कानून व्यवस्था

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Published / 2022-04-06 08:59:18
रांची : कांके से भाजपा विधायक समरी लाल का जाति प्रमाण पत्र रद्द, विधायकी पर भी खतरा

टीम एबीएन, रांची। भारतीय जनता पार्टी के विधायक समरी लाल की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। गलत तरीके से जाति प्रमाण पत्र बनाकर चुनाव लड़ने का मामला सामने आने के बाद अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र को रद्द करने का आदेश दिया गया है। राज्य में कल्याण सचिव की अध्यक्षता में गठित जाति छानबीन समिति ने जांच के बाद समरी लाल के 31 अक्टूबर 2009 को राज्य सरकार द्वारा निर्गत अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र को रद्द करने का आदेश दिया है। डीसी ने जाति से जुड़े इस रिपोर्ट को छानबीन समिति सह विशेष सचिव अनुसूचित जाति जनजाति अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग को भेज दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक 1950 से पहले की मतदान सूची में नाम या कोई सरकारी दस्तावेज भी नहीं है, जिससे साफ होता है कि समरी लाल मुख्य रूप से राजस्थान के निवासी हैं और आजीविका चलाने के लिए यहां आकर बस गए हैं। इसलिए वर्ष 2009 में जारी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर लिया गया लाभ मान्य नहीं है क्योंकि वे इस राज्य में अनुसूचित जाति का सदस्य होने के लिए जरूरी अहर्ता को पूरा नहीं कर रहे हैं।

Published / 2022-04-03 12:35:38
भारत बायोटेक निर्मित वैक्सीन की अंतर्राष्ट्रीय सप्लाई पर रोक

एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोरोना वैक्सीन का निर्माण करने वाली कंपनी भारत बायोटेक ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर झटका लगा है। हैदराबाद की इस कंपनी की ओर निर्मित की जा रही कोवैक्सीन की सप्लाई को लेकर डब्ल्यूएचओ ने यह निर्णय लिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोवैक्सीन की अंतर्राष्ट्रीय सप्लाई पर रोक लगा दी है। वहीं इससे पहले ही कोवैक्सीन उत्पादन में अस्थाई रूप से कमी लाने की बात कही गई थी। दवा कंपनी की ओर जारी बयान में इसके लिए कुछ अहम कारणों का हवाला दिया गया। डब्ल्यूएचओ की ओर से भारत बायोटेक की सप्लाई अस्थाई तौर पर रोक दी है। हैदराबाद स्थित वैक्सीन निर्माता भारत बायोटेक ने शुक्रवार को यह घोषणा कर दी थी। जिसमें कंपनी की ओर से यह कहा गया था कि वह अपने सभी विनिर्माण संयंत्रों में कोविड वैक्सीन कोवैक्सीन के उत्पादन में अस्थायी रूप से कमी लाएगी। कंपनी की ओर से इसका कारण मांग में कमी और खरीद एजेंसियों को आपूर्ति दायित्वों को पूरा करने प्रतिबद्धता की बात कही। हालांकि कंपनी ने उत्पादन में अस्थाई रूप से कटौती करन की घोषणा की। भारत बायोटेक की ओर से कहा गया कि इस दौरान कंपनी अपनी सुविधा, रखरखाव समेत अन्य गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करेगी। भारत बायोटेक की ओर कहा गया कि चूंकि कोविड-19 के सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल को पूरा करने के लिए पिछले एक साल के दौरान निरंतर वैक्सीन के उत्पादन का कार्य किया गया। अब वैक्सीन के निर्माण के संयंत्रों और सुविधाओं की मरम्मत करने की आवश्यकता है। गत 14 मार्च से 22 मार्च तक भारत बायोटेक के प्लांट का विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का ईयूएल निरीक्षण हुआ था। जिसमें दौरान भारत बायोटेक की गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन के अधिकारियों ने दवा कंपनी को सुझाव दिए थे। कंपनी की ओर से इसमे जल्द सुधार लाने की बात कही गई थी।

Published / 2022-04-01 08:22:28
CCI ने ऐप डेवलपर्स के बिलिंग सिस्‍टम को माना भेदभावपूर्ण, बढ़ सकती है गूगल की परेशानी!

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में गूगल की परेशानियां आने वाले दिनों में बढ़ सकती हैं। कंपनी के खिलाफ भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग द्वारा की गई जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, उनके अनुसार ऐप डेवलपर्स के लिए बनाए गए बिलिंग सिस्टम के नियम न केवल अनुचित है, बल्कि ये भेदभावपूर्ण भी है। यही नहीं गूगल अनुचित तरीके से अपने पेमेंट ऐप गूगल पे को बढ़ावा दे रहा है। यह जांच आयोग के एडिशनल डायरेक्टर जनरल ने की है। गौरतलब है कि गूगल के नए नियमों के अनुसार, ऐप डेवलपर्स के लिए इन-ऐप्स की खरीदारी कंपनी के अपने बिलिंग सिस्टम से करना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे भारतीय भारतीय स्टार्ट-अप्स में काफी नाराजगी है। उनका आरोप है कि गूगल अपने प्रभुत्व का दुरुपयोग करते हुए गूगल पे के अन्य प्रतिस्पर्धी ऐप्स को गलत तरीके से दरकिनार कर रही है। ईटी पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, जांच के निष्कर्षों पर जल्द सुनवाई शुरू हो सकती है। गूगल को भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के सामने आरोपों और जांच निष्कर्षों पर जवाब देना होगा। वहीं, गूगल ने अपने नियमों को पूरी तरह सही और सभी के लिए फायदेमंद बताया है। सीसीआई 2020 और 2021 में गूगल के खिलाफ आई तीन शिकायतों की एक साथ जांच कर रही है। इनमें आरोप लगाया गया है कि गूगल प्ले स्टोर और एंड्रायड ऑपरेटिंग सिस्टम पर अपने एकाधिकार का प्रयोग कर गूगल पे को दूसरे ऐप्स पर प्राथमिकता दे रहा है। सूत्रों का कहना है कि जांच में पता चला है कि गूगल अपने कुछ ऐप्स के लिए गूगल बिलिंग पेमेंट सिस्टम का प्रयोग नहीं कर रही है। वहीं दूसरे डेवलपर्स को पेमेंट के लिए इसे उसने अनिवार्य बनाया है। इससे पता चलता है कि प्ले स्टोर की पेमेंट पॉलिसी भेदभावपूर्ण है। सूत्रों ने ईटी को बताया कि इस मामले में सीसीआई ने बहुत गहराई और पारदर्शिता से जांच की है। उसने सभी डेवलेपर्स से जानकारियां जुटाई है और सिस्टम का गहराई से अध्ययन किया है। इससे आयोग इस नतीजे पर पहुंचा है कि अगर ये नीतियां लागू की गई तो इससे डेवलपर्स को बहुत नुकसान होगा। आयोग ने गूगल के गूगल पे को बढावा देने के लिए सर्च मेनिपुलेशन किए जाने के आरोपों की भी जांच की है। सीसीआई ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को भी इस मामले को देखने का आदेश दिया है। इस पूरे मामले पर गूगल के प्रतिनिधि का कहना है कि कंपनी अभी डायरेक्टर जनरल की रिपोर्ट का अध्ययन कर रही है। यह रिपोर्ट सीसीआई का अंतिम निर्णय नहीं है। इसलिए अभी केवल रिपोर्ट के आधार पर ही निर्णय पर पहुंचना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि गूगल लगातार सीसीआई के संपर्क में रहेगा और यह बताएगा की उसकी नीतियों से भारतीय उपभोक्ता और डेवलपर्स को फायदा होगा।

Published / 2022-03-29 17:40:57
दोषियों-अपराधियों की आंखों से लेकर के पैरों के प्रिंट्स तक का रिकॉर्ड रखेगी डिजिटल कुंडली

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अब एक क्लिक पर अपराधियों की कुंडली देखी जा सकेगी। इसके लिए सोमवार को केंद्र सरकार ने लोकसभा में दंड प्रक्रिया (पहचान) विधेयक-2022 पेश किया है. जानिए इस बिल की अहम बातें... एक क्लिक पर अपराधियों की कुंडली देखी जा सकेगी। इसके लिए सोमवार को केंद्र सरकार ने लोकसभा में दंड प्रक्रिया (पहचान) विधेयक-2022 पेश किया है। बिल कहता है कि किसी भी मामले में गिरफ्तार या दोषसिद्ध अपराधियों का रिकॉर्ड रखने में अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। यह बिल कई मायनों में खास है क्योंकि अब तक आरोपियों का रिकॉर्ड रखने के लिए पुलिस फिंगरप्रिंट और पैरों के निशान लेती थी लेकिन जल्द ही आंखों की पुतलियों के प्रिंट से लेकर उनकी लिखावट तक के नमूने तक लिए जाएंगे। अपराधियों की डिजिटल कुंडली तैयार होगी। 1. केंद्र सरकार ने इस नए बिल को 102 साल पुराने मौजूदा कानून की जगह पेश किया है। अब तक पुलिस केवल अपराधियों का रिकॉर्ड रखने के लिए फिंगरप्रिंट और पैरों के निशान लेती थी, लेकिन नए बिल के जरिए इन पर शिकंजा कसा जाएगा। नए बिल के तहत अब अपराधियों की आंखों का प्रिंट लिया जाएगा। इसके अलावा हथेली और पैरों की छाप, फोटो, बायोलॉजिकल सैम्पल और लिखावट के नमूने भी लिए जाएंगे। आसान भाषा में समझें तो डिजिटली इनकी पहचान पुलिस के पास होगी। 2. बिल से एक बात साफ है कि केंद्र सरकार अपराधियों से जुड़ी हर वो जानकारी डिटिजली स्टोर करना चाहती है जो उन्हें पकड़ने और पहचानने में मदद करेगी। पूरा डाटा डिजिटल रिकॉर्ड में शामिल होने पर एक क्लिक पर अपराधियों की हर जरूरी जानकारी सामने आ जाएगी। केंद्र सरकार का मानना है अपराधियों का ज्यादा ब्यौरा सामने होने पर सजा सुनाने के काम में तेजी आएगी। 3. बिल में बताई गईं बातों का रिकॉर्ड रखते समय अगर कोई अपराधी या दोषी इंकार करता है तो सजा और जुर्माना दोनों लगाया जा सकता है। बिल के मुताबिक, जांच से मना करने पर दोषी को तीन महीने की सजा या 500 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है या फिर दोनों ही हो सकता है। 4. बिल पेश करते हुए गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी ने कहा, बिल से जांच एजेंसियों को मदद मिलेगी। वहीं, लोकसभा में इस बिल का विरोध भी किया गया। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा, यह बिल अनुच्छेद 20 और 21 का उल्लंघन है। वहीं, आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन ने कहा, अगर मेरे खिलाफ कोई मामला सामने आता है तो मेरा DNA जांचा जाएगा, इसका क्या मतलब है? 5. इस बिल को लेकर कांग्रेस, टीएमसी, आरएसपी, बीएसपी जैसे राजनीतिक दलों ने विरोध किया। उनके विरोध के बाद वोटिंग कराने की नौबत आई। विपक्ष की मांग पर हुई वोटिंग में विरोधी 58 मतों के मुकाबले पक्ष में आए 120 मतों के आधार पर सदन में इस पेश करने की मंजूरी दी गई।

Published / 2022-03-28 10:05:15
आय से अधिक संपत्ति : पेश हुए कोड़ा-भानु, नहीं पहुंचे गवाह

टीम एबीएन, रांची। आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा और पूर्व मंत्री सह भाजपा विधायक भानु प्रताप शाही, कमलेश सिंह और विनोद सिन्हा कोर्ट में उपस्थित हुए। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश प्रभात कुमार की अदालत में इस मामले में गवाही होना था लेकिन गवाहों के कोर्ट नहीं पहुंचने की वजह से गवाही नहीं हो सकी है। मुख्यमंत्री मधु कोड़ा समेत मंत्रिमंडल में शामिल कई मंत्रियों पर आय से अधिक संपत्ति (Rc5a/10) और मनी लॉन्ड्रिंग (ECIR 2/9)का मामला चल रहा है। सीबीआई की विशेष अदालत ने यह मामला गवाही के स्टेज में चल रही है। वहीं झारखंड के मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में कमलेश सिंह और भानु प्रताप शाही मंत्री थे। ईडी और सीबीआई ने आरोप लगाया है कि उन्होंने 2005 से 2009 के बीच अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध संपत्ति अर्जित की है।

Published / 2022-03-28 09:58:38
आय से अधिक संपत्ति : विधायक बंधु तिर्की को तीन साल की सजा

टीम एबीएन, रांची। आय से अधिक संपत्ति मामले में मांडर विधायक बंधु तिर्की को कोर्ट ने दोषी करार देते हुए तीन साल की सजा सुनाई है।

Published / 2022-03-27 16:02:56
खराब प्रेशर कुकर : Paytm मॉल और Snapdeal पर एक-एक लाख का जुर्माना

एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने ई-कॉमर्स कंपनी पेटीएम मॉल और स्नैपडील पर एक-एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। सीसीपीए बिना मानक वाले प्रेशर कुकर बेचने के लिए जुर्माना लगाते हुए दोनों कंपनियों से बेची गई वस्तुओं को वापस लेने के साथ-साथ उपभोक्ताओं द्वारा भुगतान की गई राशि को वापस करने का आदेश दिया है। सीसीपीए ने दो अलग-अलग आदेशों में पेटीएम ईकॉमर्स प्राइवेट लिमिटेड (पेटीएम मॉल) और स्नैपडील प्राइवेट लिमिटेड को खराब प्रेशर कुकर बेचने का दोषी पाया। उसने पाया कि यह प्रेशर कुकर भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) मानकों के अनुरूप नहीं थे और घरेलू प्रेशर कुकर (गुणवत्ता नियंत्रण) आदेश-2020 (क्यूसीओ) का अनुपालन नहीं करते थे। पेटीएम मॉल ने प्रिस्टिन और क्यूबा कंपनी के प्रेशर कुकर को अपने मंच पर बेचने के लिए डाला था, जबकि उत्पाद विवरण में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि इसमें आईएसआई मार्क नहीं है। सीसीपीए ने 25 मार्च को अपने आदेश में पेटीएम मॉल को अपने मंच पर बिकने वाले 39 प्रेशर कुकर के सभी उपभोक्ताओं को सूचित करने, प्रेशर कुकर को वापस लेने और उपभोक्ताओं को उनकी कीमत वापस देने के लिए कहा है। इसके अलावा इस संबंध में इसकी अनुपालन रिपोर्ट को 45 दिन के भीतर देने के लिए कहा गया है।

Published / 2022-03-26 17:42:36
राज्य में पुरानी पेंशन योजना जल्द : हेमंत सोरेन

टीम एबीएन, रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए जल्द ही पुरानी पेंशन योजना जल्द लागू करने का भरोसा दिलाते हुए विधायक मद की राशि चार करोड़ रुपया से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए करने की घोषणा की। सोरेन ने शुक्रवार को विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन अपने समापन संबोधन में कहा कि केंद्र सरकार की कोयला कंपनियों पर राज्य सरकार का एक लाख 36 हजार करोड़ रुपए का बकाया है। उन्होंने कहा कि बकाया राशि की जल्द वसूली की जाएगी और केंद्र सरकार की कंपनियां बकाया भुगतान नहीं करती है तो राज्य से बाहर जाने वाली खनिज संपदा को रोक दिया जाएगा, ताला लगा दिया जाएगा। स्थानीयता नीति के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खतियान का सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि जो भी कानून बनेगा वह राज्य के जनमानस और जन भावना के अनुरूप होगा। उन्होंने बताया कि 2005 में भी सर्वे का काम हुआ है जबकि इससे पहले 1911, 1918, 1932, 1934 और 1993 में भी सर्वे का काम हुआ है। इनमें से किस खतियान को छोड़ा जाए और कैसे पकड़ा जाए किस का फैसला सदन को तय करना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे हमेशा हक और अधिकार के लिए लड़ने और मर मिटने की बात करते रहे हैं ऐसे में जब मौका मिला है तो इसे हाथ से जाने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्थानीय नीति के मसले पर समग्र चिंतन की जरूरत है और राज्य के अंदर समन्वय बनाकर जन भावना के अनुरूप और वैधानिक पहलुओं को ध्यान में रखकर कोई भी फैसला लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न सर्वे का अध्ययन करने के बाद और लोगों की भावना जानने के बाद ही व्यापक सहमति बनाकर राज्य सरकार आगे बढ़ेगी।मुख्यमंत्री ने नेतरहाट की तर्ज पर राज्य में 3 नए विद्यालय की स्थापना करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि पारा शिक्षकों को अब सहायक अध्यापक का दर्जा दिया जा चुका है और अब वह सामान की जिंदगी जी सकेंगे। उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड की संख्या सात लाख से बढ़ाकर 35 लाख करने की भी बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड एक ऐसा पहला राज्य है जो 18 वर्ष की विधवा को भी पेंशन योजना का लाभ दे रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने हो, मुंडारी, उरांव, कुड़ुख भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा है। इसी तरह से सरना धर्म कोड लागू करने का भी प्रस्ताव भेजा गया लेकिन केंद्र में इसका क्या हाल हुआ यह भाजपा विधायकों को बताना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके पास कई ऐसे दस्तावेज भी है जिसमें यह पता चलता है कि पूर्ववर्ती सरकार में किस तरह से अपने लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए नियम कानून की अनदेखी की गई इन सारे विषयों की जांच चल रही है।

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