एबीएन सेंट्रल डेस्क। तमिलनाडु में कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने के मद्देनजर लागू किये गये रात्रि कर्फ्यू और रविवार के लॉकडाउन में नियमों का उल्लंघन करने वालों से पिछले सप्ताह 3.45 करोड़ वसूले गये। पुलिस महानिदेशक के कार्यालय की तरफ से आज यहां जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया कि सात जनवरी से शनिवार तक लगाए गए लॉकडाउन में नियमों का उल्लंघन करने वालों से जुर्माने के तौर पर 3.45 करोड़ रुपये की वसूली हुई है। विज्ञप्ति में कहा गया कि इस दौरान कुल 254 मामले दर्ज किये गये हैं और 96 लोग गिरफ्तार किये गये हैं। फेस मास्क नहीं पहनने पर कुल 1,64,329 लोगों पर जुर्माना लगाया गया, 1,910 पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करने पर जुर्माना लगाया गया और 1,552 लोगों पर किसी वैध कारण के बिना सार्वजनिक रूप से इकट्ठा होने के लिए जुर्माना लगाया गया। इनमें से चेन्नई के 43,417 लोगों से 86 लाख रुपये की वसूली की गई, जबकि नॉर्थ जोन में मास्क नहीं पहनने और लॉकडाउन के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने पर 40,148 लोगों से 83 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) के निदेशक (विपणन) को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने रविवार को बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र की उपक्रम (पीएसयू) महारत्न कंपनी के उत्पाद बेचने वाले डीलरों को छूट प्रदान करने की नीति के संभावित लाभार्थियों से कथित तौर पर 50 लाख रुपये से अधिक की रिश्वत लेने के मामले में यह गिरफ्तारी की गई है। उन्होंने बताया कि सीबीआई ने निदेशक ई एस रंगनाथन, बिचौलियों और व्यापारियों की संलिप्तता वाले कथित रिश्वत घोटाले का खुलासा किया और शनिवार को पांच लोगों को गिरफ्तार किया। अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय एजेंसी ने रंगनाथन के कार्यालय और आवास सहित आठ स्थानों पर छापे मारे। सीबीआई के प्रवक्ता आर सी जोशी ने कहा, उक्त आरोपी (रंगनाथन) के परिसरों से छापेमारी के दौरान करीब 1.29 करोड़ नकद और सोने के आभूषण एवं अन्य कीमती सामान बरामद किए गए। अधिकारियों ने बताया कि यह आरोप है कि रंगनाथन महारत्न पीएसयू द्वारा विपणन किए गए पेट्रो रसायन उत्पादों को खरीदने वाली निजी कंपनियों को छूट के संभावित लाभार्थियों से रिश्वत ले रहे थे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय बाजार में बिकने वाले वाहनों में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर अकसर चिंताएं जाहिर की जाती रही हैं। इन चिंताओं को दूर करने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को एक ट्वीट में कहा कि उन्होंने आठ लोगों को ले जाने वाले मोटर वाहनों के लिए न्यूनतम छह एयरबैग अनिवार्य करने के लिए जीएसआर अधिसूचना के मसौदे को मंजूरी दे दी है। गडकरी ने कहा, यह आखिरकार सभी सेगमेंट में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, भले ही वाहन की कीमत/वैरिएंट कुछ भी हो। मंत्रालय ने पहले ही 1 जुलाई 2019 से ड्राइवर एयरबैग और इस साल 1 जनवरी से फ्रंट को-पैसेंजर एयरबैग के फिटमेंट को लागू करना अनिवार्य कर दिया है। एम1 वाहन श्रेणी में, यह फैसला लिया गया है कि आगे और पीछे दोनों कंपार्टमेंट में बैठे लोगों के सामने और पीछे से होने वाले टक्करों के असर को कम करने के लिए चार अतिरिक्त एयरबैग अनिवार्य हैं। इसमें दो साइड/साइड टोरसो एयरबैग और दो साइड कर्टेन/ट्यूब एयरबैग शामिल होंगे जो कार के सभी यात्रियों को कवर करेंगे। उन्होंने कहा कि भारत में मोटर वाहनों को पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है। भारत उन शीर्ष देशों में से एक है जहां हर साल चिंताजनक रूप से बड़ी संख्या में सड़क दुर्घटनाएं दर्ज होती हैं। इन सड़क हादसों में बड़ी संख्या में मौतें और गंभीर चोटें आती हैं। जबकि यातायात उल्लंघन को दुर्घटनाओं के पीछे प्रमुख कारणों के रूप में जिम्मेदार ठहराया जाता है। लेकिन अपर्याप्त सुरक्षा उपाय, विशेष रूप से छोटे एंट्री लेवल के वाहनों में भी बड़ी संख्या में मौतें का कारण होती हैं।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में राज्य सरकार के कर्मचारियों की प्रोन्नति पर रोक के आदेश को गैरकानूनी बताते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने इसे रद्द कर दिया है। जस्टिस डॉ एसएन पाठक की अदालत ने सरकार को चार सप्ताह में वैसे लोगों को पदोन्नति देकर कोर्ट को सूचित करने का भी निर्देश दिया है जिनकी अनुशंसा डीपीसी में हो गई है। इस आदेश से राज्य सरकार के करीब ढाई लाख कर्मी और रिटायर कर्मियों को लाभ होगा। अदालत ने कहा है कि प्रोन्नति पर रोक के आदेश को सरकारी आदेश नहीं माना जा सकता है। न तो यह राज्यपाल का आदेश और न ही प्रोन्नति पर रोक का कोई कारण बताया गया। यह आदेश एक विभाग के प्रधान सचिव की ओर से जारी किया गया है। इस आदेश पर प्रोन्नति लंबित नहीं रखी जा सकती है। यह आदेश उन रिटायर कर्मचारियों पर भी लागू होगा जिनकी पदोन्नति की सिफारिश डीपीसी ने कर दी है, लेकिन अधिसूचना जारी नहीं होने के कारण वह बिना पदोन्नति के ही रिटायर हो गए हैं। इस संबंध में इंस्पेक्टर अशोक कुमार सिंह, राम सागर तिवारी, रश्मि एक्का, राजकिशोर प्रसाद एवं अन्य ने याचिका दायर की थी। इन याचिकाओं में इंस्पेक्टर से डीएसपी और डिप्टी कलेक्टर से एसडीओ के पद पर प्रोन्नति देने का आग्रह किया गया था। 20 दिसंबर को इस पर सुनवाई पूरी करने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।
एबीएन डेस्क, रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने रांची के कचहरी रोड स्थित आरआईटी बिल्डिंग को खाली करने के आरआरडीए के आदेश पर रोक लगा दी है। जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने आरआरडीअए को जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए सुनवाई सात मार्च तक स्थगित कर दी है।आरआरडीए के आदेश को आरआईटी बिल्डिंग के दुकानदारों ने चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता अपराजिता भारद्वाज ने अदालत को बताया कि आरआरडीए ने दिसंबर में एक पत्र जारी कर कहा कि आरआइटी भवन जर्जर हो गया है। कभी भी दुर्घटना हो सकती है। इसलिए इस भवन में स्थित सभी दुकानों को 15 दिनों में खाली कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से पहले न तो दुकानदारों को कोई नोटिस दिया गया था और न उक्त भवन की जांच की गई थी। पत्र में सिर्फ भवन निर्माण विभाग के एक आदेश का हवाला दिया गया, जिसकी जानकारी भी प्रार्थियों को नहीं दी गई है। सरकार की ओर से यहां पर स्थित दुकानदारों को कभी रेंट के नाम पर तो कभी जर्जर भवन की बात कहते हुए परेशान किया जा रहा है। इसलिए आरआरडीए के आदेश पर रोक लगाई जाए।
एबीएन डेस्क। देश में इन दिनों कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन के मामलों में काफी तेजी से वृद्धि हो रही है। इसी के मद्देनजर कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए भारतीय रेलवे ने नई गाइडलाइंस जारी की है। बीते दो वर्षों में कोरोना वायरस के चलते रेलवे ने अपने कई नियमों में बदलाव किए थे, जिसे धीरे-धीरे वापस सामान्य किया जाने लगा था। वहीं कोरोना की तीसरी लहर के चलते रेलवे ने एक बार फिर नई गाइडलाइंस जारी की है। कोरोना वायरस ने लोगों के जीवन में व्यापक परिवर्तन किए हैं। इस दौरान कई लोगों की जानें भी गईं, जिसके चलते सरकार इसे लेकर बेहद सख्त दिखाई दे रही है। सभी राज्य सरकारें भी अपने-अपने स्तर से पाबंदियां लगा रही हैं। कई राज्यों में नाइट कर्फ्यू और वीकेंड कर्फ्यू भी लागू कर दिया गया है। इसी क्रम में रेलवे ने भी बड़ा फैसला लिया है।, तो आइए जानते हैं क्या है ये नया नियम... • कोरोना के मामले देशभर में लगातार बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में रेलवे ने कुछ गाइडलाइंस जारी की है। दरअसल, दक्षिण रेलवे ने लोकल ट्रेन में सफर करने वाले लोगों के लिए नया नियम निर्धारित किया है। • इस नियम के तहत रेल में ऐसे लोगों को एंट्री नहीं दी जाएगी, जिन्होंने कोरोना का टीका नहीं लगाया है। लोकल ट्रेन में नो वैक्सीन नो एंट्री पॉलिसी लागू की गई है। • इतना ही नहीं, यदि किसी व्यक्ति ने कोरोना की केवल पहली डोज ली है, तब भी उन्हें ट्रेन में यात्रा करने की अनुमति नहीं मिलेगी। दोनो डोज अनिवार्य है। • अब यात्रा टिकट या मासिक सीजन टिकट जारी करने के दौरान यात्रियों को वैक्सीनेशन का सर्टिफिकेट दिखाना होगा, जिनके पास वैक्सीनेशन का सर्टिफिकेट नहीं होगा उनको टिकट नहीं दी जाएगी। माना जा रहा है कि दक्षिण रेलवे के इस कदम को देखते हुए अन्य जगहों पर भी यह नियम लागू किया जा सकता है।
एबीएन डेस्क। ओडिशा सरकार ने तीन साल के लिए सरकारी नौकरियों में आवेदन करने की उम्र सीमा बढ़ा दी है। अब वहां सामान्य कैटिगरी के आवेदक 38 साल की उम्र तक गवर्नमेंट जॉब के लिए आने वाली वैकेंसी में एप्लाई कर सकेंगे। एसटी, एससी, एसईबीसी और महिला कैंडिडेट के लिए आयु सीमा 43 वर्ष तय की गई है। सोमवार को ओडिशा राज्य मंत्रिमंडल की बैठक हुई। सीएम नवीन पटनायक की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरी में आवेदन के लिए आयु सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी। यह राहत 2021 से 2023 के लिए आने वाली वैकेंसी के लिए दी गई है। ओडिशा के मुख्य सचिव एससी महापात्रा ने बताया कि कोविड-19 के कारण भर्ती प्रक्रिया में देरी हो रही है। इस दौरान कई आवेदकों की आयु समाप्त हो गई और उन्हें भर्ती परीक्षा में भाग लेने के पर्याप्त अवसर नहीं मिले। इस कारण सरकार ने सरकारी नौकरियों के लिए आयु सीमा बढ़ाने का फैसला किया है। मुख्य सचिव एससी महापात्रा ने कहा कि यह छूट कैलेंडर वर्ष 2021, 2022 और 2023 के दौरान आने वाले नौकरी के विज्ञापनों पर लागू रहेगी। इसके तहत जनरल कैटिगरी के आवेदक 38 वर्ष तक एप्लाई कर सकेंगे। रिजर्वेशन के दायरे में आने वाले एसटी, एससी, एसईबीसी और महिला कैंडिडेट के लिए 43 साल की ऊपरी उम्र सीमा तय की गई है। जनरल कैटिगरी के विकलांग कैंडिडेट के लिए आयु सीमा 38 वर्ष से बढ़ाकर 48 वर्ष कर दी गई है। रिजर्व कैटिगरी के विकलांग आवेदक के लिए आयु सीमा 53 वर्ष तय की गई है। मुख्य सचिव एससी महापात्रा ने मुताबिक मंत्रिमंडल ने इसके अलावा जिलों में 1,338.69 करोड़ रुपये की पांच मेगा ग्रामीण पेयजल आपूर्ति परियोजनाओं के लिए टेंडर को भी मंजूरी दी है। मयूरभंज, संबलपुर और कटक जिले के इन परियोजनाओं के दो साल में पूरा होने की संभावना है। सरकार ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), भुवनेश्वर को 618.665 एकड़ सरकारी भूमि मुफ्त में देने का फैसला किया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच सरकार रोजाना नए-नए कदम उठा रही है। इस बीच भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने कोरोना संक्रमितों के संपर्क में आने वाले लोगों की जांच के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके मुताबिक, अब संक्रमण की चपेट में आए मरीजों के संपर्क में आए सभी लोगों को अपनी कोरोना जांच कराने की जरूरत नहीं है। संक्रमित के संपर्क में आए उन लोगों को ही कोरोना जांच कराने की सलाह दी गई है, जिनकी उम्र काफी ज्यादा है या फिर उन्हें गंभीर बीमारी है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई की कोरोना रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है। हल्के लक्षणों के बाद उन्होंने अपना टेस्ट कराया था। उन्होंने ट्वीट के जरिए कहा कि मेरा स्वास्थ्य ठीक है, मैं होम क्वारंटीन हूं। केंद्रीय मंत्री अजय भट्ट भी कोरोना की चपेट में आ गए हैं। उनमें भी कोरोना के हल्के लक्षण थे। इसके बाद उन्होंने अपनी जांच कराई थी। उन्होंने घर पर खुद को अलग कर लिया है।
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