टीम एबीएन, रांची। झारखंड हाईकोर्ट के पांच न्यायाधीशों की बेंच ने लीव इनकैशमेंट से जुड़े मामले की सुनवाई की। पांच जजों की बेंच में झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ रविरंजन, जस्टिस अपरेश कुमार सिंह, जस्टिस एस चंद्रशेखर, जस्टिस सुजित नारायण प्रसाद और जस्टिस राजेश शंकर ने सुनवाई की।
न्यायिक सेवा के रिटायर्ड अधिकारी कुमार मिश्रा के द्वारा लीव इनकेशमेंट के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है। सोमवार की सुनवाई के बाद वृहद पीठ ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 फरवरी की तारीख मुकर्रर की है। झारखंड हाईकोर्ट ने इस मामले में हाईकोर्ट के अधिवक्ता सुमित गड़ोदिया को अमेकस क्यूरी नियुक्त किया है। वह झारखंड हाईकोर्ट का पक्ष रख रहे हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। जम्मू-कश्मीर के अधिकारियों ने शनिवार को लश्कर-ए-तैयबा के फरार कमांडर अब्दुल राशिद उर्फ जहांगीर की संपत्ति को कुर्क कर लिया है। फरार कमांडर अब्दुल राशिद नियंत्रण रेखा के पार से काम कर रहा है और आतंकवाद को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रहा है।
डोडा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अब्दुल कयूम ने कहा कि डोडा जिले के थाथरी के खानपुरा गांव में चार कनाल से अधिक की भूमि को न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर सीआरपीसी की संबंधित धाराओं के तहत राजस्व और पुलिस अधिकारियों की एक संयुक्त टीम द्वारा कुर्क किया गया।
उन्होंने कहा कि पुलिस अन्य स्थानीय आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने की प्रक्रिया में है, जो पाकिस्तान में घुसपैठ कर चुके हैं और वर्चुअल मोड या सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को आतंकी गतिविधियों में शामिल होने और जिले में आतंकवाद को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रहे हैं।
एसएसपी ने कहा कि राशिद 1993 में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) गया था और विध्वंसक गतिविधियों को अंजाम देने के इरादे से हथियारों का प्रशिक्षण प्राप्त कर लौटा था।
पाकिस्तान से घुसपैठ के बाद वह अन्य खूंखार और कट्टर आतंकवादियों के साथ सक्रिय रहा और जिले में आगजनी और विस्फोट की घटनाओं के अलावा नागरिकों और सुरक्षा बलों पर कई हमलों में शामिल पाया गया। इसके अलावा उसके द्वारा कई स्थानीय युवाओं को उकसाया गया और आतंकवाद में भर्ती किया गया।
उन्होंने कहा कि थाथरी का एक अन्य आतंकवादी कमांडर मोहम्मद अमीन उर्फ खुबैब शुरू में राशिद द्वारा प्रेरित और भर्ती किया गया था। अमीन वर्तमान में पाकिस्तान से काम कर रहा है और जम्मू संभाग के डोडा, किश्तवाड़ और रामबन जिलों में आतंकवाद को पुनर्जीवित करने के लिए प्रयास कर रहा है। उसने हाल के दिनों में आईईडी विस्फोट, ड्रोन गिराने और हथियारों की तस्करी सहित कई आतंकवादी घटनाओं की साजिश रची थी।
राशिद और अमीन दोनों ने एक दशक पहले पाकिस्तान में अपनी घुसपैठ को अंजाम दिया और जिन्हें स्थानीय अदालत द्वारा अपराधी घोषित किया गया। अधिकारी ने कहा कि डोडा और जम्मू क्षेत्र के अन्य जिलों के विभिन्न पुलिस थानों में उनके खिलाफ कई प्राथमिकी दर्ज हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सुप्रीमकोर्ट ने बिल्कीस बानो की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें सामूहिक बलात्कार मामले के 11 दोषियों की सजा माफ करने की याचिका पर गुजरात सरकार से विचार करने के लिए कहने संबंधी शीर्ष अदालत के आदेश की समीक्षा का अनुरोध किया गया था। बानो 2002 में गुजरात दंगों के दौरान सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई थीं और उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या कर दी गई थी। प्रक्रिया के अनुसार, शीर्ष अदालत के फैसले के खिलाफ पुनरीक्षण याचिका पर फैसला संबंधित निर्णय सुनाने वाले न्यायाधीश अपने कक्ष में करते हैं।
कक्ष में विचार करने के लिए यह याचिका 13 दिसंबर को न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ के समक्ष आई थी। शीर्ष अदालत के सहायक पंजीयक द्वारा बानो की वकील शोभा गुप्ता को भेजे गए संदेश में कहा गया है, मुझे आपको यह सूचित करने का निर्देश दिया गया है कि उच्चतम न्यायालय में दायर उक्त पुनरीक्षण याचिका 13 दिसंबर, 2022 को खारिज कर दी गई।
बानो ने एक दोषी की याचिका पर शीर्ष अदालत द्वारा 13 मई को सुनाए गए आदेश की समीक्षा किए जाने का अनुरोध किया था। शीर्ष अदालत ने गुजरात सरकार से नौ जुलाई 1992 की नीति के तहत दोषियों की समय से पूर्व रिहाई की मांग वाली याचिका पर दो महीने के भीतर विचार करने को कहा था। गुजरात सरकार ने सभी 11 दोषियों की सजा माफ करते हुए उन्हें 15 अगस्त को रिहा कर दिया था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरियों में और शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले के लिए ओबीसी आरक्षण को 14 फीसदी से बढ़ाकर 27 फीसदी किये जाने के फैसले को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की रोक को हटाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दी है। जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने ये आदेश दिया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता जया ठाकुर से पूछा कि आखिर आप इस फैसले से कैसे प्रभावित हैं। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर आप अगर अपनी याचिका वापस नहीं लेते तो हम आप पर जुर्माना लगायेंगे। दरअसल, 2019 में राज्य में कमलनाथ की सरकार के दौरान सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में बढाए गए ओबीसी आरक्षण के फैसले पर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने रोक लगा दिया था।
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ जया ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल किया था। याचिका में हाई कोर्ट की रोक को हटाने की मांग की गई थी। इस याचिका में कहा गया था कि हाईकोर्ट के इस रोक के चलते पिछले तीन सालों में सरकारी नौकरियों में भर्तियां बंद हो गयी है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) नियुक्ति नियमावली को चुनौती देने को लेकर दायर याचिका पर झारखंड हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश डॉ रविरंजन एवं न्यायधीश सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने सभी पक्षों की ओर से बहस और दलीलें सुनने के बाद नियोजन नीति पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था।
अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2021 में पारित नियोजन नीति (जेएसएससी रूल्स संशोधन) को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही रमेश हांसदा की ओर से दाखिल याचिका को अदालत ने स्वीकार कर लिया है। झारखंड हाईकोर्ट के तीन न्यायाधीशों की बृहद पीठ ने यह फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब वैसे अभ्यर्थी भी जेएसएससी और जेपीएससी द्वारा ली जाने वाली नियुक्ति प्रतियोगिता में शामिल हो सकते हैं। जिन्होंने झारखंड के बाहर दसवीं और बारहवीं की पढ़ाई की है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में हाईस्कूल शिक्षकों की नियुक्ति के मामले में दायर अवमानना याचिका और अन्य याचिकाओं का सुप्रीम कोर्ट ने निपटारा कर दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि जिन शिक्षकों की अभी तक नियुक्ति हो चुकी है, उनकी नौकरियां सुरक्षित रहेंगी। इसके अलावा झारखंड हाईकोर्ट में याचिककर्ता रहे लोगों को भी नियुक्तियां होंगी। इसके लिए पहले से नियुक्त लोगों की मेरिट लिस्ट को आधार बनाया जायेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि अभी शिक्षकों के जो 8586 पद खाली है, उनके लिए सरकार राज्य स्तर पर अलग से मेरिट लिस्ट बनाये। इसके लिए राज्य सरकार को शेड्यूल्ड और नॉन शेड्यूल्ड जिलों को मिलाकर एक अलग से राज्य स्तर पर मेरिट लिस्ट बनानी होगी। कोर्ट ने पूरी कवायद को पूरा करने के लिए राज्य सरकार को 3 महीने का वक़्त दिया है। 2 अगस्त को दिये अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार की शेड्यूल्ड जिलों में स्थानीय लोगों को 100 फीसदी आरक्षण देने की नीति को असंवैधानिक करार दिया था।
सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि झारखंड सरकार की ओर से 13 शेड्यूल्ड जिलो में (क्लास 3 और क्लास 4 की पोस्ट के लिए) सिर्फ स्थानीय निवासियों को ही मौका देना संविधान के अनुकूल नहीं है। इन जिलों में स्थानीय नागरिकों का 100% आरक्षण समानता के मूल अधिकार के खिलाफ है और सरकार का ऐसा करना बाकी जिलों के के लोगों को संविधान की ओर से मिले मूल अधिकारों का हनन है।
सुप्रीम कोर्ट ने तब हालाकि राज्य सरकार के नोटिफिकेशन को रद्द किया था पर साथ ही ये भी कहा था कि शेड्यूल्ड डिस्ट्रिक्ट में कई सालों से टीचर्स काम कर रहे हैं, अगर उन तमाम नियुक्तियों को रद्द किया जाता है तो ऐसी सूरत में स्कूलों में शिक्षकों की कमी हो जायेगी। आदिवासी इलाकों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होंगी। लिहाजा कोर्ट ने सीधे उनकी नियुक्ति न रद कर कहा था कि शेड्यूल्ड और नॉन शेड्यूल्ड जिलो को मिलाकर एक नयी मेरिट लिस्ट बनायी जाये, उसके आधार पर हरेक की मेरिट के लिहाज से जिलो में उनकी नियुक्ति हो।
कोर्ट में दायर अवमानना याचिका में आरोप लगाया गया था कि राज्य सरकार एससी के आदेश पर अमल नहीं कर रही है। अवमानना याचिका और मामले से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट का आज का आदेश आया है। वकील के मुताबिक शिक्षको के मामले मे दिये गये राहत के इस आदेश का ग्रुप सी और ग्रुप डी की दूसरी नौकरियों पर भी पड़ेगा। शिक्षकों की तर्ज पर सुप्रीम कोर्ट ने पंचायत सचिवों की नियुक्ति के लिए भी राज्य स्तरीय मेरिट लिस्ट बनाने को कहा है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के मशहूर डॉक्टर माजीद आलम के घर पर आईटी की टीम ने बुधवार की सुबह दबिश दी है। डॉक्टर मजीद आलम के बरियातू स्थित आलम अस्पताल, जोड़ा तालाब स्थित घर और रातू स्थित घर पर ईडी की टीम एक साथ पहुंची और काजगात खंगालने में जुट गयी। हालांकि अभी यह क्लियर नहीं है कि यह आईटी की रेड है या छापेमारी।
डॉ आलम के बरियातू रोड स्थित आलम नर्सिंग होम है, जहां आईटी की टीम 2 बड़े वाहनों में सवार होकर पहुंची। इस टीम ने नर्सिंग होम के अकाउंट ऑफिस को अपने कब्जा में लिया और फाइलों की जांच शुरू की। वहीं आईटी की दो अन्य टीमें डॉक्टर के रातू और जोड़ा तालाब स्थित घर भी पहुंची है, जहां संपत्ति और बैंक खातों की जांच कर रही है।
टीम एबीएन, रामगढ़। गोला गोलीकांड की दोषी कांग्रेस विधायक ममता देवी सहित 13 अभियुक्तों को सजा सुनाई गई विधायक ममता देवी समेत सभी दोषियों को पांच-पांच साल की सजा सुनाई गई है। अदालत ने सभी दोषियों पर 10-10 हजार का जुर्माना भी लगाया। हजारीबाग के एमपी एमएलए कोर्ट में सजा का फैसला हुआ। दिनभर हजारीबाग कोर्ट परिसर में गहमागहमी का माहौल देखने को मिला विधायक ममता देवी के परिजन बच्चे सहित कोर्ट परिसर में मौजूद रहे। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।
कोर्ट की पूरी कार्रवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई है और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ही सभी को सजा सुनाई गई। रामगढ़ विधानसभा की विधायक ममता देवी को अलग-अलग धाराओं में 5 साल की सजा हुई। ममता देवी को धारा 148 में दो साल, 332 में दो साल, 333 में दो साल और 307 में पांच साल मिली है। जिसके कारण उनकी विधानसभा की सदस्यता समाप्त हो जाएगी। अब रामगढ़ विधानसभा सीट पर उपचुनाव होगा। विधायक ममता देवी को सजा के बाद कार्यकर्ता काफी दुखी दिख रहे थे। विधायक के समर्थक और परिजन कोर्ट पहुंचे थे। परिजन ममता देवी के दूधमुहे बच्चे के साथ कोर्ट पहुंचे थे। इसे देखकर सभी की आंखें नम हो रही थी।
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