टीम एबीएन, रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि वर्तमान समय महिलाओं के आगे बढ़ने का बेहतर वक्त है और हर माध्यम से महिलाओं को प्रोत्साहन देना सरकार की प्राथमिकताओं में है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कही। मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग से मंगलवार को यहां मंत्रालय में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि सरकार हर महिला के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने को संकल्पित है। मेरा मानना है कि महिलाओं को समान अधिकार मिलना चाहिए। हम महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं, लेकिन झारखण्ड के परिपेक्ष्य में बात करें तो कई क्षेत्रों में महिलाओं को आगे लाने और उन्हें अपने साथ लेकर चलने के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता है। क्योंकि महिलाएं आधी जिम्मेवारी की हिस्सेदार होती हैं। आज के भौतिकवादी युग में बदलाव हुए हैं। आज कहीं ना कहीं रोशनी उन इलाकों तक भी पहुंच रही है, जहां महिलाओं को उनके पैरों पर खड़ा करने का प्रयास किया गया है और यह क्रम लगातार जारी है। उनके पारंपरिक सांस्कृतिक व्यवस्था के साथ आगे बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है। इन सब विषयों को उन तक हमें पहुंचाने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को सशक्त करने का कार्य हो रहा है, जिस तरह महिलाएं बढ़ना चाहती हैं। वैसी कार्य योजना बन रही है। जो अपने पैरों पर खड़ा होने की इच्छुक हैं। सरकार उन्हें हर संभव सहयोग देने को तैयार है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में महिला उत्पीड़न को लेकर बातें आती हैं। आज भी ऐसी सोच विद्यमान है, जिसे समाप्त करने का दायित्व हम सबका है तभी हम समान नजरों से देख महिलाओं को साथ लेकर बढ़ सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष ध्यान देने की जरूरत है उन तक हमें पहुंचना होगा। सोरेन ने कहा कि आज के दिन को हम महत्वपूर्ण दिन के रूप में देख सकते हैं। मानव सृजन से अब तक कहीं ना कहीं किसी ना किसी रूप में महिलाओं की भूमिका प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रही है। अलग-अलग समय में विकास की लकीरें खींची गई। समूह, वर्ग, जाति और धर्म में लोग विभक्त हुए। अपने समाज और संस्कृति के साथ सभी बढ़ते चले गए। कुछ पीछे भी रहे। ऐसे पीछे छूट चुके समाज की महिलाएं और भी पीछे चली गई। लेकिन पुरुष की तरह हर कुछ महिलाएं भी कर सकती हैं। नीति निर्धारण करने वालों ने अलग-अलग तरीके से नीति का निर्धारण किया। बावजूद इसके मानव जीवन ने यह महसूस किया कि पुरुष के साथ-साथ महिलाएं को भी साथ चलना चाहिए। तभी विकास की अवधारणा परिलक्षित होगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सरकार ने करीब दो साल बाद देश में 27 मार्च से अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक उड़ानों को कोविड दिशानिर्देशों के अनुपालन के साथ पुन: शुरू करने का फैसला किया है। नागर विमान महानिदेशालय (डीजीसीए) ने कोविड महामारी के मद्देनज़र 23 मार्च 2020 से अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक उड़ानों को स्थगित कर दिया था। डीजीसीए ने 28 फरवरी को जारी परिपत्र में अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक उड़ानों पर रोक को अगले आदेश तक बढ़ाया था। नागर विमानन मंत्रालय ने आज कहा कि विश्व भर में कोविड टीकाकरण के कवरेज में वृद्धि और सभी पक्षकारों से विचार विमर्श के उपरांत भारत सरकार ने नियमित वाणिज्यिक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को 26 मार्च को मध्य रात्रि के बाद नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया है और इस प्रकार से 27 मार्च 2022 से ये उड़ानें बहाल हो जाएंगी। कुछ खास देशों के साथ एयर बबल की व्यवस्था भी 26 मार्च की मध्य रात्रि तक चलेगी। सरकार ने करीब दो साल बाद देश में 27 मार्च से अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक उड़ानों को कोविड दिशानिर्देशों के अनुपालन के साथ पुन: शुरू करने का फैसला किया है। नागर विमान महानिदेशालय (डीजीसीए) ने कोविड महामारी के मद्देनज़र 23 मार्च 2020 से अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक उड़ानों को स्थगित कर दिया था। डीजीसीए ने 28 फरवरी को जारी परिपत्र में अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक उड़ानों पर रोक को अगले आदेश तक बढ़ाया था। नागर विमानन मंत्रालय ने आज कहा कि विश्व भर में कोविड टीकाकरण के कवरेज में वृद्धि और सभी पक्षकारों से विचार विमर्श के उपरांत भारत सरकार ने नियमित वाणिज्यिक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को 26 मार्च को मध्य रात्रि के बाद नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया है और इस प्रकार से 27 मार्च 2022 से ये उड़ानें बहाल हो जाएंगी। कुछ खास देशों के साथ एयर बबल की व्यवस्था भी 26 मार्च की मध्य रात्रि तक चलेगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अब फीचर फोन से भी यूपीआई पेमेंट होगा। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने मंगलवार को इसके लिए अलग यूपीआई लॉन्च किया। इसके UPI123Pay नाम दिया गया है। उन्होंने डिजिटल पेमेंट्स के लिए 24x7 हेल्पलाइन भी लॉन्च की। इसका नाम डिजीसाथी है। इन दोनों का सीधा संबंध आम आदमी से है। UPI123Pay की मदद से यूजर्स फीचर फोन से यूपीआई पेमेंट कर सकेंगे। स्कैन एंड पे छोड़ सभी तरह के ट्रांजेक्शन इससे किए जा सकेंगे। पेमेंट के लिए इंटरनेट जरूरी नहीं होगा। इस फैसिलिटी का इस्तेमाल करने के लिए यूजर्स को अपने मोबाइन नंबर और बैंक अकाउंट को लिंक करना होगा। यूपीआई पेमेंट प्लेटफॉर्म की शुरुआत 2016 में हुई थी। तब से इसका इस्तेमाल कई गुना बढ़ गया है। लेकिन, अब तक यूपीआई पेमेंट के लिए स्मार्टफोन जरूरी था। इस वजह से गांवों में कई लोग इसका इस्तेमाल नहीं कर पाते थे। पिछले साल दिसंबर में आरबीआई ने कहा था कि वह फीचर फोन के लिए भी यूपीआई लॉन्च करेगा। आरबीआई का मानना है कि फीचर फोन के लिए यूपीआई फैसिलिटी शुरू होने से गांवों में डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल बढ़ेगा। इससे फाइनेंशियल सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी। गांवों में कई लोगों के पास स्मार्टफोन नहीं होते हैं। इसके अलावा वहां इंटरनेट की उपलब्धता की भी गारंटी नहीं होती है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के छठे दिन आज मुख्यमंत्री प्रश्नकाल के दौरान पक्ष-विपक्ष की ओर से कई प्रश्न पूछे गए। आजसू पार्टी के प्रमुख सुदेश महतो द्वारा पूछे गए एक नीतिगत प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में विस्थापन बड़ी समस्या है। विस्थापितों की समस्याओं के समाधान को लेकर विस्थापन पुनर्वास आयोग का विषय विचाराधीन है। जिस पर सरकार जल्द निर्णय लेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में खनन कार्य 50 से 100 वर्षों से चल रहा है। सरकार से भी जमीन ली गयी, लेकिन इसका मुआवजा अब तक नहीं मिलेगा, राज्य सरकार विस्थापितों की समस्याओं के समाधान को लेकर जल्द ही विस्थापन आयोग के गठन पर निर्णय लेगी। भाजपा के शशिभूषण मेहता के एक अन्य प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने बताया कि झारखंड राज्य कर्मचारी आयोग द्वारा तृतीय और चतुर्थ वर्ग के पदों के लिए ली जानी प्रतियोगिता परीक्षा के लिए हिन्दी और अंग्रेजी को नहीं हटाया गया है। उन्होंने बताया कि जेएसएससी में हिन्दी पहले से ही है। जेएसएससी की मैट्रिक एवं इंटर स्तर पर होने वाली परीक्षाओं में हिन्दी और अंग्रेजी विषय 120 अंकों का पहले से ही निर्धारित है और इसमें उत्तीर्णता का अंक 30 प्रतिशत है, इसलिए इसे दोबारा जोड़ने की जरूरत नहीं हैं। पूर्व में मुख्य परीक्षा में भी हिन्दी की अनिर्वायता की वजह से जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा के लोग छूट जाते थे। इसलिए मुख्य परीक्षा में भी इसे शामिल करने की जरूरत नहीं हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने अलग-अलग जिलों में जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए भाषा का निर्धारित किया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश के छह राज्यों में राज्यसभा की रिक्त होने जा रही 13 सीटों के लिए आगामी 31 मार्च को चुनाव होगा। निर्वाचन आयोग ने सोमवार को यह जानकारी दी। असम, हिमाचल प्रदेश, केरल, नगालैंड और त्रिपुरा से राज्यसभा के आठ सदस्यों का कार्यकाल दो अप्रैल को और पंजाब के पांच सदस्यों का कार्यकाल नौ अप्रैल को पूरा होगा। इस कारण ये सीटें रिक्त हो रही हैं। जिन सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो रहा है उनमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एके एंटनी और आनंद शर्मा भी शामिल हैं। निर्वाचन आयोग ने एक बयान में कहा, पंजाब में रिक्त हो रही पांच सीटों में से तीन के लिए एक चुनाव होगा, जबकि दो सीटों के लिए अलग चुनाव होगा क्योंकि ये सीटें दो अलग-अलग द्विवार्षिक चक्र से संबंधित हैं। राज्यसभा की इन सीटों के लिए होने वाले चुनाव की अधिसूचना 14 मार्च को जारी होगी और मतदान 31 मार्च को होगा। स्थापित परिपाटी के तहत मतदान वाले दिन ही शाम पांच बजे से मतगणना होगी। उच्च सदन में केरल से एंटनी, हिमाचल प्रदेश से आनंद शर्मा, पंजाब से प्रताप सिंह बाजवा (कांग्रेस) एवं नरेश गुजराल (अकाली दल) का कार्यकाल पूरा हो रहा है। पंजाब से राज्यसभा चुनाव का फैसला गत 20 फरवरी को हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों पर निर्भर करेगा। विधानसभा चुनाव के लिए डाले गए मतों की गणना 10 मार्च को होगी। पंजाब से पांच सीटों के अलावा, केरल से राज्यसभा की तीन, असम से दो और हिमाचल प्रदेश, नगालैंड तथा त्रिपुरा से एक-एक सीटें रिक्त हो रही हैं।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के 250 प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में जनजातीय भाषा में पढ़ाई शुरू कर दी गई है। अभिभावकों की सहमति के बाद झारखंड के स्कूलों में जनजातीय भाषा में पढ़ाई शुरू करने के लिए सरकार ने पहल की है। जनजातीय भाषा में के पढ़ाई के तहत कक्षा 3 तक बच्चों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा दिया जाएगा। झारखंड राज्य शिक्षा परियोजना की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक पायलट प्रोजेक्ट के तहत पहले चरण में ढाई सौ प्राथमिक व मध्य विद्यालयों में जनजातीय भाषा में पढ़ाई शुरू हुई है। इस अभियान में 46 हजार स्कूलों को चुना गया था। पहले ढाई सौ चयनित स्कूलों में से 17 विद्यालयों के अभिभावकों ने जनजातीय भाषा में पढ़ाई को लेकर सहमति नहीं दी थी। उन्होंने आपत्ति जाहिर कर कहा था कि जो बच्चे जनजातीय भाषा नहीं जानते हैं। वह कैसे पढ़ाई करेंगे। हालांकि नए सिरे से एक बार फिर रिपोर्ट तैयार करते हुए राज्य सरकार ने जहां उस भाषा को बोलने वाले 70 फीसदी या उससे अधिक बच्चे नामांकित है। वहीं इसकी पढ़ाई शुरू करवाई है। झारखंड राज्य शिक्षा परियोजना ने ढाई सौ स्कूलों में जनजातीय भाषा में कक्षा तीन तक की पढ़ाई शुरू की है। नई शिक्षा नीति के तहत प्राथमिक कक्षा की पढ़ाई बच्चों को मातृभाषा में देने के लिए जोर दिया गया है। इसके तहत खूंटी में मुंडारी, लोहरदगा में कुडुख, पश्चिमी सिंहभूम में हो, गुमला सिमडेगा में खड़िया और साहिबगंज में संताली भाषा में पढ़ाई शुरू की गई है। इसे लेकर संबंधित विद्यालयों के शिक्षकों को भी प्रशिक्षण दिया गया है। जेसीईआरटी ने तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन कर ऐसे शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया है। इसके अलावा पठन-पाठन को लेकर जिला शिक्षा समिति भी गठित की गई है। ताकि जनजातीय भाषा से जुड़े स्कूलों में पठन-पाठन सही तरीके से संचालित की जा सके।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड विधानसभा का बजट सेशन चल रहा है। 5 और 6 मार्च के दो दिनों के अवकाश के बाद आज फिर सदन की कार्यवाही चलेगी। विधानसभा के छठे कार्यदिवस पर सदन में आज मुख्यमंत्री प्रश्नकाल होगा, इसके बाद विभागवार बजट पर चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही भाषा विवाद को लेकर सदन में हंगामे के भी आसार है। 1932 के खतियान के आधार पर स्थानीय नीति लागू करने और क्षेत्रीय भाषा की सूची से भोजपुरी और मगही को हटाने की मांग को लेकर आजसू ने विधानसभा घेराव का आह्वान किया है। आजसू के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा के सख्त बंदोबस्त किए गए हैं। इस मुद्दे को लेकर आजसू कार्यकर्ताओं और प्रशासन के बीच भिड़ंत की आशंका है। आज सदन में (7 मार्च ) को मुख्यमंत्री प्रश्नकाल के अलावे सदन में बजट पर चर्चा होगी। 8, 9, 10 और 11 मार्च को प्रश्नकाल और वित्तीय वर्ष 2022-23 के बजट पर सदन में चर्चा होगी। 14 मार्च को प्रश्नकाल से सदन की कार्यवाही शुरू होगी। मुख्यमंत्री प्रश्नकाल और बजट पर सदन में चर्चा होगी। 15 मार्च को प्रश्नकाल और बजट पर सदन में चर्चा होगी। 16 से 20 मार्च तक सदन की कार्यवाही स्थगित रहेगा। 21 मार्च को प्रश्नकाल, मुख्यमंत्री प्रश्नकाल और बजट पर चर्चा सदन में होगी। 22 मार्च को प्रश्नकाल और बजट पर सदन में वाद विवाद होगा। 23 मार्च को बजट पर चर्चा के अलावे सदन में विनियोग विधेयक पेश किया जायेगा। 24 और 25 मार्च को सदन में सरकार की ओर से विधेयक पेश किया जायेगा।
टीम एबीएन, रांची। झारखण्ड सरकार राज्य से फाइलेरिया के उन्मूलन को लेकर प्रतिबद्ध है और इसी के दृष्टिगत 7 मार्च से 12 मार्च तक राज्य के 6 जिलों के लोगों को फाइलेरिया के प्रभाव आदि से बचाने के लिए मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) कार्यक्रम, कोविड-19 के दिशा-निर्देशों के अनुसार शुरू किया जाएगा। इस अवसर पर, राज्य कार्यक्रम अधिकारी, वेक्टर बोर्न डिजीजेज डॉ एसएन झा ने आज कहा कि राज्य सरकार वर्ष 2030 तक फाइलेरिया रोग के झारखण्ड से पूर्ण उन्मूलन के लिए प्रतिबद्ध है और इसीलिए योजना अनुरूप एमडीए आयोजित किये जा रहे हैं। इसी क्रम में, राज्य सरकार द्वारा 7 मार्च से 12 मार्च तक साहिबगंज, बोकारो, धनबाद, रामगढ, गुमला और देवघर जिलों मंस कोविड-19 के दिशा-निर्देशों के अनुसार शारीरिक दूरी (दो गज की दूरी), मास्क और हाथों की साफ-सफाई का अनुपालन करते हुए मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) कार्यक्रम प्रारंभ किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में लगभग 11556921 लक्षित लाभार्थियों को उम्र के अनुसार फाइलेरिया रोधी दवाओं डीईसी और अल्बेंडाज़ोल की निर्धारित खुराक प्रशिक्षित दवा प्रशासकों द्वारा अपने सामने मुफ्त खिलाई जाएगी। इन दवाओं का सेवन खाली पेट नहीं करना है। 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अति गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को छोड़कर सभी लोगों को ये दवाएं खानी हैं। इस संक्रमण से स्वयं को और अपने परिवार को सुरक्षित रखने के लिए प्रशिक्षित दवा प्रशासकों द्वारा मुफ़्त दी जाने वाली फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन उनके सामने ही अवश्य करें।उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि दवाएं वितरित नहीं करनी है बल्कि अपने सामने ही खिलानी हैं।
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