एबीएन सेंट्रल डेस्क। एक फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट 2021 पेश की हैं। आपने कभी सोचा है कि आखिर सरकार पूरे साल का बजट कैसे तैयार करती है? देश के हर राज्य और हर मंत्रालय की जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है आमतौर पर बजट तैयार करने की प्रक्रिया 5 महीने पहले से ही शुरू हो जाती है और कई अहम बैठकों के बाद इसे तैयार किया जाता है। पढ़ें बजट तैयार करने की प्रक्रिया, क्या-क्या होता है बजट में। बजट तैयार करने की प्रक्रिया : बजट पेश होने के 5 महीने पहले सितंबर में आर्थिक मामलों के विभाग की बजट डिविजन सभी मंत्रालयों, विभागों, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को सर्कुलर जारी करती है। इसमें उनसे आने वाले वित्तीय वर्ष के लिए उनके खर्चों का अनुमान लगाते हुए जरूरी फंड बताने के लिए कहा जाता है। इसके बाद अक्टूबर-नवंबर में वित्त मंत्रालय दूसरे मंत्रालयों-विभागों के अधिकारियों के साथ मीटिंग करते हैं और ये तय करते हैं कि किस मंत्रालय या विभाग को कितनी रकम दी जाए। मीटिंग में तय होने के बाद एक ब्लूप्रिंट तैयार किया जाता है। सबकुछ तय होने के बाद बजट डॉक्यूमेंट की छपाई होती है लेकिन इस बार छपाई नहीं होगी। बजट पेश होने से करीब एक हफ्ते पहले वित्त मंत्रालय में हलवा सेरेमनी होती है। इसके बाद सभी संबंधित अधिकारियों को वित्त मंत्रालय में ही ठहराया जाता है और किसी बाहरी व्यक्ति से संपर्क नहीं करने दिया जाता। जब बजट पेश हो जाता है, तभी अधिकारियों को बाहर आने दिया जाता है। दफ्तर में ही गुजरती है अधिकारियों की रात : दरअसल बजट बनाने की पूरी प्रक्रिया को तीन महीने के काफी गोपनीय रखा जाता है। बजट प्रक्रिया को गोपनीय रखने के लिए उनका संपर्क पूरी दुनिया से कटा रहता है। बजट के अंतिम समय में तो उनके मोबाइल रखने पर भी प्रतिबंध लगा दिया जाता है। ऐसे में इस दौरान नॉर्थ ब्लॉक के आसपास बिना कारण घूमना भी खतरे से खाली नहीं होता है. बजट बनाने के लिए वित्त मंत्रालय के अधिकारी दिन रात मेहनत करते हैं। यह काम इतना बड़ा होता है कि उनके लिए परिवार के लिए समय निकालना भी मुश्किल होता है। फरवरी के तीसरे सप्ताह तक बजट बन कर लगभग पूरा हो जाता है। इसे नॉर्थ ब्लॉक के उस कमरे में रखा जाता है जहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता है। बजट से एक दिन पहले आता है आर्थिक सर्वे : बजट पेश होने के ठीक एक दिन पहले इकोनॉमिक सर्वे को पेश किया जाता है। हालांकि, इस बार इकोनॉमिक सर्वे बजट से दो दिन पहले 29 जनवरी को पेश हो गया। इकोनॉमिक सर्वे यानी आर्थिक सर्वेक्षण में बीते साल का लेखा-जोखा और आने वाले साल के लिए सुझाव, चुनौतियां और समाधान होते हैं। इकोनॉमिक सर्वे को आर्थिक मामलों के विभाग की इकोनॉमिक डिवीजन चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर यानी CEA की देख-रेख में तैयार करती है। इस वक्त CEA डॉक्टर कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम हैं। पहला इकोनॉमिक सर्वे 1950-51 में पेश किया गया था। 1964 तक इसे बजट के साथ ही पेश किया जाता था लेकिन बाद में इसे बजट से एक दिन पहले पेश किया जाने लगा। बजट पेश करने से पहले राष्ट्रपति की मंजूरी जरूरी : संसद में बजट पेश करने से पहले राष्ट्रपति की मंजूरी जरूरी होती है। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद इसे कैबिनेट के सामने रखा जाता है और उसके बाद संसद के दोनों सदनों में इसे पेश किया जाता है। बजट पेश होने के बाद क्या होता है? बजट पेश होने के बाद इसे संसद के दोनों सदनों यानी लोकसभा और राज्यसभा में पास कराना होता है। दोनों सदनों से पास होने के बाद 1 अप्रैल से ये लागू हो जाता है। हमारे देश में वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक होता है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को वित्त वर्ष 2022-23 के लिए बजट प्रस्ताव पेश करेंगी। यह लगातार चौथा मौका होगा जब सीतारमण बजट पेश करेंगी। पढ़ें बजट से जुड़े कुछ रोचक पहलूः भारत का पहला बजट : भारत में पहली बार बजट सात अप्रैल, 1860 को पेश किया गया था। ईस्ट इंडिया कंपनी से जुड़े स्कॉटिश अर्थशास्त्री एवं नेता जेम्स विल्सन ने ब्रिटिश साम्राज्ञी के समक्ष भारत का बजट रखा था। स्वतंत्र भारत का पहला बजट 26 नवंबर,1947 को पेश किया गया था। तत्कालीन वित्त मंत्री आर के षण्मुखम चेट्टी ने यह बजट पेश किया था। सबसे लंबा बजट भाषण : यह रिकॉर्ड सीतारमण के ही नाम पर है। उन्होंने वित्त वर्ष 2020-21 का बजट पेश करते हुए 2 घंटे 42 मिनट लंबा भाषण दिया था। इस दौरान उन्होंने जुलाई 2019 में बनाए गए अपने ही 2 घंटे एवं 17 मिनट लंबे भाषण के रिकॉर्ड को तोड़ा था। बजट भाषण में सर्वाधिक शब्द : मनमोहन सिंह के 1991 में दिए गए बजट भाषण में कुल 18,650 शब्द थे। उसके बाद दूसरा स्थान अरुण जेटली का है जिनके 2018 के बजट भाषण में 18,604 शब्द थे। सबसे छोटा बजट भाषण : तत्कालीन वित्त मंत्री हीरुभाई मुलजीभाई पटेल ने 1977 में सिर्फ 800 शब्दों वाला बजट भाषण दिया था। सबसे ज्यादा बजट भाषण : यह रिकॉर्ड पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के नाम पर है जिन्होंने 1962-69 के बीच वित्त मंत्री रहते हुए सर्वाधिक 10 बार बजट पेश किया। इसके बाद पी चिदंबरम (नौ), प्रणव मुखर्जी (आठ), यशवंत सिन्हा (आठ) और मनमोहन सिंह (छह) आते हैं। बजट भाषण के समय में परिवर्तन : वर्ष 1999 तक बजट भाषण फरवरी के अंतिम कार्यदिवस को शाम पांच बजे पेश किया जाता था। लेकिन यशवंत सिन्हा ने 1999 में इसे बदलकर सुबह 11 बजे कर दिया था। अरुण जेटली ने 2017 में बजट भाषण एक फरवरी को पेश किया। उसके बाद से बजट एक फरवरी को ही सुबह 11 बजे पेश किया जाता है। भाषा • वर्ष 1955 तक बजट सिर्फ अंग्रेजी में ही पेश किया जाता था लेकिन कांग्रेस सरकार ने इसे अंग्रेजी और हिंदी दोनों में ही पेश करना शुरू कर दिया था। कोविड-19 महामारी आने के बाद वर्ष 2021-22 का बजट कागज-रहित पेश किया गया। सीतारमण 2019 में बजट पेश करते समय ऐसा करने वालीं दूसरी महिला बनीं। उनके पहले इंदिरा गांधी ने 1970 में वित्त मंत्री के तौर पर बजट पेश किया था। रेल बजट : वर्ष 2017 तक रेल बजट एवं आम बजट अलग-अलग पेश किए जाते थे। लेकिन 2017 में रेल बजट को आम बजट में ही समाहित कर दिया गया और अब सिर्फ एक बजट ही पेश किया जाता है। बजट मुद्रण : 1950 तक बजट का मुद्रण राष्ट्रपति भवन में होता था लेकिन इसके लीक होने के बाद मुद्रण नई दिल्ली के मिंटो रोड स्थित प्रेस में होने लगा। फिर 1980 में वित्त मंत्रालय के भीतर ही सरकारी प्रेस में इसका मुद्रण होता है।
टीम एबीएन, रांची। सोमवार को झारखंड में कोरोना संक्रमण के घटते मामलों को देख आपदा प्रबंधन ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य के 17 जिलों में कक्षा एक से पढ़ाई शुरू करने की छूट दे दी गयी है। जबकि रांची, धनबाद, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला और बोकारो समेत 7 जिलों में 9वीं कक्षा से ऊपर की पढ़ाई शुरू करने की छूट दे दी गयी है। हालांकि पूरे राज्य में शादी समारोह के दौरान अधिकतम 200 लोग ही जमा हो सकते हैं। शाम 8 बजे के बाद दुकानों को बंद करने की व्यवस्था यथावत रहेगी। हालांकि चिड़ियाघर, पार्क, जिम, स्टेडियम, क्लब और सिनेमा हॉल खोलने की छूट दे दी गयी है। यही नहीं सरकारी कार्यालयों में रोस्टर व्यवस्था को खत्म कर दिया गया है। अब सभी कर्मचारियों को सरकारी कार्यालयों में आना होगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। एक ब्रिटिश अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट-आधारित मार्केट रिसर्च और डेटा एनालिसिस "फर्म यूगोव" के एक नए सर्वे से पता चला है कि लगभग दो-तिहाई या 65 प्रतिशत लोग देश में मौजूदा टैक्स स्ट्रक्चर से नाखुश थे। सर्वे के अनुसार 74 प्रतिशत शहरी भारतीय इस बात से सहमत हैं कि देश के आर्थिक विकास के लिए इनकम टैक्स महत्वपूर्ण है। 38 प्रतिशत शहरी भारतीयों ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सरकार इनकम टैक्स में छूट की सीमा को मौजूदा से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर देगी। यह उन लोगों के लिए प्रमुख अपेक्षा थी, जिन्होंने खुद को गरीब या मिडिल क्लास बताया है। संसद का बजट सत्र 2022 आज सोमवार 31 जनवरी से शुरू होने जा रहा है, जिसमें राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद दोनों सदनों को संबोधित करेंगे। इसके बाद 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना चौथा केंद्रीय बजट पेश करने वाली हैं, जिसका आम आदमी तक को बेसब्री से इंतजार है। इसका कारण बजट को लेकर लोगों को अपनी-अपनी उम्मीदें हैं। 31 फीसदी चाहते हैं इनकम टैक्स में ज्यादा छूट : विशेषज्ञों को उम्मीद है कि आगामी बजट लोकलुभावन हो सकता है, क्योंकि बजट के तुरंत बाद पांच राज्यों में चुनाव होने वाले हैं, लेकिन बड़ा सवाल है कि खासकर नौकरी-पेशा वर्ग की क्या सरकार महंगाई की मार के बीच इनकम टैक्स में राहत देने जा रही है? क्या वह नए इनकम टैक्स स्लैब से छेड़छाड़ करने को तैयार है? सर्वे के मुताबिक 31 फीसदी का मानना है कि इनकम टैक्स में छूट कुल की सीमा को मौजूदा 1.5 लाख रुपये से बढ़ाया जाना चाहिए। सर्वे के अनुसार 35 प्रतिशत उम्मीद करते हैं कि इनकम टैक्स रिबेट में कोविड के उपचार से संबंधित खर्चों को अलग से शामिल किया जाए, जबकि लगभग 30 फीसदी चाहते हैं कि वित्त मंत्री 80 डी के तहत मेडिकल खर्च के लिए रिबेट बढ़ाए जाएं। सिंगल हाइब्रिड इनकम टैक्स स्लैब की उम्मीद : वर्तमान में इनकम टैक्स फाइल करने वालों के लिए चुनने के लिए दो इनकम टैक्स स्लैब (ओल्ड और न्यू) हैं, लेकिन कई टैक्स विशेषज्ञों की राय है कि दो के बजाय सिंगल या हाइब्रिड टैक्स स्लैब की जरूरत है। इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 115 बीएसी के तहत 1 अप्रैल, 2020 से लागू हुए नए इनकम टैक्स स्लैब में घर का किराया और यात्रा भत्ता, शिक्षा भत्ता जैसी छूट, सेक्शन 80 सी और 80 डी के लाभ और सेक्शन 24बी के तहत होम लोन के ब्याज के लिए छूट की अनुमति नहीं है। केंद्र सरकार ने पिछली बार 2014 में सेक्शन 80 सी छूट की सीमा को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये की थी। उसके बाद, 2015 में राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) में योगदान के लिए सेक्शन 80 सीसीडी (1बी) के तहत 50,000 रुपये की अतिरिक्त छूट की अनुमति दी गई थी, लेकिन टैक्सपेयर्स को अधिक टैक्स रिबेट मिले अब छह साल से अधिक समय हो गया है। आय 200 रुपए बढ़ने पर भी देना पड़ता है टैक्स : मौजूदा इनकम टैक्स स्ट्रक्चर के अनुसार किसी व्यक्ति को 5 लाख रुपये तक की वार्षिक आय पर कोई टैक्स देने की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन अगर उसकी आय में मामूली वृद्धि भी हो तो वह हजारों रुपये के टैक्स का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी हो जाता है। उदाहरण के लिए अगर आपकी वार्षिक आय 5 लाख रुपये से मात्र 200 रुपये अधिक हो जाए तो मौजूदा स्ट्रक्चर के अनुसार आपको 13,000 रुपये का टैक्स देना होगा। टैक्स विशेषज्ञों का सुझाव है कि आगामी बजट 2022 में इसपर कदम उठाया जाना चाहिए जिसके माध्यम से टैक्सपेयर्स आय के 5 लाख रुपये से थोड़े अधिक होने पर ही हजारों के टैक्स भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं हो। वर्क फ्रॉम होम के लिए अलाउंस की उम्मीद : सरकार लगातार बड़े राज कोषीय घाटे से गुजर रही है और कोविड-19 महामारी की तीसरी लहर की आशंका के बीच हॉस्पिटल से लेकर बूस्टर डोज के लिए उच्च सरकारी खर्च की आवश्यकता है। ऐसे में विशेषज्ञों की राय है कि सरकार को मामूली ब्याज दर और 3 से 5 साल के टाइम लिमिट के साथ कोविड बॉन्ड लाना चाहिए और धन जुटाने का प्रयास करना चाहिए। उनका कहना है कि कोविड बॉन्ड में निवेश को टैक्स में पूरी तरह छूट मिलनी चाहिए। दूसरी तरफ कोरोना महामारी की वजह से, कई संगठनों ने पिछले एक साल से वर्क फ्रॉम होम मॉडल को अपनाया है। जिससे वेतनभोगी क्लास के लिए घर में ही इंटरनेट/वाईफाई कनेक्शन, लैपटॉप, प्रिंटर, ऑफिस डेस्क, कुर्सी इत्यादि को इंस्टॉल करना मजबूरी रही है। इसी के मद्देनजर विशेषज्ञों की मांग है कि ऐसे भत्तों को इनकम टैक्स में छूट देने के लिए आईटी एक्ट में बदलाव करना चाहिए।
टीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आज सोमवार को सभी विभागों में बजट की तुलना में आवंटन, खर्च की स्थिति के साथ सात बिंदुओं पर समीक्षा करेंगे। मुख्यमंत्री विभागों द्वारा संचालित मुख्य योजनाओं के क्रियान्वयन की मौजूदा स्थिति, नई योजनाओं की स्वीकृति और उनके कार्यान्वयन की स्थिति की भी अलग से जानकारी प्राप्त करेंगे। सभी विभाग के पदाधिकारियों को इसकी तैयारी कर लेने का निर्देश दिया गया है। सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिव समीक्षा बैठक में मौजूद रहेंगे। उन्हें पत्र लिखकर बैठक में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। मुख्यमंत्री को सभी विभागों के प्रमुख योजना बजट के विरुद्ध निर्गत स्वीकृति आदेश, आवंटन आदेश और व्यय की स्थिति से अवगत कराएंगे। बैठक के दौरान विभागों में रिक्त पदों को भरने की कार्ययोजना भी मांगी गई है। इन बिंदुओं पर समीक्षा होगी ● वित्तीय वर्ष 2021-22 में योजना बजट के विरुद्ध निर्गत स्वीकृति आदेश ● आवंटन आदेश, व्यय की स्थिति ● विभाग द्वारा संचालित मुख्य योजनाओं की स्थिति ● नई योजनाओं की स्वीकृति और कार्यान्वयन की स्थिति भारत सरकार से प्राप्त राशि और व्यय की अद्यतन स्थिति ● रिक्त पदों को भरने की कार्य योजना
एबीएन सेंट्रल डेस्क। संसद बजट सत्र की आज से शुरुआत हो रही है। आज बजट सत्र से पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करेंगे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज साल 2021-22 का आर्थिक सर्वेक्षण पेश करेंगी। इसके बाद वित्त मंत्री 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2022-23 का केंद्रीय बजट पेश करेंगी। वहीं दूसरी ओर बजट संसद सत्र के आज हंगामेदार रहने के आसार हैं। विपक्ष ने पेगासस जासूसी मामले, पूर्वी लद्दाख में चीनी घुसपैठ जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी की है। संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बताया कि सोमवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है और विपक्षी दल की ओर से इसमें जो भी मुद्दे रखें जाएंगे, उस पर विचार करेंगे।' कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा और राज्यसभा की बैठकें दिन में अलग-अलग समय पर आयोजित होंगी, ताकि कोविड से संबंधित सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन हो सके। बजट सत्र का शेड्यूल : • बजट सत्र के पहले दो दिन शून्यकाल एवं प्रश्नकाल नहीं होंगे। लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा बुधवार से शुरू होगी। • ऐसी संभावना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7 फरवरी को चर्चा का जवाब देंगे। • लोकसभा सचिवालय के अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के लिए चार दिन रखे गए हैं, जो 2 फरवरी से शुरू होगी। • संसद के बजट सत्र का पहला चरण 31 जनवरी से 11 फरवरी तक चलेगा। इसके बाद विभिन्न विभागों के बजटीय आवंटन पर विचार के लिए अवकाश रहेगा। • बजट सत्र का दूसरा चरण 14 मार्च से आरंभ होगा, जो 8 अप्रैल तक चलेगा। राष्ट्रपति का अभिभाषण 31 जनवरी को सुबह 11 बजे होगा। • लोकसभा की बैठक 1 फरवरी को सुबह 11 बजे से होगी और उस दिन आम बजट पेश किया जाएगा। • 2 फरवरी से लोकसभा की कार्यवाही शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक चलेगी। • लोकसभा सचिवालय के बुलेटिन के अनुसार कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर निचले सदन की बैठक के दौरान दोनों सदनों के कक्षों और दीर्घाओं का इस्तेमाल सदस्यों के बैठने के लिए किया जाएगा। कुल 29 बैठकें होंगी : बजट सत्र के दौरान कुल 29 बैठकें होंगी, जिसमें पहले चरण में 10 बैठक और दूसरे चरण में 19 बैठकें होंगी। बजट सत्र का आयोजन ऐसे समय हो रहा है, जब पांच राज्यों- उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब व मणिपुर में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ये मुद्दे उठाएगा विपक्ष : मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने बजट सत्र में कोरोना प्रभावित परिवारों के लिए राहत पैकेज, महंगाई, बेरोजगारी, किसानों से जुड़े मुद्दे, सीमा पर चीन के साथ गतिरोध और कुछ अन्य मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने का फैसला किया है। पार्टी का कहना है कि सीमा पर चीन की बढ़ती आक्रामकता और उसके साथ चल रहे गतिरोध, महंगाई, बेरोजगारी, अर्थव्यवस्था की स्थिति, एयर इंडिया तथा दूसरी सरकारी कंपनियों के निजीकरण तथा किसानों से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा। संसद सत्र का कामकाज सुचारू रूप से चलाने के लिये राज्यसभा के सभापति एवं उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू और संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद पटेल सोमवार को राजनीतिक दलों के सदनों में नेताओं के साथ बैठक करेंगे। लोकसभा सचिवालय के बुलेटिन के अनुसार, कार्य मंत्रणा समिति की बैठक सोमवार 31 जनवरी को होगी।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में स्कूल खोलने को लेकर चर्चाएं जोरों पर है। वहीं प्राइवेट स्कूल एंड चिल्ड्रन वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से राजधानी रांची में राज्य स्तरीय विचार संगोष्ठी की गई, जहां अभिभावकों को भी आमंत्रित किया गया। अभिभावकों ने हेमंत सरकार से अपील की है और झारखंड में स्कूल खोलने की मांग तेज कर दी है। कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए राज्य भर में जनवरी माह के प्रथम सप्ताह से ही तमाम शिक्षण संस्थानों के साथ-साथ स्कूल कॉलेज को बंद कर दिया गया। अब एक बार फिर कोरोना महामारी के कम होते रफ्तार को देखते हुए विभिन्न संगठनों के साथ-साथ अभिभावकों और प्राइवेट स्कूल एंड चिल्ड्रन वेलफेयर एसोसिएशन ने झारखंड सरकार से स्कूल खोलने की मांग की है। इसी कड़ी में एसोसिएशन की ओर से राजधानी रांची में इस विषय को लेकर एक राज्यस्तरीय विचार संगोष्ठी की गई। जहां राज्य भर के प्रतिनिधि और अभिभावक भी शामिल हुए। इस राज्य स्तरीय संगोष्ठी में लोगों ने कहा कि कोविड-19 गाइडलाइन का पालन करते हुए अब क्लास वन से लेकर 12वीं तक के स्कूलों को खोला जाना चाहिए। 22 महीने से बंद है बच्चों का स्कूल : झारखंड में पिछले 22 महीने से प्राथमिक स्कूल बंद हैं। वर्ष 2015 और 16 में जन्म लेने वाले बच्चों ने अब तक स्कूल में कदम तक नहीं रखा है। करीब 2 वर्ष के दौरान कोरोना संक्रमण काल में लोगों ने कई परेशानियों के झेला है और अब इस बीमारी से लड़ाई का तरीका भी सीख लिया है। अब धीरे-धीरे स्थितियां सामान्य हो रही हैं। इसलिए आवश्यक दिशा निर्देश के साथ स्कूलों को खोला जाना चाहिए। बच्चों और उनके अभिभावक युवाओं के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। इसलिए राज्य सरकार अब यह फैसला ले कि किस तरह से सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखते हुए कम उपस्थिति में स्कूल खोला जा सके। शिक्षा को लेकर माता-पिता से ज्यादा गुरु चिंतित हैं। मोबाइल की वजह से आठ दस साल के बच्चे बड़े और मेच्योर नजर आने लगे हैं। इस ओर भी ध्यान देने की जरूरत है। स्कूल खोलने के बाद ही इन परेशानियों को दूर किया जा सकता है।
टीम एबीएन, रांची। जेल में बंद कैदियों के प्रति राज्य सरकार सख्त है। शिकायतें अति हैं कि अपराधी जेल से ही अपना सिंडिकेट चलते हैं। ऐसे में सरकार उन्हें कोई मौका नहीं देना चाहती है। इसी को लेकर मुख्य सचिव और डीजीपी के मीटिंग के बाद अपराधियों पर नकेल कसने के लिए हर तरह की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इसी कड़ी में रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में रांची जिला प्रशासन और रांची पुलिस की टीम ने अचानक छापेमारी की है। छापेमारी में रांची डीसी, एसएसपी, एसडीओ, कई डीएसपी, आठ थानेदार सहित 100 से अधिक जवानों को लगाया गया है। जेल में महिला बैरक की जांच के लिए अलग से महिला पुलिस कर्मियों को भी लगाया गया है। छापेमारी के दौरान रांची जेल के अंदर बंद सभी कुख्यात अपराध कर्मियों के सेल को खंगाला जा रहा है। वहीं इस दौरान सभी जेल कर्मियों को बाहर रहने का ही निर्देश दिया गया है। छापेमारी के दौरान पूरे जेल परिसर को खंगाला जा रहा है। हालांकि अभी तक जेल से कोई आपत्तिजनक सम्मान मिला है या नहीं इसकी जानकारी बाहर निकलकर नहीं आ पाई है।
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