट कर्फ्यू का ऐलान किया गया है। कोरोना के खिलाफ नियमों को लेकर भी सख्ती की जा रही है। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि प्रदेश में ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों की संभावना के मद्देनजर लोगों की सुरक्षा के लिए एक जनवरी 2022 से पब्लिक सेक्टर से संबंधित संस्थानों में एंट्री के लिए वैक्सीनेशन की दोनों डोज को अनिवार्य करने के साथ सार्वजनिक स्थलों व अन्य कार्यक्रमों में 200 से अधिक लोगों के एकत्र होने तथा रात्रि में 11 बजे से प्रातः 5 बजे तक लोगों के आवागमन को प्रतिबंधित रहेंगा।शुक्रवार को चंडीगढ़ में कोविड समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए सीएम ने कहा कि ओमिक्रॉन के केस रोकने के लिए लोगों को अधिक से अधिक जागरूक करने पर फोकस किया जाना चाहिए। साथ ही वैक्सीनेशन पर भी अधिक ध्यान देने की जरूरत है। सभी लोगों को वैक्सीनेशन की दोनों डोज लगवाने के लिए प्रेरित करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को भी कोरोना मामलों से निपटने के लिए अपनी सभी प्रकार की तैयारियां पूरी कर लेने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अगर किसी जिले में कोरोना मरीजों के इलाज के लिए जरूरी प्रबंधों में कोई कमी है तो उसे तुरंत दूर करते हुए जरूरी प्रबंध सुनिश्चित बनाए जाएं। हरियाणा सरकार कोरोना वैक्सीन न लगवाने वालों पर पहले ही 1 जनवरी 2022 से सख्ती करने का ऐलान कर चुकी है। ऐसे लोगों को सार्वजनिक स्थलों पर जाने की अनुमति नहीं होगी। कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज लगवाने वालों को ही एक जनवरी 2022 से सरकारी दफ्तरों में प्रवेश मिलेगा। ट्रेनों और रोडवेज बसों में सफर के लिए भी वैक्सीन की दोनों डोज लगवाना जरूरी होगा। सरकारी बैंकों, होटल, रेस्टोरेंट, मैरिज पैलेस, मॉल, सिनेमाघरों में भी उन लोगों की एंट्री बैन रहेगी जिन्होंने दोनों डोज नहीं लगवाई होंगी। कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए चंडीगढ़ प्रशासन ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। यहां अब कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज नहीं लेने वालों से 500 रुपए जुर्माना वसूला जाएगा। चंडीगढ़ प्रशासन ने शुक्रवार को बताया कि 1 जनवरी से सार्वजनिक स्थानों पर दोनों वैक्सीन लेने पर ही लोगों को एंट्री दी जाएगी।
रांची। झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन मंगलवार को भीड़, हिंसा एवं भीड़ लिंचिंग निवारण विधेयक 2021 पास हो गया है। इसमें दोषियों को उम्रकैद की सजा का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। लिंचिंग में किसी को चोट आती है तो दोषी को तीन साल तक की सजा और एक लाख रुपये से तीन लाख रुपये तक का दंड दिया जा सकेगा। संसदीय कार्यमंत्री आलमगीर आलम ने विधेयक को सदन में प्रस्ताव रखा। इस पर स्पीकर ने मतदान कराया और सभी ने अपना मत भी रखा। विधेयक पर चर्चा के दौरान BJP ने जमकर हंगामा किया। BJP के विधायक वेल तक पहुंच गए। उन्होंने इस कानून सरकार पर तुष्टीकरण का आरोप भी लगाया। पार्टी के तीन विधायकों अमर बाउरी, अमित मंडल और रामचंद्र चंद्रवंशी ने संशोधन प्रस्ताव भी लाए, लेकिन सभी खारिज कर दिए गए। BJP के विधायक अमित मंडल ने कहा कि सरकार का ये काला अध्याय पूरे झारखंड में लिखा जाएगा। कहा कि भीड़ को अंग्रेजी में मॉब लिखा गया है और उसके बारे में कहा गया है कि दो या दो से अधिक। किस आधार पर दो व्यक्ति को मॉब लिखा गया है। ये सरकार को खुश करने के लिए IAS अधिकारियों का कारनामा है। वहीं अमर बाउरी ने कहा कि किसी विशेष वर्ग को तुष्टीकरण के लिए आदिवासी भाइयों पर अत्याचार कर रहे हैं। ये झारखंड विरोधी बिल है। अगर कोई साजिश रचता है या किसी को लिंचिंग करने के लिए उकसाता है, किसी भी तरह की मदद पहुंचाता है तो उसे उसी ढंग की सजा दी जाएगी, जैसा लिंचिंग करने वाले अपराधी को। अगर कोई आरोपी को गिरफ्तार करने में या सजा के दौरान बाधा पहुंचाता है, तो उसे तीन साल की सजा और एक से तीन लाख तक जुर्माना हो सकेगा। लिंचिंग के अपराध से जुड़े किसी साक्ष्य को नष्ट करने वाले को भी अपराधी मान कर एक साल की सजा और 50 हजार रुपये जुर्माना लगेगा। अगर कोई लिंचिंग का माहौल तैयार करने में सहयोग करता है तो वैसे व्यक्ति को तीन साल की सजा और एक से तीन लाख तक जुर्माना होगा। दंडिता प्रक्रिया संहिता के तहत जांच के जो प्रावधान बताए गए हैं, वही प्रक्रिया यहां भी अपनाई जाएगी। इस अधिनियम से जुड़े अपराध गैरजमानतीय होंगे।
एबीएन डेस्क, रांची। झारखंड में जाति प्रमाणपत्र बनाने के लिए सरकार ने नई व्यवस्था शुरू की है। इस व्यवस्था के तहत अब स्कूल में भी छात्र-छात्राओं का जाति प्रमाण पत्र बनाया जायेगा। राज्य के सभी स्कूलों में विशेष अभियान चलाकर कक्षा एक से 12वीं तक के सभी विद्यार्थियों का जाति प्रमाण पत्र बनाया जाएगा। इसको लेकर विभाग के स्तर पर तैयारी शुरू हो गई हैं। बहुत जल्द जाति प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। स्कूल में जो जाति प्रमाण पत्र बनाया जायेगा, उसकी वैधता ताउम्र रहेगी। यानि एकबार जाति प्रमाण पत्र बनाने के बाद उसे बार-बार बनाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। तीन महीने के अंदर सभी छात्र-छात्राओं का ये प्रमाणपत्र बना दिया जायेगा। झारखंड शिक्षा विभाग ने सभी डीईओ और डीएसई को 20 दिसंबर तक का समय दिया है। जिसमें सभी छात्रों की जानकारी उपलब्ध करानी है। इसके बाद सभी छात्रों का जाति प्रमाणपत्र तैयार कर लिया जायेगा।
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