टीम एबीएन, रांची। विवादित सातवीं जेपीएससी पीटी परीक्षा का परिणाम संशोधित होगा। झारखंड लोक सेवा आयोग ने सातवीं जेपीएससी पीटी परीक्षा परिणाम को संशोधित कर फिर से निकालने के लिए झारखंड हाई कोर्ट से अनुमति मांगी है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने बताया कि जेपीएससी ने हाईकोर्ट में आवेदन देकर संशोधित रिजल्ट निकालने देने की अनुमति मांगी है। उन्होंने यह भी बताया कि आयोग ने इसके लिए सामान्य श्रेणी के छात्रों का न्यूनतम कटऑफ अंक 260 से घटाकर 248 कर दिया है। प्रथमदृष्टया लगता है कि सामान्य छात्रों को इससे काफी लाभ होगा। इससे पहले झारखंड लोक सेवा आयोग ने कैटेगरी के अनुसार रिजल्ट जारी किया था, जिसे अप्रत्यक्ष रूप से आरक्षण देने जैसा माना जा रहा था। जिसको चुनौती दी गई थी। इस पर जेपीएससी को अपनी भूल समझ में आई और उसके बाद सुनवाई के दौरान जेपीएससी ने मुख्य परीक्षा को स्थगित कर दिया। साथ ही अदालत से मामले में जवाब पेश करने के लिए समय की मांग की। इसके बाद आयोग ने संशोधित रिजल्ट के लिए याचिका दायर किया है। मामले की अगली सुनवाई 15 फरवरी को होनी है। इससे पहले 7वीं जेपीएससी पीटी परीक्षा के रिजल्ट को रद्द कर फिर से संशोधित रिजल्ट निकालने की मांग को लेकर दायर याचिका पर झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डॉ रवि रंजन और न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत में 25 जनवरी को सुनवाई हुई थी। इसमें जेपीएससी पीटी परीक्षा में दिए गए आरक्षण के बिंदु पर सुनवाई थी। इस दौरान जेपीएससी ने तत्काल मुख्य परीक्षा 2 सप्ताह के लिए स्थगित करने की बात कहते हुए अदालत से मामले में जवाब पेश करने के लिए समय लिया था। अदालत ने उन्हें समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई 15 फरवरी को तय की थी। बता दें कि 28 जनवरी से जेपीएससी की मुख्य परीक्षा होने वाली थी जिसे स्थगित कर दिया गया था।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में कोरोना संक्रमण की रफ्तार काफी कम हो गई है, इसे देखते हुए खेल जगत भी फिर से एक्टिव हो रहा है। लंबे समय के ब्रेक के बाद फिर से प्रतिभाओं को निखारने के उद्देश्य से राज्य में 21 से 24 फरवरी तक जिला स्तर पर प्रतियोगिता और 1 से 4 मार्च तक राज्य स्तर पर प्रतियोगिताओं का आयोजन होना है। इसे लेकर झारखंड खेलकूद युवा कार्य निदेशालय की ओर से दिशा-निर्देश जारी किया गया है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए लंबे समय से राज्य के खेल स्टेडियम बंद पड़े थे। खिलाड़ियों को किसी भी आयोजन में हिस्सा लेने से मनाही था। सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के खिलाड़ियों को प्रैक्टिस करने में भी कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन धीरे-धीरे अब खेल जगत में भी छूट मिली है। झारखंड में खेलकूद युवा कार्य निदेशालय की ओर से 2021-22 के आयोजनों के जरिए प्रतिभा चयन की योजना बनाई गई है। राज्य के आवासीय और डे बोर्डिंग सेंटरों के लिए योग्य प्रतिभाओं की खोज में कार्यक्रम शुरू करने की तिथि भी निर्धारित की गई है। आवासीय और डे बोर्डिंग सेंटर में बेहतर खिलाड़ियों का चयन कर रखा जाता है और उन्हें उचित मार्गदर्शन के साथ प्रशिक्षित किया जाता है, ताकि वह राज्य और देश के लिए मैडल जीत सकें। इसके लिए जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक चयन प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। एक बार फिर राज्य सरकार के खेल निदेशालय ने इस संबंध में राज्य के सभी जिला अधिकारियों को निर्देश भेजा है। निर्देश के मुताबिक जिला स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन जिला मुख्यालय में 21 से 24 फरवरी तक होगा। वहीं राज्यस्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन 1 से 4 मार्च के बीच रांची में आयोजित की जाएगी। इस प्रक्रिया के तहत होगा चयन: झारखंड खेलकूद युवा कार्य निदेशालय से मिली जानकारी के मुताबिक जिला स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन सभी जिलों में आयोजित होगी। प्रत्येक जिले में इसके लिए 2 लाख खर्च भी किया जाएगा। राज्य सरकार ने 24 जिलों के लिए 48 लाख रुपए खर्च का बजट बनाया है। जो बच्चे सिलेक्शन ट्रायल में हिस्सा लेंगे उनके लिए जन्मतिथि और एज ग्रुप भी तय कर दिया गया है। जिला स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले 40 खिलाड़ियों का चयन किया जाएगा। जिसमें 20 बालक और 20 बालिका होगी। इसके बाद वे राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगे। इसमें बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को आवासीय प्रशिक्षण केंद्रों में प्रशिक्षण देने के लिए चयनित किया जाएगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ईडी ने झारखंड कोयला ब्लॉक आवंटन पीएमएलए मामले के तहत एक बायोमास ऊर्जा संयंत्र, दो ताप विद्युत संयंत्र तथा पश्चिम बंगाल और झारखंड में भूखंड समेत 1,621 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क की गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को यह जानकारी दी। कॉरपोरेट इस्पात एलॉयज लिमिटेड (सीआईएएल) नामक एक कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की गई है, जिसे झारखंड के लातेहार जिले में चित्तरपुर कोयला ब्लॉक आवंटित किया गया था। ईडी ने एक वक्तव्य में कहा, "धन शोधन निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत कुर्क की गयी संपत्ति में एक बायोमास ऊर्जा संयंत्र, दो ताप विद्युत संयंत्र, एक फेरो एलॉय प्लांट और डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन प्लांट के अलावा पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर और झारखंड के सरायकेला में स्थित भूखंड शामिल हैं।" प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का यह मामला सीआईएएल, उसके प्रवर्तकों और अन्य के खिलाफ कोयला ब्लॉक प्राप्त करने में कथित आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आपराधिक कदाचार के लिए सीबीआई की जनवरी, 2016 की प्राथमिकी पर आधारित है। ईडी ने कहा कि जांच में पाया गया कि कंपनी ने तथ्यों को गलत तरीके से पेश करके "धोखाधड़ी से" चित्तरपुर कोयला ब्लॉक प्राप्त किया।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड सरकार की कैबिनेट की बैठक गुरुवार को प्रोजेक्ट भवन में हुई। हेमंत कैबिनेट की बैठक में कुल 63 प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गयी है, जिसमें रांची में 4 फ्लाईओवर के लिए 337 करोड़ 50 लाख की स्वीकृति दी गयी है। राजधानी में सिरोम टोली चौक से राजेंद्र चौक होते हुए मेकॉन तक बनेगा चार लेन का फ्लाईओवर बनेगा, जिसकी लंबाई 2.34 किलोमीटर होगी और इसमें 337 करोड़ खर्च किए जाएंगे। योजना अंतर्गत पीडीएस दुकानदार को प्रति वस्त्र 1 रुपये की कमीशन मिलेगा। 1 करोड़ 28 लाख की स्वीकृति दी गयी है। कांची सिंचाई योजना के लिए 30 करोड़ की स्वीकृति मिली है। जल संसाधन विभाग अंतर्गत लिपिक टंकक हेतू नियमावली में संशोधन की स्वीकृति दी गयी है। इसके अलावा हेमंत कैबिनेट की बैठक में झारखंड वनवासी अधिनियम 2006 के तहत त्रिपक्षीय एमओयू के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। जनजातिय संरक्षण के लिए कुछ योजनाओं के नाम में संशोधन किया जाएगा। झारखंड सरकारी सेवक वर्गीकरण नियंत्रण अपील नियमावली 2016 में संशोधन की स्वीकृति मिली है। चार सहायक कारापाल की प्रोन्नति में अहर्ता क्षय करने की स्वीकृति दे दी गयी है। सीएक्ट स्कूल को दो साल का विस्तार मिला है। जल संसाधन विभाग में नियुक्ति नियमावली में संसोधन है। झारखंड पर्यटन नीति को घटनोतर स्वीकृति मिली है। साथ ही दुमका के गांधी चौक से करबिंदा चौक तक पथ निर्माण के लिए 68 करोड़ की मंजूरी मिली है। कई सड़कों को ग्रामीण कार्य विभाग से पथ निर्माण विभाग में ट्रांसफर करते हुए पथ निर्माण के लिए राशि की मंजूरी दी गयी है। जामताड़ा से गोविंदपुर के बीच 91 किलोमीटर सड़क की राइडिंग क्वालिटी सुधारने के लिए 63 करोड़ की मंजूरी मिली है। भंडरा सेन्हा पथ के लिए 64 करोड़ की मंजूरी मिली है। झारखंड लिपिकीय नियुक्ति नियमावली को मंजूरी दे दी गयी है। वन विकास परियोजना के लिए 136 करोड़ का ऋण नाबार्ड से सरकार लेगी। 14 ग्रामीण पुल के लिए 50 करोड़ ऋण नाबार्ड से सरकार लेगी। मुख्यमंत्री विशेष छात्रवृत्ति योजना की घटनोतर स्वीकृति मिली है। मुख्यमंत्री मेधा छात्रवृत्ति योजना में संसोधन को मंजूरी मिली है। साथ ही जाति प्रमाण पत्र ऑनलाइन के साथ साथ ऑफलाइन की स्वीकृति मिली है। इसके साथ ही हेमंत सोरेन कैबिनेट की बैठक में डॉ अनिल कुमार वर्णवाल की सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय हुआ है।
टीम एबीएन, रांची। रांची के डूमरदगा स्थित बाल सुधार गृह में बाल बंदियों के दो गुटों में हुए हिंसक झड़प के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए 10 बाल बंदियों को दूसरे जिलों में शिफ्ट कर दिया है। वहीं इस मामले में 13 पर एफआईआर दर्ज की गई है। क्या है पूरा मामलाः राजधानी के सदर थाना क्षेत्र स्थित डुमरदगा बाल सुधार गृह से 10 बाल बंदियों को झारखंड के दूसरे जिलों के तीन स्थानों पर शिफ्ट कर दिया गया है। बाल बंदियों से रंगदारी मांगने और अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए बदमाशी करने वाले बंदियों को रांची जिला प्रशासन ने चिह्नित किया है। जिसके बाद ऐसे 10 बाल बंदियों को तीन अलग-अलग स्थानों पर ट्रांसफर कर दिया गया। गौरतलब हो कि रविवार सुबह बाद बंदियों के दो गुट आपस में भिड़ गए थे। मारपीट में करीब 21 बाल कैदी घायल हो गए थे। इसमें एक पक्ष के 10 और दूसरे पक्ष के 3 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। इनका इलाज रिम्स और सदर अस्पताल में चल रहा है। बाल बंदियों के बीच हुई मारपीट मामले में रांची सदर थाने में 13 बाल कैदियों पर एफआईआर भी दर्ज कराई गई है। एफआईआर वरीय गृहपति अबु सुफियान की ओर से दर्ज कराई गई है, जिसमें 13 बाल बंदियों द्वारा वार्ड नंबर दो के युवकों से मारपीट की बात कही गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।
टीम एबीएन, रांची। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने रिम्स पर बड़ी कार्रवाई की है। बताया गया कि अस्पताल कैंपस में बड़ी मात्रा में मेडिकल वेस्ट फैला होने और इसका ठीक तरीके से निस्तारण न होने के चलते बोर्ड ने ये कार्रवाई की है। 1800 बेड वाले अस्पताल में हर रोज कई टन मेडिकल वेस्ट निकलता है। प्रदूषण नियंत्रण पार्षद ने रिम्स का निरीक्षण किया था, जिसमें बड़े स्तर पर खामियां सामने आई थीं। जानकारी के मुताबिक, रिम्स में हर दिन कई टन मेडिकल बॉयोवेस्ट जमा होता है, लेकिन इसका ठीक तरह से निस्तारण नहीं हो रहा है। हर दिन अस्पताल से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट (केमिकल, यूज्ड मेडिसिन, सिरिंज, पीपीई किट, ग्लव्स आदि) को सफाई कर्मी ट्रॉली में लादकर रिम्स के न्यू गर्ल्स हॉस्टल के पीछे बने इंसीनेटर के समीप ले जाकर फेंक देते हैं। इंसीनेटर होने के बाद भी यहां मेडिकल वेस्ट को जलाया या नष्ट नहीं किया जाता। नतीजन, कई बार यह पड़े-पड़े कई तरह की बीमारियों को जन्म देते हैं। मेडिकल वेस्ट को लेकर रिम्स को प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने बड़ा जुर्माना लगाया है। मिली जानकारी के अनुसार, बायो मेडिकल एक्ट-2016 के अनुसार, सभी अस्पतालों को अस्पताल से निकलने वाले कचरे के निस्तारण को लेकर कई मापदंड पूरे करने होते हैं। सामने आया है कि प्रदूषण नियंत्रण पार्षद ने रिम्स का निरीक्षण किया था। निरीक्षण में पाया गया कि रिम्स कई मापदंड में खरा नहीं उतर सका, जिसके बाद बोर्ड ने रिम्स पर साढ़े चार करोड़ का जुर्माना लगाया। बताते चलें कि दो साल पहले भी पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने रिम्स कैंपस का निरीक्षण किया था, उस समय भी ढाई लाख का जुर्माना लगा था। इसलिए लगा जुर्माना : 1. बायो मेडिकल एक्ट-2016 के अनुसार, सभी अस्पतालों में सीवरेज ट्रिटमेंट प्लांट होना चाहिए, लेकिन रिम्स में नहीं है। 2. रिम्स में इफ्लूएंट ट्रिटमेंट प्लांट भी नहीं है। निरीक्षण के दौरान इसे बनवाने का निर्देश दिया गया था, लेकिन सालों बाद भी नहीं बना। 3. अस्पतालों में एक सेंट्रल वेस्टेज कलेक्शन रूम होना चाहिए, लेकिन रिम्स में यह नहीं है। 4. बायो मेडिकल वेस्ट के सही तरीके से निस्तारण के लिए कॉमन बायोमेडिकल ट्रिटमेंट फैसिलिटी होनी चाहिए, जो रिम्स में नहीं है। 5. पूर्व में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा रिम्स का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के दौरान कुछ खामियां पाईं गईं थीं। उन्हीं खामियों को लेकर बोेर्ड ने रिम्स पर जुर्माना लगाया है।
टीम एबीएन, रांची। मोरहाबादी के सैकड़ों दुकानदारों के लिए मोरहाबादी मैदान के दूसरे छोर में अस्थाई तौर पर दुकान लगाने की व्यवस्था की जा रही है। हालांकि लगभग 12 दिनों से यह दुकानदार बेरोजगार हैं और इसी से आक्रोशित होकर उन्होंने जहां उनकी दुकान है वहीं उसे खोलने का अल्टीमेटम दिया था, जिसके बाद सोमवार उनके लिए प्रशासन की ओर से दुकान लगाने की अस्थाई व्यवस्था की जा रही है। 27 जनवरी को मोरहाबादी मैदान में गोलीकांड के बाद सैकड़ों दुकानदार अचानक से बेरोजगार हो गए। मोरहाबादी मैदान में ठेले और खोमचे वाले अपनी दुकान लगाते हैं। लेकिन गोलीकांड के बाद पुलिस प्रशासन और निगम की ओर से जारी आदेश के बाद उनकी दुकान बंद करा दी। लगभग 12 दिनों से ये दुकानदार स्थान देने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे। इस बीच प्रशासन की ओर से लगातार अस्थाई तौर पर दुकान मुहैया कराने को लेकर प्रयास किया जा रहा था। रविवार को दुकानदारों ने राज्य सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि अगर जल्द से जल्द अगर उन्हें दुकान खोलने की नई जगह नहीं दी गई तो वे वहीं पर अपनी दुकान फिर से खोलेंगे जहां पर वह मौजूद है। इसके बाद जो भी स्थिति उत्पन्न होगी उसकी जिम्मेदार सिर्फ जिला प्रशासन होगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने मोरहाबादी मैदान के आसपास फुटपाथ पर ठेला खोमचा लगाकर जीविका चलाने वाले लोगों के लिए मोरहाबादी फुटबॉल मैदान के पीछे अस्थाई रूप से दुकान लगाने के लिए व्यवस्था कर रही है। जिला प्रशासन ने कहा है कि वेंडर मार्केट निर्माण के बाद उन्हें स्थाई तौर पर दुकान मुहैया कराया जाएगा। फिलहाल, वह अस्थाई तौर पर वहां दुकान लगा सकते हैं। लेकिन अतिथिशाला से लेकर बापू वाटिका तक कोई दुकान नहीं लगेंगी। यह निर्देश निगम और प्रशासन की ओर से जारी किया गया है। सोमवार को इन दुकानदारों के लिए जगह चिह्नित किए जाने के बाद जिला प्रशासन और निगम की टीम साफ सफाई में लगी रही। इस दौरान दुकानदारों ने कहा कि यह जगह बेहतर है। अगर सुरक्षा के साथ उन्हें वहां अपनी दुकान चलाने दी जाए तो तो उन्हें किसी भी तरह की आपत्ति नहीं है।
टीम एबीएन, रांची। रांची यूनिवर्सिटी सहित चार विश्वविद्यालयों में स्थायी कुलपति और प्रति कुलपति नहीं हैं। इन विश्वविद्यालयों में प्रभारी के भरोसे काम चल रहा है। हालांकि, राजभवन की ओर से 6 महीने पहले आवेदन आमंत्रित किया गया था, लेकिन अब तक नियुक्ति नहीं हो सकी है। स्थिति यह है कि लंबे समय से कुलपति और प्रति कुलपति नियुक्ति का मामला लटका हुआ है। वहीं, राज्यपाल रमेश बैस ने कहा कि एक से डेढ़ महीने के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। विश्वविद्यालयों में स्थायी कुलपति नहीं होने से नियमित कार्य भी लंबित हो रहे हैं। प्रभारी कुलपति को झारखंड विश्वविद्यालय अधिनियम में निहित शक्तियां प्राप्त नहीं है। इससे प्रभारी कुलपति नीतिगत निर्णय नहीं ले सकते हैं। इसकी वजह है कि राजभवन की ओर से रोक लगाई गई है। स्थिति यह है कि बहुत जरूरी कार्य होने पर राजभवन से अनुमति लेने के बाद ही कार्य का निष्पादन किया जाता है। रांची यूनिवर्सिटी सहित चार विश्वविद्यालयों में स्थायी कुलपति और प्रति कुलपति नहीं हैं। इन विश्वविद्यालयों में प्रभारी के भरोसे काम चल रहा है। हालांकि, राजभवन की ओर से 6 महीने पहले आवेदन आमंत्रित किया गया था। लेकिन अब तक नियुक्ति नहीं हो सकी है। स्थिति यह है कि लंबे समय से कुलपति और प्रति कुलपति नियुक्ति का मामला लटका हुआ है। वहीं, राज्यपाल रमेश बैस ने कहा कि एक से डेढ़ महीने के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। विश्वविद्यालयों में स्थायी कुलपति नहीं होने से नियमित कार्य भी लंबित हो रहे हैं। प्रभारी कुलपति को झारखंड विश्वविद्यालय अधिनियम में निहित शक्तियां प्राप्त नहीं है। इससे प्रभारी कुलपति नीतिगत निर्णय नहीं ले सकते हैं। इसकी वजह है कि राजभवन की ओर से रोक लगाई गई है। स्थिति यह है कि बहुत जरूरी कार्य होने पर राजभवन से अनुमति लेने के बाद ही कार्य का निष्पादन किया जाता है। कुलपति पद के लिए आवेदन देने वाले अभ्यर्थी अब सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इन चारों विश्वविद्यालय के वीसी, प्रोवीसी के लिए कई आवेदन प्राप्त हैं। इसके बावजूद अब तक नियुक्ति नहीं हुई है। रांची विश्वविद्यालय, डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय और जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी में कुलपति की नियुक्ति होनी है। वहीं, सिद्धो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय और बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय में प्रति कुलपति के पद पर नियुक्ति होनी है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि कुछ दिन पहले प्रक्रिया शुरू की गई थी। आवेदनों की स्क्रूटनी हो चुकी है और नियुक्ति के लिए राज्यपाल की ओर से सर्च कमेटी का गठन भी किया गया है। वीसी नियुक्ति नहीं होने पर कॉलेज डेवलपमेंट काउंसिल की बैठक समय पर नहीं हो रही है। कॉलेजों का सौंदर्यीकरण और प्रयोगशाला की मेंटेनेंस सहित कई कार्य का प्रस्ताव राज्य सरकार को नहीं भेजा जा सका है। सिंडिकेट और सीनेट की बैठक भी आयोजित नहीं हो रही है। सिंडिकेट की बैठक राजभवन से अनुमति लेकर आयोजित की जा रही है। स्थिति यह है कि नीतिगत निर्णय लेने में प्रभारी कुलपति सक्षम नहीं है। हालांकि, एक समारोह के दौरान राज्यपाल रमेश बैस ने कहा कि इन पदों पर नियुक्ति को लेकर राजभवन सख्त है और शीघ्र ही चारों विश्वविद्यालयों को कुलपति और प्रति कुलपति मिल जाएंगे। इसको लेकर प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
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