टीम एबीएन, रांची। 7वीं जेपीएससी मुख्य परीक्षा पर रोक लगाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डॉ रवि रंजन और न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत में सुनवाई हुई। 7वीं जेपीएससी पीटी परीक्षा में जो आरक्षण दिए गए हैं। इसके बिंदु पर सुनवाई हुई। जेपीएससी ने तत्काल मुख्य परीक्षा 2 सप्ताह के लिए स्थगित करने की बात कहते हुए अदालत से मामले में जवाब पेश करने के लिए समय लिया। अदालत ने उन्हें समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई 15 फरवरी को तय की है। बता दें कि 28 जनवरी से जेपीएससी की मुख्य परीक्षा होने वाली थी। उसे तत्काल स्थगित कर दी गई है।
कोडरमा। चलती ट्रेन में रात को तेज आवाज बात करना, शोर मचाना और गाना सुनना अब यात्रियों को महंगा पड़ेगा। ट्रेनों में रात 10 बजे के बाद तेज आवाज होने पर टीटीई व टिकट चेकिंग स्टाफ के साथ आरपीएफ के जवान कार्रवाई करेंगे। रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक नीरज शर्मा ने आरपीएफ अधिकारियों के साथ बैठक कर सभी जोनल रेलवे प्रबंधकों को पत्र जारी किया है। इससंबंध में पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के सीपीआरओ राजेश कुमार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि भारतीय रेलवे यात्री सुविधा के लिए कृतसंकल्पित है। इसके लिए पूर्व मध्य रेलवे धनबाद सहित पंडित दीनदयाल जक्शन, समस्तीपुर, हाजीपुर, दानापुर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक और आरपीएफ कमांडेट को इसे लागू करने के लिए पत्र लिखा गया है। पत्र में कहा गया है कि यात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखकर अभियान चला जाए। जिससे ट्रेनों में तेज आवाज में म्यूजिक सुनना, तेज आवाज में देर रात बात करना, लाइट जलाने पर रोक लगायी जा सके। दरअसल ट्रेनों में रात 10 बजे के बाद मोबाइल फोन पर तेज बातें करने और म्यूजिक सुनने के कारण कई यात्रियों को नींद में बाधा पहुंच रही है। यात्रियों ने रेल मंत्रालय को इसकी शिकायतें भी भेजी हैं। विशेषकर एसी क्लास में सफर करने वाले यात्रियों को बोगी में तेज आवाज बात करने वाले यात्रियों से परेशानी हो रही है। इसे देखते हुए रेलवे बोर्ड ने आरपीएफ के अधिकारियों के साथ एक बैठक पिछले सप्ताह की। बैठक में ही सभी जोनल और मंडल स्तर के अधिकारियों को ट्रेनों में सघन जांच कराने के आदेश दिए गए। ट्रेन में टिकट चेकिंग करने वाले टीटीई को रात में यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई यात्री तेज बातें तो नहीं कर रहा है। यदि यात्री तेज आवाज करते हुए पाया गया तो ट्रेन में मौजूद आरपीएफ एस्कार्ट के साथ मिलकर उस यात्री के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं यदि ट्रेन में एस्कार्ट न हुआ तो अगले ठहराव वाले स्टेशन पर स्थित आरपीएफ पोस्ट की मदद ली जाएगी। इस व्यवस्था को अभियान के रूप में इसी सप्ताह शुरू किया जाएगा। इसकी निगरानी रेल मंत्रालय करेगा। इसके अलावा वरिष्ठ नागरिक, दिव्यांगजन और अकेली यात्रा कर रही महिला यात्रियों के लिए रेल कर्मचारियों के द्वारा जरूरत पड़ने पर तत्काल मदद पहुंचायी जायेगी।
एबीएन डेस्क। झारखंड पुलिस के 2012 बैच के दारोगा लालजी यादव की मौत की जांच के मामले में सीआईडी ने प्राथमिक जांच पूरी कर ली है। सीआईडी की प्राथमिक जांच में आए तथ्यों के आधार पर पूरा मामला खुदकुशी का माना गया है। वहीं जांच में तीन वजहों से तनाव की बात सामने आयी है। पूरे मामले में सीआईडी के डीएसपी जेपीएन चौधरी के नेतृत्व में टीम ने जांच की है। जांच रिपोर्ट सोमवार को पुलिस मुख्यालय को सौंपी जाएगी।सीआईडी सूत्रों के मुताबिक, जांच में लालजी यादव के खुदकुशी के पीछे तीन मुख्य वजह सामने आए हैं। जांच में यह बात भी सामने आयी है कि लालजी यादव का सीधा विवाद डीटीओ से नहीं हुआ था, बल्कि थाने आए परिवहन विभाग के एक कर्मचारी से हुआ था, जो डीटीओ के अधीनस्थ था। वेतन नहीं मिलने की वजह से भी वे तनाव में थे। मौत की सीबीआई जांच के लिए याचिका दारोगा लालजी यादव की मौत की सीबीआई जांच के लिए झारखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गयी है। रांची निवासी अनुरंजन अशोक ने याचिका दायर कर मौत को संदेहास्पद बताया है। इसकी सीबीआई जांच कराने का आग्रह किया है। याचिका में सरकार के मंत्री मिथिलेश ठाकुर, उनके भाई वीनू ठाकुर, पलामू एसपी, डीटीओ और एसडीपीओ को भी प्रतिवादी बनाते हुए इनकी संपत्ति की जांच का आग्रह भी किया गया है। दी जा रही धमकी याचिका में कहा गया है कि लालजी यादव की मृत्यु के बाद हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट दाखिल करने वाले लालजी यादव के भाई और पलामू एसपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने वाले उनके परिजनों को लगातार धमकी मिल रही है। साथ ही केस उठाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। याचिका में यह भी कहा गया है कि इस पूरी घटना के पीछे कोयला और खनिज की लूट का विरोध प्रमुख वजह है। इससे पहले इस पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई से कराने की मांग को लेकर लालजी यादव के भाई संजीव यादव ने भी हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। क्रिमिनल रिट में पलामू के एसपी, डीएसपी वर्तमान थाना प्रभारी डीटीओ और अन्य लोगों को पार्टी बनाया गया है। सीआईडी के अधिकारियों के मुताबिक, रांची के बुढ़मू थाने से मालखाना का चार्ज लंबित होने के कारण लालजी यादव को दो साल से अधिक वक्त से वेतन नहीं मिल रहा था। ऐसे में लालजी यादव वेतन को लेकर तनाव में थे। इसी दौरान पलामू डीटीओ की शिकायत पर थाने से निलंबित किए जाने के कारण लालजी यादव का तनाव बढ़ गया था। निलंबन के बाद लालजी यादव ने बूढ़मू थाने आकर मालखाने का प्रभार देने की कोशिश की थी, लेकिन इस दौरान भी कुछ सामान गायब मिले, ऐसे में लालजी यादव के वेतन निकासी का मामला फंस गया। सीआईडी के अधिकारियों के मुताबिक, पूरे मामले में विस्तृत जांच जरूरी है। परिवार के लोगों ने आला अधिकारियों पर भी प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं, ऐसे में मोबाइल की सीडीआर समेत अन्य पहलुओं पर भी जांच होने के बाद मामला स्पष्ट हो पाएगा। गौरतलब है कि थाने से निलंबन के चार दिनों के बाद नावा बाजार के थानेदार रहे लालजी यादव ने थाने में ही खुदकुशी कर ली थी। इस मामले में सीआईडी पुलिस मुख्यालय के आदेश पर केस का अनुसंधान टेकओवर करेगी।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में वनों और वन्य जीवों की कमी होने पर हाईकोर्ट ने शुक्रवार को वन विभाग के अधिकारियों को जमकर फटकार लगायी। स्वत: संज्ञान लिए मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने अफसरों के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि अधिकारी कोर्ट में आते हैं और बड़े-बड़े दावे कर चले जाते हैं। यदि अधिकारी काम कर रहे हैं तो राज्य में वन और वनों में रहने वाले जंगली जानवर कहां चले जा रहे हैं। अधिकारियों के नए-नए पद सृजित हो रहे हैं और जानवर घटते जा रहे हैं। वर्ष 2018 में राज्य में पांच बाघ होने का दावा किया गया था, लेकिन अभी कितने बाघ हैं इसकी कोई जानकारी किसी को नहीं है। अदालत ने सरकार से मौखिक पूछा कि क्या वन विभाग के सर्वोच्च 20 अधिकारियों ने अपनी संपत्ति का ब्योरा दिया है। क्यों नहीं इनकी संपत्ति की एसीबी से जांच करायी जाए। हालांकि अदालत ने अपने आदेश में इसका उल्लेख नहीं किया। लातेहार में हाथियों की मौत पर स्वत: संज्ञान लेकर हाईकोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रहा है। सुनवाई के दौरान हेड ऑफ फॉरेस्ट और अन्य अधिकारी अदालत में मौजूद थे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ज्यादातर लोगों का मानना है कि वित्त वर्ष 2022-23 के आम बजट में आयकर छूट की सीमा को 2.5 लाख रुपए से बढ़ाया जा सकता है। केपीएमजी इंडिया के एक सर्वे में यह राय उभरकर सामने आई है। आम बजट एक फरवरी को पेश किया जाएगा। बजट से पहले केपीएमजी द्वारा किए गए सर्वेक्षण में 36 प्रतिशत लोगों का मानना है कि 80सी कटौती के तहत कटौती की सीमा को 1.5 लाख रुपए से बढ़ाया जा सकता है। वहीं 19 प्रतिशत का कहना था कि वेतनभोगियों के लिए मानक कटौती की सीमा को मौजूदा के 50000 रुपए से बढ़ाया जा सकता है। सर्वेक्षण के अनुसार, 16 प्रतिशत उत्तरदाताओं को उम्मीद है कि बजट में वेतनभोगियों के लिए घर से काम करने की व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कर-मुक्त भत्ता/अन्य लाभ दिया जा सकता है। इसमें इंटरनेट कनेक्शन, फर्नीचर और ईयरफोन के लिए प्रावधान किया जा सकता है। केपीएमजी ने बजट-पूर्व यह सर्वे जनवरी, 2022 में किया है। इसमें वित्तीय क्षेत्र से जुड़े लगभग 200 पेशेवरों के विचार लिए गए हैं। सर्वेक्षण में 64 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि मूल आयकर छूट की सीमा 2.5 लाख रुपए सालाना से बढ़ाई जाएगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी नए नियमों के अनुसार देश के हथियार निर्माताओं को हथियारों और गोला-बारूद के सालाना उत्पादन को बढ़ाने की अनुमति दे दी गई है। हालांकि, हथियार (संशोधन) नियम, 2022 के तहत निर्माताओं को हर महीने निर्मित किए गए, बेचे गए, स्थानांतरित किए गए या इस्तेमाल किए गए हथियारों की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध करानी होगी। मंत्रालय ने नए नियम गुरुवार को एक गजट अधिसूचना के माध्यम से जारी किए थे। इस संबंध में मंत्रालय की ओर से जारी की गई अधिसूचना में कहा गया है, जिन निर्माताओं को फार्म 7 में लाइसेंस जारी किया गया है उन्हें इन नियमों के तहत लाइसेंसिंग प्राधिकारी और संबंधित राज्य सरकार को 90 दिनों के अंदर सूचना देकर हथियारों और गोला-बारूद का सालाना उत्पादन बढ़ाने या क्षमता के अनुसार संशोधन की अनुमति दी जाएगी। इसके लिए क्षमता के रूप में वित्त वर्ष के अंत से लाइसेंस पर आगे किसी भी समर्थन की आवश्यकता नहीं होगी। आवेदन करते समय निर्माता को निर्माण क्षमता बढ़ाने या लाइसेंस क्षमता में संशोधन लिए विस्तृत प्रस्ताव, रूपरेखा, आर्थिक व्यवहार्यता के लिए वित्त व औचित्य के साधनों और बाजार में मांग के पूर्वानुमान की जानकारी प्रदान करनी होगी। ये जानकारियां कंपनी के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता से प्रमाणित होनी चाहिए। मासिक ऑनलाइन रिटर्न, उत्पादन, बिक्री, हस्तांतरण और उपभोग का विवरण, निर्माता महीने के अंतिम दिन के काम के घंटों के अंत तक जमा किया जाएगा। कंपनी में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नियंत्रण में किसी भी परिवर्तन के लिए या शेयरधारिता में ऐसे किसी बदलाव या लाभकारी हित के मामले में जिसकी वजह से प्रमोटरों की शेयर भागीदारी 10 फीसदी से कम हो रही हो, लाइसेंसिंग प्राधिकरण से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। यदि ऐसी परिस्थिति आती है जो लाइसेंसधारक को ऑनलाइन रिटर्न जमा करने से रोकती है, तो वैकल्पिक साधन स्थापित करने के लिए स्थानीय लाइसेंसिंग प्राधिकरण को सूचना देनी होगी।
एबीएन डेस्क। केंद्र सरकार ने भारत विरोधी यूट्यूब चैनलों पर बड़ी कार्रवाई की है। सरकार ने ऐसे 35 यूट्यूब चैनलों को बैन कर दिया है। इसके अलावा 2 वेबसाइट्स, 1 ट्विटर अकाउंट और 1 फेसबुक अकाउंट भी बैन किया गया है। इससे पहले बुधवार को केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा था कि भारत को बदनाम करने वाले यूट्यूब चैनलों को बैन किया जाएगा। आईबी मंत्रालय के संयुक्त सचिव विक्रम सहाय ने बताया कि कल 20 जनवरी को मंत्रालय को प्राप्त ताजा खुफिया सूचनाओं के आधार पर हमने 35 यूट्यूब चैनल, 2 ट्विटर अकाउंट, 2 इंस्टाग्राम अकाउंट, 2 वेबसाइट और एक फेसबुक अकाउंट को ब्लॉक करने के निर्देश जारी किये हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने वीरवार को एक अहम फैसले की सुनवाई के दौरान कहा कि बिना वसीयत के मृत हिंदू पुरुष की बेटियां पिता की स्व-अर्जित और अन्य संपत्ति पाने की हकदार होंगी और उन्हें परिवार के अन्य सदस्यों की अपेक्षा वरीयता होगी। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला मद्रास उच्च न्यायालय के एक फैसले के खिलाफ दायर अपील पर आया है जो हिंदू उत्तराधिकार कानून के तहत हिंदू महिलाओं और विधवाओं को संपत्ति अधिकारों से संबंधित था। न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने कहा कि वसीयत के बिना मृत किसी हिंदू पुरुष की मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति चाहे वह स्व-अर्जित संपत्ति हो या पारिवारिक संपत्ति के विभाजन में मिली हो, उसका उत्तराधिकारियों के बीच वितरण होगा। पीठ ने इसके साथ ही कहा कि ऐसे पुरुष हिंदू की बेटी अपने अन्य संबंधियों (जैसे मृत पिता के भाइयों के बेटे/बेटियों) के साथ वरीयता में संपत्ति की उत्तराधिकारी होने की हकदार होगी। पीठ किसी अन्य कानूनी उत्तराधिकारी की अनुपस्थिति में बेटी को अपने पिता की स्व-अर्जित संपत्ति को लेने के अधिकार से संबंधित कानूनी मुद्दे पर गौर कर रही थी। न्यायमूर्ति मुरारी ने पीठ के लिए 51 पृष्ठों का फैसला लिखते हुए इस सवाल पर भी गौर किया कि क्या ऐसी संपत्ति पिता की मृत्यु के बाद बेटी को मिलेगी जिनकी वसीयत तैयार किए बिना मृत्यु हो गयी और उनका कोई अन्य कानूनी उत्तराधिकारी नहीं हो।
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