टीम एबीएन, रांची। झारखंड में पंचायत चुनाव की डुगडूगी बज चुकी है। इसके तहत पहले चरण में होने वाले चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया जारी है। इन सबके बीच इस बार के चुनाव में कई ऐसे अभ्यर्थी चुनाव मैदान में नहीं उतर पाएंगे, जिन्होंने पिछली बार हुए चुनाव में अपने खर्च का ब्यौरा नहीं दिया है। राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर निर्वाचन आयोग ने पिछले चुनाव के दौरान खर्च का ब्यौरा नहीं देने वाले सैकड़ों ऐसे अभ्यर्थी पर कार्रवाई की है। इन पर तीन वर्ष के लिए चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर दिया है। आयोग के इस निर्णय के बाद इस बार राज्य में हो रहे पंचायत चुनाव में वैसे अभ्यर्थी चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। आयोग के आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा ऐसे अभ्यर्थी पलामू जिला में चिंहित किए गए हैं, जिनकी संख्या 91 है। वहीं सबसे कम जामताड़ा का है जहां मात्र 01 अभ्यर्थी पर आयोग ने कार्रवाई करते हुए डिबार किया है। आइये जानते हैं, किस जिले में कितने हैं प्रतिबंधित : जिला- प्रतिबंधित अभ्यर्थियों की संख्या बोकारो- 22, गुमला - 37, पूर्वी सिंहभूम- 56, चतरा- 40, हजारीबाग-60, रांची- 86, देवघर- 56, खूंटी- 15, पाकुड़- 18, धनबाद- 49, जामताड़ा- 01, रामगढ़- 10, दुमका- 67, कोडरमा- 06, सिमडेगा- 10, गढ़वा- 52, लोहरदगा- 07, सरायकेला-खरसावां- 29, गोड्डा- 57, लातेहार- 31, साहिबगंज- 40, गिरीडीह- 66, पश्चिमी सिंहभूम -27, पलामू- 91. राज्य निर्वाचन आयोग के प्रावधान : त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान खर्च का ब्यौरा नहीं देने पर राज्य निर्वाचन आयोग के पास कार्रवाई करने का अधिकार है। 2020 के पंचायत चुनाव में खड़े सभी अभ्यर्थियों को इस संबंध में निर्देश दिए गए थे। चुनाव के बाद भी आयोग और स्थानीय जिला प्रशासन के द्वारा चुनाव खर्च का ब्यौरा देने को लेकर आरोपियों को नोटिस भेजे गए थे उसके बावजूद अभ्यर्थियों ने इसपर गंभीरता नहीं दिखाई। जिसपर जिला प्रशासन की अनुशंसा पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 10 क एवं पंचायती राज अधिनियम 2001 की धारा 68 क एवं 65 क के तहत ऐसे व्यक्तियों को त्रिस्तरीय पंचायत निकायों और स्थानीय नगर निकायों के किसी भी पद या स्थान के लिए चुने जाने और निर्वाचित होने के लिए आदेश की तारीख से 3 वर्ष की समय सीमा के लिए प्रतिबंध लगाई जाती है। राज्य निर्वाचन आयुक्त डीके तिवारी ने कहा है कि निर्वाचन प्रावधान के तहत आयोग ऐसे व्यक्तियों पर पूर्व से कार्रवाई करती रही है। आयोग की कार्रवाई से खलबली : राज्य निर्वाचन आयोग की इस कार्रवाई से खलबली मची हुई है। आयोग की इस कार्रवाई में वार्ड सदस्य से लेकर मुखिया और जिला परिषद सदस्य तक आ चुके हैं। रातू के जिला परिषद सदस्य आलोक उरांव का मानना है कि अभ्यर्थियों को नियम कानून का ज्ञान होना चाहिए नहीं तो कार्रवाई होगी ही। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता एसअली के अनुसार राज्य निर्वाचन आयोग को लचीला रुख अपनाते हुए अभ्यर्थी को इसके प्रति जागरूक करना चाहिए तभी इसका समाधान हो सकेगा। वहीं इस बार के चुनाव में अपने प्रत्याशी को जीताने में लगे प्रदीप कुमार महतो का कहना है कि वो इस बार जो भी दिशा-निर्देश आयोग का है उसे पूरा करेंगे। पंचायत चुनाव में खर्च का सरकारी प्रावधान : पद - खर्च का प्रावधान : सदस्य ग्राम पंचायत - 14,000, मुखिया - 85,000, सदस्य पंचायत समिति- 71,000, सदस्य जिला परिषद- 2,14,000. बहरहाल राज्य में तीसरी बार हो रहे पंचायत चुनाव में एक बार फिर बड़ी संख्या में लोग किस्मत आजमाने चुनाव मैदान में उतरने वाले हैं। ऐसे में निर्वाचन आयोग के साथ-साथ सामाजिक संगठनों की भी जिम्मेदारी बनती है कि प्रत्याशियों को चुनाव के तौर तरीकों से अवगत कराएं। निर्वाचन आयोग की ये कार्रवाई एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए अच्छा उदाहरण है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सिविल सेवा अधिकारियों की केंद्रीय प्रतिनियुक्त को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच चल रहे विवाद के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय एक और ऐसा प्रस्ताव लेकर आया है जो राज्य सरकारों के साथ उसके विवाद को बढ़ा सकता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय एक प्रस्ताव लेकर आया है जिसके तहत भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के जो अधिकारी पुलिस अधीक्षक (SP) या उप महानिदेशक (DIG) स्तर पर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर नहीं आएंगे उनकी नौकरी के बाकी सालों में केंद्रीय नियुक्ति पर रोक लगाई जा सकती है। इससे पहले केंद्र सरकार ने अखिल भारतीय सेवा नियमों में बदलाव के लिए राज्यों को एक प्रस्ताव भेजा था जिसमें केंद्र सरकार को किसी भी IAS, IPS या भारतीय वन सेवा के अधिकारी को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर बुलाने के लिए राज्य की मंजूरी की जरूरत नहीं रह जाएगी। नए प्रस्ताव में क्या : सूत्रों के अनुसार, विभिन्न केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और केंद्रीय पुलिस संगठनों में इन दोनों स्तरों पर 50 प्रतिशत से अधिक रिक्तियां हैं। वर्तमान में, नियम कहते हैं कि यदि कोई आईपीएस अधिकारी तीन साल तक केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर महानिरीक्षक (IG) स्तर तक नहीं बिताता है, तो उसे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए पैनल में नहीं रखा जाएगा। गृह मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि मौजूदा नियमों के चलते ज्यादातर आईपीएस अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आईजी स्तर पर ही आते हैं, जिससे SP और DIG स्तर पर भारी कमी हो जाती है। अधिकांश राज्य केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए SP और डीआईजी को राहत नहीं देते क्योंकि उनके पास इन स्तरों पर पर्याप्त रिक्तियां हैं। चूंकि आईजी और उससे ऊपर के स्तर पर कम पद हैं, इसलिए इन अधिकारियों को केंद्र में भेजा जाता है। आईपीएस अधिकारियों की कमी का कारण : एक रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने कहा कि तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार द्वारा अपने लागत में कटौती के उपायों के तहत नए आईपीएस बैचों के आकार को कम करने के फैसले के कारण यह हालात पैदा हुए हैं। बता दें कि, 80-90 नए अधिकारियों के बैचों को छोटा करके साल 1999-2000 में में IPS अधिकारियों के बैचों को काटकर 35-40 अधिकारियों का कर दिया गया। दूसरी ओर, हर साल औसतन लगभग 85 आईपीएस अधिकारी सेवानिवृत्त होते हैं। 2009 में 4,000 से अधिक IPS अधिकारियों की स्वीकृत संख्या के मुकाबले 1,600 से अधिक रिक्तियां थीं। इसके बाद तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार ने पहले के नियम को बहाल करके इस गलती को दूर करने की कोशिश की। इसके कारण साल 2020 में आईपीएस बैचों की संख्या बढ़कर 150 तक पहुंच गई। 1 जनवरी, 2020 तक, 4,982 की स्वीकृत संख्या के मुकाबले 908 रिक्तियां थीं। इससे पहले, बिहार जैसी एनडीए सरकारों सहित अधिकांश राज्यों ने आईएएस और आईपीएस सेवा नियमों को बदलने के केंद्र के प्रस्ताव की आलोचना करते हुए इसे संविधान के संघीय ढांचे पर हमला बताया था।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड पंचायत चुनाव के लिए मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट जारी कर दिया गया है। झारखंड पंचायत चुनाव 14 मई से शुरू चुनाव होने वाले हैं। इस बार 4 चरणों में मतदान कराए जाएंगे। पहले चरण का मतदान 14 मई को होगा। दूसरे चरण का मतदान 19 मई को होगा। वहीं तीसरे चरण का मतदान 24 मई को होगा, जबकि चौथे चरण का मतदान 27 मई को होगा। झारखंड राज्य निर्वाचन आयोग ने पूरे राज्य में चुनाव आचार संहिता लागू कर दी है। राज्य निर्वाचन आयोग ने उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों के लिए विस्तृत निर्देश जारी किया है। जानें चुनाव आयोग के निर्देश : • कोई भी उम्मीदवार या राजनैतिक दल ऐसा कोई कार्य नहीं करेगा, जिससे किसी धर्म, संप्रदाय या जाति के लोगों की भावना को ठेस पहुंचे या उनमें विद्वेष या तनाव पैदा हो। • मत प्राप्त करने के लिए धार्मिक, सांप्रदायिक, जातीय या भाषायी भावनाओं का सहारा नहीं लिया जाना चाहिए। • कोई भी उम्मीदवार या राजनैतिक दल ऐसा कोई कार्य नहीं करेगा, जिससे किसी धर्म, संप्रदाय या जाति के लोगों की भावना को ठेस पहुंचे या उनमें विद्वेष या तनाव पैदा हो। • मत प्राप्त करने के लिए धार्मिक, सांप्रदायिक, जातीय या भाषायी भावनाओं का सहारा नहीं लिया जाना चाहिए। • पूजा या उपासना के किसी स्थल जैसे कि मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर, गुरुद्वारा आदि का उपयोग निर्वाचन प्रचार के लिए नहीं किया जाना चाहिए। • किसी प्रत्याशी के व्यक्तिगत जीवन के ऐसे पहलुओं की आलोचना नहीं की जानी चाहिए जिनका संबंध उसके सार्वजनिक जीवन या क्रियाकलापों से हो। न ही ऐसे आरोप लगाए जाने चाहिए जिनकी सत्यता स्थापित न हुई हो। • किसी प्रत्याशी की आलोचना उसकी नीति और कार्यक्रम पूर्व इतिहास एवं कार्य तक ही सीमित रहनी चाहिए. उसका एवं उसके कार्यकर्ताओं की आलोचना असत्यापित आरोपों पर आधारित नहीं की जानी चाहिए। • हर व्यक्ति के शांतिपूर्ण घरेलू जीवन के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए, चाहे उसके विचार कैसे भी क्यों न हों। • किसी व्यक्ति के कार्याें या विचारों का विरोध करने के लिए प्रत्याशी द्वारा ऐसे व्यक्ति के घर के सामने धरना, नारेबाजी, प्रदर्शन का तरीका अपनाना गलत होगा। • प्रत्याशी को ऐसे सभी कार्यों से परहेज करना चाहिए जो निर्वाचन कानून के अंतर्गत अपराध हो। निर्वाचन क्षेत्र में मतदान की समाप्ति के लिए नियत किए गए समय से 48 घंटे पूर्व तक की अवधि के दौरान कोई भी व्यक्ति न तो सार्वजनिक सभा बुलाएगा, न ही आयोजित करेगा और न ही उसमें उपस्थित होगा। • मतदाताओं को रिश्वत या किसी प्रकार का इनाम देना भी अपराध माना जाएगा। • मतदान केंद्र के 100 मीटर के अंदर किसी प्रकार का चुनाव प्रचार करना, क्षमा याचना करना। मतदाताओं को मतदान केंद्र तक लाने या ले जाने के लिए वाहनों का उपयोग करना, मतदान केंद्र में या उसके आसपास विश्रृंखल आचरण करना या मतदान अधिकारियों के कार्य में बाधा डालना या उनसे अभद्र व्यवहार करना दंडनीय माना जाएगा। • मतदाताओं का प्रतिरूपण करना अर्थात गलत नाम से मतदान करने या कराने का प्रयास करना भी प्रतिबंधित रहेगा। • मतदान के दो दिन पूर्व से लेकर मतदान के दिन तथा उसके अगले दिन सुबह सात बजे तक किसी उम्मीदवार द्वारा न तो शराब खरीदी जाए और न ही उसे किसी को पेश किया जाए। • किसी भी उम्मीदवार द्वारा किसी भी व्यक्ति की भूमि, भवन, अहाते या दीवार का उपयोग झंडा, बैनर आदि लगाने का कार्य भवन मालिक की लिखित अनुमति के बगैर नहीं किया जाना चाहिए। समर्थकों एवं कार्यकर्ताओं को भी ऐसा नहीं करने देना चाहिए। • भवन, अहाते या दीवार पर चुनाव प्रचार हेतु नारे लिखना, चुनाव चिह्न पेंट करना या पोस्टर चिपकाने का कार्य मकान मालिक की लिखित सहमति लेने बाद भी नहीं किया जा सकेगा। कोई भी अभ्यर्थी या उसका समर्थक किसी सार्वजनिक स्थल, भवन, दीवार, खंभे, वृक्ष आदि पर किसी भी प्रकार का झंडा, बैनर, पोस्टर नहीं लगाएगा। • चुनाव संबंधी प्रचार-प्रसार, नारे, चिह्न आदि नहीं लिखेगा. यदि इस प्रकार का कोई मामला प्रकाश में आता है, तो निर्वाची पदाधिकारी द्वारा उस अभ्यर्थी के विरुद्ध विधि सम्मत त्वरित कार्रवाई की जाएगी। किसी भी उम्मीदवार द्वारा उसके पक्ष में लगाये गये झंडे या पोस्टर दूसरे उम्मीदवार के कार्यकर्ताओं द्वारा नहीं हटाये जाने चाहिए। • मतदाताओं को दी जाने वाली पहचान पर्चियां सादे कागज पर होनी चाहिए और उनमें उम्मीदवार का नाम या चुनाव चिह्न अंकित नहीं होना चाहिए। • पर्ची में मतदाता का नाम, उसके पिता या पति का नाम, वार्ड क्रमांक, मतदान केंद्र क्रमांक तथा मतदाता सूची में उसके क्रमांक के अलावा और कुछ नहीं लिखा होना चाहिए। • मतदान शांतिपूर्ण तथा सुचारू रूप से सम्पन्न कराने में निर्वाचन ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग किया जाना चाहिए। • मतदान केंद्र/ मतगणना केंद्र पर प्राधिकृत अभिकर्ता को बिना बैज या पहचान पत्र के प्रवेश हेतु अनुमति नहीं दिया जाना चाहिए। • सरकारी/ अर्द्धसरकारी परिसदनों, विश्रामगृहों, डाक बंगलों या अन्य आवासों का उपयोग चुनाव कार्य के लिए किसी भी उम्मीदवार या उसके समर्थक द्वारा नहीं किया जाएगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में बच्चों और युवाओं में बढ़ते ऑनलाइन गेमिंग के क्रेज और इसमें दांव पर लगने वाली भारी रकम को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार अब सतर्क हो गई है। सरकार को इस बात डर सता रहा है कि ऑनलाइन गेमिंग का इस्तेमाल काले धन को सफेद बनाने में किया जा सकता है। साथ ही गेमिंग के जरिए कमाई जाने वाली राशि का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए भी हो सकता है। इन्हीं सभी बातों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ऑनलाइन गेमिंग और इससे जुड़ी गतिविधियों को धन शोधन निरोधक कानून (पीएमएलए) की जद में ला सकती है। अगर गेमिंग कंपनियां धन शोधन निरोधक कानून के दायरे में आती हैं तो उन्हें खेलने वालों से पहले नो योर कस्टमर (केवाईसी) जमा करने के लिए बाध्य करना होगा। इसके बाद ही लोग आसानी से गेम खेल सकेंगे। गेमिंग में दांव लगाने वालों का पहचान पत्र उपलब्ध नहीं इंडिया मोबाइल गेमिंग रिपोर्ट 2021 के अनुसार, भारत के टॉप-30 छोटे शहरों में 2020 की तुलना में ऑनलाइन गेम खेलने वाले लोगों की तादाद में 170 फीसदी तेजी आई है। कुछ छोटे शहरों में तो ऐसे लोगों की संख्या में 100 से 200 फीसदी तक का इजाफा हुआ है। आनलाइन गेमिंग मामलों के जानकारों का कहना है कि दरअसल सरकार को गेमिंग कंपनियों को पीएमएलए के दायरे में लाने की जरूरत तब महसूस हुई, जब जांच एजेंसियां रकम के आदान-प्रदान का पता नहीं लगा सकीं। क्योंकि इसकी एक ही वजह थी कि जो ग्राहक ऑनलाइन गेमिंग में दांव लगा रहे थे, उनके बारे में जानकारी और उनके आधिकारिक पहचान पत्र उपलब्ध ही नहीं थे। इन गेमिंग ऐप्लिकेशन के जरिए लाखों रुपये की रकम की हेराफेरी हुई है मगर इसमें लिप्त लोगों की जानकारी गेमिंग कंपनियों के पास नहीं थी। केवाईसी अनिवार्य करने के अलावा गेमिंग ऐप को पीएमएलए में लाने का एक मतलब यह भी होगा कि इन कंपनियों को अलग से एक निदेशक और एक मुख्य अधिकारी की नियुक्ति करनी होगी। पीएमएलए के तहत गेमिंग कंपनियों को रिपोर्टिंग इकाई (आरई) का दर्जा दिए जाने से इन इकाइयों को रकम भेजने वालों और पाने वालों की जानकारी एवं अन्य संबंधित विवरण वित्तीय खुफिया इकाई (एफआईयू) को देना होगा। इसके अलावा गेमिंग कंपनियों को 50,000 रुपये से अधिक के प्रत्येक लेनदेन की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए भी कहा जा सकता है। इस मामले में वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि गेमिंग कंपनियों को नियंत्रित करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है, जो चिंता की बात है। वैसे तो गेमिंग कंपनियां कंपनी मामलों के मंत्रालय में पंजीकृत हैं मगर इनमें विदेशी निवेश पर कोई रोक नहीं है। विश्वस्त सूत्रों ने कहा कि इनमें कुछ कंपनियां माल्टा में पंजीकृत हैं। वित्तीय उपाय कार्य बल (एफएटीएफ) ने माल्टा को उन देशों में शुमार किया है, जहाँ वित्तीय नियमन दुरुस्त नहीं हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो माल्टा एफएटीएफ की ग्रे सूची में आता है।
टीम एबीएन, रांची। चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने झारखंड सरकार और इस मामले से जुड़े सभी स्टेकहॉल्डरों को जांच में सीबीआई को सहयोग करने का निर्देश दिया है। राष्ट्रीय खेल के आयोजन के दौरान मेगा स्पोर्ट्स कांपलेक्स और खेल सामग्री की खरीद में 28.34 करोड़ का घोटाला किए जाने की शिकायत को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में कई जनहित याचिकाएं दायर की गयी थीं। इस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह निर्देश दिया। मामले में एसीबी ने झारखंड ओलंपिक संघ के अध्यक्ष आरके आनंद, पूर्व मंत्री बंधु तिर्की, तत्कालीन खेल निदेशक पीसी मिश्र समेत झारखंड ओलंपिक संघ के कई सदस्यों को आरोपी बनाते हुए प्राथमिकी दर्ज की है। अदालत ने राज्य सरकार को सीबीआई को सभी संसाधन और मामले से जुड़ी सभी फाइल उपलब्ध कराने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य सरकार की ओर से कमी की जाती है तथा किसी पक्ष द्वारा सहयोग नहीं किया जाए या बाधा पहुंचायी जाए, तो सीबीआई इसकी जानकारी हाईकोर्ट को दे। अदालत इस पर आदेश पास करेगी। अदालत ने सीबीआई को इस बात की भी जांच करने का निर्देश दिया है कि एसीबी के किन अधिकारियों के चलते जांच में देरी हुई है। 12 साल में भी जांच पूरी नहीं कर सकी एसीबी : एसीबी इस मामले की जांच 12 साल में भी पूरा नहीं कर सकी। सुनवाई के दौरान अदालत को प्रार्थियों की ओर खेल उपकरण खरीदारी और मेगा स्पोर्ट्स कांप्लेक्स बनाने में हुए घोटाले का मुद्दा उठाया गया। अदालत को बताया कि मामले में एसीबी भेदभाव कर रहा है। इस मामले में कई वरीय पुलिस अधिकारी भी शामिल है, लेकिन उनके खिलाफ अभी तक कोई जांच नहीं की गई है। इनके खिलाफ पुलिस जांच कर भी नहीं सकती है, इसलिए इस मामले को सीबीआई को सौंप जाना चाहिए। घोटाले में दूसरे राज्य के लोग भी शामिल हैं। इस दौरान महाधिवक्ता की ओर से कहा गया कि मामले में पांच चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। अन्य आरोपियों को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया गया है। जल्द ही इस मामले की जांच पूरी कर ली जाएगी। एसीबी ने इन्हें बनाया है मुख्य आरोपी : झारखंड ओलंपिक संघ के अध्यक्ष और राष्ट्रीय खेल आयोजन समिति के अध्यक्ष आरके आनंद, कोषाध्यक्ष मधुकांत पाठक, निदेशक पीसी मिश्रा, महासचिव एसएम हासमी एचएल दास और सुविमल मुखोपाध्याय। खेल घोटाले में एसीबी ने आरके आनंद, बंधु तिर्की, पीसी मिश्रा, एसएम हाशमी पर लगे आरोप एसीबी जांच में सही पाए गए और सरकार की सहमति पर इनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया जा चुका है। फिलहाल इस मामले की सुनवाई एसीबी कोर्ट में चल रही है। कुछ दिन पहले ही झारखंड हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द करने के आरके आनंद की अर्जी को खारिज भी कर दिया था।
टीम एबीएन, रांची। राजधानी में रामनवमी जुलूस को लेकर ट्रैफिक रूट प्लान जारी कर दिया गया है। 9, 10 और 11 अप्रैल के लिए रांची का रूट डायवर्ट किया गया है। शनिवार को दोपहर 2 बजे से ही शहर में बड़े वाहनों की एंट्री बंद हो जाएगी, जबकि रांची के अपर बाजार इलाके में किसी भी तरह के वाहनों की एंट्री बंद रहेगी। रांची में रामनवमी जुलूस 10 अप्रैल को निकलेगा, इसे देखते हुए 10 अप्रैल को जुलूस के दौरान मेन रोड में सभी प्रकार के वाहनों की नो एंट्री होगी। यह व्यवस्था रामनवमी जुलूस की समाप्ति तक होगी। भारी वाहनों के लिए रिंग रोड को वैकल्पिक मार्ग बनाया गया है। वहीं, सामान्य वाहन शहर के हरमू बायपास रोड होते हुए अरगोड़ा के रास्ते आपात के लिए रूट निर्धारित की गई है। इसी रूट से आपात की स्थिति वाले वाहन बैरिकेडिंग से बचने के लिए आवागमन कर सकेंगे। इसी तरह बहु बाजार, कांटाटोली वाली रूट और बरियातू रोड का इस्तेमाल किया जा सकेगा। रांची ट्रैफिक पुलिस की ओर से रूट चार्ट भी जारी कर दी गई है। 9 अप्रैल की दोपहर 2 बजे से 10 अप्रैल की सुबह 6 बजे तक शहर में भारी वाहनों की नो एंट्री होगी। 9 अप्रैल की दोपहर 2 बजे से लेकर 10 अप्रैल की सुबह 4 बजे तक नागाबाबा खटाल, जाकिर हुसैन पार्क, किशोरी यादव चौक, शहीद चौक, सुभाष चौक, ग्वाला टोली, श्रद्धानंद रोड, गांधी चौक, रातू रोड गोलचक्कर से अपर बाजार महावीर चौक की ओर जाने वाले सभी प्रकार के रिक्शा छोटे बड़े दोपहिया या चार पहिया वाहनों का प्रवेश पूरी तरह बंद रहेगा। 10 अप्रैल की सुबह 8 बजे से 11 अप्रैल सुबह 4 बजे तक भारी वाहनों की नो एंट्री होगी। 10 अप्रैल दिन के 11 बजे से लेकर 11 अप्रैल कि सुबह 4 बजे तक अपर बाजार, महावीर चौक की ओर से आनेवाले सभी प्रकार के रिक्शा, छोटे-बड़े दोपहिया व चार पहिया वाहन का प्रवेश नागाबाबा खटाल, जाकिर हुसैन पार्क, किशोरी यादव चौक, शहीद चौक, सुभाष चौक, ग्वाला टोली, श्रद्धानंद रोड, गांधी चौक, रातू रोड गोलचक्कर की ओर से प्रवेश वर्जित रहेगा। बदले गए कई रूट : • पिस्का मोड़ होकर हजारीबाग रोड जाने वाले सभी बड़े वाहन तिलता चौक से रिंग रोड लॉ यूनिवर्सिटी होकर हजारीबाग रोड की ओर जाएगी। इसी तरह हजारीबाग रोड से लातेहार, पलामू, गढ़वा, इटकी रोड, सिमडेगा गुमला, लोहरदगा रोड, पिस्कामोड़ जाने वाले वाहन रिंग रोड लॉ यूनिवर्सिटी तिलता चौक की ओर जा सकेंगे। • खूंटी की ओर से आने वाले सभी बड़े वाहन रिंग रोड होते हुए रामपुर, नामकुम, दुर्गा सोरेन चौक, खेलगांव, बूटी मोड़ होते हुए हजारीबाग की ओर जा सकेंगे। उसी मार्ग से हजारीबाग रोड से खूंटी की ओर जाएंगे। • टाटा रोड से हजारीबाग रोड जाने वाले सभी बड़े वाहन नामकुम, दुर्गा सोरेन चौक, टाटीसिल्वे, खेलगांव, बूटी मोड़ होकर हजारीबाग रोड की ओर जा सकेंगे। इसी प्रकार हजारीबाग रोड से जमशेदपुर जाने वाले सभी बड़े वाहन खेलगांव, टाटी सिल्वे, दुर्गा सोरेन चौक, नामकुम होकर जा सकेंगे। • गुमला रोड, लोहरदगा रोड, खूंटी रोड से जमशेदपुर जाने वाले वाहन एवं जमशेदपुर रोड से गुमला रोड, लोहरदगा रोड, खूंटी रोड जाने वाले वाहन रिंग रोड सीठियो होकर आवागमन कर सकेंगे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ऑस्कर 2022 में विल स्मिथ की थप्पड़ की घटना के कुछ दिनों बाद, एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर्स आर्ट्स एंड साइंसेज के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने शुक्रवार (08 अप्रैल) को द परस्यूट ऑफ हैप्पीनेस स्टार विल स्मिथ को 10 सालों के लिए बैन कर दिया है। एकेडमी के अध्यक्ष डेविड रुबिन ने कहा कि इस साल के ऑस्कर समारोह के दौरान मंच पर क्रिस रॉक को थप्पड़ मारने के कारण विल को अगले 10 सालों तक एकेडमी के किसी भी कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस निर्णय को बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की सहमति से लिया गया है। डेविड ने कहा कि इस घटना के बाद विल को हॉलीवुड के डॉल्बी थिएटर में बैठने की अनुमति देने और उन्हें पुरस्कार देने के बाद एकेडमी आलोचना के घेरे में आ गई थी। ऑस्कर सेरेमनी के दौरान घटी इस घटना के बाद स्मिथ लगातार सोशल मीडिया पर आलोचना का शिकार बन रहे थे। हालांकि, बाद में अपने भाषण में विल रो पड़े थे और मंच पर क्रिस को थप्पड़ मारने के लिए सभी से माफी मांगी थी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। डिजिटल फ्रॉड के बढ़ते मामलों के बीच आरबीआई ने इसे रोकने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब लोगों को बिना डेबिट कार्ड डाले एटीएम से पैसा निकालने की सुविधा मिलेगी। ये सुविधा सभी बैंकों में दी जाएगी। रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने इस बात की पुष्टि की है। अभी तक केवल कुछ ही बैंकों में बिना कार्ड के रुपए निकालने की सुविधा थी। ये सुविधा वढक के माध्यम से पूरी होगी, जिसमें कार्ड की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इसका सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि ठग कार्ड का क्लोन नहीं बना पाएंगे और इस तरह से होने वाले फ्रॉड के मामले खत्म हो जाएंगे। इस बारे में फइक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने भी बात की और कहा कि इससे ट्रांजेक्शन्स काफी सेफ हो जाएंगी। ये बात भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक में फइक गवर्नर शक्तिकांत दास ने कही। अभी सभी एटीएम पर कार्डलेस निकलेगा कैश : आरबीआई गवर्नर ने कहा, वर्तमान में एटीएम के जरिए कार्डलेस नकद निकासी की सुविधा केवल कुछ बैंकों तक ही सीमित है। अब यूपीआई का उपयोग करते हुए सभी बैंकों और एटीएम नेटवर्क पर कार्डलेस नकद निकासी की सुविधा उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा, लेनदेन में आसानी के अलावा ये भी फायदा होगा कि ऐसे लेनदेन के लिए फिजिकल कार्ड की आवश्यकता नहीं होगी और कार्ड स्किमिंग और कार्ड क्लोनिंग आदि धोखाधड़ी को रोकने में मदद मिलेगी।
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