टीम एबीएन, रांची। झारखंड में कोरोना संक्रमण के कम होते मामलों के बीच राज्य की हेमंत सोरेन सरकार ने शिक्षण संस्थानों को खोलने का आदेश दिया है। दरअसल, बीते सोमवार को राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार की बैठक में लंबे अरसे से बंद चल रहे स्कूलों को खोलने का निर्णय लिया गया। अब ऐसे में स्कूलों को खोलने के साथ ही राज्य सरकार ने कई गाइडलाइन भी जारी किए हैं, जिनका पालन सभी स्कूलों को करना होगा। राज्य सरकार के निर्देश के अनुसार स्कूलों को क्लास के दौरान कोरोना गाइडलाइंस का समुचित ध्यान रखने की अवश्यकता होगी। स्कूलों में सभी लोग मास्क का इस्तेमाल करें और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। यह सारी व्यवस्था स्कूल प्रबंधन को सुनिश्चित करनी होगी। इसके साथ ही स्कूलों को अपने क्लास रूम से लेकर स्टाफ रूम और कारिडोर तक को समय-समय पर सैनिटाइज करना होगा। वहीं जगह-जगह शारीरिक दूरी और कोविड नियमों के पालन के लिए बोर्ड और पोस्टर भी लगाने होंगे। वहीं स्कूलों में केवल ऐसे शिक्षकों को क्लास लेने की इजाजत होगी, जिन्होंने कोरोना वैक्सीन का दोनों डोज ले लिया हो। स्कूलों और संस्थानों में किसी प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रतिबंधित रहेंगे। कक्षा में शिक्षक व छात्रों को मास्क पहनना अनिवार्य होगा। हॉस्टल में कोरोना गाइडलाइंस का करना होगा पालन : बता दें, राज्य सरकार ने जिन जिलों सभी कक्षाओं के लिए स्कूल खोलने की अनुमति दी है। यदि उनके यहां हॉस्टल हैं तो उसे भी खोले जा सकेगा। लेकिन, हॉस्टल में कोरोना गाइडलाइंस के अनुरूप हर व्यवहार का पालन कराना होगा। वहीं झारखंड में कोचिंग व अन्य शिक्षण संस्थानों के लिए भी ये नियम ही लागू होंगे। कॉलेज और यूनिवर्सिटी में उपस्थिति की अनिवार्यता नहीं रहेगी। छात्रों के लिए ऑफलाइन क्लास वैकल्पिक होगा। लेकिन, छात्रों व शिक्षकों को टीके का डबल डोज अनिवार्य होगा। एसओपी के अनुसार, भारत सरकार, राज्य सरकार व अन्य द्वारा आयोजित ऑफलाइन परीक्षा की अनुमति दी गयी है। समय-समय पर जांच जरूरी : इसके साथ ही हर जिले में जिला प्रशासन टीम को भी समय-समय पर कोविड -19 टेस्ट कराने के निर्देश भी दिये गये हैं। वहीं समय-समय पर स्कूलों में जाकर देखना होगा कि कोरोना गाइडलाइंस का पालन हो रहा है कि नहीं। बता दें, फिलहाल राज्य के 17 जिलों में ही क्लास वन से ऊपर की कक्षा खोलने का निर्णय लिया गया है। जबकि 7 जिलों में क्लास 9 से ऊपर के क्लास संचालित होंगे। इन 7 जिलों में रांची, बोकारो, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला, सिमडेगा, चतरा और देवघर शामिल हैं। नये आदेश के अनुसार अब कोचिंग संस्थानों को भी खोलने का निर्णय लिया गया है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड विधानसभा का बजट सत्र 25 फरवरी से 25 मार्च तक आहूत किया गया है। आधिकारिक प्रवक्ता ने बुधवार को बताया कि राज्यपाल रमेश बैस ने संविधान के अनुच्छेद 176 (1) के तहत झारखंड विधानसभा का बजट सत्र 25 फरवरी, 2022 से आहूत करने की अनुमति दी है। प्रवक्ता के अनुसार, राज्यपाल ने अपने आदेश में कहा है, भारत के संविधान के अनुच्छेद 176 के खंड (1) में प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए मैं झारखंड विधानसभा के सत्र को 25 फरवरी, 2022 पूर्वाह्न 11 बजकर 30 मिनट पर संबोधित करना चाहता हूं। इसके लिए झारखंड विधानसभा के सभागार में सदस्यों की उपस्थिति चाहता हूं। विधानसभा का सत्र 25 फरवरी शुक्रवार को राज्यपाल के अभिभाषण के साथ शुरू होगा। तीन मार्च बृहस्पतिवार को विधानसभा में राज्य सरकार आगामी वित्त वर्ष का बजट पेश करेगी।
टीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश के बाद आदिवासी सामाजिक व्यवस्था को गांव-पंचायत स्तर पर नेतृत्व प्रदान करने वाले मांझी हडाम, जोग मांझी, पराणिक, नायके बाबा, कुड़ाम नायके को भी अब सम्मान राशि मिलेगी। गिरिडीह जिला के पीरटांड़ प्रखंड में मांझी हडाम, जोग मांझी, पराणिक, नायके बाबा, कुड़ाम नायके को राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा प्रतिमाह एक हजार रुपए सम्मान राशि का भुगतान किया जायेगा। राज्य सरकार से स्वीकृति मिलने के उपरांत पीरटांड़ के 177 मांझी हडाम, 179 जोग मांझी, 143 पराणिक, 78 नायके बाबा एवं 120 कुड़ाम नायके को सम्मान राशि प्राप्त होगी। मालूम हो कि उपरोक्त सभी 697 लोगों का नाम पूर्व में छूट गया था। गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार द्वारा मामले की जानकारी मुख्यमंत्री को दी गई। जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री सोरेन ने जल्द से जल्द इन्हें सम्मान राशि प्रदान करने का निर्देश दिया था। वर्तमान में मानकी को प्रतिमाह तीन हजार, मुण्डा एवं ग्राम प्रधान को प्रतिमाह दो हजार तथा डकुआ, परगणौत, पराणिक, जोग मांझी, कुड़ाम नायकी, नायकी, गोड़ैत, मूल रैयत, पड़हा राजा, ग्रामसभा का प्रधान, घाटवाल, तावेदार तथा ग्रामीण दिउरी (पुजारी) को प्रतिमाह एक हजार रुपये सम्मान राशि का भुगतान किया जा रहा है। ऐसे में इनके समरूप कार्य करने वाले मांझी हडाम, जोग मांझी, पराणिक, नायके बाबा, कुड़ाम नायके को भी सम्मान राशि देने का निर्णय लिया गया।
टीम एबीएन, रांची। झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन के आवास के पास गैंगवार के बाद रांची जिला प्रशासन राजधानी की सुरक्षा को लेकर हाई अलर्ट मोड पर है। पूरे शहर पर निगरानी रखने के लिए रांची के डीसी छवि रंजन ने राजधानी रांची स्थित सभी निजी और सरकारी प्रतिष्ठानों के मेन गेट पर सड़क की ओर मुख कर सीसीटीवी कैमरा लगाने का आदेश दिया है। क्या है आदेश: डीसी के आदेश में यह लिखा हुआ है कि रांची के मोरहाबादी मैदान जैसे सुरक्षित स्थान पर गोलीबारी कर अपराधियों ने बड़ा दुस्साहस दिखाया है। राजधानी में आपराधिक घटनाओं में हो रही वृद्धि को लेकर और भविष्य में आपराधिक घटनाओं पर अंकुश लगाने को लेकर प्रतिष्ठानों में सीसीटीवी कैमरा का होना अति आवश्यक है। डीसी ने प्रतिष्ठानों के संचालकों को निर्देश दिया है कि दुकानों, शॉपिंग मॉल और अन्य किसी भी संस्थान में उच्च स्तर का सीसीटीवी कैमरा लगाते हुए उसके डीवीआर में 30 दिनों तक का 24X 7 निर्बाध वीडियो फुटेज सुरक्षित कर बाहरी कैमरे के डीवीआर के फीड को जिला कम अपोजिट कंट्रोल रूम को उपलब्ध कराएं। जल्द लगाया जाए सीसीटीवी: डीसी ने सभी प्रतिष्ठानों के मालिकों या संचालकों को जल्द से जल्द निर्देश का पालन करने को कहा है। उन्होंने कहा कि आप अपने स्तर से अपने प्रतिष्ठानों के आसपास सड़क की ओर सीसीटीवी कैमरा लगाना सुनिश्चित करें, जिससे कि रांची में गैंगवार की स्थिति दोबारा ना बने। लोगों की जानमाल की क्षति ना हो और रांची शहर में विधि व्यवस्था और शांति व्यवस्था बनी रहे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। रक्षा मंत्रालय ने सशस्त्र सेनाओं में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक और कदम उठाते हुए वायु सेना में अब महिलाओं को प्रायोगिक के बजाय स्थायी योजना के तहत लड़ाकू पायलट के रूप में शामिल करने का निर्णय लिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को खुद इस निर्णय की घोषणा की। सिंह ने कहा कि रक्षा मंत्रालय ने वायु सेना में महिला लड़ाकू पायलटों को भर्ती करने की प्रायोगिक योजना को स्थाई योजना में बदलने का निर्णय लिया है। यह भारत की नारी शक्ति की क्षमता तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नारी सशक्तिकरण के प्रति वचनबद्धता का प्रमाण है। वायु सेना में महिला पायलटों को लड़ाकू भूमिका के लिए पहली बार वर्ष 2016 में मौका दिया गया था जिसके बाद 3 महिला अधिकारियों ने लड़ाकू विमान के पायलट के रूप में प्रशिक्षण लिया था। वर्ष 2018 में फ्लाइंग ऑफिसर अवनी चतुर्वेदी ने अकेले लड़ाकू विमान उड़ा कर इतिहास रचा था। उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय ने कुछ महीने पहले ही राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में महिलाओं की भर्ती को मंजूरी देते हुए सरकार से अकादमी के दरवाजे महिलाओं के लिए खोलने का आदेश दिया था।
टीम एबीएन, रांची। केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए आम बजट पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने केंद्र सरकार पर हमला करते हुए कहा कि यह बजट मध्यमवर्गीय परिवार, नौकरी पेशा और गरीब वर्ग विरोधी है। राष्ट्रीय संपदा को पूंजीपतियों को उपहार स्वरूप देने के लिए यह बजट बनाया गया है। सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि यह बजट पूरी तरह आरक्षण विरोधी है। किसानों को झुनझुना थमाने वाला है। उन्होंने कहा कि बजट में युवाओं, किसानों, आदिवासियों, दलितों और पिछड़ों का खयाल नहीं रखा गया है। प्रधानमंत्री सिर्फ मन की बात कहते हैं, उन्हें किसी की भावना का खयाल नहीं है। यह इस बजट में साफ साफ दिख रहा है। उन्होंने कहा कि इस बजट में राज्यों को विकास के लिए ऋण दिए जाएंगे जबकि पहले फंड के रूप में दिया जाता था। उन्होंने कहा कि आज के बजट में वित्त मंत्री ने केंद्र के मन की बात कही है। इस बजट में किसी की सुनवाई नहीं हो रही है सिर्फ अपनी बातें होती हैं। नीति आयोग के CEO अमिताभ कांत ने कहा कि ये बहुत ही प्रगतिशील बजट है। ये पिछले साल के बजट की निरंतरता में है। इस बजट से भारत की लंबे समय तक ग्रोथ होगी। इसकी खासियत ये है कि ये पूंजीगत व्यय पर फोकस करता है। पिछले साल 5.54 लाख करोड़ दिए गए थे, इसे बढ़ाकर 7.5 लाख करोड़ कर दिया गया है। इस बजट ने शहरीकरण और MSME पर बहुत फोकस किया है। MSME की क्रेडिट गारंटी स्कीम को 4.5 लाख करोड़ से बढ़ाकर 5 लाख करोड़ कर दिया गया है। पर्यटन क्षेत्र पर बहुत फोकस किया गया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अगले वित्त वर्ष में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 44 हजार करोड़ रुपए की लागत से 80 लाख बनाने की घोषणा की है। श्रीमती सीतारमण ने मंगलवार को आज संसद में वित्त वर्ष 2022-23 का बजट प्रस्तुत करते हुए कहा कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में 80 लाख मकानों का निर्माण किया जाएगा। ये मकान शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बनाये जाएगें। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्र की नीतियों, क्षमता सृजन, नियोजन, क्रियान्वयन, प्रशासन के बारे में सिफारिशें करने के लिए जाने-माने शहरी नियोजकों, शहरी विकास विशेषज्ञों तथा संस्थानों की एक उच्च स्तरीय समिति बनाने का प्रस्ताव किया है, ताकि शहरी विकास में मूलभूत परिवर्तन लाया जा सकें। बजट में आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय के लिए 76549.46 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। सीतारमण ने कहा कि शहरी नियोजन का सामान्य दृष्टिकोण जारी नहीं रखा जा सकता, क्योंकि भारत में 2047 तक लगभग आधी आबादी शहरी क्षेत्रों में रहने लगेगी। इसकी तैयारी के लिए व्यवस्थित शहरी विकास महत्वपूर्ण है। इससे देश की आर्थिक क्षमता का उपयोग किया जा सकेगा, जिसमें जनसांख्यिकीय लाभ के लिए आजीविका संबंधी अवसर भी आते हैं। इसके लिए एक ओर जहां हमें मेगा-सिटीज के पोषण की जरूरत है, आस-पास के क्षेत्रों को आर्थिक विकास के वर्तमान केन्द्रों के रूप में विकसित करने की आवश्यकता हैं। द्वितीय और तृतीय श्रेणी शहरों में सुविधा प्रदान किए जाने की जरूरत है, जिससे कि इनको भविष्य के लिए तैयार किया जा सके। वित्त मंत्री ने कहा कि शहरों को जीवन विकास केन्द्र के रूप में देखने की आवश्यकता है, जिसमें सभी के लिए विशेषकर महिलाओं और युवाओं के लिए अवसर उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि शहरी क्षमता निर्माण के लिए राज्यों को सहायता दी जाएगी। भवन संबंधी उपनियमों के आधुनिकीकरण टाउन नियोजन योजनाएं और परिवहन उन्मुखी विकास लागू किया जाएगा। इससे जन परिवहन व्यवस्थाओं के साथ लोगों के रहने और निकटता से कार्य करने संबंधी सुधार होंगे। सार्वजनिक परिवहन परियोजनाओं और अमृत योजना के लिए दी जाने वाली केंद्र सरकार की वित्तीय सहायता का लाभ कार्य योजनाओं को तैयार करने और उनका कार्यान्यवन करने और राज्यों द्वारा टाउन नियोजन योजनाएं और परिवहन उन्मुखी विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि शहरी नियोजन और डिजाइन में भारत विशिष्ट ज्ञान विकसित करने और इन क्षेत्रों में प्रमाणित प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए, विभिन्न क्षेत्रों में पांच मौजूदा शैक्षिक संस्थाओं को उत्कृष्टता केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा। इन केंद्रों को प्रत्येक के लिए 250 करोड़ रुपए की निधि दी जाएगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2022 पेश करने के बाद प्रैस कांफ्रेस की। जिसमें उन्होंने कहा कि हमने आम लोगों का ध्यान रख बजट बनाया है। उन्होंने कहा कि हमने टैक्स नहीं बढ़ाया। एक भी पैसा अतिरिक्त टैक्स के द्वारा कमाने की कोशिश नहीं की। पिछली बार प्रधानमंत्री का आदेश था कि घाटा कितना भी हो, महामारी में जनता पर टैक्स का बोझ नहीं डालना। इस बार भी वही निर्देश थे। उन्होंने कहा कि हम हर ट्रांजैक्शन पर 1% टीडीएस लगाकर उसमें (क्रिप्टो करेंसी) पैसे के हर लेन-देन पर भी नजर रख रहे हैं। निर्मला सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदेश हैं कि कोरोना काल में लोगों पर बोझ न बढ़े, इसलिए 2 साल से टैक्स नहीं बढ़ाया गया है। यह लोगों के लिए सबसे बड़ी राहत की बात है। निर्मला सीतारमण ने आगे कहा कि महामारी के बावजूद सरकार ने जनता पर टैक्स के जरिए किसी भी तरह की भरपाई करने की कोशिश तक नहीं की, यानी कि टैक्स नहीं बढ़ाया गया। उन्होंने कहा कि विनिवेश को लेकर सरकार की मंशा प्रगतिशील है। योजना के मुताबिक एलआईसी का विनिवेश किया जाएगा। इस दौरान उन्होंने बताया कि छकउ का आईपीओ लाने की पूरी तैयारी है।
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