कानून व्यवस्था

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Published / 2025-02-16 18:41:44
नंबर प्लेट से छेड़खानी करने पर होंगी सख्त कार्रवाई, सक्रिय हुई पुलिस

  • नंबर प्लेट के साथ छेड़खानी करने वालों की खैर नहीं
  • पुलिस ने दिखाये सख्त तेवर, अब एक्शन की तैयारी

टीम एबीएन, रांची। राजधानी रांची में जब से ऑनलाइन चालान कटना शुरू हुआ है, तब से ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले लोग तरह-तरह की जुगाड़ लगाकर फाइन से बचने में लगे हुए हैं। कोई नंबर प्लेट पर टेप चिपका दे रहा है तो कोई एक डिजिट नंबर ही मिटा दे रहा है। इसे देखते हुए नंबर टेंपरिंग करने वालों के खिलाफ एफआईआर की तैयारी शुरू हो गई है।

राजधानी में ट्रैफिक पुलिस इन दोनों खासा परेशान है। दरअसल, ट्रैफिक नियमों में ईमानदारी बरतने के साथ-साथ चालान से बचने के लिए भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने जैसे मामलों पर ब्रेक लगाने के लिए ट्रैफिक पुलिस के द्वारा शहर में लगाए गए ऑटोमेटिक कैमरे के जरिए चालान काटा जा रहा है। मैन्युअल चालान काटना लगभग बंद कर दिया गया है।

नतीजा यह हुआ कि ट्रैफिक नियमों को ताक पर रखकर चलने वाले लोग ऑनलाइन चालान से बचने के लिए अपने नंबर प्लेट को ही टेंपर कर वाहन चलाने लगे। गलत नंबर प्लेट होने की वजह से कई लोगों के फाइन नहीं कटे, इसके लिए कुछ लोगों ने किसी अन्य व्यक्ति के कार का नंबर अपनी स्कूटी में लगाकर चलाना शुरू कर दिया। यह मामला इतनी बढ़ गई कि गलती स्कूटी की और चालान पहुंचना कार मालिकों के पास शुरू हो गया।

Published / 2025-02-15 22:54:21
रांची नगर निगम ने होल्डिंग व ट्रेड लाइसेंस की जांच कर शुरू की कार्रवाई

टीम एबीएन, रांची। रांची नगर निगम के राजस्व शाखा की टीम के द्वारा निगम क्षेत्रांतर्गत लगातार होल्डिंग व ट्रेड लाइसेंस की जांच करते हुए विभिन्न भवनों एवं प्रतिष्ठानों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। इस क्रम में आज दिनांक 15.02.2025 को सहायक प्रशासक के नेतृत्व में राजस्व शाखा की गठित टीम के द्वारा मेन रोड स्थित विभिन्न भवनों की जांच की गई। जिसमें सर्वप्रथम सेंट्रो मॉल की जांच की गई एवं भवन परिसर के क्षेत्र की मापी की गई। मापी के क्रम में क्षेत्रफल में अंतर पाया गया। 

पूर्व में मॉल द्वारा 1,02,732 sq. ft. क्षेत्र का निर्धारण किया गया था, परन्तु मापी के उपरांत 1,98,427 sq. ft. क्षेत्रफल पाया गया। इसके साथ ही मॉल की ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट की जांच की जिसपर पाया गया कि जून माह से मॉल की ऑक्यूपेंसी निर्धारित है। जिसपर सहायक प्रशासक द्वारा जून माह से ऑक्यूपेंसी तिथि मानते हुए री-असेसमेंट करते हुए सात दिनों के भीतर कर का भुगतान करने का निर्देश दिया गया। 

इसके अलावा राज अस्पताल को तीन दिनों के भीतर री असेसमेंट करने का निर्देश दिया गया। टीम के द्वारा चर्च कॉम्प्लेक्स परिसर की मापी की गई एवं भवन के ग्राउंड फ्लोर के मेज़ नाइन में कुछ नए दुकानें पाई गई, जिसपर सहायक प्रशासक द्वारा उक्त प्रतिष्ठानों को तीन दिनों के भीतर री-असेसमेंट करने एवं टॉप फ्लोर में अधिष्ठापित होर्डिंग्स व मोबाइल टावर के कार्पेट एरिया को गणना में सम्मिलित करते हुए कर का भुगतान करने का निर्देश दिया गया। 

इसके अलावा मेन रोड स्थित कच्ची बिल्डिंग की भी जांच की गई और तीन दिनों के भीतर री-असेसमेंट करने का निर्देश दिया गया। जांच टीम में नगर प्रबंधक, निगम के कर संग्रहकर्ता, एजेंसी के कर संग्रहकर्ता एवं राजस्व शाखा की अन्य कर्मी उपस्थित थे।

Published / 2025-02-11 22:58:00
मेडिकल क्लेम पर झारखंड हाई कोर्ट सख्त

  • शारीरिक-मानसिक बीमारी के नाम पर भेदभाव न करें, मेडिकल क्लेम पर झारखंड HC की टिप्पणी

टीम एबीएन, रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि मानसिक बीमारी के इलाज में होने वाले खर्च को मेडिकल क्लेम के दायरे से बाहर नहीं किया जा सकता। कोई भी कंपनी अपने मौजूदा या रिटायर्ड कर्मचारियों को मेडिकल क्लेम के भुगतान में शारीरिक और मानसिक बीमारी के नाम पर भेदभाव नहीं कर सकती।

यह फैसला जस्टिस आनंद सेन की बेंच ने झारखंड स्थित कोल इंडिया की सहयोगी कंपनी बीसीसीएल (भारत कोकिंग कोल लिमिटेड) के एक रिटायर एग्जीक्यूटिव की याचिका पर सुनवाई के बाद सुनाया। अदालत ने बीसीसीएल (BCCL) को आदेश दिया कि वह याचिकाकर्ता की पत्नी के मानसिक स्वास्थ्य इलाज पर किए गए खर्च का भुगतान करे।

मानसिक व शारीरिक बीमारियों के इलाज में भेदभाव न करें

बीसीसीएल ने कोल इंडिया और उसकी सहयोगी कंपनियों में लागू कंट्रीब्यूटरी पोस्ट रिटायरमेंट मेडिकेयर स्कीम फॉर एक्जीक्यूटिव्स ऑफ सीआईएल एंड इट्स सब्सिडियरीज के प्रावधान का हवाला देते हुए मानसिक बीमारी के इलाज में किए गए खर्च का भुगतान करने से इनकार कर दिया था। 

अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद अपने फैसले में कहा कि मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 की धारा 21 यह स्पष्ट करती है कि मानसिक और शारीरिक बीमारियों के इलाज में भेदभाव नहीं किया जा सकता।

मेडिकल क्लेम को लेकर झारखंड HC ने क्या कहा

कोर्ट ने अधिनियम का हवाला देते हुए कहा है कि प्रत्येक बीमाकर्ता को मानसिक रोगों के उपचार के लिए उसी तरह की स्वास्थ्य बीमा सुविधा प्रदान करनी होगी, जैसे कि शारीरिक बीमारियों के लिए की जाती है। कोर्ट ने कहा, भारत सरकार के अधिनियम के अनुसार, किसी भी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी में मानसिक रोगों के उपचार को बाहर करने के लिए प्रावधान नहीं हो सकता।

कोर्ट ने पाया कि कोल इंडिया और इसकी सहयोगी कंपनियों में मेडिकल बीमा की जो योजना लागू है, उसमें मानसिक रोगों के उपचार के खर्च के भुगतान का प्रावधान नहीं है। लेकिन, यह प्रावधान मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के सीधे विरोध में है।

कोई भी नीति संसद से पारित कानून के खिलाफ नहीं हो सकती

कोर्ट ने कहा, कोल इंडिया लिमिटेड और उसकी सहायक कंपनियां संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत राज्य की परिभाषा में आती हैं। उनकी कोई भी नीति या संकल्प संसद द्वारा पारित किसी भी कानून के खिलाफ नहीं हो सकती। अगर कोई संकल्प या उसका कोई भाग किसी संसदीय कानून के विपरीत है, तो वह भाग अमान्य माना जाएगा।

Published / 2025-02-11 19:18:52
एचईसी का बैंक खाता कोर्ट ने किया फ्रीज

टीम एबीएन, रांची। हटिया स्थित एसबीआई शाखा में संचालित एचईसी (हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन) का बैंक खाता फ्रीज कर दिया गया है। यह कार्रवाई कॉमर्शियल कोर्ट के स्पेशल जज चंद्रभानु कुमार के आदेश पर की गयी है। हावड़ा की कंपनी एंट्रीकेट इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड का एचईसी पर 28,21,481 रुपये का बकाया था, जो ब्याज सहित 1,62,57,000 रुपये हो गया है। 

अदालत के आदेश के बाद सोमवार को नाजिर जीशान इकबाल की अगुवाई में एक टीम हटिया स्थित एसबीआई शाखा पहुंची और एचईसी का बैंक खाता फ्रीज करा दिया। जानकारी हो कि 2011 में एचईसी ने हावड़ा की कंपनी को 3 क्रेन आपूर्ति करने का आॅर्डर दिया था। कंपनी ने जून 2015 तक 2 के्रन की आपूर्ति कर दी। लेकिन एचईसी ने 28,21,481 रुपये का भुगतान नहीं किया। 

बकाया न मिलने पर कंपनी ने तीसरी के्रन की आपूर्ति रोक दी और कोलकाता की पश्चिम बंगाल माइक्रो लघु उद्योग सुविधा परिषद में शिकायत दर्ज करायी। परिषद ने एचईसी को बकाया भुगतान का आदेश दिया, लेकिन एचईसी ने पैसे नहीं चुकाये। इसके बाद 2022 में कंपनी ने रांची सिविल कोर्ट स्थित कॉमर्शियल कोर्ट में मुकदमा दायर कर दिया। 

लंबे समय तक भुगतान न होने के कारण कोर्ट ने एचईसी के बैंक खाते को फ्रीज करने का आदेश दिया। अब जब तक कंपनी को बकाया राशि नहीं मिलती, एचईसी को अपने वित्तीय लेन-देन में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

Published / 2025-02-08 21:53:15
झारखंड में नगर निकाय चुनाव कराने को लेकर हाइकोर्ट सख्त

  • झारखंड में विधानसभा चुनाव की वोटर लिस्ट के आधार पर हो सकती नगर निकाय चुनाव की वोटिंग : झारखंड उच्च न्यायलय 

टीम एबीएन, रांची। झारखंड हाइकोर्ट में शुक्रवार को नगर निगम व निकाय चुनाव मामले में दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई की गयी। न्यायमूर्ति आनंद सेन ने पूर्व वार्ड पार्षद रोशनी खलको की अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई। 

झारखंड विस चुनाव में उपयोग किये गये वोटर लिस्ट से ही होगी वोटिंग सुनवाई के दौरान भारत निर्वाचन आयोग के शपथ पत्र को देखकर कोर्ट ने कहा कि झारखंड विधानसभा चुनाव में उपयोग किया गया वोटर लिस्ट ही अपडेटेड वोटर लिस्ट है, इसी वोटर लिस्ट के आधार पर नगर निकाय चुनाव कराये जा सकते हैं। 

वहीं राज्य निर्वाचन आयोग ने भी कहा कि इस मतदाता सूची के आधार पर ही पर ही चुनाव कराये जायेंगे। साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग ने कहा कि वार्डवार वोटरलिस्ट तैयार करने में कम से कम 75 दिन लग जायेंगे। वहीं अदालत ने सभी दलीलों को सुनने के बाद अगली सुनवाई 12 हफ्तों के बाद निर्धारित की है।

जानकारी हो कि झारखंड में स्थानीय नगर निकाय चुनाव अप्रैल 2023 से लंबित हैं। न्यायमूर्ति सेन ने जनवरी 2024 में राज्य सरकार को तीन हफ्ते में चुनाव कराने का निर्देश दिया था। हालांकि, सरकार समय सीमा पर अमल करने में नाकाम रही, जिसके बाद खलको ने उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर की।

Published / 2025-02-05 20:53:46
राष्ट्रपति पर टिप्पणी मामले में सोनिया-राहुल पर रांची में केस

सोनिया और राहुल गांधी के खिलाफ रांची के थाने में शिकायत दर्ज, जानिये क्या है मामला 

टीम एबीएन, रांची। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लेकर सोनिया गांधी के द्वारा की गयी टिप्पणी का विवाद बढ़ता ही जा रहा है। अब झारखंड में जनजाति सुरक्षा मंच की तरफ से रांची के एससी- एसटी थाना में सांसद राहुल गांधी और सोनिया गांधी के खिलाफ शिकायत दर्ज की गयी है। बता दें कि जनजाति सुरक्षा मंच संगठन की महिला प्रमुख अंजलि लकड़ा की तरफ से ये शिकायत दर्ज करायी गयी है।  

क्या है आवेदन में 

अंजलि लकड़ा ने आवेदन में लिखा है कि राहुल गांधी द्वारा बोरिंग कहकर अपमान करना और सोनिया गांधी के द्वारा राष्ट्रपति को पूअर लेडी, असहाय, लाचार, गरीब महिला और थकी हुई कहकर, भारत के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति, भारत के प्रथम नागरिक, तीनों सेनाओं के अध्यक्ष के पद पर आसीन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सोची समझी साजिश के तहत अनुसूचित जनजाति आदिवासी महिला को योजनाबद्ध तरीके से प्रताड़ित किया गया। 

आवेदन में यह भी लिखा गया है कि यह अपमान पूरे देश के साथ-साथ अनुसूचित जनजाति आदिवासी समाज का अपमान है। मामले में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अत्याचार अधिनियम 1989 के अंतर्गत उचित कानूनी कार्रवाई की जाये।

Published / 2025-02-04 23:21:36
भूमि घोटाला : कई आरोपियों के खिलाफ आरोप गठित

  • चेशायर होम जमीन फर्जीवाड़े में आईएएस अफसर छवि रंजन, कारोबारी विष्णु अग्रवाल समेत 9 के खिलाफ आरोप गठित

टीम एबीएन, रांची। सिविल कोर्ट रांची के पीएमएलए के विशेष न्यायाधीश की अदालत ने मंगलवार को बरियातू के चेशायर होम रोड स्थिति 1 एकड़ जमीन की अवैध तरीके खरीद-फरोख्त करने के आरोप में शामिल रांची के पूर्व डीसी छवि रंजन समेत 9 आरोपियों के खिलाफ आरोप गठित कर दिया है। इससे आरोपियों की मुश्किलें बढ़ गई है। मामले में अब ईडी की ओर से साक्ष्य प्रस्तुत किया जाएगा। एक आरोपी कोर्ट नहीं पहुंचा। जिसके कारण उस पर आरोप तय नहीं हो सका है।

मामले में रांची के पूर्व उपायुक्त छवि रंजन, व्यवसायी अमित कुमार अग्रवाल, सत्ता के दलाल प्रेम प्रकाश, कारोबारी विष्णु अग्रवाल, दिलीप घोष, भरत प्रसाद, इम्तियाज अहमद, अफसर अली और मो सद्दाम पर आरोप गठित किया गया है। पिछले दिनों मामले के आरोपियों की ओर से दाखिल डिस्चार्ज पिटीशन सुनवाई पश्चात एक-एक करके खारिज कर दी थी।

मामले में आरोप गठन पर सुनवाई के दौरान आरोपियों ने अपने आप को निर्दोष बताया। कहा कि आगे मामले में ट्रायल फेस करेंगे। इसके बाद अदालत ने आरोप गठन की प्रक्रिया पूरी की। जानकारी हो कि छवि रंजन सेना के कब्जे वाली 4.55 एकड़ जमीन फजीर्वाड़े में भी आरोपी हैं। इस मामले में वह 4 मई 2023 से जेल में है। चेशायर होम मामले में भी जेल में हैं। एक मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। लेकिन दूसरे मामले में जेल में रहने के कारण बेल नहीं ली है।

Published / 2025-02-04 23:18:27
सुनवाई में देरी पर सीबीआई के जवाब से हाईकोर्ट नाराज

  • सांसदों-विधायकों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की सुनवाई में देरी पर सीबीआई के जवाब से हाईकोर्ट असंतुष्ट, मांगा पुन: जवाब

टीम एबीएन, रांची। झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस एसएन प्रसाद व जस्टिस नवनीत कुमार की खंडपीठ में सांसद-विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले के त्वरित निष्पादन में देरी को लेकर मंगलवार को सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने सीबीआइ के जवाब पर असंतुष्टि जताते हुए जवाब मांगा है। 

अदालत ने सीबीआइ से पूछा है कि झारखंड में सांसद-विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों के ट्रायल को पूरा करने में क्यों देरी हो रही है? लंबित सभी 15 केस में गवाही पूरी होने में देरी का कारण स्पष्ट करें। अदालत ने मौखिक कहा कि सांसद-विधायकों के कई केस में आरोप गठित होने के पांच साल बाद भी गवाही की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से ट्रायल लंबित है। मामले में अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी। अदालत ने कहा कि सीबीआइ जैसी संस्था गवाहों को जल्द लाने में असफल साबित हो रही है। ट्रायल में देरी होने से गवाहों में डर का माहौल बना रहता है।

महाधिवक्ता ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से मांगी वर्चुअल सुनवाई की रिकॉर्डिंग, खर्च देने को तैयार

एक मामले में सीबीआइ ने भी स्वीकार किया है कि ट्रायल में गवाहों को धमकाए जाने की आशंका को देखते हुए उस गवाह की गवाही कराने के लिए वीडियो कान्फ्रेंसिंग का भी सहारा लेना पड़ा है। कोर्ट ने मौखिक कहा कि प्रतीत होता है कि सीबीआइ सांसद-विधायकों के लंबित केस के जल्द निष्पादन को लेकर गंभीर नहीं है। इनके खिलाफ आपराधिक मामले को जल्द क्यों नहीं निपटाया जा रहा है। सांसद- विधायकों के अधिकांश लंबित मामलों में गवाही की प्रक्रिया काफी धीमी है। 

गवाहों को जल्द लाकर ट्रायल प्रक्रिया पूरी की जाए ताकि जल्द से जल्द अंतिम फैसला हो सके। ट्रायल में देरी से गवाहों पर भी असर पड़ता है। उनकी गवाही प्रभावित होती है। पूर्व की सुनवाई में भी हाई कोर्ट ने राज्य के सांसद-विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के निष्पादन में देरी होने पर असंतोष जताते हुए कड़ी टिप्पणी की थी। सीबीआइ ने अपने शपथ पत्र में सांसद और विधायकों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की लंबित रहने का सटीक कारण कोर्ट को नहीं बताया था।

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