कानून व्यवस्था

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Published / 2022-02-22 04:36:02
10वीं-12वीं की ऑफलाइन परीक्षा रद्द करने की याचिका पर सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट तैयार

एबीएन सेंट्रल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट सोमवार को उस याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमत हो गया जिसमें CBSE-ICSE तथा अन्य बोर्ड की तरफ से इस वर्ष स्कूलों में (ऑफलाइन माध्यम से) 10वीं और 12वीं कक्षा की प्रत्यक्ष बोर्ड परीक्षाएं आयोजित नहीं कराने का अनुरोध किया गया है। चीफ जस्टिस एन वी रमन्ना, जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने याचिका को शीघ्र सूचीबद्ध करने के एक वकील के अभिवेदन पर गौर किया। याचिका में कहा गया था कि कोरोना महामारी के कारण प्रत्यक्ष परीक्षाएं आयोजित नहीं कराई जानी चाहिए। अधिवक्ता प्रशांत पद्मनाभन ने कहा कि यह कक्षा 10 और 12वीं की बोर्ड परीक्षों के संबंध में है। महामारी के हालात के चलते प्रत्यक्ष परीक्षाएं नहीं कराई जानी चाहिए। इसपर पीठ ने कहा कि मामले को न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर की पीठ के पास जाने दीजिए। अधिवक्ता ने अधिकार कार्यकर्ता अनुभा श्रीवास्तव सहाय की ओर से दाखिल याचिका का भी जिक्र किया जिसमें सीबीएसई और अन्य बोर्ड को निर्देश देने का अनुरोध किया गया था, जिन्होंने कक्षा 10 और 12वीं की परीक्षाएं स्कूलों में कराने का प्रस्ताव दिया है।

Published / 2022-02-21 08:35:19
चारा घोटाला : राजद सुप्रीमो लालू को हुई 5 साल की सजा, 60 लाख जुर्माना भी

टीम एबीएन, रांची। चारा घोटाला के सबसे बड़े मामले डोरंडा कोषागार से 139.35 करोड़ रुपए की अवैध निकासी में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद को सोमवार को पांच साल की सजा सुनाई गई। साथ ही 60 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। रांची में CBI के विशेष जज एसके शशि ने सजा का ऐलान किया। बहस की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। लालू यादव के वकील प्रभात कुमार ने बताया कि पूरी कार्रवाई के दौरान लालू प्रसाद चुपचाप बहस देख रहे थे। उन्होंने कुछ भी नहीं कहा। सजा के ऐलान के पहले लालू की तबीयत और बिगड़ गई थी। उनका ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल बढ़ गया है। सुबह लालू यादव का ब्लड शुगर 160 पहुंच गया जो सामान्य स्थिति में खाली पेट में 110 होना चाहिए। दूसरी ओर उनका ब्लड प्रेशर 150/ 70 हो पहुंच गया है। डॉक्टर ने बताया की सजा की सुनवाई होने से पहले लालू यादव सुबह से ही काफी तनाव में थे। इस कारण उनका बीपी और ब्लड शुगर अनियंत्रित था। इलाज कर रहे डॉक्टर विद्यापति ने बताया कि सुबह लालू से जब मुलाकात हुई तो वह काफी तनाव में दिखे और तबीयत के बारे में पूछा गया तो काफी मायूस होकर उन्होंने जवाब दिया। लालू प्रसाद की ओर से सीबीआई कोर्ट में मेडिकल ग्राउंड के आधार पर गुहार लगाई गई थी। लालू प्रसाद के अधिवक्ता प्रभात कुमार समेत दूसरे अधिवक्ताओं ने कोर्ट से यह अपील की है कि लालू प्रसाद समेत सभी दोषी करार दिए गए आरोपी 75 से 85 वर्ष के हैं और कई गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। इसलिए कम से कम सजा दी जाए। कोर्ट इस मामले में आज दिन के डेढ़ बजे सजा के बिंदु पर फैसला सुनायी।

Published / 2022-02-21 02:33:24
सीबीआई की स्पेशल कोर्ट आज सुनायेगी लालू को सजा

टीम एबीएन, रांची। चारा घोटाला में फंसे लालू प्रसाद यादव की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। चार केसों में से दुमका ट्रेजरी से जुड़े मामले में लालू प्रसाद को विभिन्न धाराओं में 7-7 वर्ष तक की सजा मिल चुकी है। अब सबसे बड़े मामले डोरंडा कोषागार मामला में लालू प्रसाद यादव को सीबीआई कोर्ट के द्वारा दोषी पाए गए हैं। इस मामले पर कोर्ट आज सजा सुनायी जाएगी। आज यानी सोमवार 21 फरवरी को सीबीआई 41 आरोपियों के सजा बिंदु पर फैसला सुनाएगी। सीबीआई स्पेशल कोर्ट द्वारा दिये जाने वाले फैसले पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की बात करें तो सीबीआई की विशेष अदालत ने 15 फरवरी को हुई सुनवाई में लालू को साजिश रचने सहित भ्रष्टाचार के कई धाराओं में दोषी पाया है, जिससे लालू प्रसाद की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक बीएमपी सिंह की मानें तो लालू प्रसाद को न्यायालय ने 120B, 420, 409, 467, 468, 471, 477A, IPC and 13(2), 13(1)(c)PC Act के तहत इस महाघोटाले में साजिश रचने के आरोप में दोषी पाया है। इन धाराओं में न्यूनतम एक वर्ष और अधिकतम सात वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। डोरंडा कोषागार से चारा खरीदने के नाम पर हुए 139.35 करोड़ के अवैध निकासी मामले में लालू प्रसाद यादव, आरके राणा, ध्रुव भगत, जगदीश शर्मा सहित 75 आरोपियों को कोर्ट ने 15 फरवरी को दोषी पाया था। दोषी पाये गये अभियुक्तों में 34 को अधिकतम तीन वर्ष तक की सजा दी गयी है। शेष दोषियों की सजा के बिंदु पर न्यायालय द्वारा आज फैसला सुनाया जाएगा। आज यानी सोमवार को सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा सजा के बिंदु पर सुनवाई वीडियो कॉफ्रेसिंग से भी हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो न्यायालय द्वारा होटवार जेल प्रबंधन को लालू सहित सभी दोषियों को वीसी के जरिए उपस्थित कराने का निर्देश दिया जाएगा। प्रावधान के अनुसार अभियुक्तों की मौजूदगी में ही फैसला न्यायालय में सुनाया जाता है चाहे वो वीडियो कॉफ्रेसिंग से हो या सशरीर उपस्थिति के जरिए। अधिवक्ता संजय कुमार की मानें तो न्यायालय अभी तक इसपर कोई निर्णय नहीं लिया है कि वीडियो कॉफ्रेसिंग से सजा की सुनवाई की जाए, ये निर्णय आज ही होगा। कोर्ट के समक्ष जो न्यायालय का कार्य दिवस है उस वक्त अभियुक्तों को हाजिर होना है।

Published / 2022-02-20 02:39:30
चारा घोटाला : सीबीआई के बाद अब ईडी करेगी दो मामलों की जांच

टीम एबीएन, रांची। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की मुश्किलें और बढ़ने वाली है सीबीआई के बाद अब लालू प्रसाद यादव ईडी के रडार पर भी आ गए हैं। ईडी ने सीबीआई के चारा घोटाले से संबंधित दो मामलों को टेकओवर करते हुए मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। चारा घोटाला की ईडी जांच : ईडी ने जिन दो मामलो को टेक ओवर किया है उसमें देवघर कोषागार से 3.76 करोड़ रुपये की अवैध निकासी और दुमका कोषागार से 34.91 करोड़ रुपये की अवैध निकासी का मामला शामिल है। इन मामलों में सीबीआइ की विशेष अदालत ने 19 मार्च 2018 और 9 अप्रैल 2018 को इस केस के सभी अभियुक्तों के खिलाफ सजा सुनाई थी। ईडी के दौरान जांच के दायरे में प्रमुख नाम : लालू प्रसाद यादव, अजीत कुमार वर्मा, अरुण कुमार सिंह, विमल कांत दास, गोपीनाथ दास, कृष्णा कुमार प्रसाद, मनोरंजन प्रसाद, महिंदर सिंह बेदी, नंदकिशोर प्रसाद, नरेश प्रसाद, ओम प्रकाश दिवाकर, पंकज मोहन भुज, फूलचंद सिंह, पितांबर झा, राधा मोहन मंडल, राजकुमार शर्मा उर्फ राजा राम जोशी, रघुनंदन प्रसाद, राजेंद्र कुमार बगरिया और शरदेंदु कुमार दास शामिल हैं। चारा घोटाला देश का सबसे बड़ा घोटाला था। यह कुल 950 करोड़ रुपये का घोटाला बताया गया था। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव चारा घोटाले में दर्ज पांच कांडों में दोषी पाये जा चुके हैं। आछठे केस का ट्रायल अभी चल रहा है। कुछ दिन पहले ही डोरंडा कोषागार से 139.35 करोड़ों रुपये की फर्जी निकासी मामले में भी लालू प्रसाद दोषी करार दिए जा चुके हैं इस मामले में 21 फरवरी को लालू प्रसाद यादव को सजा सुनाई जाएगी।

Published / 2022-02-19 17:44:42
वैक्सीन लगने के 90 दिन बाद हुआ कोरोना तो बिना टीका के माने जायेंगे : डब्लूएचओ

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अगर आपको टीका लगवाए तीन महीने से अधिक समय बीत चुका है तो संक्रमण के प्रति लापरवाह रवैया खतरनाक साबित हो सकता है। डब्लूएचओ ने ताजा दिशानिर्देश में कहा है कि अगर संक्रमित मरीज के संपर्क में आने वाला कोई व्यक्ति 90 दिन पहले दोनों डोज लगवा चुका था तो उसे टीकारहित माना जाए। यानी ऐसे संभावित संक्रमित व्यक्ति के इलाज को लेकर सरकारों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है क्योंकि इस अवधि के बाद टीके से मिलने वाली प्रतिरक्षा कमजोर हो जाती है। पूरी दुनिया में कोरोना संक्रमण के कमजोर पड़ने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपने दिशानिर्देशों में संशोधन किया है। वैश्विक निकाय ने जो नए प्रोटोकॉल जारी किए हैं, उनसे यही परिलक्षित हो रहा है कि टीका लगवाने के तीन महीने बाद शरीर की प्रतिरक्षा में गिरावट होगी। यानी इस तरह दुनिया की टीका लगवा चुकी एक बड़ी तादाद के लिए बूस्टर की आवश्यकता की मांग भी जोर पकड़ सकती है। डब्लूएचओ ने दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा कि बूस्टर डोज लगाने जाने का बहुत सीमित डाटा ही अभी उपलब्ध है। डब्लूएचओ ने अपने ताजा दिशानिर्देश में कहा कि हाल में जिन लोगों ने कोरोनारोधी टीका लिया है, उन्हें संक्रमण जोखिम की श्रेणी में कम खतरे वाला माना जाए। मगर जिन लोगों ने 90 दिनों से ज्यादा समय पहले टीका लगवा लिया है, उन्हें जोखिम प्राथमिकता श्रृंखला में ऊपर रखना होगा, क्योंकि उनके शरीर की प्रतिरक्षा समय के साथ घटी होगी। डब्लूएचओ ने यह भी कहा कि अगर टीका लगवा चुके लोग किसी संक्रमित के संपर्क में आ जाते हैं तो उन्हें टीकारहित माना जाएगा और इस श्रेणी के हिसाब से ही उनके लिए सरकारें क्वारंटाइन व जांच के प्रोटोकॉल का पालन कराएं।

Published / 2022-02-18 10:47:25
किसी का रास्ता, हवा और पानी रोकना मौलिक अधिकार का हनन : हाईकोर्ट

टीम एबीएन, रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि कोई व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का हनन नहीं कर सकता। रास्ता, हवा और पानी किसी भी व्यक्ति के लिए बंद नहीं किया जा सकता। जस्टिस एसके द्विवेदी की अदालत ने प्रार्थी गीता देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें घर तक जाने का रास्ता उपलब्ध कराने और सोमवार को पूर्व की स्थिति बहाल करने का निर्देश जिला प्रशासन और एसएसपी के दिया है। अदालत ने कहा है कि अदालत इस मामले में टाइटल तय नहीं कर रहा है। टाइटल तय करने के लिए दोनों पक्ष सक्षम न्यायालय में जा सकते हैं। लेकिन जब तक टाइटल डिसाइड नहीं हो जाता, तब तक किसी का रास्ता अवरुद्ध नहीं किया जा सकता। ऐसा करना मौलिक अधिकार का हनन है। गीता देवी ने अपनी याचिका में कहा है कि वह हिनू की निवासी है। कुछ लोगों ने उनके घर का रास्ता बंद कर दिया है। स्थानीय लोगों ने जिस जमीन पर दीवार खड़ी कर रास्ता बंद किया है, वह आम रास्ता था, लेकिन उसे सरना की जमीन बताकर वहां बाउंड्री वॉल खड़ा कर दिया गया, जिससे उनके घर का रास्ता बंद हो गया है।

Published / 2022-02-17 17:44:53
झारखंड की लंबित अवमानना याचिकाओं पर फिर से विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट

टीम एबीएन, रांची। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को झारखंड सरकार व डीजीपी नीरज सिन्हा के खिलाफ लंबित अवमानना याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर विचार को सहमति जताई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि डीजीपी सिन्हा 31 जनवरी को सेवानिवृत्त होने के बाद भी पद संभाल रहे हैं। सीजेआई एनवी रमण की पीठ को वरिष्ठ वील सिद्धाथ लूथरा ने बताया कि इस मामले को पिछले साल सितंबर में सूचीबद्ध करने का आदेश दिया गया था लेकिन अब तक इस पर सुनवाई शुरू नहीं हुई है। इस पर पीठ ने कहा, हमारे पास इस मामले की फाइल भेजिये, हम देखते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 14 जुलाई को राज्य सरकार, उसके शीर्ष अधिकारियों और संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के खिलाफ अपने फैसले के कथित उल्लंघन के लिए अवमानना याचिका पर नोटिस जारी किया था। बाद में सिन्हा को भी इस मामले में वादी बनाया था। याचिकाकर्ता राजेश कुमार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की थी।

Published / 2022-02-17 17:40:26
हिनू सड़क विवाद : हाई कोर्ट के निर्देश पर एसएसपी दिलायेंगे रास्ता

टीम एबीएन, रांची। राजधानी रांची के हिनू में रास्ता रोकने के मामले में दायर याचिका पर झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा कि कोई भी किसी व्यक्ति का हवा, पानी और रास्ता रोका नहीं सकता है। यह मौलिक अधिकार है मौलिक अधिकार का हनन नहीं किया जा सकता। अदालत ने रांची जिला प्रशासन और एसएसपी को निर्देश दिया है कि वो बाउंड्री हटवाकर 21 फरवरी तक रास्ता दिलाएं और कोर्ट को इससे अवगत कराएं। झारखंड हाई कोर्ट के न्यायाधीश संजय कुमार द्विवेदी की अदालत में इस मामले पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि कुछ स्थानीय लोगों ने उनके घर के सामने के रास्ते को बंद कर दिया है जबकि वह आम रास्ता था, लेकिन उसे सरना स्थल का जमीन बताते हुए उसकी घेराबंदी कर दी गयी, जिससे रास्ता बंद हो गया है। उन्होंने अदालत से गुहार लगाई कि उन्हें रास्ता दिलाया जाए। इस पर अदालत ने कहा कि यहां टाइटल डिसाइड नहीं किया जा सकता है। दोनों ही पक्ष सक्षम न्यायालय में टाइटल में जाने को स्वतंत्र हैं, लेकिन जब तक टाइटल डिसाइड नहीं होता तब तक किसी का रास्ता रोका नहीं जा सकता है। क्योंकि यह मौलिक अधिकार है और मौलिक अधिकार का हनन नहीं किया जा सकता है। यहां बता दें कि रांची हिनू की गीता देवी के घर का रास्ता स्थानीय लोगों ने घेराबंदी करके बंद कर दिया है। उसी रास्ता को खुलवाने की मांग को लेकर झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। उसी याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने रांची जिला प्रशासन और रांची एसएसपी को रास्ता दिलाने का निर्देश दिया है।

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