एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने महाराष्ट्र के सोलापुर स्थित द लक्ष्मी को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड का लाइसेंस रद्द कर दिया है। बैंक के पूंजी कमी और आमदनी की संभावनाएं नहीं होने के मद्देनजर केंद्रीय बैंक ने यह कदम उठाया है। आरबीआई ने बयान में कहा कि को-ऑपरेटिव बैंक द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम (डीआईसीजीसी) से 99 प्रतिशत से अधिक जमाकर्ता अपनी जमा की पूरी राशि प्राप्त करने के हकदार हैं। इसमें कहा गया है कि डीआईसीजीसी ने 13 सितंबर, 2022 तक कुल बीमित जमा राशि का 193.68 करोड़ रुपये पहले ही भुगतान कर दिया है। आरबीआई ने बैंक के पास पर्याप्त पूंजी और कमाई की संभावनाएं नहीं हैं। केंद्रीय बैंक ने कहा कि लक्ष्मी को-ऑपरेटिव बैंक बृहस्पतिवार (22 सितंबर, 2022) को कारोबार की समाप्ति से बैंकिंग कारोबार बंद कर देगा। रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि बैंक अपनी मौजूदा वित्तीय स्थिति में जमाकर्ताओं की पूरी राशि का भुगतान करने में समर्थ नहीं है।
एबीएन सेंट्रल सरकार ने दूरसंचार क्षेत्र को और सहूलियत देने के लिए बुधवार को इंडियन टेलीकम्युनिकेशंस बिल 2022 जारी कर दिया है। इसमें टेलीकॉम सेवाओं को और किफायती बनाने और कंपनियों को राहत देने के लिए कई नये नियम शामिल किये गये हैं। दूरसंचार विभाग (डॉट) ने बताया कि नए बिल के तहत दूरसंचार और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को फीस और पेनॉल्टी में छूट दिये जाने का प्रावधान है। इसके अलावा अगर टेलीकॉम या इंटरनेट प्रोवाइडर अपना लाइसेंस सरेंडर करता है तो उसे फीस रिफंड कर दी जायेगी। केंद्रीय दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ड्राफ्ट बिल का लिंक शेयर करते हुए पूछा कि इस पर लोगों के सुझाव चाहिए और 20 अक्तूबर तक बिल पर पब्लिक अपना सुझाव दे सकती है। इसके बाद इसे अंतिम रूप दिया जायेगा। बिल के रूप में तैयार मसौदे के अनुसार, केंद्र सरकार दूरसंचार और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को फीस में पूरी तरह या आंशिक रूप से छूट दे सकती है। इसमें एंट्री फीस, लाइसेंस फीस, रजिस्ट्रेशन फीस सहित अन्य दूसरी तरह की फीस व चार्जेज शामिल होंगे। इसके अलावा ब्याज, अतिरिक्त चार्ज और पेनॉल्टी पर भी लाइसेंस धारकों और रजिस्टर्ड संस्थाओं को छूट दी जा सकती है। बिल में केंद्र या राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त संवाददाताओं के भारत में प्रकाशित होने वाले प्रेस संदेशों को इंटरसेप्शन से छूट देने का भी प्रस्ताव है। बिल के रूप में तैयार मसौदे के अनुसार, केंद्र सरकार दूरसंचार और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को फीस में पूरी तरह या आंशिक रूप से छूट दे सकती है। इसमें एंट्री फीस, लाइसेंस फीस, रजिस्ट्रेशन फीस सहित अन्य दूसरी तरह की फीस व चार्जेज शामिल होंगे। इसके अलावा ब्याज, अतिरिक्त चार्ज और पेनॉल्टी पर भी लाइसेंस धारकों और रजिस्टर्ड संस्थाओं को छूट दी जा सकती है। बिल में केंद्र या राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त संवाददाताओं के भारत में प्रकाशित होने वाले प्रेस संदेशों को इंटरसेप्शन से छूट देने का भी प्रस्ताव है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड (सेबी) की अध्यक्ष माधवी पुरी बुच ने बुधवार को कहा कि व्यवसाय करने का कोई भी ऐसा तरीका जो ब्लैक बॉक्स पर आधारित है और जिसका न तो लेखा परीक्षण किया जा सकता है और न ही सत्यापन किया जा सके, उसकी इजाजत नहीं दी जायेगी। उन्होंने यह भी कहा कि डेटा सार्वजनिक अवसंरचना है और इसे अपने अधिकार में लेने का किसी भी निजी इकाई या व्यक्ति का प्रयास बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। ब्लैक बॉक्स एक उपकरण या प्रणाली है, जो अपने आतंरिक कामकाज के बारे में कोई खुलासा किए बिना उपयोगी जानकारी देता है। इसके निष्कर्षों के लिए कोई स्पष्टीकरण नहीं रहता है। बुच ने ग्लोबल फिनटेक फेस्ट को संबोधित करते हुए कहा, हम एल्गो (एल्गोरिदम) ट्रेडिंग के समर्थन में या विरोध में नहीं हैं, बशर्ते पर्याप्त पारदर्शिता और खुलासे हों। कारोबारी मॉडल ब्लैक बॉक्स पर आधारित नहीं हो सकते हैं...इसलिए ऐसा कोई भी दावा जिसका लेखा परीक्षण या सत्यापन नहीं हो सके उसकी इजाजत नहीं दी जायेगी। ऐसी खबरें आई थी कि बाजार नियामक एल्गो ट्रेडिंग के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। इस महीने की शुरुआत में पूंजी बाजार नियामक सेबी ने निवेशकों को एल्गो ट्रेडिंग से संबंधित सेवाएं देने वाले ब्रोकरों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे। इस पहल का उद्देश्य उच्च रिटर्न का दावा कर शेयर बिक्री पर रोक लगाना है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने पाया कि कुछ शेयर ब्रोकर नियमन के दायरे से बाहर मंचों के जरिये एल्गोरिदम (एल्गो) आधारित कारोबार की सुविधा निवेशकों को दे रहे हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। आईआरसीटी घोटाले को लेकर बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सीबीआई ने तेजस्वी यादव की जमानत को रद्द करने के लिए दिल्ली की अदालत में एक अर्जी लगाई है। इसके बाद कोर्ट ने तेजस्वी यादव को नोटिस भी जारी कर दिया है। इस अर्जी के बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने तेजस्वी को समन किया है। सीबीआई का कहना है कि, तेजस्वी ने कथित रूप से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीबीआई के अधिकारियों को धमकी दी थी। तेजस्वी यादव की जमानत रद्द की जाए क्योंकि उन्होंने जमानत का शर्तों का उल्लंघन किया है।
टीम एबीएन, रांची। वकील राजीव कुमार अब मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा होटवार में रहेंगे। इससे पूर्व वह 31 जुलाई से कोलकाता के प्रेसीडेंसी सुधार गृह में बंद थे। कैश कांड में जमानत की सुविधा मिलने के बाद शुक्रवार को राजीव कुमार को ईडी कोर्ट में सशरीर पेश किया गया। अदालत ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में लेते हुए 30 सिंतबर तक के लिए बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा होटवार भेज दिया है। अब उक्त मामले में अगली पेशी 30 सितंबर को होगी। बता दें कि कोलकाता पुलिस के एआरएस विभाग ने हैरिसन स्ट्रीट में अवस्थित व्यावसायिक परिसर से बीते 31 जुलाई की रात को 50 लाख नकद के साथ राजीव को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के 18 वें दिन ईडी ने राजीव कुमार के खिलाफ मनी लाउंड्रिंग का केस किया था।
टीम एबीएन, रांची। मनी लाउंड्रिंग के आरोप में बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा होटवार में बंद निलंबित आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल को बुधवार को ईडी कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किया गया। उनके साथ जेल में बंद सीए सुमन कुमार एवं बर्खास्त जूनियर इंजीनियर राम बिनोद प्रसाद सिन्हा को भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किया गया। तीनों की न्यायिक हिरासत अवधि 28 सितंबर तक बढ़ा दी गई है। तीनों की पेशी अब अदालत में 28 सितंबर को होगी। पूजा 11 मई से जेल में है। जबकि राम बिनोद प्रसाद सिन्हा को ईडी ने कोलकाता से 17 जून 2020 को गिरफ्तार किया था। तब से जेल में है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। जम्मू कश्मीर में हुए उप-निरीक्षकों (एसआई) भर्ती घोटाले के मामले में जांच तेज कर दी गई है। इस घोटाले की जांच को लेकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई भी मंगलवार को एक्शन में दिख रही है। सीबीआई की ओर से मंगलवार को देश के कई शहरों में 33 जगहों पर छापेमारी की जा रही है। जिन शहरों में छापेमारी हो रही है, उनमें जम्मू, श्रीनगर, गाजियाबाद, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, दिल्ली, गांधीनगर, बेंगलुरु, शामिल हैं। जम्मू कश्मीर एसएसबी के पूर्व चेयरमैन खालिद जहांगीर और परीक्षा नियंत्रक अशोक कुमार के ठिकानों पर भी छापेमारी की जा रही है। इसके साथ ही जम्मू कश्मीर पुलिस और सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स के अफसरों के ठिकानों पर भी छापे मारे जा रहे है। बता दें कि इसी साल 22 जुलाई को जम्मू कश्मीर सर्विसेज सेलेक्शन बोर्ड ने पुलिस के उप निरीक्षकों के पद के लिए आयोजित हो रही लिखित परीक्षा को रद्द कर दिया था। 4 जून को घोषित हुए थे नतीजे : जम्मू कश्मीर शासन की ओर से पहले ही इस भर्ती घोटाले को लेकर सीबीआई जांच का आदेश दिया जा चुका था। जेकेएसएसबी ने जम्मू कश्मीर के विभिन्न स्थानों पर 27 मार्च, 2022 को 2022 के लिए जम्मू कश्मीर पुलिस के एसआई पदों के लिए परीक्षा आयोजित की थी। यह परीक्षा ओएमआर आधारित थी। इसका रिजल्ट 4 जून, 2022 को घोषित किया गया था। अनियमितताओं का लगा था आरोप : इस परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप लगने के बाद जम्मू कश्मीर सरकार ने एक कमेटी गठित कर मामले की आंतरिक जांच कराई। जांच के दौरान पाया गया कि परीक्षा आयोजित करने में अनेक अनियमितता बरती गई थी। साथ ही आपराधिक षडयंत्र के जरिए अनेक परीक्षार्थियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई थी। ये परीक्षा 1200 पदों पर भर्ती के लिए रखी गई थी। सीबीआई में अगस्त में भी इस मामले में रेड की थी। सीबीआई ने इस मामले में जम्मू कश्मीर सेवा चयन बोर्ड के सदस्य समेत कुल 33 लोगों पर विभिन्न आपराधिक धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ज्ञानवापी मस्जिद और श्रृंगार गौरी का मामला सुनवाई सुनने योग्य है कि नहीं इस पर फैसला सुनाते हुए वाराणसी जिला अदालत के जज डॉ अजय कृष्ण विश्वेश ने हिंदू पक्ष में फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस मामले में जिला अदालत में नियमित सुनवाई शुरू हुई थी। सिविल जज रवि दिवाकर के सर्वे के आदेश के बाद मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। ज्ञानवापी मस्जिद अंजुमन इंतजामिया कमेटी की याचिका 7 रूल 11 को खारिज करते हुए जिला जज ने हिंदू पक्ष के दावे को सही ठहराया और कहा कि यह वाद सुनवाई योग्य है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 22 सितम्बर को होगी। जिला जज के फैसले के बाद अब इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होगी। फैसले के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने कहा कि जिला अदालत ने मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाते हुए मुस्लिम पक्ष की याचिका 7 रूल 11 को खारिज कर दिया। यह एक बड़ी जीत है। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने यह माना है कि मामला सुनवाई योग्य है और इस मामले में 1991 का वर्शिप एक्ट लागू नहीं होता। अब इस मामले में 22 सितंबर को अगली सुनवाई होगी। विष्णु जैन ने कहा कि इस मामले से जुड़ी पूरी लीगल टीम आज ही काशी विश्वनाथ के दर्शन भी करने जायेगी। धर फैसले के बाद भाजपा की तरफ से भी प्रतिक्रिया आई है। प्रदेश भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि अदालत का फैसला स्वागत योग्य है। अभी तो पूजा के अधिकार को लेकर यह लड़ाई थी। अभी यह लड़ाई लंबी चलेगी। उन्होंने साथ ही लोगों से शांति भी बनाये रखने की अपील की। राकेश त्रिपाठी ने कहा कि 1991 वर्शिप एक्ट का भाजपा हमेशा से ही विरोध करती रही है। अब कोर्ट का फैसला आ गया है। सभी को शांति और सौहार्द बनाये रखने की जरूरत है।
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