कानून व्यवस्था

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Published / 2022-05-07 04:08:04
सीएम हेमंत सोरेन के खनन पट्टा मामले पर हाई कोर्ट में अगले सप्ताह हो सकती है सुनवाई

टीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर मुख्यमंत्री रहते हुए खनन पट्टा लेने के आरोप में दायर जनहित याचिका पर झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकी। झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डॉ रवि रंजन और न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत नहीं बैठने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। पूर्व में हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत में खनन पट्टा अपने नाम लेने के मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री और खनन विभाग के भी मंत्री हेमंत सोरेन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए साथ ही साथ खनन मंत्री होते हुए खनन पट्टा अपने नाम करने को लेकर याचिकाकर्ता शिव शंकर शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उस याचिका पर झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डॉ रवि रंजन और न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत में सुनवाई हुई थी। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के उपरांत मुख्यमंत्री को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने को कहा था। अदालत ने इस मामले की विस्तृत बिंदुवार अद्यतन जानकारी अदालत में पेश करने को कहा था। अब देखना होगा कि उनकी तरफ से क्या कुछ जवाब आया है अदालत अब इस जवाब को देखने के उपरांत क्या कुछ आदेश देता है। बता दें कि कि कुछ दिनों पहले सीएम हेमंत सोरेन के नाम पत्थर खदान का पट्टा एलॉट होने का मामला सामने आया था। इस मामले में हाइकोर्ट में पीआइएल दाखिल हुआ था। कोर्ट ने इस मामले पर महाधिवक्ता से भी जवाब तलब करने का आदेश दिया है। मालूम हो कि झारखंड हाइकोर्ट में सीएम हेमंत सोरेन के किलाफ 11 फरवरी को जनहित याचिका दायर की गयी थी। प्रार्थी शिव शंकर शर्मा की ओर से अधिवक्ता राजीव कुमार ने पीआइएल दाखिल किया था। प्रार्थी की ओर से इस जनहित याचिका में कहा गया था कि हेमंत सोरेन खनन मंत्री, मुख्यमंत्री औऱ वन पर्यावरण विभाग के विभागीय मंत्री भी हैं। उन्होंने स्वंय पर्यावरण क्लीयरेंस के लिए आवेदन दिया था और खनन पट्टा हासिल किया है। ऐसा करना पद का दुरुपयोग है और जन प्रतिनिधि अधिनियम का उल्लंघन है। इसलिए इस पूरे मामले की सीबीआइ से जांच करायी जाये। साथ ही प्रार्थी ने हेमंत सोरेन की सदस्यता रद्द करने की मांग भी कोर्ट से की थी। प्रार्थी ने हाइकोर्ट से मांग की थी कि अदालत राज्यपाल को यह निर्देश दे कि वह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेने के खिलाफ प्राथमिकी के लिए अभियोजन स्वीकृति प्रदान करें।

Published / 2022-05-06 09:02:19
पीएम पर टिप्पणी में राहुल गांधी को राहत नहीं, सुनवाई टली

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जातिसूचक आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को झारखंड उच्च न्यायालय से बृहस्पतिवार को भी राहत नहीं मिल सकी। समयाभाव के कारण इस मामले में सुनवाई नहीं हो सकी। यह मामला बृहस्पतिवार को न्यायमूर्ति एसके द्विवेदी की अदालत में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था। लेकिन समय की कमी के चलते मामले में सुनवाई नहीं हो सकी। अब इस मामले में 11 जून को सुनवाई होगी। यद्यपि राहुल गांधी को इस मामले में पहले से मिली अंतरिम राहत फिलहाल बरकरार रहेगी। बता दें कि इस मामले में निचली अदालत की ओर से जारी समन के खिलाफ कांग्रेस नेता ने झारखंड उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की है जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दाखिल इस मामले को खारिज करने की अपील की है।

Published / 2022-05-04 13:28:15
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका खारिज, नहीं रुकेगा पंचायत चुनाव

टीम एबीएन, रांची। झारखंड पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण की मांग को लेकर दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद झारखंड में पंचायत चुनाव अब अपने निर्धारित समय पर ही होगा। झारखंड में चार चरणों में हो रहे त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में वोटिंग इसी महीने होना है। ऐसे में कोर्ट के इस आदेश से राज्य सरकार को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट में तीन जजों की बेंच ने पूरे मामले की सुनवाई की। झारखंड पंचायत चुनाव में ओबीसी को आरक्षण को लेकर सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी की ओर से उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर किया गया था। याचिका में कहा गया था कि झारखंड में चार चरणों में पंचायत चुनाव हो रहे हैं लेकिन ओबीसी को आरक्षण नहीं दिया गया है। पंचायत चुनाव में आरक्षण न देकर राज्य के ओबीसी के साथ हेमंत सोरेन सरकार अन्याय कर रही है। इस मामले में दायर याचिका पर 25 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी। तब तीन जजों की बेंच ने विस्तृत सुनवाई के लिए 4 मई की तारीख तय कर दी थी। इससे पहले जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस अभय एस ओका की अदालत ने इस मामले को सुना। तब अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका को तीन जजों के बेंच में स्थानांतरित कर दिया था। अदालत में क्या हुआ : झारखंड हाईकोर्ट के महाधिवक्ता राजीव रंजन ने जानकारी देते हुए बताया कि अदालत ने मामले में सभी पक्षों को सुनने के उपरांत पंचायत चुनाव मामले में दायर याचिका को खारिज कर दिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आदेश सुनाते हुए कहा कि झारखंड में चुनाव स्टार्ट हो गया। ऐसे में फिलहाल बिना आरक्षण के पंचायत चुनाव कराया जाएगा। इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को अगले पंचायत चुनाव से पहले ओबीसी आरक्षण को लेकर जरूरी प्रावधान पूरे कर लेने का निर्देश दिया। बता दें कि झारखंड विधानसभा में सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा था कि ट्रिपल टेस्ट कराकर ओबीसी को आरक्षण देने में परेशानी हो रही है। इसलिए फिलहाल बिना आरक्षण के पंचायत चुनाव कराया जा रहा है।

Published / 2022-05-02 13:57:59
कोविड टीकाकरण के लिए किसी को मजबूर नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट

एबीएन सेंट्रल डेस्क। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि किसी भी व्यक्ति को कोविड-19 रोधी टीकाकरण के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है और न्यायालय ने केंद्र से इस तरह के टीकाकरण के प्रतिकूल प्रभाव के आंकड़ों को सार्वजनिक करने के लिए कहा है। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत शारीरिक स्वायत्तता और अखंडता की रक्षा की जाती है। शीर्ष अदालत ने कहा कि वर्तमान कोविड-19 वैक्सीन नीति को स्पष्ट रूप से मनमाना और अनुचित नहीं कहा जा सकता है। पीठ ने कहा, संख्या कम होने तक, हम सुझाव देते हैं कि संबंधित आदेशों का पालन किया जाए और टीकाकरण नहीं करवाने वाले व्यक्तियों के सार्वजनिक स्थानों में जाने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जाए। यदि पहले से ही कोई प्रतिबंध लागू हो तो उसे हटाया जाए। पीठ ने यह भी कहा कि टीका परीक्षण आंकड़ों को अलग करने के संबंध में, व्यक्तियों की गोपनीयता के अधीन, किए गए सभी परीक्षण और बाद में आयोजित किए जाने वाले सभी परीक्षणों के आंकड़े अविलंब जनता को उपलब्ध कराए जाने चाहिए। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को व्यक्तियों के निजी आंकड़ों से समझौता किए बिना सार्वजनिक रूप से सुलभ प्रणाली पर जनता और डॉक्टरों पर टीकों के प्रतिकूल प्रभावों के मामलों की रिपोर्ट प्रकाशित करने को भी कहा। अदालत ने जैकब पुलियेल द्वारा दायर एक याचिका पर फैसला सुनाया जिसमें कोविड-19 टीकों और टीकाकरण के बाद के मामलों के नैदानिक परीक्षणों पर आंकड़ों के प्रकटीकरण के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी।

Published / 2022-04-30 13:01:23
अभिनेत्री फर्नांडीस की सात करोड़ की संपत्ति ईडी ने की जब्त

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने काले धन को वैध बनाने के मामले में बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीस की सात करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की। सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी। ईडी ने पिछले साल दिसंबर में अभिनेत्री फर्नांडीस को ठगी के आरोपी सुकेश चंद्रशेखर मामले की जांच में तलब किया था, जिसमें उन्होंने अपना बयान दर्ज कराया था। सूत्रों ने कहा कि ईडी ने अनुमान लगाया कि अभिनेत्री को सुकेश चंद्रशेखर से करोड़ों रुपये का गिफ्ट मिला था। उनके परिवार वालों को भी उससे कुछ रुपए मिले थे। इससे पहले ईडी ने सुकेश चंद्रशेखर को मनी लाॅन्ड्रिंग अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया था। वह कथित तौर पर जेल में रहकर ही रंगदारी का धंधा चला रहा था और उसके ऊपर एक प्रमोटर की पत्नी से 200 करोड़ रुपये की वसूली करने का आरोप है।

Published / 2022-04-25 09:24:43
हनुमान चालीसा विवाद : नवनीत राणा ने बॉम्बे हाईकोर्ट में डाली याचिका, FIR रद्द करने की मांग

एबीएन सेंट्रल डेस्क। महाराष्ट्र में हनुमान चालीसा को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। सीएम उद्धव ठाकरे के घर के बाहर हनुमान चालीसा पढ़ने के ऐलान के बाद मुंबई पुलिस ने सांसद नवनीत राणा और उनके पति रवि राणा को गिरफ्तार किया था। दोनों पर धार्मिक सद्भाव बिगाड़ने का आरोप लगा है। निचली अदालत ने उनको जमानत देने से इनकार कर दिया, साथ ही 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा। अब वो इस मामले को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट गई हैं। सोमवार दोपहर 2.30 बजे न्यायमूर्ति वराले की पीठ इस मामले में सुनवाई करेगी। दरअसल, राणा दंपति के खिलाफ धारा 153 ए (धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास, भाषा, आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना और सद्भाव बनाए रखने के लिए प्रतिकूल कार्य करना), धारा 34, धारा 37 (1) और धारा 135 के तहत मामला दर्ज किया गया है। निचली अदालत के आदेश के बाद रविवार देर रात नवनीत राणा को भायखला महिला जेल ले जाया गया, जबकि रवि राणा को मुंबई के तलोजा जेल में भेजा गया है। वहीं जब से राणा दंपति ने मातोश्री के बाहर हनुमान चालीसा पढ़ने का ऐलान किया है, तब से वो शिवसैनिकों के निशाने पर हैं। जब नवनीत राणा अपने मुंबई स्थित आवास पहुंची तो शिवसैनिकों ने उसे घेर लिया और जमकर बवाल हुआ। इसके अलावा सीएम के घर के बाहर भी बड़ी संख्या में शिवसैनिक डटे रहे, ताकि राणा दंपति के आने पर उनका विरोध किया जा सके। इसको देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नवनीत राणा को Y श्रेणी की सुरक्षा दे दी थी। अब उनके साथ 11 सुरक्षाकर्मी रहेंगे, जिसमें दो कमांडो भी शामिल हैं।

Published / 2022-04-22 10:28:43
मुश्किल में सीएम हेमन्त... हाईकोर्ट ने ईडी से मांगा संपत्ति का ब्यौरा

टीम एबीएन, रांची। आय से अधिक संपत्ति मामले में झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन और उनके भाई बसंत सोरेन की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है। झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत ने इनसे संबंधित लोगों द्वारा 300 से ज्यादा कंपनी बनाकर अवैध कमाई निवेश करने के मामले में सुनवाई करते हुए रजिस्टार आफ कंपनी को प्रतिवादी बनाया है। वहीं दो सप्ताह में रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा है। आय से अधिक संपत्ति की जांच की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने ईडी और रजिस्ट्रार ऑफ़ कंपनी को नोटिस जारी किया और दो सप्ताह में सभी कम्पनियों की जांच कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिका में जितनी भी कम्पनियों की जानकारी दी गई है उनकी जानकारी कोर्ट ने मांगी है। अदालत ने इनसे संबंधित लोगों द्वारा 400 से ज्यादा कंपनी बनाकर अवैध कमाई निवेश करने के मामले में सुनवाई करते हुए रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी को प्रतिवादी बनाया है। याचिकाकर्ता शिवशंकर शर्मा ने झारखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर झारखंड, बिहार और बंगाल समेत अन्य राज्यों में चलाई जा रही सेल कम्पनियों की जांच सीबीआई और ईडी से करवाने की मांग की है। जिसमें हेमंत सोरेन उनके भाई बसंत सोरेन की कमाई निवेश करने का आरोप है। इसी पर अदालत ने रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी को प्रतिवादी बनाते हुए इन कंपनियों का जांच करने का निर्देश दिया है। अब कोर्ट के निर्देशों के बाद ईडी इन्हीं कंपनियों की जांच करेगी। वहीं दूसरी ओर आज सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की तरफ से एडीशनल एडवोकेट जनरल ने कोलकाता से ऑनलाइन अपना पक्ष रखा। उन्होंने तमाम आरोपों को बेबुनियाद बताया।

Published / 2022-04-22 07:27:57
चारा घोटाला : झारखंड हाईकोर्ट से लालू को मिली जमानत

टीम एबीएन, रांची। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव को झारखंड हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। उन्हें चारा घोटाले से जुड़े डोरंडा कोषागार से अवैध निकासी से संबंधित मामले में जमानत दी गई है। लालू को इस मामले में 21 फरवरी को सीबीआई की विशेष अदालत ने पांच साल की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट के जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की अदालत ने लालू प्रसाद की जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। लालू प्रसाद को जुर्माने के तौर पर दस लाख रुपये जमा करने होंगे। लालू प्रसाद को चारा घोटाले के डोरंडा कोषागार से अवैध निकासी के मामले में सीबीआई कोर्ट ने पांच साल की सजा और 60 लाख का जुर्मना लगाया था। इसके साथ ही अब लालू को चारा घोटाले के सभी मामलों में अब जमानत मिल गई है। पूर्व मुख्यमंत्री पर चारा घोटाले के पांच मामले दर्ज थे और सभी में सजा मिली है। सजा के खिलाफ लालू प्रसाद ने हाईकोर्ट में अपील के साथ जमानत याचिका दायर की थी। आधी सजा काटने और स्वास्थ्य कारणों से लालू प्रसाद ने जमानत मांगी थी। लालू प्रसाद फिलहाल बीमार हैं और दिल्ली के एम्स में उनका इलाज चल रहा है।

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