टीम एबीएन, रांची। मरीजों के लिए अच्छी खबर है। अब रिम्स अस्पताल में पहली पाली में आने वाले सभी मरीजों का इलाज किया जाएगा। इससे पहले कोरोना संक्रमण की रफ्तार अधिक होने पर पहली पाली में 1 बजे तक सिर्फ 40 मरीज को देखने की व्यवस्था कर दी गई थी। वहीं रिम्स प्रबंधन जल्द ही दूसरी पाली में भी मरीजों के इलाज की व्यवसथा करने की तैयारी कर रहा है। अभी रिस्ट्रिक्शन के चलते दूर दराज के कई मरीजों को बिना इलाज के ही लौटना पड़ता था। इससे मरीजों की परेशानी बढ़ जाती थी। बता दें कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए रिम्स अस्पताल में ओपीडी के समय में बदलाव किया गया था। जिसमें सुबह 9 से 1 तक में मात्र 40 मरीजों को देखने का आदेश जारी हुआ था और दूसरी पाली में ओपीडी सेवा संक्रमण की वजह से बंद कर दिया गया था। लेकिन मरीजों की परेशानी को देखते हुए रिम्स प्रबंधन ने यह आदेश जारी किया है कि पहली पाली में अब सिर्फ 40 मरीजों को देखने के रिस्ट्रिक्शन को हटा दिया गया है। पहली पाली में जितने भी मरीज आएंगे उनका इलाज किया जाएगा। वहीं अभी दूसरी पाली में ओपीडी सेवा बंद रहेगी लेकिन जल्दी मरीजों की सुविधा को देखते हुए रिम्स प्रबंधन दूसरी पाली में भी ओपीडी सेवा बहाल करने के लिए प्रयासरत है।
टीम एबीएन, रांची। कोरोना संक्रमण की वजह से बंद पड़े स्कूलों को खोलने को लेकर लगातार कई संगठनों की ओर से मांग उठाई जा रही है। वहीं कई निजी स्कूलों ने भी स्कूल खोलने के पक्ष में अपनी राय सरकार को दी है। इसी कड़ी में शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने आपदा प्रबंधन के सचिव और शिक्षा सचिव के साथ स्कूल खोलने को लेकर चर्चा की है। कोरोना के तीसरी लहर से पहले झारखंड सरकार के शिक्षा विभाग की ओर से जूनियर बच्चों के लिए भी स्कूल खोलने की तैयारी की जा रही थी। नर्सरी से लेकर क्लास 5 के बच्चों के लिए भी स्कूल खोले जाने की तैयारी सरकार ने कर रखी थी। इसे लेकर विभिन्न निजी स्कूलों ने भी अपनी मंशा जाहिर की थी। लेकिन अचानक कोरोना की बढ़ती रफ्तार के कारण छठी से लेकर 12वीं तक के स्कूलों को भी एक बार फिर बंद करना पड़ा। तमाम शिक्षण संस्थानों में दोबारा ताला लटक गए। लेकिन अब कोरोना की रफ्तार थोड़ी कम हो रही है और इसके मद्देनजर राज्य सरकार के शिक्षा विभाग नर्सरी से लेकर 12वीं तक के बच्चों के लिए स्कूल ओपन करने को लेकर मंथन कर रही है। शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो लगातार मामले को लेकर विशेषज्ञों की राय जान रहे हैं। इसी कड़ी में शनिवार को शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव और शिक्षा सचिव की मामले को लेकर चर्चा भी हुई है। बच्चों की पढ़ाई कैसे हो या इनके लिए कब और किस तरह से स्कूल खोले जाएं। इस पर विचार विमर्श किया गया। हालांकि फिलहाल स्कूल खोले जाने को लेकर तिथि तय नहीं हुई है। आपदा प्रबंधन विभाग के साथ मुख्यमंत्री की भी एक महत्वपूर्ण बैठक जल्द होगी। उसके बाद ही शिक्षा विभाग स्कूल खोलने को लेकर निर्णय ले सकता है। प्राइवेट स्कूल एंड चिल्ड्रन वेलफेयर एसोसिएशन भी लगातार सरकार और शिक्षा विभाग से स्कूल खोलने का आग्रह कर रही है। दूसरी ओर देश के कई राज्यों में धीरे-धीरे स्कूल ओपन कर दिया गया है। राज्य सरकार की ओर से ऐसे ही राज्यों का व्यवस्था का आकलन करते हुए झारखंड में भी स्कूल ओपन करने की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है। शिक्षा मंत्री ने सीधे तौर पर कहा है कि स्कूल खोलने को लेकर अधिकारियों के साथ लगातार मंथन किया जा रहा है। अभिभावक और समाजसेवियों से भी राय ली जा रही है। ऑनलाइन पठन-पाठन से बच्चों को फायदा नहीं मिल रहा है। सरकारी स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई हो ही नहीं रही है। सरकारी स्कूलों तक ऑनलाइन शिक्षा की पहुंच नहीं है। ऐसे में वह स्कूल खोलने के पक्ष में हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल खोलने से पहले अभिभावकों की राय ली जाएगी। तमाम लोगों से विचार-विमर्श किया जाएगा। आपदा प्रबंधन विभाग के निर्देश के बाद स्कूल खोली जाएगी।
टीम एबीएन, रांची। कोरोना की रफ्तार धीमी होते ही झारखंड में स्कूल खोलने को लेकर सरकार के स्तर पर सुगबुगाहट शुरू हो गई है। इसी को लेकर शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो के साथ उनके आवास पर निजी स्कूलों के संचालकों के साथ बैठक हुई। जिसमें शिक्षा मंत्री ने फरवरी के दूसरे सप्ताह से स्कूल खोले जाने को लेकर अपनी सहमति दी है। शिक्षा मंत्री के इस फैसले के बाद आपदा प्रबंधन विभाग और मुख्यमंत्री इस संबंध में आखिरी फैसला लेंगे। आपदा प्रबंधन विभाग के साथ होगी बैठक : झारखंड में स्कूल खोलने को लेकर शिक्षा मंत्री मंत्री जगरनाथ महतो आपदा प्रबंधन विभाग के पदाधिकारियों के साथ एक बैठक करेंगे। उसके बाद वे शिक्षा विभाग के निर्णय से मुख्यमंत्री को अवगत कराएंगे। आपदा प्रबंधन विभाग और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस संबंध में जो भी निर्णय लेंगे उसी पर झारखंड शिक्षा विभाग अमल करेगा। हालांकि शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने फरवरी के दूसरे सप्ताह से राज्यभर में स्कूल कॉलेज कोरोना गाइडलाइन के तहत खुलने की उम्मीद जताई है। वहीं स्कूल खोलने के आश्वासन के बाद स्कूल संचालक के सदस्य काफी खुश दिखे।
टीम एबीएन, रांची। माननीय कृषि मंत्री श्री बादल ने कहा कि राज्य के सभी बिरसा किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड से आच्छादित करना है। सभी बिरसा कृषक चाहे वे पीएच कार्ड, हरा राशन कार्ड, सफेद राशन कार्ड धारक हों अथवा बटाईदार हों उन्हें किसान क्रेडिट कार्ड से जोड़कर लाभांवित कराना हमारा लक्ष्य है। श्री बादल ने कहा कि बैंक से सामंजस्य स्थापित कर अधिक से अधिक जरूरतमंद कृषकों को इसका लाभ दिलवाएं, बेवजह किसी का आवेदन बैंक द्वारा रिजेक्ट न किया जाए। वे आज नेपाल हाउस में आयोजित प्रमंडलस्तरीय समीक्षा बैठक में दक्षिण छोटानागपुर प्रमण्डल के विभिन्न जिलों के उपायुक्तों के साथ कृषि विभाग द्वारा किये जा रहे कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। श्री बादल ने कहा कि राज्य में हर दो पंचायत पर एक धान अधिप्राप्ति केंद्र खोला जाए तथा उसे लैंप्स पैक्स से जोड़ा जाए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था कराई जाए जिससे किसानों को उनके आवास के निकट ही धान के सैंपल को चेक किया जा सके। श्री बादल ने कहा कि मत्स्य उत्पादन के लिये तालाबों की नीलामी में पारदर्शिता लाई जाए जिससे इसमें अधिक लोग शामिल हो सकें। अधिक लोगों के शामिल होने से सरकार के राजस्व में भी वृद्धि होगी। माननीय मंत्री ने कहा कि राज्य में सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिये नए तालाबों के निर्माण के साथ-साथ पुराने तालाबों के जिर्णोद्धार पर भी विशेष ध्यान देना है। डोभा निर्माण एवं डीप बोरिंग सिस्टम की व्यवस्था भी किसानों को कराई जाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पशुधन योजना से लोगों को जोड़ें जिससे कृषकों के सर्वांगीण विकास में सहायता प्राप्त होगी। कृषि सचिव अबु बकर सिद्दिकी ने समीक्षा के क्रम में प्रमंडल के सभी जिले के उपायुक्तों को कहा कि हमारी प्राथमिकता अधिक से अधिक लाभुकों को लाभ दिलाना हैं । इस हेतु कृषि विभाग की योजनाओं के प्रचार प्रसार में फ्लैक्स, नुक्कड़ नाटक, कृषि मेला का इस्तेमाल कोविड गाइडलाइन के अनुरूप करें, जिससे अधिक से अधिक लोगों को योजनाओं का लाभ उठाने के लिये जागरूक किया जा सके। उन्होंने कहा कि सभी जिले के उपायुक्त कृषि विभाग की समीक्षा समय-समय पर करते रहें एवं मुख्यालय को इससे संबंधित आवश्यक्ताओं से अवगत कराते रहें। उन्होंने कहा कि किसी जिले में यदि कोई नई पहल होती है तो उसे साझा करें। उपायुक्तों द्वारा कृषि विभाग में मैन पावर की कमी कि ओर विभाग का ध्यान आकृष्ट कराया गया जिस वजह से योजनाओं को मूर्त रूप देने में समस्या आ रही है। इसपर कृषि सचिव ने कहा कि नियमावली के अनुसार आॅऊटसोर्स से भी मैनपॉवर बहाल कर लें एवं झारखण्ड बनने के बाद के जो नए जिले बने हैं वे कृषि विभाग के सैंक्सन पद हेतु आवेदन मुख्यालय को उपलब्ध करा दें। समीक्षा बैठक में कृषि निदेशक निशा उरांव, पशुपालन निदेशक शशि प्रकाश झा, मत्स्य निदेशक एचएन द्विवेदी, सहकारिता निबंधक मृंत्यजंय वर्णवाल, समिति निदेशक सुभाष सिंह एवं विशेष सचिव प्रदीप हजारे सहित विभाग के पदाधिकारी उपस्थित थे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। 17वीं लोकसभा के 8वें सत्र के पहले दो दिनों के दौरान दोनों सदनों में राष्ट्रपति का अभिभाषण और बजट का प्रेजेंटेशन होगा। इस वजह से 31 जनवरी और 1 फरवरी 2022 को शून्य काल नहीं होगा। शून्य काल के दौरान उठाए गए सार्वजनिक महत्व के मामलों को 2 फरवरी 2022 से लिया जाएगा। संसद का बजट सत्र 31 जनवरी से आरंभ हो रहा है। राष्ट्रपति का अभिभाषण 31 जनवरी को होगा। सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा और राज्यसभा की बैठकें दिन में अलग-अलग समय पर आयोजित होंगी, ताकि कोविड से जुड़ी सामाजिक दूरी के नियमों का पालन हो सके। 1 फरवरी को आम बजट पेश होगा : लोकसभा की बैठक 1 फरवरी को सुबह 11 बजे होगी और उस दिन आम बजट पेश किया जाएगा। 2 फरवरी से लोकसभा की कार्यवाही शाम चार बजे से रात नौ बजे तक चलेगी। बजट सत्र का पहला चरण 11 फरवरी तक होना है। 14 मार्च से बजट सत्र का दूसरा चरण : लोकसभा सचिवालय के हाल की बुलेटिन के अनुसार, कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर निचले सदन की बैठक के दौरान दोनों सदनों के कक्षों और दीर्घाओं का इस्तेमाल सदस्यों के बैठने के लिए किया जाएगा। बजट सत्र का दूसरा चरण 14 मार्च से आरंभ होगा जो 8 अप्रैल तक चलेगा।
एबीएन डेस्क। दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) ने राज्य सरकार के साथ उच्चस्तरीय बैठक में बनी सहमति के बाद शुक्रवार मध्य रात्रि से बिजली कटौती वापस ले ली। इसके पहले डीवीसी अधिकारियों की शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो और वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव के साथ प्रोजेक्ट भवन में बैठक हुई। बैठक के बाद डीवीसी चेयरमैन रामनरेश सिंह ने कटौती वापस लेने की घोषणा की। सीएम नाराज : सूत्रों के अनुसार डीवीसी अधिकारी मुख्यमंत्री के साथ बैठक करना चाहते थे, लेकिन सीएमओ से सहमति नहीं मिली। बताया जाता है कि सीएम डीवीसी के रवैये से नाराजे हैं इसलिए उन्होंने बैठक का समय नहीं दिया। डीवीसी मुख्य अभियंता (वाणिज्य) देवाशीष डे ने जेबीवीएनएल के महाप्रबंधक (वाणिज्य एवं राजस्व) को पत्र के माध्यम से बिजली कटौती वापस लेने की जानकारी दे दी। पत्र में लिखा गया है कि टॉप मैनेजमेंट के साथ झारखंड सरकार की बैठक में डीवीसी ने मासिक बिल नियमित भुगतान करने का आग्रह किया है। पूर्व के बकाए को डीवीसी एक फरवरी को सरकार के समक्ष रोडमैप पेश करेगा। डीवीसी के फैसले से सात जिलों को मिली राहत : कटौती वापस होने से डीसात जिलों चतरा, गिरिडीह, बोकारो, कोडरमा, हजारीबाग, रामगढ़ और धनबाद में बिजली की किल्लत दूर होगी। ज्ञात है कि डीवीसी ने बीते वर्ष छह नवंबर को जेबीवीएनएल पर 2173 करोड़ का बकाया भुगतान के लिए नोटिस दिया और कटौती शुरू कर दी थी। डीवीसी इन जिलों में रोज 600 मेगावाट बिजली की आपूर्ति करता है। नोटिस के मुताबिक हर दिन करीब 300 मेगावाट बिजली की कटौती की गई।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्र सरकार ने डॉ वी अनंत नागेश्वरन को मुख्य आर्थिक सलाहकार का पदभार सौंप दिया है। मोदी सरकार से अनुमति मिलने के बाद उन्होंने कार्याभार संभाल लिया है। वी अनंत नागेश्वरन को ऐसे वक्त मुख्य आर्थिक सलाहकार बनाया गया है, जब 31 जनवरी 2022 से संसद का बजट सत्र शुरू होने वाला है। बजट सत्र के पहले ही दिन इकॉनमिक सर्वे पेश किया जाता है और इसे तैयार करने की पूरी जिम्मेदारी मुख्य आर्थिक सलाहकार की होती है। बता दें कि, डॉ नागेश्वरन ने एक शिक्षक, सलाहकार और लेखक के रूप में भी काम किया है। डॉ नागेश्वरन ने भारत और सिंगापुर में कई बिजनेस स्कूलों और प्रबंधन संस्थानों में पढ़ाया है और बड़े पैमाने पर उनके लेख प्रकाशित भी हुए हवी अनंत नागेश्वरन IFMR ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस के डीन और Krea विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के विशिष्ट विजिटिंग प्रोफेसर थे। वह 2019 से 2021 तक भारत के प्रधान मंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद के अंशकालिक सदस्य भी रहे हैं। उन्होंने भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद से प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा और विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त की है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2022 यानी मंगलवार को सुबह 11 बजे बजट पेश करेंगी। सरकार ने आम आदमी को बजट की जानकारी आसानी से उपलब्ध कराने के लिए मोबाइल ऐप लॉन्च किया है। इस ऐप पर हिंदी और अंग्रेजी में पूरा बजट उपलब्ध होगा। वित्त मंत्री सीतारमण के बजट पेश करने के तुरंत बाद ही बजट इस ऐप पर उपलब्ध हो जाएगा। मोबाइल ऐप पर यूजर अपनी सुविधा के अनुसार बजट को हिंदी या अंग्रेजी में देख पाएंगे। इस ऐप का नाम यूनियन बजट मोबाइल ऐप है। बजट ऐप http://indiabudget.gov.in से डाउनलोड किया जा सकता है। संसद ऐप पर लाइव देखिये बजट : बजट-2022 को लाइव मोबाइल पर देखा जा सकेगा। इसके लिए डिजिटल संसद नाम से ऐप लॉन्च किया गया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया कि डिजिटल संसद ऐप पर संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही का सीधा प्रसारण, सदनों के प्रतिदिन के कार्यों की जानकारी, सदन पटल पर रखे जाने वाले पत्र के साथ 1947 से अब तक बजट पर हुई चर्चाएं भी उपलब्ध हैं। इस ऐप पर आम बजट को लाइव देख सकेंगे।
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