टीम एबीएन, रांची। झारखंड की निलंबित आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल को झारखंड उच्च न्यायालय ने बड़ा झटका दिया। उच्च न्यायालय ने पूजा सिंघल की ओर से उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें स्वास्थ्य को आधार मानकर उन्हें जमानत देने की अर्जी दी गई थी। झारखंड उच्च न्यायालय कोर्ट के न्यायाधीश संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने पूजा सिंघल की याचिका की सुनवाई करते हुए उन्हें जमानत देने से साफ इनकार कर दिया। पूजा सिंघल की ओर से दायर जमानत के लिए स्वास्थ्य का मुख्य आधार बताते हुए कोर्ट को बताया गया था कि उनकी तबीयत खराब रह रही है इस वजह से उन्हें जमानत दी जाए। तबीयत खराब रहने की वजह से रिम्स के पेइंग वार्ड में इलाजरत हैं। झारखंड उच्च न्यायालय कोर्ट के अधिवक्ता धीरज कुमार ने बताया कि पिछले 4 महीनों से जेल में बंद निलंबित आईएएस अधिकारी की ओर से जमानत के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। वहीं याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी ने सभी पक्षों को सुनते हुए पूजा सिंघल की जमानत से जुड़ी याचिका को खारिज कर दिया। पूजा सिंघल को रांची स्थित ईडी ने 11 मई को गिरफ्तार किया था। इसके बाद से वह जेल में बंद है। गिरफ्तार होने के बाद से पूजा सिंघल के वकील ने ईडी कोर्ट में जमानत के लिए याचिका दायर की थी, जिसे ईडी कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके बाद पूजा सिंघल की ओर से झारखंड उच्च न्यायालय में जमानत याचिका दायर की गई थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जहां एक ओर ईडी ने खनिज लीज घोटाला मामले में समन भेजा है। वहीं, आज शुक्रवार सुबह इनकम टैक्स ने कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव और बेरमो से कांग्रेस विधायक कुमार जय मंगल उर्फ अनूप सिंह के घर पर छापेमारी कर दी है। बताया जा रहा है कि विधायक कुमार जयमंगल सिंह के बेरमो के ढोरी स्टाफ क्वार्टर आवास पर लगभग 30-35 के संख्या में इनकम टैक्स के अधिकारी पहुंचे हैं। वहीं विधायक प्रदीप यादव के रांची और गोड्डा स्थित आवास पर रेड मारी गई है। साथ ही पश्चिम बंगाल और झारखंड में कई जगहों पर आर्मी से जुड़े लैंड स्कैम के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने सर्च आॅपरेशन शुरू कर दिया है। इसमें 12 से ज्यादा जगहों पर छापेमारी की गई है। यह छापेमारी 4.50 एकड़ जमीन और रांची में कुछ फ्लैट की खरीद फरोख्त को लेकर की गई है। आरोप है कि ये जमीन और फ्लैट गलत तरीके से आगे बेचे गये थे। बता दें कि ये रेड पश्चिम बंगाल के 2 कारोबारी अमित अग्रवाल और अनुज अगवाल के यहां हो रही है। बेरमो के कोल व्यवसायी अजय सिंह के आवास पर भी आयकर विभाग के अधिकारियों ने छापेमारी की है। जानकारी के अनुसार आयकर विभाग के अधिकारी सुबह लगभग 7:30 बजे बेरमो से कांग्रेस विधायक कुमार जयमंगल सिंह के आवास पर पहुंचे थे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। श्रमजीवी एक्सप्रेस में अश्लील हरकत करने वाले यात्री पर चारबाग रेलवे स्टेशन स्थित न्यायालय की ओर से एक वर्ष का सश्रम कारावास व जुर्माना लगाया गया है। मामला आठ अक्तूबर, 2013 का है। पीड़िता श्रमजीवी एक्सप्रेस से नई दिल्ली से लखनऊ आ रही थी। उसकी बोगी में बैठे अभियुक्त रामप्रताप शाही ने उसके साथ अश्लील हरकत की। पीड़िता ने उसे ऐसा करने से मना भी किया। ट्रेन जब चारबाग रेलवे स्टेशन पहुंची तो पीड़िता ने अपने पिता को फोन कर पूरी जानकारी दी। इसके बाद पिता ने जीआरपी चारबाग में अभियुक्त के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। जीआरपी ने मामले में कार्रवाई करते हुए अभियुक्त को स्टेशन पर ही गिरफ्तार कर लिया और प्रकरण में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। न्यायालय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट उत्तर रेलवे के न्यायाधीश रणविजय सिंह ने रामप्रताप शाही को एक वर्ष की सश्रम कारावास व तीन हजार रुपये जुर्माने की सजा दी। मामले में अभियोजन अधिकारी विकास सिंह व सुनयना त्रिपाठी तथा कोर्ट पैरोकार हेड कांस्टेबल जितेंद्र गौतम रहे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। दुनिया में बड़े डिजिटल प्लेटफार्म वाली दिग्गज अमेरिकी कंपनी गूगल पर एक हफ्ते के भीतर दो बार बड़ा जुमार्ना लगाकर भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने चेताया है कि आॅनलाइन प्लेटफॉर्म भारत में मनमाने तरीके से काम नहीं कर सकते। साथ ही यह भी कि उसे भारतीय हितों की अनदेखी की इजाजत नहीं दी जा सकती। उम्मीद की जानी चाहिए कि दो चरणों में दो हजार दो सौ करोड़ के भारी-भरकम जुर्माने के बाद कंपनी के निरंकुश व्यवहार में कमी आयेगी। प्रतिस्पर्धा आयोग ने अनुचित तौर-तरीके अपनाने के प्रति गूगल को चेताया भी है। दरअसल, गूगल अपने एप डाउनलोड करने वाले प्ले स्टोर के वर्चस्व का लाभ उठाकर तमाम एप डेवेलपर्स पर दबाव डालती रही है कि वे अपने एप से संबंधित सभी भुगतान गूगल के भुगतान प्लेटफॉर्म के जरिये ही करें। इसको लेकर प्रतिस्पर्धा आयोग ने चेतावनी दी है कि एप डेवेलपर्स को अपने पेमेंट प्लेटफॉर्म का ही प्रयोग करने को बाध्य न करे। दरअसल, इससे पहले सीसीआई ने एंड्रॉयड मामले में अपने वर्चस्व का दुरुपयोग करने का आरोप गूगल पर लगाया था। आरोप था कि गूगल स्मार्टफोन निर्माताओं को बाध्य करती रही है कि वे प्रत्येक फोन में गूगल एप्स को अनिवार्य रूप से शामिल करें, तभी उन्हें एंड्रॉयड तकनीक के प्रयोग की इजाजत मिलेगी। गूगल की इस हरकत को सीसीआई ने बाजार में स्वतंत्र प्रतिस्पर्धा कानून का अतिक्रमण बताया है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी प्रतिस्पर्धा आयोग गूगल पर अन्य मामलों में सीमाएं लांघने पर जुमार्ना लगा चुका है। दरअसल, पूरी दुनिया में गूगल अपने वर्चस्व के चलते अनैतिक कारोबार का सहारा ले रहा है। यही वजह है कि यूरोपीय यूनियन, आस्ट्रेलिया तथा दक्षिण कोरिया समेत कई देश गूगल पर जुमार्ना लगा चुके हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गूगल के वर्चस्व को तोड़ने के लिये दुनिया के तमाम देश विकल्प तलाशने की जुगत में लगे हैं। भारत में प्रतिस्पर्धा आयोग अन्य मामलों में भी गूगल की अनियमितताओं की निगरानी कर रहा है। विगत में भी विदेशों व भारत में मीडिया संस्थान नियमों का उल्लंघन करके समाचारों से मुनाफा कमाने के आरोप गूगल पर लगते रहे हैं। बाकायदा आस्ट्रेलिया और यूरोपीय देशों ने इस बाबत जुर्माना भी वसूला है। बहरहाल, सीसीआई द्वारा गूगल पर लगाया गया जुर्माना साफ संदेश है कि वह अनुचित व्यावसायिक परिपाटियों से परहेज करे। भारत में हालिया जुमार्ने उसे अमेरिकी तकनीकी दिग्गज एंड्रॉइड मोबाइल डिवाइस को लेकर अपने दबदबे का दुरुपयोग व एप डेवेलपर्स को भारत में तीसरे पक्ष की बिलिंग भुगतान सेवाओं को बाधित न करने के निर्देश के रूप में लगाये गये हैं। इस कार्रवाई के बाद गूगल प्रबंधन बचाव की मुद्रा में है और दलील दे रहा है कि वह इन सेवाओं के उपयोगकर्ताओं तथा डेवेलपर्स को बेहतर सेवाएं देने के लिये प्रतिबद्ध है। साथ ही यह कि उसने भारतीय मॉडल में कम लागत रखते हुए डिजिटल मुहिम में योगदान दिया है। सीसीआई की कार्रवाई का मकसद यही है कि डिजिटल डोमेन में स्वस्थ स्पर्धा का विकास हो। साथ ही बड़े खिलाड़ियों को इस बाजार में एकाधिकार करने से रोका जा सके। निस्संदेह, भारत में गूगल के लिये बड़ा बाजार है, जिसे वह गंवाना नहीं चाहेगा। उल्लेखनीय है कि देश के साठ करोड़ स्मार्टफोन में से 97 फीसदी एंड्रॉइड आॅपरेटिंग सिस्टम से संचालित हैं। वहीं दूसरी ओर समाचार सामग्री के जरिये अनुचित राजस्व हासिल करने के बाबत शिकायतों पर सीसीआई के निर्देश पर तकनीकी विशेषज्ञ पहले ही गूगल की कार्यप्रणाली की जांच कर रहे हैं। जिसमें समाचार के स्रोत वाले संस्थानों को भुगतान किये बिना मुनाफा कमाया जा रहा है। इसकी शिकायत न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एवं डिजिटल एसोसिएशन ने की थी। दरअसल, पारदर्शिता के अभाव में डिजिटल मीडिया घरानों ने गूगल के राजस्व साझेदारी मॉडल के चलते नुकसान उठाया है। तकनीकी दिग्गजों की कार्यप्रणाली के नियमन के लिये सीसीआई को अधिक कानूनी अधिकार दिये जाने चाहिए। इस बाबत भारत को पश्चिमी देशों के मॉडल से सीख लेनी चाहिए। इन देशों में डिजिटल मार्केट में कॉपीराइट का अधिकार समाचार संगठनों को हासिल हो पाया, जो उनकी सामग्री के अनुचित उपयोग पर मुआवजा प्रदान करने की राह सुगम करता है।
टीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी ने पूछताछ के लिए समन भेजा है। सीएम को गुरुवार को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। ईडी के सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी पंकज मिश्रा के आवास से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नाम से कई बैंकिंग दस्तावेज मिले हैं। मुख्यमंत्री के नाम से चेकबुक, पासबुक इत्यादि दस्तावेज मिलने के बारे में ईडी उनसे पूछताछ करेगी। अवैध खनन से जुड़ा यह पूरा मामला है। मुख्यमंत्री को पूछताछ के लिए समन जारी करने का मुख्य कारण उनके विशेष प्रतिनिधि पंकज मिश्रा द्वारा अवैध खनन में शामिल होने और 42 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति अर्जित करने के अलावा अन्य कई मामले हैं। इसमें मनी लाउंड्रिंग के आरोप में फंसी आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल को खान विभाग में पदस्थापित करने के कारणों के अलावा प्रेम प्रकाश के घर से मुख्यमंत्री आवास की सुरक्षा के लिए तैनात जवानों के नाम आवंटित दो एके-47 और 60 गोलियों का मिलना शामिल है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया 1 नवंबर से बीमाकर्ताओं के लिए केवाईसी (नो योर कस्टमर) विवरण देना अनिवार्य कर सकती है। अभी तक नॉन लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदते समय केवाईसी विवरण देना स्वैच्छिक है जो पहली नवंबर से अनिवार्य किया जा सकता है. नये और पुराने दोनों कस्टमर्स के लिए केवाईसी से जुड़े नियम अनिवार्य किये जा सकते हैं। इसके तहत इंश्योरेंस क्लेम करते समय अगर केवाईसी डॉक्यूमेंट पेश नहीं किए तो आपका क्लेम खारिज हो सकता है। हर महीने की पहली तारीख को पेट्रोलियम कंपनियों की तरफ से एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में बदलाव देखने को मिलता है। ऐसे में 1 नवंबर को भी तेल कंपनियों द्वारा एलपीजी गैस सिलेंडर के नये दाम जारी किए जायेंगे। 1 नवंबर को 14 किलो वाले घरेलू और 19 किलो वाले कॉमर्शियल गैस सिलेंडर दोनों की ही कीमतों में बदलाव हो सकता है। इस महीने की पहली तारीख को भी कॉमर्शियल गैंस सिलेंडर की कीमतों में कटौती की गयी थी। रसोई गैस सिलेंडर की डिलीवरी से जुड़ी प्रक्रिया में भी 1 नवंबर से बदलाव होने जा रहा है। गैस बुकिंग के बाद ग्राहकों के मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी भेजा जायेगा। जब सिलेंडर डिलीवरी के लिए आयेगा तो आपको इस ओटीपी को डिलीवरी बॉय के साथ शेयर करना होगा। एक बार इस कोड का सिस्टम से मिलान हो जाने पर ग्राहक को सिलेंडर की डिलीवरी ही मिलेगी। 1 नवंबर से ट्रेनों के टाइम टेबल में बदलाव भी होने जा रहा है। भारतीय रेलवे देशभर में ट्रेनों के टाइम टेबल में बदलाव करने जा रहा है। पहले 1 अक्टूबर से ट्रेनों के टाइम टेबल में बदलाव होने वाला था, लेकिन किन्हीं कारणों से 31 अक्टूबर की तारीख आगे तय की गई है। अब 1 नवंबर से नई समय सारिणी लागू की जायेगी। इसके बाद 13 हजार यात्री ट्रेनों के समय और 7 हजार मालगाड़ी के समय बदलेंगे। देश में चलने वाली करीब 30 राजधानी ट्रेनों का समय भी 1 नवंबर से बदल जायेगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सोशल मीडिया मंचों पर उपलब्ध सामग्रियों एवं अन्य मुद्दों को लेकर दर्ज शिकायतों का संतोषजनक निपटारा करने के लिए सरकार ने शुक्रवार को आईटी नियमों में बदलाव करते हुए तीन महीने में अपीलीय समितियों का गठन की घोषणा की। ये समितियां मेटा और ट्विटर जैसी सोशल मीडिया कंपनियों द्वारा सामग्री के नियमन के संबंध में किये गये फैसलों की समीक्षा कर सकेंगी।शुक्रवार को जारी गजट अधिसूचना के मुताबिक तीन महीने के भीतर शिकायत अपीलीय समितियां गठित कर दी जायेंगी। इन अपीलीय समितियों के गठन के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया नीति संहिता) नियम, 2021 में कुछ फेरबदल किए गए हैं। अधिसूचना में कहा गया है, केंद्र सरकार सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) संशोधन नियम, 2022 के लागू होने की तारीख से तीन महीने के भीतर अधिसूचना द्वारा एक या अधिक शिकायत अपीलीय समितियों का गठन करेगी। प्रत्येक समिति में एक चेयरपर्सन और केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त दो पूर्णकालिक सदस्य होंगे। इनमें से एक पदेन सदस्य होगा और दो स्वतंत्र सदस्य होंगे। अधिसूचना के मुताबिक शिकायत अधिकारी के निर्णय से असहमत कोई भी व्यक्ति, शिकायत अधिकारी से सूचना मिलने से तीस दिनों के भीतर अपीलीय समिति में शिकायत कर सकता है।
टीम एबीएन, गिरिडीह/ रांची। झारखंड के गिरिडीह जिले के भेलवाघाटी पुलिस ने प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी की हार्डकोर महिला नक्सली सुनीता हेंब्रम को गिरफ्तार किया है। बीते सोमवार को पुलिस के हत्थे चढ़े विनोद वर्णवाल उर्फ राजेश वर्णवाल की निशानदेही पर यह सफलता पुलिस को मिली है। सुनीता चकाई थाना इलाके के अति उग्रवाद प्रभावित जंगली इलाका बाराजोर गांव की रहने वाली है। हालांकि, भेलवाघाटी थाना पुलिस ने इस मामले की पुष्टि अभी नहीं की है। दरसअल, सुनीता बीती देर रात अपने इकलौते पुत्र से मिलने अपने घर बाराजोर आई हुई थी, जिसकी भनक भेलवाघाटी थाना पुलिस को लगी। इसके बाद भेलवाघाटी थाना प्रभारी प्रशांत कुमार के नेतृत्व में टीम गठित कर उसकी गिरफ्तारी की गई। उसके पास से पुलिस ने हथियार व कारतूस सहित अन्य सामान बरामद किया है। बताया जाता है कि सुनीता ने वर्ष 2008 में भेलवाघाटी थाना क्षेत्र के तेतरिया बाजार में तीसरी के ढिबरा व्यवसायी दासो साव की हत्या कर दी थी। हालांकि, उस वक्त सुनीता के साथ और भी कई नक्सली शामिल थे। इसके बाद भेलवाघाटी थाना में कांड संख्या 166/08 के तहत सुनीता हेंब्रम सहित कई नक्सलियों पर मुकदमा दर्ज किया गया था। सुनीता हेंब्रम ने चकाई थाना के बाराजोर गांव निवासी अपने पहले पति रमका टूडू को छोड़कर वर्ष 2005 में प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के जोनल कमांडर मृत चिराग दा उर्फ रामचंद्र महतो के दस्ते के सक्रिय सदस्य रजो मरांडी उर्फ राजा दा से 2007 में शादी कर ली थी। शादी से ठीक 1 वर्ष बाद बिहार के लखीसराय में पुलिस नक्सली मुठभेड़ में राजू मरांडी उर्फ राजा दा के मारे जाने के बाद सुनीता ने उसके छोटे भाई आकाश मरांडी, जो प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी का सदस्य था, उससे 2010 में शादी रचा ली। लेकिन वह पिछले 5 वर्षों से लापता है। सुनीता का कहना है कि नक्सली आकाश मरांडी से इतने दिनों में ना ही मिली है और ना ही कहीं कोई अता-पता चल पाया है।
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