टीम एबीएन, रांची। जमीन घोटाला मामले में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पीएमएलए के विशेष जज राजीव रंजन ने 3 दिन की ईडी रिमांड में भेज दिया है। प्रवर्तन निदेशालय के वकील ने कोर्ट से हेमंत सोरेन की 4 दिन की रिमांड की मांग की थी।
हेमंत सोरेन के वकील ने उनको और ईडी रिमांड देने का कोर्ट में विरोध किया। कहा कि हेमंत सोरेन से जितनी पूछताछ होनी थी, 10 दिन में हो चुकी है। उनसे और पूछताछ की जरूरत नहीं है। लेकिन, विशेष जज ने झारखंड के पूर्व सीएम को तीन दिन की ईडी रिमांड में भेजने का आदेश सुना दिया।
जमीन घोटाला मामले में हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद ईडी की विशेष अदालत ने दो बार ईडी को उनकी रिमांड सौंपी थी। दोनों बार हेमंत सोरेन से पूछताछ के लिए ईडी को 5-5 दिन का समय दिया गया था। हेमंत सोरेन को 31 जनवरी की रात को सात से आठ घंटे की पूछताछ के बाद ईडी ने गिरफ्तार कर लिया था। आखिरी बार उन्हें 7 फरवरी को कोर्ट में पेश किया गया था। कोर्ट ने उन्हें 5 दिन की हिरासत में भेज दिया था।
हेमंत सोरेन ने गिरफ्तारी को हाईकोर्ट में चुनौती दी। बाद में वह सुप्रीम कोर्ट चले गए और हाईकोर्ट में अपील दायर की कि वह अपना केस वापस लेना चाहते है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हेमंत सोरेन की याचिका पर सुनवाई करने से इंकार कर दिया और उन्हें हाईकोर्ट जाने के लिए कहा।
चूंकि हेमंत सोरेन के वकील ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को इस याचिका की जानकारी नहीं दी थी, हाईकोर्ट ने कहा कि प्रतिवादी पक्ष को जानकारी दिए बगैर याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकती। इसके बाद हेमंत सोरेन के वकील की ओर से ईडी को इस केस की जानकारी दी गई। कोर्ट ने ईडी को जवाब दाखिल करने के लिए 9 फरवरी तक का समय दिया था।
हाईकोर्ट में 12 फरवरी को ही उनकी क्रिमिनट रिट पिटीशन पर सुनवाई हुई। ईडी के वकील ने एक्टिंग चीफ जस्टिस एस चंद्रशेखर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ को बताया कि अमेंडमेंट पर जवाब देने के लिए उसे समय दिया जाए। इस पर एक्टिंग चीफ जस्टिस की खंडपीठ ने अंतिम सुनवाई के लिए 27 फरवरी की तारीख मुकर्रर कर दी।
टीम एबीएन, रांची। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2022 में जिला जजों की नियुक्ति मामले में झारखंड हाइकोर्ट के फुलकोर्ट द्वारा लिये गये निर्णय को रद्द कर दिया है। साथ ही जिला जजों के रिक्त नौ पदों पर जल्द नियुक्ति करने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सुशील कुमार पांडे एवं अन्य के मामले में यह फैसला सुनाया है।
झारखंड हाइकोर्ट की फुलकोर्ट ने जिला जज नियुक्ति में न्यूनतम उत्तीर्ण मार्क्स 50% कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया में हाईकोर्ट किसी भी शर्त में फेरबदल कर सकता है, लेकिन जब नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो गयी है, तो फेरबदल करना गलत है। अगर हाइकोर्ट को फेरबदल करना ही था, तो परीक्षा की प्रक्रिया शुरू होने के पहले फेरबदल करना चाहिए था।
दरअसल, यह मामला झारखंड हाइकोर्ट द्वारा वर्ष 2022 में 22 जिला जजों की नियुक्ति का है। हाइकोर्ट ने झारखंड सुपीरियर ज्यूडिशल सर्विस कैडर के तहत 22 पद पर नियुक्ति के लिए नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की थी। नियुक्ति प्रक्रिया के बीच में हाईकोर्ट ने बदलाव किया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गयी थी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
झारखंड हाई कोर्ट के फुलकोर्ट द्वारा नियमों में बदलाव के प्रस्ताव को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द करते हुए रिक्त 9 पदों पर सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति का आदेश दिया है। पूर्व में हाईकोर्ट ने 22 पदों में से 13 पदों पर मेरिट लिस्ट जारी कर नियुक्ति की अनुशंसा की थी, 9 पद खाली रह गये थे।
टीम एबीएन, रांची। पूर्व सीएम हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई का दायरा बढ़ता जा रहा है। ईडी ने आज हेमंत सोरेन के बेहद खास माने जाने वाले विनोद कुमार सिंह को पूछताछ के लिए बुलाया है। उनसे ईडी के रांची स्थित जोनल ऑफिस में पूछताछ की जा रही है।
वहीं हेमंत सोरेन के पूर्व मीडिया सलाहकार अभिषेक प्रसाद उर्फ पिंटू को भी पूछताछ के लिए आज ही बुलाया गया है। जानकारी के मुताबिक, विनोद कुमार सिंह को पूर्व सीएम हेमंत सोरेन के दिल्ली स्थित आवास से बरामद लग्जरी कार के सिलसिले में बुलाया गया है। कहा जा रहा है कि उनके दिल्ली आवास से बरामद एक लग्जरी कार का विनोद कुमार सिंह से कनेक्शन है।
साथ ही हेमंत सोरेन के साथ ट्रांसफर पोस्टिंग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा से जुड़े एडमिट कार्ड को लेकर व्हाट्सएप के जरिए की गयी पैरवी से जुड़े सवाल भी पूछे जा रहे हैं। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि सीएम के पूर्व मीडिया सलाहकार अभिषेक प्रसाद उर्फ पिंटू से किस मसले पर पूछताछ की जा रही है।
सूत्रों का कहना है कि पिछलो दिनों अभिषेक के आवास पर ईडी ने छापेमारी की थी। तब उनके आवास से कई दस्तावेज बरामद हुए थे। वैसे पूर्व में खनन से जुड़ी शेल कंपनियों के मामले में अभिषेक उर्फ पिंटू से पूछताछ हो चुकी है।
बाद में भी उन्हें समन भेजा गया था लेकिन उन्होंने कैबिनेट के फैसले का हवाला देते हुए ईडी दफ्तर जाने से इनकार कर दिया था। अब सवाल है कि विनोद कुमार सिंह आखिर हैं कौन? आखिर इनका पूर्व सीएम हेमंत सोरेन से क्या कनेक्शन है?
मिली जानकारी के मुताबिक, विनोद कुमार सिंह पेशे से आर्किटेक्ट हैं। उनका मेन रोड में दफ्तर भी है। उन्होंने बीआईटी, मेसरा से पढ़ाई की है। जब वह बीआईटी मेसरा में थे, उसी दौरान हेमंत सोरेन भी वहीं के छात्र हुआ करते थे। हालांकि हेमंत सोरेन अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाये थे। कहा जा रहा है कि उसी समय से दोनों एक दूसरे के बेहद करीबी हैं।
अभिषेक प्रसाद के साथ भी हेमंत सोरेन का करीबी संबंध रहा है। इसी वजह से सीएम बनने के बाद हेमंत सोरेन ने उनको अपना मीडिया सलाहकार बनाया था। फिलहाल, 31 जनवरी से हेमंत सोरेन ईडी की रिमांड पर हैं। उनसे भी लगातार पूछताछ चल रही है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में ईडी की दबिश लगातार बढ़ती जा रही है। ताजा मामला जेएसएससी सीजीएल परीक्षा से जुड़ा है। इस परीक्षा के पेपर लीक की जांच अब ईडी की टीम कर सकती है, जिसे लेकर एक बार फिर से झारखंड में राजनीतिक सरकार भी तेज हो गयी है।
पूर्व शिक्षा मंत्री नीरा यादव ने कहा कि छात्रों से जुड़े इस मामले को लेकर हम लोग सीबीआई की मांग कर रहे थे, लेकिन ईडी जांच कर रही है।
वहीं झामुमो विधायक लोबिन हेंब्रम ने कहा कि जांच होनी चाहिए, लेकिन ज्यादा टाइम टेकिंग नहीं होना चाहिए। अन्यथा छात्रों का भविष्य बर्बाद हो जायेगा। वही चंपई सोरेन की नयी सरकार में मंत्री सत्यानंद भोक्ता ने कहा कि इस मामले को लेकर हमारे मुख्यमंत्री पहले ही संज्ञान ले चुके हैं।
बता दें कि ईडी ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर पेपर लीक केस के संबंध में जानकारी मांगी है। राज्य के साढ़े छह लाख छात्रों ने परीक्षा में शामिल होने के लिए आवेदन दिया था। 28 जनवरी को परीक्षा के दौरान ही समान्य ज्ञान का पेपर सोशल मीडिया पर पेपर लीक हो गया था, जिस कारण परीक्षा रद्द करनी पड़ी।
टीम एबीएन, रांची। पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को झारखंड हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए हेमंत सोरेन द्वारा हाईकोर्ट में दायर याचिका की सोमवार को सुनवाई हुई, जिसमें ईडी के जवाब दाखिल करने के बाद मामले की सुनवाई की जायेगी।
हेमंत सोरेन द्वारा दायर क्रिमिनल रीट पर सोमवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत से हेमंत सोरेन को कोई राहत नहीं मिली है।
अधिवक्ता धीरज कुमार ने जानकारी देते हुए कहा कि हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ न्यायाधीश जस्टिस एस चंद्रशेखर और जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की बेंच ने इस संबंध में ईडी से जवाब मांगा है।
हाईकोर्ट ने ईडी को 9 फरवरी तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 12 फरवरी की तिथि निर्धारित की है। इस सुनवाई के दौरान अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने ऑनलाइन हेमंत सोरेन की ओर से पक्ष रखा।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मुसिबत में पड़ चुके हैं। उच्चतम न्यायालय ने धन शोधन मामले में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की याचिका पर हस्तक्षेप करने से शुक्रवार को इनकार कर दिया।
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मुसिबत में पड़ चुके हैं। उच्चतम न्यायालय ने धन शोधन मामले में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की याचिका पर हस्तक्षेप करने से शुक्रवार को इनकार कर दिया। सोरेन ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई उनकी गिरफ्तारी को चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने सोरेन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी से राहत के लिए उच्च न्यायालय जाने को कहा।
अपनी गिरफ्तारी की आशंका के कारण झारखंड के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने वाले झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) नेता हेमंत सोरेन ने शीर्ष अदालत के समक्ष अपनी याचिका में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) पर उन्हें सुनियोजित साजिश के तहत गिरफ्तार करने का आरोप लगाया था। उन्होंने याचिका में कहा था कि अब से कुछ महीनों बाद होने वाले लोकसभा चुनावों से पहले केंद्र के निर्देश पर यह कार्रवाई की गयी।
शीर्ष अदालत के समक्ष दायर याचिका में सोरेन ने उनकी गिरफ्तारी को अनुचित, मनमाना और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन घोषित करने का आग्रह किया था। सोरेन को 31 जनवरी को भूखंड के अवैध कब्जे और भूमि माफिया के साथ कथित संबंध से जुड़े धन शोधन मामले में गिरफ्तार किया गया था। रांची की एक विशेष पीएमएलए अदालत ने उन्हें बृहस्पतिवार को एक दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा शुक्रवार को झारखंड में प्रवेश कर गयी। राज्य में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने लोगों द्वारा चुनी गयी झारखंड सरकार को अस्थिर करने की कोशिश की, लेकिन इंडिया गठबंधन उसकी साजिश के खिलाफ खड़ा हो गया और उसे सफल नहीं होने दिया।
इस अवसर पर नवनियुक्त मुख्यमंत्री चंपई सोरेन भी मौजूद थे और उन्होंने राहुल गांधी का स्वागत किया। सभा को संबोधित करते हुए गांधी ने आरोप लगाया कि भाजपा के पास धन बल और जांच एजेंसियां हैं, लेकिन कांग्रेस और वह उनसे डरते नहीं हैं तथा उनकी विभाजनकारी विचारधारा के खिलाफ लड़ते रहेंगे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को 36 करोड़ रुपये की संपत्ति के मामले में ईडी से आप विधायक और वक्फ बोर्ड प्रमुख अमानतुल्लाह खान को जारी किए गए समन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने मंगलवार को अमानतुल्लाह खान को समन के खिलाफ तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए कहा था कि अंतिम समय में राहत नहीं मांगी जा सकती।
अदालत ने यह भी स्पष्टीकरण मांगा था कि शुरू में समन कब जारी किया गया था। अमानतुल्लाह खान ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 50 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है और भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) तथा ईडी द्वारा दायर मामलों को रद्द करने का निर्देश देने की भी मांग की है। न्यायमूर्ति रेखा पल्ली और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की खंडपीठ ने
गुरुवार को एसीबी द्वारा दर्ज की गई एफआईआर, मामले में समन और जांच को चुनौती देने वाली अमानतुल्लाह खान की याचिका पर नोटिस जारी करने से इनकार कर दिया। अमानतुल्लाह खान के वकील की अनुपलब्धता के कारण अदालत ने मामले को 7 फरवरी के लिए स्थगित कर दिया।
अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील के अनुरोध पर मामले को स्थगित करते हुए यह स्पष्ट किया कि न तो अदालत ने याचिका में नोटिस जारी किया है और न ही कोई अंतरिम आदेश दिया है। राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश राकेश सयाल ने हाल ही में मामले में दायर ईडी के आरोप पत्र पर संज्ञान लिया था।
ईडी ने जीशान हैदर, उनकी पार्टनरशिप फर्म स्काईपावर, जावेद इमाम सिद्दीकी, दाऊद नासिर और कौसर इमाम सिद्दीकी के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। कथित तौर पर खान से प्रभावित होकर अवैध धन से 36 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की गयी थी, जिन्होंने कथित तौर पर 8 करोड़ रुपये नकद दिये थे।
खान की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर ईडी के वकील ने कहा था कि अन्य से संबंधित आगे की जांच जारी है। वकील ने बताया था कि अपराध में आरोप दिल्ली वक्फ बोर्ड में अनियमितताओं से संबंधित हैं, जहां खान कथित तौर पर 100 करोड़ रुपये की हेराफेरी और नौकरियां प्रदान करने सहित भ्रष्ट आचरण में शामिल थे।
जांच के दौरान, ईडी ने सीबीआई, एसीबी और दिल्ली पुलिस द्वारा पहले दर्ज की गई एफआईआर पर विचार किया। एसीबी ने खान के खिलाफ पीएमएलए जांच की मांग की, जिसमें आरोप लगाया गया कि कथित गलत कमाई से दिल्ली, तेलंगाना और उत्तराखंड में संपत्तियां ली गयीं।
हामिद अली खान और कौसर इमाम सिद्दीकी के स्वामित्व वाले परिसरों की तलाशी में आपत्तिजनक सबूत और अवैध हथियार मिले। बरामद डायरियों में अमानतुल्लाह खान और जावेद इमाम सिद्दीकी के बीच उच्च मूल्य के लेनदेन का सुझाव दिया गया है, जिसमें ओखला के तिकोना पार्क में 36 करोड़ रुपये के प्लॉट की खरीद भी शामिल है।
अदालत को बताया गया कि आरोपी के मोबाइल से बरामद 36 करोड़ रुपये बेचने के समझौते में हेरफेर किया गया, जो सबूतों के साथ छेड़छाड़ का संकेत देता है। ईडी ने कहा कि संपत्ति खान के आदेश पर खरीदी गई थी। अदालत को 27 करोड़ रुपये के नकद लेनदेन के सबूत पेश किए गए, जिससे यह आरोपी व्यक्तियों को बुलाने के लिए एक अनिवार्य मामला बन गया।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बड़ा झटका लगा है।।सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई करने से मना कर दिया। अदालत ने कहा कि आपको पहले हाईकोर्ट जाना चाहिए था।
मालूम हो कि हेमंत सोरेन ने ईडी द्वारा उन्हें गिरफ्तार किये जाने की कार्रवाई के खिलाफ पहले झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, फिर उन्होंने हाईकोर्ट से याचिका वापस ले ली और ईडी की कार्रवाई को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
शुक्रवार, दो फरवरी को सुनवाई के दौरान गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली रिट याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने विचार करने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने हेमंत सोरेन से पूछा कि आप हाई कोर्ट क्यों नहीं जाते?
कोर्ट ने हेमंत सोरेन को संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत झारखंड हाई कोर्ट जाने को कहा। अदालत ने कहा कि हेमंत सोरेन हाईकोर्ट के समक्ष अपनी याचिका को शीघ्र सूचीबद्ध करने की मांग कर सकते हैं।
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