टीम एबीएन, रांची। मनी लॉन्ड्रिंग की आरोपी निलंबित आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल ने रांची ईडी कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम जमानत की अवधि पूरी होने के बाद उन्होंने सरेंडर किया है। सरेंडर करने के बाद उन्हें फिर से न्यायिक हिरासत में होटवार जेल भेज दिया गया।
पूजा सिंघल को 3 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिली थी। सुप्रीम कोर्ट ने पूजा सिंघल को बेटी के मेडिकल ग्राउंड पर एक महीने की अंतरिम जमानत दी थी। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस अभय ओका की अदालत ने उन्हें अंतरिम जमानत दी थी। झारखंड के खूंटी में हुए मनरेगा घोटाला मामले में ईडी ने पूजा सिंघल को 11 मई 2022 को गिरफ्तार किया था। पूजा सिंघल की गिरफ्तारी के बाद झारखंड सरकार ने उन्हें सस्पेंड कर दिया।
गिरफ्तारी के बाद उनके वकील ने पहले ईडी कोर्ट में जमानत याचिका दी। ईडी कोर्ट ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया। ईडी कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद हाई कोर्ट पहुंची लेकिन वहीं भी निराशा ही हाथ लगी। हाई कोर्ट के बाद उनके वकील सुप्रीम कोर्ट पहुंचे जहां से उन्हें एक महीने के अंतरिम जमानत मिली।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की कोर्ट ने धनबाद के आशीर्वाद टावर में हुए अग्निकांड पर संज्ञान लिया है। इस मामले की सुनवाई गुरुवार को होगी। उल्लेखनीय है कि धनबाद बैंक मोड़ थाना क्षेत्र के जोड़ाफाटक रोड स्थित आशीर्वाद टावर के द्वितीय तल में मंगलवार शाम भीषण आग लग गई थी। हादसे में 14 लोगों की झुलसकर मौत हो गई जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं। मृतकों में दस महिलाएं, तीन बच्चे और एक पुरुष है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रसव पूर्व लिंग-निर्धारण का वीडियो यूट्यूब पर अपलोड करने वालों की अब खैर नहीं। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने उन यूट्यूबर्स को नोटिस भेजा है, जिन्होंने अपने चैनल पर प्रसव पूर्व लिंग-निर्धारण के वीडियो अपलोड किये थे। मंत्रालय ने यूट्यूबर्स से 36 घंटों के भीतर ये वीडियोज हटाने का आदेश दिया है। अगर यूट्यूबर्स ने ऐसा नहीं किया तो उनपर कानूनी कार्रवाई की जायेगी और ऐसे लोगों को जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है।
सरकार ने यूट्यूब पर ऐसे चार हजार वीडियोज की पहचान की है। देश में प्री-कंसेप्शन एंड प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक्स एक्ट 1994 (पीसीपीएनडीटी एक्ट) के तहत प्रसव पूर्व लिंग-निर्धारण पर बैन है। इस एक्ट के तहत डायग्नोस्टिक केंद्रों को कड़ाई से नियमों का पालन करने के लिए कहा जाता है। यह एक्टकन्या भ्रूण हत्या को रोकने और भारत में गिरते लिंगानुपात को रोकने के लिए बनाया गया था।
मंत्रालय के सेक्रेटरी पीवी मोहनदास ने बताया कि मंत्रालय इस तरह की आपत्तिजनक सामग्री के लिए सोशल मीडिया की नियमित निगरानी कर रहा है। जब यह वीडियो हमारे संज्ञान में आए तो हमने सबसे पहले आपत्तिजनक चैनलों की पहचान की और उनकी एक लिस्ट बनायी। बाद में हमने ऐसे चैनलों को वीडियो हटाने के लिए नोटिस भेजा।
पीवी मोहनदास ने बताया कि इससे पहले मंत्रालय ने सर्च इंजन गूगल से भी ऐसी आपत्तिजनक सामग्री हटाने को कहा था। मोहनदास ने बताया कि अगर कोई भी व्यक्ति वेबसाइट्स या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पीसीपीएनडीटी एक्ट के उल्लघंन वाली सामग्री देखे तो वह राज्य में नोडल अधिकारियों या मंत्रालय से ईमेल pndtmohfw@gmail.com पर शिकायत कर सकता है।
दरअसल, कुछ दिन पहले दिल्ली के रेडियोलॉजिस्ट डॉ अनुज अग्रवाल को यूट्यूब पर पर एक ऐसा वीडियो मिला, जिसने एम्स अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ का हिस्सा होने का दावा किया था। वह यूट्यूब चैनल गर्भावस्था, गर्भावस्था के टिप्स और प्रसव पूर्व लिंग-निर्धारण की तकनीकों पर बने वीडियो से भरा हुआ था। चौंकाने वाली बात यह थी कि इस वीडियो को करीब सात लाख लोगों ने देखा था।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने टीपीसी के कमांडर भीखन गंझू का आपराधिक रिकॉर्ड और केस डायरी मांगे हैं। सोमवार को गंझू की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस राजेश कुमार की अदालत ने यह दस्तावेज मांगे हैं। यह मामला आर्म्स एक्ट से जुड़ा है और पिपरवार थाना से संबंधित है।
रांची पुलिस ने 10 लाख के इनामी भीखन गंझू को पिछले साल पंडरा इलाके से गिरफ्तार किया था। इसके बाद से वह न्यायिक हिरासत में है। पिपरवार के अशोका, टंडवा के मगध-आम्रपाली परियोजना में टेरर फंडिंग के केस में भी भीखन गंझू आरोपी है। इसके साथ ही नागालैंड से हथियार की तस्करी में भी एनआईए ने भीखन पर चार्जशीट दायर की है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उच्चतम न्यायालय के फैसलों को क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराने पर प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डी वाई चंद्रचूड़ के जोर देने की रविवार को सराहना की। हाल ही में एक समारोह में सीजेआई जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने क्षेत्रीय भाषाओं में सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों को उपलब्ध कराने की दिशा में काम करने की बात कही।
उन्होंने इसके लिए तकनीक के उपयोग का भी सुझाव दिया। यह एक प्रशंसनीय विचार है, जो कई लोगों की मदद करेगा। मोदी ने ट्विटर पर लिखा और मुंबई में बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र एंड गोवा द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में सीजेआई के भाषण की प्रासंगिक क्लिप को साइट पर साझा किया। अतीत में प्रधान मंत्री ने प्राय: न्यायिक निर्णयों को क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराकर आम आदमी के लिए अधिक सुलभ बनाने की वकालत की है।
मोदी ने एक अन्य ट्वीट में कहा, भारत में कई भाषाएं हैं, जो हमारी सांस्कृतिक जीवंतता को बढ़ाती हैं। केंद्र सरकार भारतीय भाषाओं को प्रोत्साहित करने के लिए कई प्रयास कर रही है, जिसमें इंजीनियरिंग और चिकित्सा जैसे विषयों को अपनी मातृभाषा में पढ़ने का विकल्प शामिल है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित शिक्षक नियुक्ति भ्रष्टाचार मामले में आखिरकार हुगली जिले के तृणमूल युवा नेता कुंतल घोष को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार कर लिया। घोष को सीजीओ कॉम्प्लेक्स स्थित केंद्रीय एजेंसी के क्षेत्रीय कार्यालय में पूछताछ के लिए लाया जा रहा है। ईडी के सूत्रों ने यह जानकारी दी।
ईडी अधिकारियों की दो टीमें शुक्रवार सुबह करीब 7 बजे चिनार पार्क स्थित कुंतल के दो फ्लैटों की तलाशी लेने पहुंची थीं। एक फ्लैट में कुंतल को बैठा कर रखा गया। तलाशी में महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए। इस पर उससे पूछताछ की गई और शनिवार सुबह उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।
मूल रूप से हुगली जिले के बालागढ़ में तृणमूल युवा के बड़े नेता के तौर पर जाने जाने वाले कुंतल के बारे में प्राथमिक शिक्षा परिषद के पूर्व अध्यक्ष माणिक भट्टाचार्य के करीबी तापस मंडल ने बताया था। तापस से सीबीआई अधिकारियों ने पूछताछ की थी। उसने पूछताछ में दावा किया था कि कुंतल ने 325 छात्र-छात्राओं से करीब 19 करोड़ रुपये की वसूली की है ।
ईडी ने इस संबंध में चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें यह जिक्र है कि 325 छात्रों से घोष बाबू नाम के एक नेता ने 3.25 करोड़ रुपये सीधे लिए थे। उस समय पता नहीं चला था कि घोष बाबू कौन है। अब कुंतल की गिरफ्तारी से स्पष्ट हो गया है कि इसी तृणमूल नेता के बारे में चार्जशीट में जिक्र था।
सीबीआई ने बुधवार को कुंतल से निजाम पैलेस में पूछताछ की थी। पूछताछ के बाद बाहर निकल कर उसने कहा था कि अगर मैंने शिक्षक नियुक्ति भ्रष्टाचार मामले में एक रुपया भी लिया होता तो सीबीआई मुझे इतनी आसानी से नहीं छोड़ती।
टीम एबीएन, रांची। बच्चू यादव की जमानत याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने उसे जमानत की सुविधा प्रदान कर दी है। अदालत ने दोनों पक्षों की ओर से बहस सुनने के बाद बेल अर्जी पर अपना फैसला सुनाया है। झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस राजेश शंकर की कोर्ट में बच्चू की याचिका पर सुनवाई हुई। यह मामला आर्म्स एक्ट से जुड़ा हुआ है।
प्राथमिकी के मुताबिक, साहिबगंज के शुक्र बाजार में बच्चू यादव और दाहु यादव ने गोलीबारी की थी, जिसमें साहेबगंज के मुफस्सिल थाना में कांड संख्या 29/2022 दर्ज की गई है। इससे पहले निचली अदालत ने इस केस में बच्चू को जमानत देने से इनकार कर दिया था। इस केस में दाहु यादव और मुनीम यादव भी आरोपी हैं। बता दें कि बच्चू यादव मनी लॉन्ड्रिंग केस में भी आरोपी हैं। फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड हाई कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति मामले में सजायाफ्ता झारखंड के पूर्व मंत्री एनोस एक्का और उनकी पत्नी मेनन एक्का को निचली अदालत से दी गई सजा बरकरार रखा है। इसके अलावा हाई कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ईडी कोर्ट द्वारा एनोस एक्का को सुनाई गई सजा को भी बरकरार रखने का आदेश दिया है।
एक्का दंपती ने निचली अदालतों के फैसलों के खिलाफ अपील की थी, जिन्हें खारिज कर दिया गया है। झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस गौतम कुमार चौधरी की कोर्ट ने शुक्रवार को एक्का दंपती की याचिकाओं पर फैसला सुनाया। गौरतलब है कि 25 फरवरी 2020 को सीबीआई के विशेष जज एके मिश्रा की अदालत ने आय से अधिक संपत्ति में एनोस एक्का और उनकी पत्नी मेनन को 7 साल की सजा सुनाई थी। फिलहाल एनोस एक्का और उनकी पत्नी मेनन एक्का दोनों जेल में हैं। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी कोर्ट ने अप्रैल 2020 में एनोस एक्का को सात साल की सजा सुनाई थी और उन पर दो करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया था। पूर्व मंत्री एनोस पर 20 करोड़ 31 लाख 77 हजार रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप था।
एनोस झारखंड के तत्कालीन सीएम मधु कोड़ा के मंत्रिमंडल में मंत्री हुआ करते थे। ईडी ने रांची में एयरपोर्ट रोड पर स्थित उनके नवनिर्मित आवास को जब्त कर लिया था। झारखंड में ईडी का जोनल कार्यालय अभी उसी मकान में चलता है। झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता की ओर से वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार और अधिवक्ता जितेंद्र एस सिंह ने पैरवी की थी, वहीं सीबीआई की ओर से अधिवक्ता प्रशांत पल्लव ने दलीलें दीं।
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