टीम एबीएन, रांची। मनरेगा घोटाला और मनी लाउंड्रिंग केस में जेल में बंद झारखंड की चर्चित आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 21 अप्रैल को सुनवाई होगी। पूजा सिंघल 3 माह की अंतरिम जमानत पर जेल से बाहर निकली थीं। 12 अप्रैल को जमानत अवधि पूरी होने के बाद उन्होंने आत्मसमर्पण किया था।
सुप्रीम कोर्ट में 13 अप्रैल को सुनवाई होनी थी, लेकिन नहीं हो सकी। अगली तारीख 21 अप्रैल निर्धारित की गयी है। पूजा सिंघल को ईडी ने 11 मई 2022 को गिरफ्तार किया था। सुप्रीम कोर्ट ने बेटी के इलाज के लिए दो बार में तीन महीने की अंतरिम जमानत की सुविधा दी थी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। यदि आप फेसबुक इस्तेमाल करते हैं और आपका फेसबुक अकाउंट 2007 से दिसंबर 2022 के बीच बना है तो आपको पैसे मिल सकते हैं। जी हां, फेसबुक आपको भुगतान करेगा। दरअसल, फेसबुक पर 2018 में कैंब्रिज एनालिटिका को गलत तरीके से अपने 8.7 करोड़ यूजर्स की निजी जानकारी देने का आरोप लगा था।
मेटा अब इस मुकदमे में भुगतान करने के लिए सहमत है। यानी आप 725 मिलियन डॉलर यानी करीब 5,947 करोड़ रुपये के समझौते के एक हिस्से के हकदार हो सकते हैं। फेसबुक पर डाटा चोरी का यह आरोप 2018 में लगाया गया था। वहीं 2019 में मुकदमा दायर किया गया है।
मुकदमे में दावा किया गया था कि फेसबुक न केवल लिंग और उम्र जैसे बुनियादी डाटा को शेयर कर रहा है, बल्कि उनकी फोटो, उनके द्वारा बनाये गये वीडियो, उनके द्वारा देखे गये वीडियो और उनके व्यक्तिगत मैसेज को भी शेयर करता है।
कानून कार्यालय ने अपनी वेबसाइट पर शेयर किया- फेसबुक कथित तौर पर कैंब्रिज एनालिटिका के अनुचित डाटा कलेक्शन के बारे में 2015 से जानता था और गतिविधि को रोकने या यूजर्स को सूचित करने के लिए कार्रवाई करने में विफल रहा। यह मुकदमा कंपनी के खिलाफ दावा करता है कि फेसबुक यूजर्स के डाटा और कंटेंट का दुरुपयोग या अनधिकृत पहुंच से ठीक से सुरक्षित करने में विफल रहा।
फेसबुक यूजर्स जिनका अकाउंट 24 मई, 2007 से 22 दिसंबर, 2022 के बीच का है वह इस क्लेम में दावा कर सकते हैं। इन व्यक्तियों को 25 अगस्त, 2023 तक दावा प्रस्तुत करना होगा। अगस्त 2022 में एक समझौता किया गया और अदालत में लाया गया, उसके बाद 22 दिसंबर तक महीनों की बातचीत हुई, जब वादी ने समझौते की प्रारंभिक स्वीकृति के लिए एक प्रस्ताव दायर किया।
वादी का प्रतिनिधित्व करने वाली कानूनी फर्म केलर रोहरबैक एलएलपी के डेरेक लोसर और लेस्ली वीवर ने एक बयान में कहा कि यह ऐतिहासिक समझौता इस जटिल और प्रमुख प्राइवेसी मामले में वर्ग को राहत प्रदान करेगा। बता दें कि समझौते की राशि 725 मिलियन डॉलर यानी करीब 59,47 करोड़ रुपये है।
यानी आप इस राशि के एक हिस्से के हकदार हो सकते हैं। जो यूजर्स सोचते हैं कि वे निपटारे के एक हिस्से के हकदार हैं, वे अपने नाम, पते और ईमेल के साथ फॉर्म भर सकते हैं। आप अपने अकाउंट से जुड़े अपने फेसबुक यूजर्स नाम और फोन नंबर प्रदान करने के लिए कहा जायेगा।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजय कुमार मिश्र की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में मंगलवार को त्रिकुट रोप-वे हादसे पर लिये गये स्वतः संज्ञान से जनहित याचिका में तब्दील मामले की सुनवाई हुई।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय देने का आग्रह किया गया। कोर्ट ने सरकार को 16 मई तक शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 16 मई को होगी।
सुनवाई के दौरान कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता पीयूष चित्रेश ने पक्ष रखा। हाई कोर्ट की ओर से नियुक्त अमेकस क्यूरी (न्याय मित्र) कुमार वैभव भी अदालत में मौजूद थे। पिछले साल दस अप्रैल को देवघर के त्रिकूट पहाड़ के रोप-वे पर हुए हादसे पर झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डॉ रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की बेंच ने स्वत: संज्ञान लिया था।
झारखंड हाई कोर्ट इस मामले को स्वतः संज्ञान से जनहित याचिका में तब्दील कर सुनवाई कर रहा है। हाई कोर्ट ने इस मामले को लेकर सरकार से जवाब मांगा था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने माफिया डॉन रहे अतीक अहमद और उसके भाई की गोली मारकर की गयी हत्या के मामले का संज्ञान लेते हुए निर्णय लिया है कि पत्रकारों की रक्षा व सुरक्षा को लेकर एक मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की जायेगी। सूत्रों के अनुसार गृह मंत्रालय ने रविवार को एसओपी तैयार करने का फैसला किया है।
उल्लेखनीय है कि शनिवार रात कुछ अपराधी पत्रकार बनकर पुलिस हिरासत में मेडिकल जांच के लिए जा रहे अतीक अहमद और उसके भाई की हत्या कर दी। हत्या के समय अतीक और उसका भाई पत्रकारों से बातचीत कर रहा था। इस घटना ने पत्रकारों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े किये हैं।
टीम एबीएन, रांची। जमीन माफिया के साथ मिलीभगत करके जमीन घोटाला करने वाले बड़गाई अंचलकर्मी भानु प्रताप आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया। भानु प्रताप लैंड स्कैम का मुख्य सूत्रधार बताया जा रहा है।
इस मामले में फर्जी कागजात बनाने वाले अफसर अली खान के साथ साथ ईडी ने अन्य पांच को भी गिरफ्तार किया है। जिन सात लोगों को ईडी ने गिरफ्तार किया है, उन सभी के ठिकानों पर गुरुवार को छापेमारी हुई थी।
जो बिहार, झारखंड के साथ साथ पश्चिम बंगाल सहित कुल 22 स्थानों पर दिनभर छापेमारी चलती रही। इस मामले में झारखंड के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और रांची के पूर्व डीसी छवि रंजन के ठिकानों पर भी छापेमारी की गयी है।
भानु प्रताप प्रसाद, राजस्वकर्मी बड़गाई अंचल, गुरुवार को इसके रोड नंबर 7 हिलव्यू रोड, बरियातू रांची और झूलन सिंह चौक सिमडेगा स्थित आवास पर ईडी ने रेड की थी। अफसर अली खान, राहत नर्सिंग होम के पास, बरियातू में ईडी ने रेड किया था।
इम्जियाज अहमद, इसके हिनू स्थित आवास पर ईडी ने गुरुवार को रेड किया था। फैयाज खान, इसके मिल्लत कॉलोनी स्थित आवास पर रेड डाली गयी थी। अजहर खान, हाउस नंबर 28, सेकेंड स्ट्रीट हिंदपीढ़ी, रांची मो सद्दाम हुसैन, प्लॉट नंबर 40 जेड, फर्स्ट मार्क स्कूल रोड, बरियातू, रांची में ईडी ने कार्रवाई की थी।
पश्चिम बंगाल के रहने वाले प्रदीप बागची, इसके उदयांचल टावर, तीसरा तल्ला, टीपी रोड, उषाग्राम, आसनसोल में ईडी ने रेड की थी। तलहा खान उर्फ सनी, राहत नर्सिंग होम के पास, बरियातू स्थित आवास में ईडी ने गुरुवार को छापेमारी की थी।
टीम एबीएन, रांची। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने आईएएस अधिकारी छवि रंजन के ठिकानों पर गुरुवार सुबह से छापेमारी कर रही है यह छापेमारी आईएएस अधिकारी छवि रंजन की पत्नी लवली के जमशेदपुर आवास पर भी चल रही है। इसके अलावा कई अंचलाधिकारी समेत कुल 22 ठिकानों पर छापेमारी चल रही है।
रांची के पूर्व उपायुक्त छवि रंजन वर्तमान में समाज कल्याण विभाग में निदेशक के पद पर पदस्थापित हैं। सूत्रों ने बताया कि रांची, जमशेदपुर, सिमडेगा, हजारीबाग, कोलकाता, गोपालगंज में ईडी की टीम ने एक साथ दबिश दी है। इसके अलावा रांची के हिंदपीढ़ी में कुछ जमीन कारोबारियों के यहां भी टीम पहुंची है।
बताया जा रहा है कि रांची के बरियातू स्थित सेना के कब्जे वाली 4.55 एकड़ जमीन की खरीद-बिक्री मामले में ईडी यह कार्रवाई कर रही है। इससे पहले ईडी ने बीते पांच नवंबर 2022 को कोलकाता के कारोबारी अमित अग्रवाल और एक अन्य व्यवसायी विष्णु अग्रवाल, खरीद-बिक्री में शामिल प्रदीप बागची, दिलीप घोष एवं दो रजिस्ट्रार से जुड़े दो दर्जन से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की थी।
यह फर्जीवाड़ा का खुलासा आयुक्त की जांच रिपोर्ट में पहले ही हो चुका है। उक्त रिपोर्ट में यह बात सामने आ चुकी है कि प्रदीप बागची नाम के व्यक्ति ने फर्जी रैयत बनकर जगत बंधु टी इस्टेट प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक दिलीप कुमार घोष को उक्त जमीन बेच डाली थी। जमीन की खरीद-बिक्री के लिए रजिस्ट्री में प्रदीप बागची ने जिस होल्डिंग नंबर से संबंधित दो अलग-अलग कागजातों को लगाया था, वह जांच में फर्जी मिले थे। इसके बाद रांची नगर निगम की ओर से भी बरियातू थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी।
रांची नगर निगम के कर संग्रहकर्ता दिलीप शर्मा ने नगर आयुक्त के आदेश पर जून 2022 में प्रदीप बागची के विरुद्ध जालसाजी के मामले में प्राथमिकी दर्ज करायी थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रदीप बागची ने फर्जी आधार कार्ड, फर्जी बिजली बिल दिखाकर दो-दो होल्डिंग ले लिया था। आयुक्त की जांच में सेना के कब्जे वाली जमीन का असली रैयत जयंत करनाड मिला था। ईडी ने इस पूरे मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत केस दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया था।
टीम एबीएन, झुमरी तिलैया। बिजली चोरी रोकने के लिए विभाग के द्वारा 12 अप्रैल को झुमरी तिलैया और डोमचांच के अलग-अलग 90 इलाकों में छापामारी की गयी, जहां बिजली चोरी को लेकर 33 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है।
इस बारे में बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार सिंह ने बताया कि इन सबों पर 2,22,000 रुपये का जुमार्ना भी लगाया गया है। उन्होंने कहा कि झुमरी तिलैया के 57 स्थानों पर छापामारी हुई, जहां बिजली चोरी के आरोप में 23 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गयी।
जबकि डोमचांच के 33 स्थानों पर छापामारी हुई जहां बिजली चोरी को लेकर 10 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गयी है। ईई मनोज सिंह ने बिजली चोरी ना करने और बकाये बिलों का भुगतान शीघ्र करने की जरूरत बतायी है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। आयकर विभाग ने कर्नाटक के कुछ सहकारी बैंकों पर छापा मारकर 1,000 करोड़ रुपए के फर्जी खर्च और कथित वित्तीय अनियमितताओं का पता लगाया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने मंगलवार को यह जानकारी दी। गौरतलब है कि कर्नाटक में अगले महीने विधानसभा चुनाव होने हैं।
आयकर विभाग को संदेह था कि ये बैंक अपने ग्राहकों की विभिन्न व्यावसायिक संस्थाओं के धन को इस तरह से इधर-उधर कर रहे हैं, ताकि उन्हें कर देनदारियों से बचाया जा सके। इसके बाद इन बैंकों के 16 परिसरों में तलाशी 31 मार्च को शुरू की गई थी।
सीबीडीटी ने बयान में कहा कि तलाशी के दौरान 3.3 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी और दो करोड़ रुपए के आभूषण जब्त किये गये। सीबीडीटी, आयकर विभाग के लिए प्रशासनिक निकाय है।
बोर्ड ने कहा कि जब्त किये गये सबूतों से पता चला है कि ये सहकारी बैंक विभिन्न व्यापारिक संस्थाओं द्वारा विभिन्न काल्पनिक संस्थाओं के नाम पर जारी किए गए धारक चेक को भुनाने में शामिल थे। इन व्यावसायिक संस्थाओं में ठेकेदार, रियल एस्टेट कंपनियां आदि शामिल हैं और इस तरह के धारक चेक को भुनाने में केवाईसी मानदंडों का पालन नहीं किया गया था।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse