कानून व्यवस्था

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Published / 2024-07-17 21:22:56
अब बच्चों की आर्थिक हैसियत से तय होगा माता-पिता का गुजारा भत्ता

मां-बाप की सुध : बच्चों की हैसियत के अनुरूप गुजारा भत्ता

एबीएन सेंट्रल डेस्क। यह विडंबना है कि हमारे सामाजिक ताने-बाने में तेजी से आये बदलाव के बीच वृद्ध माता-पिता की देखभाल की जिम्मेदारी से मुंह मोड़ने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। अदालतों में गुजारा-भत्ते से जुड़े विवाद बड़ी संख्या में सामने आ रहे हैं। यही वजह है कि केंद्र सरकार वृद्ध माता-पिता की देखभाल के लिए बाध्य करने वाले 2007 के कानून में बदलाव लाकर, इसका दायरा बढ़ाने के मकसद से नये कानून लाने की तैयारी में है। 

माता-पिता और बुजुर्गों की देखभाल से जुड़े वर्षों पुराने कानून को प्रभावी व व्यावहारिक बनाने की कोशिश है। पहले वृद्ध माता-पिता अपनी संतानों से दस हजार रुपये तक का गुजारा भत्ता पाने के हकदार थे। बताया जा रहा है कि नये विधेयक के अनुसार अब माता-पिता का गुजारा भत्ता बच्चों की आर्थिक हैसियत से तय होगा। वहीं बच्चों के साथ कटुता कम करने के प्रयासों में माता-पिता व बुजुर्गों को त्यागने अथवा दुर्व्यवहार पर बच्चों को दी जाने वाली सजा में कमी करने की तैयारी है। 

सामाजिक संगठनों से विमर्श में यह बात सामने आयी थी कि लंबी सजा से माता-पिता और बच्चों के संबंधों में ज्यादा खटास बढ़ती है। कहा जा रहा है कि सरकार बजट सत्र में इस विधेयक को पेश कर सकती है। दरअसल, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने बुजुर्गों की देखभाल से जुड़े 2007 के कानून में बदलाव की पहल तब की, जब समाज में बुजुर्गों की अनदेखी व दुर्व्यवहार के मामले तेजी से बढ़े हैं। 

दरअसल, नये विधेयक में इससे जुड़े कानून की व्यावहारिक दिक्कतों को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, मंत्रालय ने कानून में बदलाव की पहल वर्ष 2019 में कर दी थी। इसी साल लोकसभा में एक विधेयक भी पेश किया गया था। इसके व्यापक पहलुओं की पड़ताल के लिए विधेयक को बाद में संसदीय समिति के पास भेज गया था। संसदीय समिति की सिफारिशों के आधार पर सरकार ने एक बार फिर एक विधेयक को संसद में पेश किया था। लेकिन वह पारित नहीं हो पाया था।

कालांतर 17वीं लोकसभा का कार्यकाल खत्म होने के कारण विधेयक निष्प्रभावी हो गया था। जिसके बाद अब सरकार नये सिरे से इस विधेयक को संसद में लाने की तैयारी में है। उल्लेखनीय है कि इस विधेयक में कई नये प्रावधानों को जोड़ा गया है। एक ओर जहां गुजारा भत्ते के सीमित दायरे को खत्म किए जाने का प्रावधान है, वहीं विगत में आए बच्चों की सजा बढ़ाने के प्रस्ताव को टाला गया है। अब इसे सिर्फ प्रतीकात्मक तौर पर ही रखा जायेगा। 

वहीं गुजारा भत्ता देने की जवाबदेही का विस्तार करते हुए अब पात्र बच्चों के दायरे में दामाद, पुत्रवधु,नाती-पोते, पोती-नातिन व अल्पवयस्क बच्चों के विधिक अभिभावकों को भी शामिल किया गया है। अब तक इस जवाबदेही के दायरे में बेटा-बेटी व दत्तक बेटा-बेटी ही शामिल थे। इसके अलावा विधेयक में प्रत्येक जिले में बुजुर्गों की गणना, मेडिकल सुविधाओं से लैस वृद्ध आश्रम व जिला स्तर पर एक सेल गठित करने जैसे प्रावधान हैं।

Published / 2024-07-17 21:19:49
सरकारी घोषित हुई माफिया अतीक की 50 करोड़ की बेनामी संपत्ति

एबीएन सेंट्रल डेस्क। माफिया अतीक अहमद की अपराध से अर्जित करीब 50 करोड़ रुपये मूल्य की कुर्क की गई बेनामी संपत्ति को न्यायालय (गैंगस्टर) ने राज्य सरकार के पक्ष में निहित कर दिया है। जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) गुलाब चंद्र अग्रहरि ने बताया कि अतीक अहमद ने अपराध की कमाई से यह संपत्ति लालापुर के राजमिस्त्री हूबलाल ने नाम पर खरीदी थी।

लगभग 2.377 हेक्टेयर भूमि की उस समय कीमत 12.42 करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर थी। उन्होंने बताया कि हूबलाल के नाम पर जमीन का बैनामा करते समय अतीक अहमद द्वारा कहा गया था कि जरूरत पड़ने पर इस जमीन का बैनामा वह अपने नाम करा लेगा। अग्रहरि ने कहा कि पुलिस आयुक्त न्यायालय द्वारा इस संपत्ति को गैंगस्टर एक्ट की धारा 14 (1) के तहत कुर्क किया गया और जवाब दाखिल करने के लिए तीन महीने का समय दिया गया। लेकिन इस तीन महीने के भीतर संबंधित पक्ष ने जमीन के पक्ष में कोई साक्ष्य नहीं पेश किया।

उन्होंने बताया कि इसके बाद पुलिस आयुक्त न्यायालय ने इस मामले में पत्रावली को न्यायालय (गैंगस्टर) के पास भेज दिया। मंगलवार को न्यायाधीश विनोद कुमार चौरसिया ने पुलिस आयुक्त की कार्यवाही को उचित और न्यायसंगत माना और अपराध से अर्जित इस बेनामी संपत्ति को राज्य सरकार के पक्ष में निहित कर दिया। 

पुलिस के मुताबिक, अतीक के खिलाफ गैंगस्टर कानून के तहत दर्ज मुकदमे की विवेचना के दौरान पता चला कि एयरपोर्ट थाना क्षेत्र में हूबलाल के नाम पर अतीक की संपत्ति है। पूछताछ में हूबलाल ने बताया कि अतीक ने वर्ष 2015 में धमकाकर उसके नाम पर यह जमीन लिखवाई थी। पुलिस ने नवंबर, 2023 में इस जमीन को कुर्क कर दिया था।

उल्लेखनीय है कि उमेश पाल हत्याकांड सहित 100 से अधिक आपराधिक मामलों में नामजद अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की पिछले वर्ष 15 अप्रैल को प्रयागराज के काल्विन अस्पताल में गोली मारकर हत्या कर दी गयीथी। वहीं अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन, गुड्डू मुस्लिम, अशरफ की पत्नी जैनब सहित कई अभियुक्त अब भी फरार हैं।

Published / 2024-07-10 21:47:03
डायन बताकर जानलेवा हमला करने वाली महिला आरोपी को नहीं मिली अग्रिम जमानत

टीम एबीएन, रांची।  सोनाहातु थाना क्षेत्र अंतर्गत लान्दुपडीह गांव में डायन कहकर पत्थर से कुचल कर जानलेवा हमला करने वाली महिला करूणा देवी पति फणिभूषण महतो की अग्रिम जमानत याचिका आज न्यायायुक्त दिवाकर पांडेय की अदालत ने खारिज कर दी। 

उल्लेखनीय है कि पिछले 27 मई को लान्दुपडीह गांव की एक विधवा वृद्ध महिला करुणा देवी पति चित्तरंजन महतो को घर के पीछे गोबर लीपने के दौरान गांव की ही करूणा देवी पति फणिभूषण महतो ने गाली गलौज करते हुए पत्थर से सिर और चेहरा में कुचल कर बुरी तरह से घायल कर दिया था। 

इस संबंध में वृद्ध महिला के पुत्र बिपिन बिहारी महतो ने सोनाहातु थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी थी। रांची सिविल कोर्ट के अधिवक्ता मृत्युंजय प्रसाद ने आरोपी महिला की अग्रिम जमानत का पुरजोर विरोध किया।

Published / 2024-07-06 23:05:52
19 तक जेल में ही रहेंगे पूर्व डीसी छवि रंजन

  • रांची के पूर्व उपायुक्त छवि रंजन सहित सात की न्यायिक हिरासत अवधि बढ़ायी गयी

टीम एबीएन, रांची। चेशायर होम रोड की एक एकड़ जमीन की बिक्री से जुड़े मनी लाउंड्रिंग मामले में आरोपित रांची के पूर्व उपायुक्त छवि रंजन सहित सात की न्यायिक हिरासत अवधि पीएमएलए कोर्ट ने दो सप्ताह के लिए बढ़ा दी है। 

इससे पूर्व जेल में बंद आरोपितों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से शुक्रवार को पेश किया गया। अदालत ने अगली पेशी की तिथि 19 जुलाई निर्धारित की है। वर्तमान में यह मामला आरोप गठन के बिंदु पर सुनवाई पर लंबित है। आरोपितों को पुलिस पेपर सौंप दिया गया है। 

मामले में रांची के पूर्व उपायुक्त छवि रंजन, प्रेम प्रकाश, भरत प्रसाद, राजेश राय, इम्तियाज अहमद, अफसर अली और मो सद्दाम न्यायिक हिरासत में है। जबकि कारोबारी विष्णु अग्रवाल को हाई कोर्ट से जमानत प्राप्त है। वहीं एक आरोपित पुनीत भार्गव फरार चल रहा है।

Published / 2024-07-02 20:58:26
झारखंड : नये कानून के तहत शुरू हो गये एफआइआर

देश में लागू हुए 3 नये अधिनियम कानून, झारखंड के सभी राज्यों में नई व्यवस्था के तहत की जा रही है एफआइआर

टीम एबीएन, रांची। 1 जुलाई से पूरे देश में 3 नये अधिनियम कानून लागू हो गये हैं। इसे लेकर झारखंड पुलिस ने कार्य प्रारंभ कर दिया है। सभी राज्यों में नयी व्यवस्था के तहत प्राथमिकी दर्ज की जा रही है। गिरिडीह के एसपी दीपक ने बताया कि 3 नए अधिनियम के आधार पर अब परिवर्तित धाराओं में कांड दर्ज किये जायेंगे। इसमें पूरे सिस्टम को पूरी न्यायिक प्रणाली को और पूरे कानून को पारदर्शी बनाने का हर संभव प्रयास किया गया है। 

उन्होंने बताया कि अब घटना कहीं भी हो, व्यक्ति कोई भी हो, प्राथमिकी किसी भी थाना में जाकर दर्ज करवायी जा सकती है। उस प्राथमिकी की, प्राथमिकी के बाद आगे की कार्रवाई की जानकारी आवेदक को समय- समय पर मिलती जायेगी।   

एसपी दीपक ने बताया कि यह बहुत बड़ा क्रांतिकारी कदम है। इस व्यवस्था में पारदर्शिता रहेगी और लोगों का भरोसा कानून व्यवस्था पर बढ़ेगा। एसपी ने बताया कि इन नये कानून अपराध नियंत्रण और विधि व्यवस्था संधारण में पुलिस को काफी सहयोग मिलेगा। आर्थिक अपराध, आतंकवाद, महिला हिंसा समेत कई मामले में नए कानून का समावेश, धाराओं को समावेश किया गया है। उन्होंने बताया कि महिला हिंसा के मामले में कठोर सजा का समावेश हुआ है।

Published / 2024-06-21 21:32:25
1 जुलाई को अर्हता तिथि मानते हुए 18 वर्ष पूरे करने वाले नये मतदाताओं को मतदाता सूची से जोड़ें : सीईओ

भारत निर्वाचन आयोग ने 20 अगस्त को अद्यतन मतदाता सूची के प्रकाशन की तिथि की निर्धारित 

मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण का कार्य ससमय दक्षता से पूर्ण करें पदाधिकारी 

टीम एबीएन, रांची। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार ने भारत निर्वाचन आयोग की ओर से मतदाता सूची के प्रकाशन को लेकर प्राप्त निर्देशों के आलोक में सभी जिलों के जिला निर्वाचन पदाधिकारियों एवं उप निर्वाचन पदाधिकारियों के साथ निर्वाचन सदन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक की। 

उन्होंने सभी जिलों में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम का कार्य पूरी दक्षता के साथ ससमय सम्पन्न कराने के निर्देश सभी संबंधित पदाधिकारियों को दिये। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा 25 जून से मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम का कार्य प्रारंभ करने के निर्देश प्राप्त हैं। 

इस दौरान सभी बीएलओ को मतदाताओं के घर-घर जाकर मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्य करना है। इस दौरान 1 जुलाई को अर्हता तिथि मानते हुए 18 वर्ष पूरे करने वाले नए मतदाताओं को मतदाता सूची से जोड़ने का कार्य करना है साथ ही शिफ्टेड, डुप्लीकेट और मृत मतदाताओं का सत्यापन करते हुए मतदाता सूची से उनका विलोपन नियमानुसार सुनिश्चित करना है।  

इस दौरान उन्होंने कहा कि मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम के दौरान सभी बीएलओ को रंगीन मतदाता सूची दी गयी है, उस सूची से मिलान करते हुए पुराने लेमिनेटेड कार्ड को बदलने का कार्य किया जाना है, इस दौरान इस बात का भी ध्यान रखा जाना है कि नए सूची में यदि किसी का फोटो साफ नहीं दिख रहा तो वैसे कार्ड को भी बदलना है।  

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि भारत निर्वाचन आयोग के निदेर्शानुसार 1 जुलाई तक उक्त कार्य के साथ साथ 1500 से अधिक मतदाता संख्या वाले मतदान केंद्रों की सूची समर्पित करें ताकि आवश्यकतानुसार नये मतदान केंद्रों की जरूरत का निर्णय ससमय किया जा सके। 

उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्र में 500 से अधिक मतदाता वाले हॉउसिंग सोसाईटीज में सोसाइटी के अंदर ही मतदान केंद्र बनाने का निर्देश पहले ही जारी है, इस बाबत सभी संबंधित सोसाईटी एवं उस हेतु चयनित मतदान केंद्र की सूची भी ससमय उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने सभी मतदाताओं से भी अपील की कि मतदाता पुनरीक्षण कार्यक्रम के दौरान जिन मतदाताओं का नाम मतदाता सूची में नहीं है अथवा किसी प्रकार के सुधार कराने हैं। वे अविलंब आनलाइन माध्यम से अथवा अपने बीएलओ से मिलकर अपना आवेदन समर्पित कर दें जिससे आने वाले विधानसभा चुनाव में वे अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें। 

बैठक में अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी डॉ नेहा अरोड़ा, संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुबोध कुमार, ओएसडी गीता चौबे, अवर निर्वाचन पदाधिकारी सुनील कुमार सहित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के जिला निर्वाचन पदाधिकारी, उप निर्वाचन पदाधिकारी उपस्थित रहे।

Published / 2024-06-20 20:53:51
कोडरमा : दुष्कर्म के दोषी को 16 वर्ष सश्रम कारावास

  • अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय अजय कुमार सिंह की आदालत ने सुनायी सजा, 5000 रुपये जुर्माना भी लगाया 
  • जुर्माना की राशि नहीं देने पर 6 माह अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी 
  • अदालत ने त्वरित सुनवाई करते हुए आरोप गठन के करीब डेढ़ माह के अंदर सुनायी सजा 

टीम एबीएन, कोडरमा। डोमचांच थाना कांड संख्या 13/ 2024 एसटी 52/ 2024 लकड़ी चुनने गयी बिरहोरीन महिला के साथ जबरन दुष्कर्म किये जाने के एक मामले की सुनवाई करते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय अजय कुमार सिंह की अदालत ने गुरुवार को आरोपी  संजय बिरहोर, उम्र  40 वर्ष, पिता मंगर विरहोर, ग्राम - जिओरायडीह, थाना- डोमचांच,जिला कोडरमा,, निवासी को आईपीसी की धारा 376 (2)(एन) का दोषी पाते हुए 16 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनायी है। साथ ही 5000 रुपये जुर्माना लगाया। जुर्माना की राशि नहीं देने पर 6 माह अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। 

क्या है मामला 

मुक्तभोगी महिला ने थाना को दिये आवेदन में कहा था कि 2 फरवरी 2024 को समय करीब 10 बजे मैं अपने गांव के दो अन्य वीरहोरीन के साथ चंदन चूल्हा जंगल में  बकरी चराने गयी थी। जब हम लोग घर वापस आ रहे थे तब वह उन दोनों विरहोरीन के पीछे आ रही थी। इसी दौरान कोई मेरे पीछे से आकर मेरा मुंह दबा दिया। जब पीछे देखी तो मेरे ही गांव का संजय विरहोर पिता मंगल बिरहोर, मेरा मुंह दबाकर पकड़े हुए हैं। 

संजय विरहोर मुझे घसीट कर जंगल में एक पेड़ के पास ले गया और साड़ी फाड़ दिया और रस्सी से मुझे पेड़ में बांध दिया और जबरदस्ती मेरे साथ बलात्कार किया। वह पुन: मुझे वहां से घसीट कर पश्चिम दिशा में दूर ले जाकर जमीन में पटक दिया तथा दोबारा वहां मेरे साथ जबरदस्ती बलात्कार किया। फिर मैं संध्या में किसी तरह छुड़ाकर भाग कर गांव आयी और गांव के लोगों को बतायी। गांव के रात्रि करीब 9 बजे संजय को पकड़ कर ग्रामीण महिलाओं ने बंद कर रखा और पुलिस को सौंप दिया। भुक्तभोगी महिला ने पुलिस से उचित कार्रवाई करने का अनुरोध किया था। 

अभियोजन का संचालक लोक अभियोजक पीपी एंजेलिना वारला ने किया। इस दौरान सभी 10 गवाहों का परीक्षण कराया गया। लोक अभियोजक पीपी ने कार्रवाई के दौरान न्यायालय से अभियुक्त को अधिक से अधिक सजा देने का आग्रह किया। वहीं बचाव पक्ष की ओर से  एलएडीसीएस की अधिवक्ता किरण कुमारी ने दलीलें पेश करते हुए बचाव किया। अदालत ने सभी गवाहों और साक्ष्यो का अवलोकन करने के उपरांत अभियुक्त को दोषी पाते हुए सजा मुकर्रर की और जुर्माना लगाया।

Published / 2024-06-17 20:54:13
एक और झटका... एटीएम से पैसे निकालने पर देना होगा अधिक चार्ज

एटीएम आपरेटरों ने आरबीआइ से की फीस बढ़ाने मांग

एबीएन सेंट्रल डेस्क। एटीएम से पैसा निकालने वालों से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आयी है। आपको तय फ्री लिमिट के बाद कैश निकालने पर ज्यादा शुल्क चुकाने पड़ सकते हैं। दरअसल, देश के एटीएम आॅपरेटरों ने कैश निकासी पर ग्राहकों की ओर से भुगतान किये जाने वाले इंटरचेंज फीस में बढ़ोतरी की मांग की है। एटीएम आॅपरेटर ने इस सिलसिले में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) से संपर्क किया है।

23 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन करने की डिमांड

एटीएम उद्योग परिसंघ चाहता है कि इस इंटरचेंज फीस को बढ़ाकर अधिकतम 23 रुपये प्रति ट्रांजेक्शन किया जाये ताकि बिजनेस के लिए ज्यादा फंडिंग जुटायी जा सके। एटीएम बनाने वाली कंपनी एजीएस ट्रांजैक्ट टेक्नोलॉजीज के कार्यकारी निदेशक स्टेनली जॉनसन ने कहा कि दो साल पहले इंटरचेंज रेट में बढ़ोतरी की गयी थी। हम आरबीआई से संपर्क कर रहे हैं और उम्मीद है कि वे इसका समर्थन करेगी। 

हमने फीस को बढ़ाकर 21 रुपये करने की अपील है, जबकि कुछ अन्य एटीएम बनाने वाली कंपनियों ने इसे बढ़ाकर 23 रुपये करने की मांग की है। पिछली बार, इसे बढ़ाने में कई साल लग गये थे लेकिन मुझे लगता है कि सभी लोग एकमत हैं और यह केवल समय की बात है कि फीस में बढ़ोतरी कब होगी।

2021 में हुई थी बढ़ोतरी

बता दें कि साल 2021 में एटीएम ट्रांजैक्शन पर इंटरचेंज फीस 15 रुपये से बढ़ाकर 17 रुपये कर दी गयी थी। एटीएम इंटरचेंज वह फीस होती है जो कार्ड जारी करने वाले बैंक (जारीकर्ता) की ओर उस बैंक को दिया जाता है जहां कार्ड का इस्तेमाल नकदी निकालने के लिए किया जाता है। एक अन्य एटीएम निर्माता ने कहा- इंटरचेंज रेट बढ़ाने के लिए हर जगह अपनी मांगों को उठाया गया है। 

एनपीसीआई के माध्यम से एक प्रतिनिधित्व भेजा गया है और बैंक भी फीस पर बढ़ोतरी के लिए राजी है। इंटरचेंज शुल्क में वृद्धि एनपीसीआई द्वारा लिया गया निर्णय है क्योंकि दर उनके द्वारा तय की जाती है। 

मालूम हो कि मौजूदा समय में देश के छह मेट्रो शहरों बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई और नई दिल्ली में बैंक अपने बचत बैंक खाताधारकों को एक महीने में न्यूनतम पांच फ्री ट्रांजैक्शन की सुविधा देते हैं, जबकि किसी अन्य बैंक के एटीएम पर तीन बार लेन-देन फ्री है।

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