राज काज

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Published / 2022-06-09 15:26:46
18 जुलाई को होगा राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान, 21 को रिजल्ट

एबीएन सेंट्रल चुनाव। चुनाव आयोग ने गुरुवार को राष्ट्रपति चुनाव की तारीख का एलान कर दिया। आयोग के मुताबिक, देश के सर्वोच्च पद के लिए होने वाले चुनाव के लिए अधिसूचना 15 जून को जारी की जाएगी। नामांकन की आखिरी तारीख 29 जून तय की गई है। नामांकन पत्रों की जांच 30 जून को निर्धारित की गई है। उम्मीदवार अपना नामांकन दो जुलाई तक वापस ले सकेंगे। वहीं, राष्ट्रपति का चुनाव 18 जुलाई को होगा, जिसके नतीजे तीन दिन बाद यानी 21 जुलाई को आएंगे। चुनाव आयोग ने राष्ट्रपति चुनाव की तारीखों का एलान कर दिया है। नामांकन की अंतिम तारीख 29 जून तक है फिर मतदान 18 जुलाई को होगा। वहीं नतीजे 21 जुलाई को आएंगे। राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत 12 राज्यसभा सांसद राष्ट्रपति चुनाव में वोट नहीं डालते हैं। वहीं, 543 सदस्यों वाली लोकसभा में अभी 540 सांसद हैं। तीन सीटें खाली हैं। इन पर भी चुनाव की प्रक्रिया जारी है। मतलब साफ है कि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव से पहले लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा की सभी खाली सीटों पर उपचुनाव हो जाएंगे। चुने गए सदस्य राष्ट्रपति चुनाव में वोट डालेंगे।

Published / 2022-06-08 15:35:16
अब ओडिशा के चिल्का झील में मछलियां पकड़ने वाली बिल्लियों की हो रही गिनती

एबीएन सेंट्रल डेस्क। ओडिशा के चिल्का झील में पाई जाने वाली दुनिया की पहली मछली पकड़ने वाली बिल्लियों की गणना की जा रही है, चिल्का डेवलपमेंट अथॉरिटी ने 176 मछली पकड़ने वाली बिल्लियों की सूचना दी है। दो दिन पहले 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर बिल्ली के गणना की रिपोर्ट जारी की थी। चिल्का डेवलपमेंट अथॉरिटी ने द फिशिंग कैट प्रोजेक्ट के सहयोग से यह गणना की है। यह हालिया गणना मछली पकड़ने वाली बिल्ली के लिए दुनिया का पहला ऐसा जनसंख्या अनुमान है जो संरक्षित एरिया नेटवर्क के बाहर आयोजित किया गया था। बिल्लियों की गणना दो चरणों में की गयी थी। पहले चरण का आयोजन 2021 में चिल्का और उसके आसपास के क्षेत्रों के उत्तर और उत्तर-पूर्वी खंड में मौजूद 115 वर्ग किलोमीटर दलदली जमीन पर किया गया था। दूसरे चरण का आयोजन इस वर्ष परीकुड की तरफ चिल्का झील के तटीय द्वीपों के किनारे किया गया, जो एक खारे पानी का झील है। चिल्का विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुशांत नंदा ने बताया, "दोनों चरणों को मिलाकर, कुल 150 कैमरा ट्रैप तैनात किए गए थे और हर ट्रैप 30 दिनों तक मैदान में रहे। इसके बाद, डेटा का विश्लेषण करने के लिए स्थानीय रूप से स्पष्ट कैप्चर रीकैप्चर विधि का उपयोग किया गया।" अधिकारी ने आगे बताया, यह हकीकत में जज्बे की भागीदारी थी क्योंकि स्थानीय मछुआरे और चिल्का के ग्रामीण इस अभियान के प्राथमिक भागीदार थे। उनके समर्थन के बिना, इस विश्व स्तर पर खतरे से जूझ रही बिल्ली पर संरक्षित क्षेत्रों के बाहर दुनिया का पहला ऐसा जनसंख्या अनुमान संभव नहीं होता।" द फिशिंग कैट प्रोजेक्ट जो फिशिंग कैट पर दुनिया का सबसे लंबा चलने वाला संरक्षण और अनुसंधान प्रोजेक्ट है, इस प्रोजेक्ट के सह-संस्थापक पार्थ डे ने बताया, ग्रामीणों के अलावा, दस स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों ने भी इस अभियान के दौरान स्वेच्छा से हिस्सा लिया। चिल्का वन्यजीव प्रभाग के कर्मचारियों ने सक्रिय रूप से सहायता की और जनसंख्या आकलन में हिस्सा लिया। इस मायावी और खतरे में पड़ी प्रजातियों के अध्ययन के लिए कई स्टॉकहोल्डर्स को शामिल करने का ऐसा भागीदारी प्रयास एक अद्भुत मिसाल कायम करता है। खत्म होने की कगार पर मछली पकड़ने वाली बिल्लियां फिशिंग कैट दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया की एक मध्यम आकार की जंगली बिल्ली है। इसे आईयूसीएन रेड लिस्ट में लुप्तप्राय के रूप में दर्ज किया गया है, जिसका मतलब है कि यह जंगली बिल्ली विलुप्त होने के एक उच्च खतरे का सामना कर रही है। लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन के आर्टिकल कश् के परिशिष्ट भाग कक पर मछली पकड़ने वाली बिल्ली को सूचीबद्ध किया गया है, जो इन प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करता है। मछली पकड़ने वाली बिल्ली रात का जानवर है और इस जानवर का पता लगाना आसान काम नहीं है। मादा बिल्ली का वजन लगभग 8-10 किलोग्राम होता है और नर बिल्ली का वजन लगभग 10-15 किलोग्राम होता है। यह उथली गीली जमीन के किनारे से मछली का पता लगाती है, उसके बाद मछली के पीछे गोता लगाती है और अपने नुकीले पंजों से उसको पकड़ती है। गांव रेडियो में बिल्लियों की कहानी सुनिए। नंदा ने बताया, मछली पकड़ने वाली बिल्लियां जंगल के पास के गांवों से मवेशियों और मुर्गी का भी शिकार करती हैं और लोगों से मुसीबत मोल ले लेती हैं। चिल्का झील में काफी मात्रा में मछलियों की मौजूदगी और मानव निवास से दूरी ने चिल्का को मछली पकड़ने वाली बिल्लियों के लिए उपयुक्त आवास बना दिया है। मुख्य रूप से गीली जमीन के तबाह होने के कारण, जो उनका निवास स्थान है मछली पकड़ने वाली बिल्लियों को विश्व स्तर पर खतरा है। टियासा आध्या, सह-संस्थापक, द फिशिंग कैट प्रोजेक्ट ने बताया,"एशिया में जमीन का गीला पन खतरनाक तरीके से तेजी से खत्म हो रहा है और उनकी वर्तमान स्थिति पर मुनासिब डेटा या कई देशों में आधारभूत डेटा भी नहीं है। कई गीली जमीन की प्रजातियों की स्थिति का अभी तक अध्ययन नहीं किया गया है और खतरा बहुत ज्यादा है। उन्होंने आगे बताया, मछली पकड़ने वाली बिल्ली जैसी विशेष प्रजातियों को ट्रैक करना हमें इस बात की तरफ इशारा करता है कि इन इकोलॉजिकल सिस्टम के साथ क्या हो रहा है, जो जलवायु परिवर्तन और सूखे के खिलाफ सुरक्षा उपाय हैं।" फिशिंग कैट के लिए पंचवर्षीय संरक्षण योजना साल की शुरूआत में, चिल्का विकास प्राधिकरण ने चिल्का में मछली पकड़ने वाली बिल्लियों के संरक्षण के लिए पंचवर्षीय कार्य योजना अपनाने की अपनी मंशा जाहिर की थी। नंदा ने बताया, "टीएफसीपी के सहयोग से, हम जल्द ही एक फिशिंग कैट एक्शन प्लान साझा करने जा रहे हैं जो कि सोशियो-इकोलॉजिकल होगा। हमने पहले ही बिल्ली और उसकी सह प्रजातियों पर एक साल की लंबा गश्त और निगरानी कार्यक्रम शुरू कर दिया है।" अधिकारी ने आगे बताया, "इसकी स्कैलिंग के साथ, हम गीली जमीन के बदलाव को रोकने के लिए टिकाऊ और पारंपरिक रूप से कटाई वाले गिली जमीन के उत्पादों को बढ़ावा देंगे, एक रेस्क्यू और पुनर्वास केंद्र स्थापित करेंगे, छोटे पैमाने पर अनुभवात्मक और शिक्षाप्रद गिली जमीन पर्यटन को बढ़ावा देंगे, आवास बहाली कार्यक्रमों के साथ-साथ शिक्षा कार्यक्रमों को भी अपनाएंगे। हेमंत राउत, जो पर्यावरणविद् और गहिरमाथा समुद्री कछुए और मैंग्रोव संरक्षण सोसायटी के अध्यक्ष हैं ने बताया, मछली पकड़ने वाली बिल्ली अपना अधिकांश जीवन पानी के करीब घने वनस्पतियों में बिताती है और वह एक माहिर तैराक है। मछली पकड़ने वाली बिल्ली के सामने एक बड़ा खतरा गिली जमीनों की तबाही है, जो उसका पसंदीदा आवास है। राउत ने बताया, चिल्का झील के जलाशय सर्दियों में इरावदी डॉल्फिन और प्रवासी पक्षियों के लिए मशहूर है। लेकिन दुख की बात है कि मछली पकड़ने वाली बिल्ली, एक कम ज्ञात प्रजाति जो इस रामसर स्थल पर निवास करती है, डॉल्फिन जैसी स्थिति का आनंद नहीं लेती है।

Published / 2022-06-08 13:11:27
मोदी सरकार ने किसानों की दी बड़ी राहत, खरीफ की फसलों पर एमएसपी बढ़ाने को दी मंजूरी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। मोदी सरकार ने देश के करोड़ों किसानों को बड़ी सौगात दी है। 17 फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को बढ़ा दिया गया है। कैबिनेट ने बुधवार को यह फैसला लिया। तिल पर 523 रुपए की वृद्धि की गई है। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए बताया कि पिछले 8 वर्षों में बीज के बाजार के दृष्टिकोण के कारण फायदा हुआ है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा, आज की बैठक में खरीफ की 14 फसलों के लिए टरढ बढ़ाने का निर्णय लिया गया। पिछले साल जो तय किया गया कि लागत प्लस 50 प्रतिशत, उसे हमने लगातार आगे बढ़ाया है। किसान सम्मान निधि के तहत 2 लाख करोड़ खाते में जा चुका है। फर्टिलाइजर पर 2 लाख 10 हजार करोड़ की सब्सिडी दी गई है। उन्होंने आगे कहा कि कृषि बजट भी बढ़कर 1 लाख 26 हजार करोड़ रुपए का हो गया है। हमारी सरकार ने बाकी कई फसलों को भी एमएसपी के दायरे में लेकर आई है। बीमा से सिंचाई तक हर कदम पर सशक्तीकरण हुआ है। कृषि क्षेत्र में कई कदम उठाए गए हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि फसल विविधिकरण को प्रोत्साहन देते हुए सरकार ने एमएसपी की दरों में ऐतिहासिक वृद्धि की थी, जिससे किसानों की आय में बढ़ोतरी हुई और उससे उनकी बिक्री भी बहुत हुई। पिछले आठ सालों में मोदी सरकार के फैसलों से किसानों की आय बढ़ी है। साथ ही, किसानों को राहत भी मिली है।

Published / 2022-06-08 10:34:57
अब 31 जुलाई तक जमा करा सकेंगे डिटेल, सालाना मिलेंगे 6000 रुपये

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत आर्थिक मदद पाने वाले किसानों को ई-केवाईसी का प्रोसेस 31 जुलाई तक पूरा करना होगा। सरकार ने किसानों को राहत देते हुए पीएम किसान ई-केवाईसी (PM Kisan e-KYC) की शर्तों में ढील दी है। इसके तहत अब 31 मई की बजाय 31 जुलाई तक ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। बता दें कि इस योजना के तहत किसानों के बैंक खातों में 2000 रुपये की किस्त जमा होती है। 12 महीनों में कुल 6000 रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है। देश के करोड़ों किसानों को बड़ी राहत देते हुए केंद्र सरकार ने ऐलान किया है कि पीएम किसान योजना के तहत पंजीकरण कराने वाले किसान अपना ई-केवाईसी 31 जुलाई तक पूरा करा सकेंगे। पहले डेडलाइन 31 मार्च थी, फिर 31 मई तक बढ़ाई गई, अब 31 जुलाई तक ई-केवाईसी का प्रोसेस पूरा किया जा सकेगा। सरकार ने कहा है कि केवाईसी की प्रक्रिया पूरी न होने पर हर चार महीनों में सीधे बैंक खातों में मिलने वाली आर्थिक मदद (2000 रुपये) रुक सकती है। पीएम किसान सम्मान निधि पाने के हकदार किसान सरकारी पोर्टल पर जाकर ई-केवाईसी का प्रोसेस पूरा कर सकते हैं। किसानों को आधार कार्ड के साथ रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर वन टाइम पिन (OTP) के जरिए ई-केवाईसी पूरा करने का विकल्प दिया गया है। पीएम किसान पोर्टल- https:// pmkisan.gov.in/ पर विजिट करें। "फार्मर्स कॉर्नर" में e-KYC टैब दिया गया है। ई-केवाईसी टैब पर क्लिक करने के बाद आधार नंबर भरने का विकल्प मिलेगा। आधार नंबर भरने के बाद सर्च पर क्लिक करें। इसके बाद ओटीपी भरने को कहा जाएगा। आधार नंबर के साथ रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर वन टाइम पिन (ओटीपी) आएगा। मोबाइल में प्राप्त ओटीपी भरने के बाद "सबमिट ओटीपी" पर क्लिक करें। ऑफलाइन प्रोसेस कंप्यूटर या इंटरनेट सेवाओं से दूर किसान भाई ऑफलाइन केवाईसी पूरी कर सकते हैं। मोबाइल और आधार कार्ड के साथ कॉमन सर्विस सेंटर पर जाएं। बॉयोमेट्रिक वेरिफिकेशन करा कर पीएम किसान ई केवाईसी का प्रोसेस पूरा किया जा सकता है। 21 हजार करोड़ रुपये ट्रांसफर बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिमाचल प्रदेश दौरे के दौरान किसानों के बैंक खातों में लगभग 21 हजार करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे। पीएम किसान स्कीम की 11वीं किस्त के तहत जारी की गई आर्थिक मदद गत 31 मई को किसानों के बैंक अकाउंट में जमा हुई। किन किसानों को पैसे मिलते हैं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ वैसे किसानों को मिलता है जिनके पास खेती करने के लिए 2 हेक्टेयर से कम जमीन है। ऐसे किसान या उनके परिवार में किसी के पास भी सरकारी नौकरी नहीं होनी चाहिए। ऐसे परिवारों में कोई भी इनकम टैक्स पेयर नहीं होना चाहिए। पीएम किसान स्कीम का लाभ उन किसानों को ही मिलता है जो किसी भी तरह की सरकारी पेंशन का लाभ न उठा रहे हों।

Published / 2022-06-08 09:56:48
कहीं से भी डाल सकेंगे वोट... रिमोट वोटिंग की संभावनाएं तलाश रहा चुनाव आयोग

एबीएन सेंट्रल डेस्क। चुनाव आयोग ऐसी संभावनाएं तलाश रहा है जिससे दूरस्थ राज्यों में रह रहे लोग भी अपने राज्य के चुनाव में मतदान कर सकेंगे। चुनाव आयोग का ये प्रयास सार्थक हुआ तो आप देश के किसी भी कोने में हों, मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे। निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को कहा कि प्रवासी मतदाताओं के मुद्दों पर गौर करने के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें राजनीतिक दलों और मतदाताओं सहित सभी हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के बाद दूरस्थ मतदान की संभावनाएं तलाशना शामिल है। इसके अलावा, शहरी क्षेत्रों में मतदान को लेकर उदासीनता को दूर करने के लिए, केंद्र और राज्य सरकार के सभी विभागों, केंद्र और राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों और 500 से अधिक कर्मचारियों वाली कॉर्पोरेट संस्थाओं को अवकाश लेने वाले लेकिन गैर-मतदान कर्मचारियों का पता लगाने के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के लिए कहा जाएगा। निर्वाचन आयोग ने कहा कि इन संगठनों के ऐसे गैर-मतदान सदस्यों के लिए विशेष मतदाता शिक्षा और चुनावी भागीदारी जागरूकता सत्र आयोजित किए जाएंगे। निर्वाचन आयोग की एक बैठक में शहरी क्षेत्रों में किसी भी मतदाता के लिए दो किलोमीटर के भीतर मतदान केंद्र स्थापित किए जाने के बावजूद कुछ महानगरों / शहर क्षेत्रों में कम मतदान होने को लेकर चिंता व्यक्त की गई। बैठक में लिए गए फैसलों की घोषणा करते हुए आयोग ने कहा, मतदाता अपने मतदान पंजीकरण वाले स्थान से शहरों और अन्य स्थानों पर शिक्षा, रोजगार और अन्य उद्देश्यों के लिए पलायन करते हैं। उनके लिए वोट डालने के लिए अपने पंजीकृत मतदान केंद्र पर लौटना मुश्किल हो जाता है। आयोग का मानना है कि दूरस्थ मतदान की संभावनाओं का पता लगाने का समय आ गया है, और ऐसा प्रायोगिक आधार पर किया जा सकता है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार के उत्तराखंड के एक दूरस्थ मतदान केंद्र की एक घंटे की यात्रा करने के कुछ दिनों बाद, निर्वाचन आयोग ने मतदान के दिन से तीन दिन पहले ऐसे मतदान केंद्रों पर जाने वाले मतदान अधिकारियों के पारिश्रमिक को दोगुना करने का फैसला किया। आयोग के बयान के अनुसार निर्वाचन आयोग ने मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए कहा, विशेष रूप से प्रवासियों के बीच। आयोग ने कहा, अब समय आ गया है कि दूरस्थ मतदान की संभावनाओं का पता लगाया जाए और प्रायोगिक आधार पर ऐसा किया जा सकता है। कुमार ने शुक्रवार को उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित राज्य के सबसे दूरस्थ मतदान केंद्र दुमक का दौरा किया था। बयान में कहा गया है कि प्रवासी मतदाताओं के मुद्दों पर गौर करने के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा। बयान के अनुसार इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि मतदाता और राजनीतिक दल प्राथमिक हितधारक हैं, उसके बाद सभी हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श शुरू किया जाएगा। निर्वाचन आयोग की एक बैठक में यह भी फैसला लिया गया कि कठिनाई वाले क्षेत्रों में ईवीएम-वीवीपीएटी को सुरक्षित ले जाने के लिए अतिरिक्त उपकरण मुहैया कराए जाएंगे। बयान में कहा गया है, आयोग ने दुर्गम क्षेत्रों में चुनाव ड्यूटी करने वाले उन मतदानकर्मियों के समर्पण की सराहना की, जो मतदान से तीन दिन पहले ही मतदान केंद्रों पर पहुंच जाते हैं और आयोग ने ऐसे मतदान अधिकारियों का पारिश्रमिक दोगुना करने का फैसला किया। अब तक, मतदान अधिकारियों के लिए पारिश्रमिक सभी के लिए एक समान हुआ करता था।

Published / 2022-06-08 07:35:31
गुमला में सर्वजन पेंशन योजना की शुरुआत करेंगे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन

टीम एबीएन, गुमला। सीएम हेमंत सोरेन आज गुमला पहुंचेंगे। वो स्थानीय परमवीर अलबर्ट एक्का स्टेडियम में प्रमंडलस्तरीय सर्वजन पेंशन योजना का शुभारंभ करेंगे। इस मौके पर पांच जिलों के लाभुक शिरकत करेंगे। इसे लेकर प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। सीएम हेमंत सोरेन के अलावा इस कार्यक्रम में वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव, महिला बाल विकास एवं समाज कल्याण मंत्री जोबा मांझी सहित जिले के चारों विधानसभा क्षेत्र के विधायक भी शामिल होंगे। कार्यक्रम को लेकर अल्बर्ट एक्का स्टेडियम में पूरी तैयारी की गई है। कार्यक्रम में सिमडेगा, खूंटी, रांची और लोहरदगा जिला से एक एक हजार और गुमला जिले के पांच हजार लाभुक शामिल होंगे। कार्यकर्म स्थल का निरीक्षण करने पहुंचे जिला के उपायुक्त सुशांत गौरव ने बताया कि सर्वजन पेंशन वितरण सह जागरूकता कार्यक्रम में 5 लोगों को सांकेतिक रूप से प्रमाण पत्र दिया जाएगा। इसके साथ ही एएनएम और जीएनएम को सांकेतिक रूप नियुक्ति पत्र सौंपा जाएगा। उन्होंने कहा कि गुमला जिला इस कार्यक्रम की मेजबानी कर रहा है। ऐसे में प्रयास होगा प्रमंडलस्तरीय इस कार्यक्रम में आने वाले तमाम मेहमान संतुष्ट हो। वहीं, जिला के पुलिस अधीक्षक डॉ एहतेशाम वकारीब ने बताया कि मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। शहर में ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त कर ली गई है। इस कार्यक्रम में आने वाले तमाम लोगों को हर प्रकार की सुविधा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जिला पुलिस के अलावे स्पेशल ब्रांच के अधिकारी मौजूद भी रहेंगे।

Published / 2022-06-07 15:10:16
झारखंड : राज्यपाल रमेश बैस को मिली डी लिट की मानद उपाधि

टीम एबीएन, रांची। झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस को जगदीशप्रसाद झाबरमल टिबड़ेवाला विश्वविद्यालय, झुंझुनू ने राज भवन, रांची में आयोजित विशेष दीक्षांत समारोह डी. लिट की मानद उपाधि प्रदान की। इस मौके पर राज्यपाल ने उम्मीद जतायी कि यह विश्वविद्यालय अपनी उपलब्धियों से अन्य शिक्षण संस्थानों के लिए प्रेरणा का कार्य करेगा और किसी की भी गरीबी उसके उच्च शिक्षा हासिल करने में बाधक नहीं होगी। राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा से ही किसी भी भी देश व समाज की उन्नति संभव है, शिक्षा ही एक विकसित समाज की नींव होती है। उन्हें प्रसन्नता है कि यह विश्वविद्यालय ग्रामीण एवं महिला शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिबद्ध है और आशा है कि यह विश्वविद्यालय अपनी उपलब्धियों से अन्य शिक्षण संस्थानों के लिए प्रेरणा का कार्य करेगा और किसी की भी गरीबी उसके उच्च शिक्षा हासिल करने में बाधक नहीं होगी। राज्यपाल ने कहा कि यह विश्वविद्यालय अपनी कार्यशैली से देश के अन्य निजी विश्वविद्यालयों को यह भी संदेश देता है कि शिक्षण संस्थान का उद्देश्य विद्यार्थियों को शिक्षा सुलभ कराने के प्रति पूर्णत: समर्पित रहना है। उन्हें विद्यार्थियों को गुणात्मक शिक्षा प्रदान कराने की दिशा में सचेष्ट रहने के साथ-साथ प्रोत्साहित भी करना चाहिये। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय द्वारा डी लिट की मानद उपाधि प्रदान करना विश्वविद्यालय का उनके प्रति स्नेह को दर्शाता है। वे चाहते थे कि विश्वविद्यालय में जाकर और वहां का दौरा कर डी लिट की उपाधि ग्रहण करूं, इससे उन्हें और भी प्रसन्नता होती। लेकिन पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों व व्यस्तताओं के कारण वे वहां नहीं जा सके। उन्होंने कहा कि डॉ विनोद टिबड़ेवाला के कुशल नेतृत्व में इस विश्वविद्यालय के अधिकारियों द्वारा इस विश्वविद्यालय को एक शोध उन्मुख विश्वविद्यालय बनाने की दिशा में सतत प्रयास किए जा रहे हैं। उन्हें बताया गया कि विश्वविद्यालय में प्रभावी प्लेसमेंट सेल है और इसके माध्यम से विद्यार्थियों को रोजगार दिलाने के प्रयास किए जाते हैं।

Published / 2022-06-07 13:01:11
जानें सरकार ने सीडीएस की नियुक्ति संबंधी नियमों में क्या किया बदलाव...

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पिछले कई महीनों से खाली पड़े प्रमुख रक्षा अध्यक्ष यानी (सीडीएस) के पद को भरने की दिशा में महतवपूर्ण कदम उठाते हुए सरकार ने इस पद पर नियुक्ति से संबंधित नियमों में बदलाव किया है जिसके तहत तीनों सेनाओं में 62 वर्ष से कम आयु के लेफ्टिनेंट जनरल या जनरल स्तर के सेवारत या सेवानिवृत अधिकारी को सीडीएस नियुक्त किया जा सकता है। रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को सेना, वायु सेना और नौसेना अधिनियमों में संशोधन से संबंधित एक अधिसूचना जारी कर कहा कि अब सरकार जनहित में जरूरत पड़ने पर तीनों सेनाओं के सेवारत लेफ्टिनेंट जनरल या जनरल या सेवानिवृत लेफ्टिनेंट जनरल या जनरल स्तर के अधिकारी को प्रमुख रक्षा अध्यक्ष के पद पर नियुक्त कर सकती है। लेकिन इसमें आयु संबंधी शर्त भी जोड़ी गयी है जिसके अनुसार नियुक्ति के समय अधिकारी की उम्र 62 वर्ष से कम होनी चाहिए। इस पद पर नियुक्त किये जाने वाले अधिकारी अधिकतम 65 वर्ष की उम्र तक अपने पद पर बने रहे सकते हैं। उल्लेखनीय है कि, जनरल बिपिन रावत भारत के पहले सीडीएस थे, जिनकी बीते साल 8 दिसंबर को कुनूर के नजदीक एमआई-16वी5 के क्रैश हादसे में मौत हो गई थी। रावत की मौत के बाद से यह पद खाली पड़ा हुआ है। अभी तक नए सीडीएस की नियुक्ति नहीं हो पाई है। वहीं रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि नए चीफ आॅफ डिफेंस स्टॉफ की नियुक्ति में तेजी आएगी।

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