टीम एबीएन, रांची। झारखंड उच्च न्यायालय ने यहां एक निचली अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ दाखिल मानहानि के मुकदमे में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए इस संबन्ध में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष की याचिका खारिज कर दी। अब गांधी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं और उन्हें इस मामले में अब रांची की निचली अदालत में पेश होना पड़ सकता है। न्यायमूर्ति एस के द्विवेदी की पीठ ने यहां निचली अदालत में दाखिल मानहानि के वाद को खारिज करने की गांधी की याचिका को खारिज कर उन्हें वहां पेश होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए। उच्च न्यायालय के इस आदेश से गांधी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उच्च न्यायालय ने गांधी और प्रतिवादी पक्ष के वकीलों की लंबी बहस के बाद अपना फैसला सुनाया। न्यायालय ने एक स्थानीय अदालत से जारी समन को चुनौती देने वाली गांधी की याचिका को खारिज कर दिया। पीठ ने कहा कि प्रार्थी अपनी बात निचली अदालत में सुनवाई के दौरान रखें। गांधी ने निचली अदालत से जारी समन को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान मोरहाबादी मैदान में जनसभा में कहा था कि सभी मोदी नाम वाले चोर होते हैं। उनके इस बयान के बाद अधिवक्ता प्रदीप मोदी ने उनके खिलाफ एक स्थानीय अदालत में एक शिकायतवाद दर्ज कराई। उसमें कहा गया कि गांधी ने मोदी नामधारियों के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दिया है जिससे मोदी समाज की भावना आहत हुई है। याचिका में गांधी के खिलाफ अदालत से कानूनी कार्रवाई करने का आग्रह किया गया था। इस शिकायत पर अदालत ने गांधी को 22 फरवरी 2019 को अदालत में हाजिर होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया था। लेकिन निचली अदालत में पेश होने की बजाय इस समन के खिलाफ गांधी ने उच्च न्यायालय में रिट दाखिल कर पूरे मामले को ही खारिज करने की मांग की थी लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। जीवाजी विश्वविद्यालय प्रबंधन ने स्वच्छता की ओर एक कदम बढ़ाते हुए विश्वविद्यालय को स्वच्छ बनाने की पहल की है। इसके तहत जीवाजी विश्वविद्यालय प्रशासनिक बिल्डिंग में लगाए गए कैमरे के आधार पर एक कर्मचारी पर गुटका खाकर थूकने पर जुर्माने की कार्रवाई तय की गई है और भविष्य में चेतावनी दी है कि अगर इस तरह की हरकत दोबारा की गई तो निलंबन की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। गुटका थूकने पर लगेगा जुर्माना : दरअसल जीवाजी विश्वविद्यालय परिसर में निगरानी के लिए लगे सीसीटीवी कैमरे में एक कर्मचारी गुटखा खाकर बार-बार थूकता हुआ नजर आया था। जिस पर जेयू प्रबंधन ने कड़ा एक्शन लिया है। कर्मचारी को चुनकर उस पर 500 रूपये का जुर्माना लगाया गया है और भविष्य में अगर वह फिर से गलती दोहराता है तो उसका निलंबन भी हो सकता है। परिसर को स्वच्छ बनाए रखने की अपील : यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सभी विश्वविद्यालय परिसर में स्वच्छता बनाए रखने की अपील की है और ऐसा नहीं करने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी दी हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी यानी सीसीपीए (CCPA) ने एक राहत भरी घोषणा की है। सीसीपीए ने रेस्टोरेंट और होटलों में सर्विस चार्ज को लेकर नई गाइडलाइंस जारी की है। अब आपके बिल में सर्विस चार्ज लगकर नहीं आएगा। गाइडलाइंस के मुताबिक अब से कोई भी रेस्टोरेंट और होटल अपने ग्राहकों को सेवा देने के बदले जबरन सर्विस चार्ज नहीं वसूल सकते हैं। सर्विस चार्ज देना या ना देना ग्राहक पर निर्भर : गाइडलाइंस के मुताबिक, सर्विस चार्ज देना या ना देना ग्राहक पर निर्भर करेगा, रेस्टोरेंट इसके लिए किसी भी तरीके से ग्राहकों को बाध्य नहीं कर सकता है। रेस्टोरेंट और होटलों को ग्राहकों को स्पष्ट रूप से बताना होगा कि सर्विस चार्ज वैकल्पिक, स्वैच्छिक और ग्राहक के विवेक पर है। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1915 पर दर्ज करा सकते हैं शिकायत : आदेश के मुताबिक, होटल और रेस्टोरेंट के बिल में सर्विस उपभोक्ताओं से किसी अन्य नाम से नहीं लिया जा सकता और न ही इसे भोजन बिल में जोड़ा जा सकता है। सीसीपीए के आदेश के मुताबिक, अगर कोई रेस्टोरेंट अपने बिल में सर्विस चार्ज लगाता है, तो ग्राहक राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1915 पर रेस्टोरेंट शिकायत दर्ज करा सकते हैं। फ्रेमवर्क लाएगा DoCA उपभोक्ता मामलों के विभाग यानी डीओसीए (DoCA) ने पहले कहा था कि यह जल्द ही रेस्टोरेंट और होटलों द्वारा लगाए गए सर्विस चार्ज के संबंध में स्टेकहोल्डर्स द्वारा सख्त कंप्लायंस को लागू करने के लिए एक मजबूत फ्रेमवर्क विकसित करेगा क्योंकि यह नियमित रूप से ग्राहकों को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। रेस्टोरेंट द्वारा लिया जाने वाला सर्विस चार्ज पूरी तरह से कानूनी : रेस्टोरेंट एसोसिएशन मिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया यानी एनआरएआई (NRAI) ने यह साफ किया है कि रेस्टोरेंट द्वारा लिया जाने वाला सर्विस चार्ज पूरी तरह से कानूनी है और उपभोक्ता मामलों के विभाग ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि नए फ्रेमवर्क को अपनाया जाए या नहीं।
टीम एबीएन, रांची। निलंबित आईएएस पूजा सिंघल की जमानत याचिका पर ईडी की विशेष अदालत में सोमवार (4 जुलाई) को आंशिक सुनवाई हुई, जिसमें पूजा सिंघल की जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए 12 जुलाई की तारीख दी गई है। पूजा सिंघल के वकील ने सोमवार को अपना पक्ष रखा, जिस पर बहस के लिए कोर्ट ने नई तिथि निर्धारित की है। खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर दायर की है जमानत अर्जी : मनी लॉन्ड्रिंग मामले के आरोप में जेल में बंद निलंबित आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल ने जमानत याचिका दाखिल की है। उन्होंने पीएमएलए कोर्ट के जज प्रभात कुमार शर्मा की अदालत में अपने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए जमानत याचिका दाखिल की है। प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने छापेमारी के बाद आईएएस अफसर पूजा सिंघल को 11 मई को गिरफ्तार किया था। 14 दिनों की पूछताछ के बाद 25 मई को बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा होटवार भेज दिया गया था, तब से पूजा सिंघल जेल में बंद है। उनके अधिवक्ता विश्वजीत मुखर्जी ने जमानत याचिका दाखिल की है। उनके न्यायिक हिरासत की अवधि 5 जुलाई को समाप्त हो रही है। बता दें कि ईडी की टीम ने पूजा सिंघल के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। इस दौरान उनके सीए सुमन कुमार के घर से करोड़ों रुपए जब्त हुए थे। इसके बाद कई दिनों तक पूजा सिंघल से पूछताछ के बाद उन्हें ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर लिया था। फिलहाल, इस मामले में उनके सीए सुमन कुमार भी होटवार जेल में बंद है। मालूम हो कि मनरेगा से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की टीम कई बिल्डर के ठिकानों पर भी छापेमारी कर चुकी है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड पुलिस ने नक्सलियों के खिलाफ अपने अभियान को तेज कर दिया है। इसी कड़ी में चतरा जिले की प्रतापपुर थाना पुलिस ने भाकपा माओवादी के दुर्दांत उग्रवादी गौतम पासवान उर्फ सुरेश उर्फ अर्जुन के पैतृक घर प्रतापपुर थाना क्षेत्र के सोनवर्षा गांव में इश्तेहार चस्पा कर न्यायालय में हाजिर होने की बात कही है। यदि इसके बाद भी वह न्यायालय में हाजिर नहीं होगा तो न्यायालय के आदेश पर पुलिस उसके घर की संपत्ति कुर्क करेगी। कई बड़ी घटनाओं में नामजद बता दें कि गौतम लंबे समय से संगठन में सक्रिय है। सोनवर्षा गांव निवासी नागेश्वर पासवान के पुत्र गौतम पासवान वर्तमान समय में भाकपा माओवादी में स्पेशल रीजनल कमेटी का सदस्य है। झारखंड सरकार ने उसके ऊपर 25 लाख का इनाम घोषित कर रखा है। गौतम के खिलाफ झारखंड एवं बिहार के विभिन्न जिलों में पुलिस मुठभेड़, हत्या और अपहरण के पांच दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं। 21 फरवरी 2002 को सदर थाना क्षेत्र की संघरी घाटी में पुलिस बल पर हमला कर वशिष्ठ नगर थाना के तत्कालीन प्रभारी सहित कई पुलिस कर्मियों को बलिदान करने, छह अक्टूबर 2006 को कुंदा थाना क्षेत्र की बनियाडीह पहाड़ी पर तत्कालीन डीएसपी सहित एक दर्जन पुलिस कर्मियों की बलिदान तथा इस प्रकार की कई बड़ी घटनाओं में वह नामजद है।
टीम एबीएन, रांची। ईडी राज्य में मनरेगा घोटाले के केस में इसी हफ्ते चार्जशीट दायर करेगी। जांच एजेंसी ने इसकी तैयारी पूरी कर ली है। कहा जा रहा है कि चार या पांच जुलाई को ईडी आरोप पत्र दाखिल करेगी। इसमें निलंबित खनन सचिव पूजा सिंघल, सीए सुमन सिंह, पूजा के पति अभिषेक झा व कई डीएमओ पर भी आरोप पत्र दाखिल होगा। सूत्रों के मुताबिक, 2009-11 के बीच मनरेगा घोटाले से अर्जित पैसों की मनी लॉन्ड्रिंग हुई। बाद में सरकारी पद पर रहते हुए पूजा सिंघल ने डीएमओ की मिलीभगत से भी मनी लॉन्ड्रिंग की। जांच में डीएमओ से पैसे लेने की बात का खुलासा हुआ है। जानकारी के मुताबिक, घोटाले से अर्जित पैसों के जरिए पल्स डायग्नोसिस सेंटर व पल्स अस्पताल का निर्माण हुआ। इसके लिए अवैध तरीके से अर्जित संपत्ति की मनी लॉन्ड्रिंग की गई। जांच में इससे संबंधित तथ्य भी ईडी को मिले हैं, ऐसे में ईडी अभिषेक झा पर भी चार्जशीट कर सकती है। राज्य सरकार ने खूंटी में मनरेगा घोटाले में दर्ज केस की एसीबी से जांच का फैसला लिया है। 011 में भी मनरेगा घोटाले से जुड़े केस एसीबी में ट्रांसफर किए जाने का फैसला सरकार ने लिया था, लेकिन तब इस मामले की जांच नहीं हो पाई थी। ईडी की टीम खूंटी में दर्ज कांड के आधार पर ही मनी लॉन्ड्रिंग की कार्रवाई कर रही है। खूंटी के केस में जांच हुई तो पूजा सिंघल की परेशानी बढ़ सकती है। ईडी ने जांच में यह पाया है कि मनरेगा घोटाले के दौरान पूजा सिंघल के बैंक खाते में उनकी आय के सभी स्रोतों से 1.43 करोड़ की राशि अधिक थी। रिमांड के दौरान पूजा से ईडी ने इस संबंध में पूछताछ की थी, लेकिन उन्होंने इस आय के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी एजेंसी को नहीं दी थी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। झारखंड उच्च न्यायालय में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एवं उनके करीबियों से जुड़े शेल कंपनी और माइनिंग लीज मामले में सुनवाई हुई। अदालत ने अब इस मामले में अगली सुनवाई 5 जुलाई मंगलवार को निर्धारित की है। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डॉ रविरंजन और न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत में गुरुवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से सुप्रीम कोर्ट की वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और राज्य सरकार की ओर से कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा, जबकि ईडी की ओर से प्रशांत पल्लव और प्रार्थी शिवशंकर शर्मा की ओर से राजीव रंजन ने कोर्ट में पक्ष रखा। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता की ओर से कोर्ट में शेल कंपनी का कई ब्यौरा दिया गया, जिसमें करोड़ों रुपए की लेन-देन का जिक्र करते हुए शेल कंपनी में सीएम हेमंत सोरेन, विधायक बसंत सोरेन, अभिषेक पिंटू, पंकज मिश्रा और रवि केजरीवाल की ओर से निवेश का दावा किया गया। शेल कंपनी मामले की सुनवाई के दौरान किसी अन्य याचिका का जिक्र करने पर अधिवक्ता राजीव कुमार ने खेद किया। राजीव कुमार ने बताया कि डीसी गढ़वा ने अपनी सास के नाम पर माइनिंग लीज ली थी, हालांकि बाद में उसे वापस ले लिया गया था, इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट की ओर से यह मौखिक टिप्पणी की गई कि पिंटू और पंकज का नाम कई बार सुना है। इससे पहले मनरेगा में वित्तीय गड़बड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़े पीआईएल पर सुनवाई के दौरान ईडी ने झारखंड हाईकोर्ट में एक सीलबंद लिफाफा पेश किया था। ईडी की दलील थी कि उसके पास शेल कंपनी से जुड़े कई अहम साक्ष्य हाथ लगे हैं, लिहाजा, मुख्यमंत्री से जुड़े खनन पट्टा और शेल कंपनी से जुड़े पीआईएल को भी एक साथ सुना जाना चाहिए। ईडी के स्टैंड को वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने दोनों केस के मेंटेनेबिलिटी पर सुनवाई के लिए झारखंड हाईकोर्ट को आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में खनन लीज से जुड़े पीआईएल संख्या 727 और शेल कंपनी से जुड़े पीआईएल संख्या 4290 को मेंटेनेबल बताया है। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद दोनों केस के मेरिट पर सुनवाई का रास्ता साफ हो गया था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। उच्चतम न्यायालय ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पूर्व नेता नूपुर शर्मा को पैगंबर मोहम्मद पर विवादित टिप्पणी के मामले में शुक्रवार को कड़ी फटकार लगाई और कहा कि इसके लिए उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए। न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की अवकाशकालीन पीठ ने इन सख्त टिप्पणियों के साथ सुश्री शर्मा की उस याचिका को खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने देशभर में अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकियोंं को दिल्ली स्थानांतरित करने की गुहार लगाई थी। न्यायमूर्ति सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली इस पीठ ने कहा कि एक टीवी कार्यक्रम के दौरान पैगंबर मोहम्मद पर की गई टिप्पणियों से कई राज्यों में भड़के दंगे और हिंसक घटनाओं के लिए उन्हें (नूपुर शर्मा) को देश से माफी मांगनी चाहिए। पीठ ने सख्त टिप्पणियां करते हुए कहा, हमने बहस देखी है। बहस के दौरान किस तरीके से देशभर को भड़काने वाली टिप्पणियां की गई थीं। इसके लिए सिर्फ वह महिला जिम्मेदार हैं। एक वकील होने के नाते जिस तरह से भड़काया गया, वह और भी अधिक शर्मनाक है। उन्हें पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए। शीर्ष अदालत इस दौरान दिल्ली पुलिस पर भी तल्ख टिप्पणी की। पीठ ने दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि उनकी (नूपुर शर्मा) शिकायत पर एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, लेकिन कई प्राथमिकियां दर्ज होने के बावजूद उनके (नूपुर) खिलाफ अभी तक दिल्ली पुलिस ने ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की। पीठ ने निचली अदालत में विचाराधीन उत्तर प्रदेश के ज्ञानवापी मस्जिद विवाद पर चर्चा कराने के लिए संबंधित टेलीविजन चैनल के प्रति भी नाराजगी व्यक्त की। इसी कार्यक्रम चर्चा में भाग लेने वालों में सुश्री शर्मा शामिल थीं। शीर्ष अदालत की सख्त रुख के बाद याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस लेने की गुजारिश की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर ली।
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