कानून व्यवस्था

View All
Published / 2022-03-09 06:18:24
11 साल में रॉबर्ट वाड्रा ने छिपाई 106 करोड़ रुपए की आय : आयकर विभाग

एबीएन सेंट्रल डेस्क। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद और कांग्रेस महासचिव के प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा ने 11 सालों में राजस्थान में बेनामी जोत से अपनी आय को 106 करोड़ रुपए से कम बताया। आयकर विभाग ने आरोप लगाया है कि रॉबर्ट वाड्रा ने अपनी असल कमाई को छुपाया है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, आयकर विभाग ने इस राशि को मूल्यांकन वर्ष 2010-11 से 2020-21 के दौरान उनकी आय में जोड़ने का प्रस्ताव दिया है। आयकर विभाग ने वाड्रा की सात कंपनियों - मैसर्स आर्टेक्स, स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी, स्काईलाइट रियल्टी, ब्लूब्रीज ट्रेडिंग, लंबोदर आर्ट्स, नॉर्थ इंडिया आईटी पार्क्स और रियल अर्थ की आय में लगभग 9 करोड़ रुपए जोड़ने का भी प्रस्ताव किया है जो कि 2010-11 से 2015-16 मूल्यांकन वर्ष के दौरान की हैं। बेनामी लेन-देन (निषेध) अधिनियम के तहत राजस्थान में भूमि सौदों में कथित कर चोरी के लिए वाड्रा के खिलाफ विभाग की जांच के संबंध में आय की कम जानकारी देने की बात सामने आई है। विभाग ने दिसंबर 2021 में वाड्रा की आय (106 करोड़ रुपये) और उनकी सात कंपनियों (लगभग 9 करोड़ रुपए) की कम जानकारी देने को लेकर अपने निष्कर्षों की जानकारी प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भी दी थी। वहीं इस पूरे मामले में वाड्रा ने कहा कि पिछले कई सालों की तरह ही एक ही कारण से मेरा नाम उछाला जा रहा है। वाड्रा ने कहा कि दुर्भावनापूर्ण है कि मुझे राजनीतिक तौर पर निशाना बनाया जा रहा है। मेरी कानूनी टीम इस मामले में जवाब देगी। आईटी अधिनियम 1961 की धारा 270 ए के तहत, आयकर चोरी पर आय की कम जानकारी देने के लिए देय कर के 50 प्रतिशत का जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि गलत जानकारी देने के कारण कम आय की जानकारी सामने आती है, तो जुर्माना देय कर का 200 प्रतिशत होगा।

Published / 2022-03-08 17:30:04
बच्चों की जिद के आगे झुके बिछड़े माता-पिता, अब रहेंगे साथ

टीम एबीएन, रांची। बच्चों की खुशी के आगे विवाह विच्छेद का मुकदमा लड़े रहे पति-पत्नी को झुकना पड़ा। अधिवक्ता मध्यस्थ नीलम शेखर एवं पीसी उरांव के प्रयास से विवाह विच्छेद का मुकदमा लड़े रहे पति-पत्नी अब एक साथ रहकर नयी जिंदगी शुरू करने पर राजी हो गये। वहीं दो वर्षीय बेटी को मां के साथ अब पिता का प्यार मिलेगा। बेटी मां-पिता को एक साथ पाकर लिपट कर खुशी का इजहार मध्यस्थता केंद्र में किया। जी हां मंगलवार को पांच दिवसीय विशेष मध्यस्थता अभियान के दूसरे दिन 14 मुकदमों में सुलह कराया गया। जिसमें चार मुकदमें बच्चों की खुशी से जुड़े हुए थे। केस नंबर 1. रांची निवासी विजय कुमार प्रजापति एवं नवादा निवासी पत्नी प्रियंका के बीच मामूली मतभेद को लेकर आगे की जिंदगी अलग रहकर बीतने को लेकर पति ने विवाह विच्छेद का मुकदमा किया था। जबकि पत्नी ने भरण-पोषण को लेकर मुकदमा किया था। फैमिली कोर्ट जज ने मामले में सुलह को लेकर मध्यस्थता केंद्र भेज दिया था। साथ ही मध्यस्थ नीलम शेखर को नामित किया गया। दोनों की शादी अप्रैल 2018 में हुई थी। दोनों को एक बेटी है। सुलह के बाद पुराने वाद-विवाद पर विराम लगाते हुए बेटी के साथ खुशनुमा जीवन व्यतीत करने पर राजी हुए। दोनों अपनी बेटी का भ‌विष्य को साथ मिलकर संभालेंगे। बेटी की हर जरूरत को पूरा करेंगे। सभी तरह की कड़वाहट अब नहीं रखेंगे। सुलह में दोनों पक्ष के अधिवक्ताओं की भी भूमिका अहम रही। केस नंबर 2. मध्यस्थ प्रकाश चंद्र उरांव ने तीनों बच्चों को माता-पिता का प्यार एक साथ दिलाने में सफल रहे। सुलह के माध्यम से उन्होंने पुनिया उरांव एवं सूरज उरांव को एक किया। दोनों पति-पत्नी विवाह विच्छेद का मुकदमा लड़ रहे थे। दोनों को तीन बच्चे हैं। आपसी मनमुटाव के कारण दोनों पति-पत्नी पिछले एक साल से अलग-अलग रह रहे थे। सुलह के बाद अब एक साथ रहेंगे। साथ ही पुनिया उरांव को सूरज पांच हजार रुपये प्रति माह खर्च भी देगा।

Published / 2022-03-05 14:25:55
देश की सुरक्षा को देख खारिज हो रहे 83% तक आरटीआइ आवेदन

एबीएन सेंट्रल डेस्क। विश्लेषण के मुताबिक, 2019-20 में केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों को 1.29 करोड़ आरटीआई आवेदन प्राप्त हुए, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 2.48% कम था। सीआईसी के अनुसार, इस दौरान देश में 1 करोड़ 33 लाख आरटीआई आवेदन प्राप्त हुए। देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फळक आवेदन खारिज किए जा रहे हैं। इस बीच एक विश्लेषण से पता चला है कि 2020-21 के दौरान केंद्र सरकार के मंत्रालयों द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर सूचना के अधिकार (आरटीआई) के आवेदनों के रिजेक्शन में 83 फीसदी की वृद्धि हुई थी। ओवरआॅल रिजेक्शन रेट 2.95 प्रतिशत तक कम हो गया था। मानवाधिकार अभियान निकाय, कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव (सीएचआरआई) के वेंकटेश नायक ने केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के अंतर्गत आने वाले 2,182 से अधिक विभागों में आरटीआई आवेदनों को खारिज करने के कारणों का विश्लेषण किया। बता दें कि प्रत्येक मंत्रालय को केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) को दायर आरटीआई आवेदनों पर वार्षिक स्थिति प्रस्तुत करनी होती है। विश्लेषण के मुताबिक, 2019-20 में केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों को 1.29 करोड़ आरटीआई आवेदन प्राप्त हुए, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 2.48% कम था। सीआईसी के अनुसार, इस दौरान देश में 1 करोड़ 33 लाख आरटीआई आवेदन प्राप्त हुए। आरटीआई आवेदनों में सर्वाधिक वृद्धि स्वास्थ्य और इस्पात मंत्रालयों को प्राप्त हुई। खारिज किए गए 53,537 आवेदनों में से 1,024 आरटीआई आवेदन राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर थे, जबकि पिछले वर्ष 557 आवेदन थे। सरकार ने तेजी से किया आरटीआई के क्लाउज 8 (1) का उपयोग : नायक ने कहा कि हालांकि कुल अस्वीकृति दर गिर गई है, सरकार ने आरटीआई आवेदनों को अस्वीकार करने के लिए आरटीआई अधिनियम (राष्ट्रीय सुरक्षा को बाधित करने वाली जानकारी प्रदान करने की छूट) के खंड 8 (1) का तेजी से उपयोग किया। उन्होंने इसे एक परेशान करने वाली प्रवृत्ति करार दिया। नायक ने कहा, ह्ययहां तक कि उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा छूट को लागू करने वाले महामारी वर्ष में 401 आवेदनों को खारिज कर दिया। श्रम और रोजगार मंत्रालय ने आरटीआई आवेदनों को खारिज करने के लिए खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के बारे में जानकारी मांगने से संबंधित एक अन्य प्रावधान का इस्तेमाल किया। यह मंत्रालय के दायरे में कोई सुरक्षा या खुफिया एजेंसी नहीं आने के बावजूद था। आरटीआई अधिनियम की धारा 24 में प्रावधान है कि कानून की अनुसूची के तहत सूचीबद्ध सुरक्षा अधिकारियों से भ्रष्टाचार से संबंधित जानकारी को छोड़कर जानकारी नहीं मांगी जा सकती है। नायक ने कहा, ह्यस्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, उपभोक्ता मामले और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय उल्लेखनीय मंत्रालय हैं, जिन्होंने महामारी वर्ष के दौरान सैकड़ों मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा छूट का आह्वान किया है ताकि सूचना से इनकार किया जा सके। 2019-20 में करीब 12,000 आवेदन खारिज किए गए : हालांकि पिछले साल की तरह, आरटीआई आवेदनों को अस्वीकार करने का सबसे बड़ा कारण धारा 8 (1) जे रहा, जो व्यक्तिगत जानकारी प्रदान करने पर रोक लगाता है। इस आधार पर 2019-20 में करीब 12,000 आवेदन खारिज किए गए। आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष अग्रवाल ने कहा, ह्यइस तरह के अधिकांश आवेदन सरकारी अधिकारियों के खिलाफ सेवा और जांच के बारे में जानकारी से संबंधित हैं। आरटीआई अधिनियम के अनुसार, एक बार आरटीआई आवेदन खारिज होने के बाद, आवेदक प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के पास अपील दायर कर सकता है, जो मंत्रालय या विभाग में एक वरिष्ठ अधिकारी है, जहां आवेदन दायर किया गया है। प्रथम अपीलीय आदेश से संतुष्ट न होने की स्थिति में पारदर्शिता प्रहरी सीआईसी के पास द्वितीय अपील दायर की जा सकती है।

Published / 2022-03-02 16:05:36
लालू की जमानत याचिका मंजूर, 4 मार्च को फैसला

टीम एबीएन, पटना। चारा घोटाला से जुड़े डोरंडा ट्रेजरी मामले में आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव को 5 साल की सजा सुनाई गई है, जिसके बाद से वह जेल में हैं। हालांकि स्वास्थ्य कारणों से रिम्स के पेइंग वार्ड में भर्ती हैं। इस बीच उनकी ओर से झारखंड हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की गई थी, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया है। लालू के वकील देवार्षी मंडल ने जमानत याचिका को कोर्ट से विशेष श्रेणी में शामिल कर जल्द सुनवाई करने का आग्रह किया था। इस याचिका में उनकी उम्र और बीमारियों का हवाला दिया गया है। शुक्रवार यानी 4 मार्च को उनकी अर्जी पर सुनवाई होगी। आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव की जमानत याचिका में उनके अधिवक्ता की ओर से उनकी बढ़ती उम्र (73 साल), 17 बीमारियों का हवाला देने के साथ-साथ चारा घोटाले के मामले में आधी से अधिक सजा जेल में काट लेने को आधार बनाया गया है। लालू के परिवार और पार्टी के लोगों को उम्मीद है कि 4 तारीख को उनको बेल मिल जाएगी और वे घर में होली मना पाएंगे। 30 सितंबर 2013 को सभी 45 आरोपियों को दोषी ठहराया था। लालू समेत इन आरोपियों पर चाईबासा ट्रेजरी से 37.70 करोड़ रुपये अवैध तरीके से निकालने का दोषी पाया गया था। इस मामले में 3 अक्टूबर 2013 को कोर्ट ने सजा सुनाई थी। लालू प्रसाद को 5 साल की सजा हुई थी। देवघर ट्रेजरी से फर्जी तरीके से 84.5 लाख रुपये अवैध निकासी मामले में लालू प्रसाद को 23 दिसंबर 2017 को दोषी ठहराया गया था और 6 जनवरी को साढ़े तीन साल कैद की सजा सुनाई गई थी। साथ ही उनपर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।

Published / 2022-02-27 15:28:59
मनरेगा : लोकपाल नियुक्त नहीं करने वाले राज्यों को नहीं मिलेगी राशि

एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्र सरकार अगले वित्त वर्ष से रोजगार गारंटी योजना मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) के लिए उन राज्यों को राशि जारी नहीं करेगी जिन्होंने अपने ऐसे 80 फीसदी जिलों में लोकपाल की नियुक्ति नहीं की है, जहां योजना लागू है। यह जानकारी रविवार को एक शीर्ष सरकारी अधिकारी ने दी। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से उपलब्ध जानकारी के अनुसार भाजपा शासित गुजरात, अरुणाचल प्रदेश व गोवा, तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) की सरकार वाले तेलंगाना और पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, दादरा एवं नगर हवेली जैसे केंद्र शासित प्रदेशों ने एक भी लोकपाल नियुक्त नहीं किया है। राजस्थान, पंजाब, बंगाल आदि में भी नियुक्ति कम : इसी तरह कांग्रेस शासित राजस्थान जैसे अन्य जिले भी हैं जहां बहुत कम जिलों में लोकपाल की नियुक्ति की गई है। राजस्थान में 33 जिलों में से केवल चार में योजना के तहत लोकपाल को नियुक्त किया गया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) शासित पश्चिम बंगाल में इस योजना के तहत 23 में से केवल चार जिलों में लोकपाल नियुक्त हैं। हरियाणा और पंजाब में भी स्थिति ऐसी ही है। दोनों राज्यों में 22-22 जिले योजना के तहत आते हैं लेकिन हरियाणा में केवल चार और पंजाब में ऐसे सात जिलों में लोकपाल की नियुक्ति की गई है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव नागेंद्र नाथ सिन्हा ने कहा कि आदर्श तौर पर राज्यों को सभी जिलों में लोकपाल नियुक्त करने चाहिए। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी जताई थी नाराजगी : उन्होंने कहा कि जिन राज्यों ने मनरेगा के तहत आने वाले कुल जिलों में से कम से कम 80 फीसदी में लोकपालों की नियुक्ति नहीं की है उन्हें अगले वित्त वर्ष के इस योजना को लागू करने के लिए राशि आवंटित नहीं की जाएगी। इससे पहले गुरुवार को केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह ने भी इस पर नाराजगी जताई थी। गिरिराज सिंह ने मनरेगा के लिए लोकपाल एप का उद्घाटन करते हुए कहा था कि यह देखने को मिला है कि कई स्थानों पर उन लोगों को लोकपाल के पद पर नियुक्त किया गया है जो किसी राजनीतिक दल से जुड़े हुए हैं। जो राज्य प्रावधानों के तहत नियुक्ति नहीं कर रहे हैं उन्हें अगले वित्त वर्ष से राशि जारी नहीं की जाएगी।

Published / 2022-02-25 17:48:58
चिटफंड मामले के आरोपी को तीन साल की सजा

टीम एबीएन, रांची। चिटफंड मामले के आरोपी को रांची मजिस्ट्रेट कोर्ट से सजा मिली है। आम लोगों की गाढ़ी कमाई की ठगी करने वाले आरोपी मेसर्स गुडलक सिटी कंपनी के सीएमडी अशोक कुमार को 3 साल की सजा हुई है। रांची जुडिशल मजिस्ट्रेट विक्रम आनंद की कोर्ट ने फैसला सुनाया है। झारखंड हाई कोर्ट के आदेश पर स्पीड ट्रायल हुआ था। अशोक कुमार मेसर्स गुडलक सिटी कंपनी के CMD थे, जिन्होंने चिटफंड में पैसा निवेश करने के नाम पर रांची की भोली भाली जनता से लगभग 60 लाख की ठगी की थी। इस संबंध में झारखंड पुलिस ने साल 2014 में मामला दर्ज कराया था। राजधानी के कांटाटोली में इसका ऑफिस था।

Published / 2022-02-23 17:33:41
छठी जेपीएससी : हाईकोर्ट ने रिजल्ट सम्बन्धी याचिका को किया खारिज

टीम एबीएन, रांची। झारखंड उच्च न्यायालय ने बुधवार को छठी जेपीएससी के रिजल्ट को खारिज करने के फैसले को एकल पीठ के फैसले को बरकरार रखा है। इस फैसले से छठी जेपीएससी संयुक्त सेवा परीक्षा में सफल 326 सफल अभ्यर्थियों को बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट में छठी जेपीएससी परीक्षा परिणाम को एकल पीठ द्वारा खारिज किये जाने के फैसले को माननीय खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी गयी थी। प्रार्थी शिशिर तिग्गा समेत अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से दाखिल याचिका में हाईकोर्ट की एकल पीठ के आदेश को गलत बताते हुए उस आदेश को निरस्त करने की गुहार लगायी गयी थी। याचिका में कहा गया था कि छठी जेपीएससी की मुख्य परीक्षा में पेपर वन (हिन्दी व अंग्रेजी) का अंक कुल प्राप्तांक में जोड़ा जाना सही है। इसी आधार पर जेपीएससी ने मुख्य परीक्षा के बाद मेरिट लिस्ट जारी की थी। इसमें कोई गड़बड़ी नहीं है। गौरतलब है कि झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा ली गयी छठी जेपीएससी परीक्षा के रिजल्ट को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने फैसला सुनाते हुए छठी जेपीएससी की मेरिट लिस्ट रद्द करते हुए 326 अभ्यर्थियों की नियुक्ति को गलत बताया था, जिसके बाद से इस परीक्षा में सफल और असफल हुए अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लकटा हुआ नजर आ रहा है। इस फैसले के खिलाफ सफल अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट की डिविजन बेंच में अपील दायर की गयी थी, जिसे डिवीजन बेंच ने भी खारिज कर दिया है।

Published / 2022-02-23 05:47:10
बच्चा गोद लेने के लिए मैरिज सर्टिफिकेट जरूरी नहीं

एबीएन सेंट्रल डेस्क। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बच्चा गोद लेने के एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया। दरअसल, एक केस की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में कहा है कि बच्चा गोद लेने के लिए मैरिज सर्टिफिकेट का होना जरूरी नहीं है। सिंगल पैरेंट भी ले सकता है बच्चे को गोद : कोर्ट ने "हिंदू एडाप्टेशन एवं मेंटिनेंस एक्ट, 1956" का हवाला देते हुए कहा कि यहां तक कि सिंगल पैरेंट भी बच्चा गोद ले सकता है। अदालत ने यह टिप्पणी गत 9 फरवरी को ट्रांसजेंडर रीना किन्नर एवं उनके साथी की याचिका पर सुनवाई करते हुए की। अर्जी में कहा गया है कि रीना का जन्म 1983 में हुआ और उनकी शादी 16 दिसंबर 2000 को वाराणसी के अदरौली बाजार स्थित महाबीर मंदिर में हुई। याचिकाकर्ता बच्चा गोद लेना चाहते हैं लेकिन उनसे मैरिज सर्टिफिकेट दिखाने के लिए कहा गया जो कि उनके पास नहीं है।

Page 80 of 92

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

Tranding

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।

© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse