एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश के 16वें उपराष्ट्रपति का चुनाव छह अगस्त को होगा। चुनाव आयोग ने आज यहां उपराष्ट्रपति चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा की। कार्यक्रम के अनुसार पांच जुलाई को उपराष्ट्रपति चुनाव की अधिसूचना जारी की जाएगी और उसके बाद से नामांकन प्रारंभ हो जाएगा और नामांकन की आखिरी तारीख 19 जुलाई होगी। उम्मीदवार स्वयं अथवा उनके प्रस्तावक एवं अनुमोदक किसी भी कार्यदिवस में 11 बजे से तीन बजे तक नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। 20 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी और 22 जुलाई तक नाम वापस लिये जा सकेंगे।
टीम एबीएन, रांची। सूबे के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आज (29 जून) को महादेवगंज स्थित मेधा डेयरी प्लांट का शुभारंभ करेंगे। सीएम के कार्यक्रम को लेकर जिले में तैयारी पूरी की जा चुकी है। 34 करोड़ की लागत से बने इस प्लांट के उद्घाटन के लिए सीएम दिन के लगभग एक बजे साहिबगंज पहुंचेंगे। मेधा डेयरी प्लांट की शुरुआत से साहिबगंज और उसके पास आस के जिलों के लोगों को फायदा होने की उम्मीद जाहिर की जा रही है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 अप्रैल 2017 को साहिबगंज में डेयरी प्लांट की आधारशिला रखी थी। यह चार साल में बनकर तैयार हो गया था। इस प्लांट का निर्माण एनडीडीबी (राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड) ने 34 करोड़ की लागत से बनाकर तैयार किया है। इस प्लांट की झमता प्रतिदिन 50 हजार लीटर दूध स्टॉक करने की है। भविष्य में इसकी क्षमता बढ़ाकर एक लाख तक की जा सकती है। प्लांट बनने के बाद सहकारी दुग्ध उत्पादक महासंघ लिमिटेड ने मेधा ब्रांड से होने वाले उत्पादन का नाम दिया। इस प्लांट से लगभग 2200 किसान और डेयरी कॉपरेटिव सोसाइटी व बीएमसी से लोग जुड़े हुए हैं। मेधा डेयरी प्लांट के हब इंचार्ज रविन्द्र कुमार सिन्हा ने कहा कि जिला में डीसीएस ( डेयरी सहकारिता समिति) का केंद्र 40 पंचायत में खोला गया है, जहां दूध जमा होता है। वहीं जिला में दो स्थान पर बीएमसी (बल्क मिल्क कूलर) है, जिसमें एक राजमहल के मंगलहाट और दूसरा डेहारी में खोला गया है। दो और बीएमसी पतना और बरहेट में खोले जा रहे हैं, जिसका काम अंतिम चरण में है। सीएम के हाथों से इनका शुभारंभ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में पांच हजार से अधिक लोगों को रोजगार से जुड़ने का मौका मिलेगा। ट्रायल पर चार प्रकार का दूध जिसमें शक्ति स्पेशल, शक्ति, ताजा मिल्क, गाय का दूध और पनीर लस्सी, दही, फ्लेवर और घी तैयार कर बाजार में भेजा जाता है। इसके विधिवत उद्घाटन के बाद दूध से बने अन्य उत्पाद को तैयार कर सकेंगे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता और राज्य के वित्त मंत्रियों वाली जीएसटी परिषद की 47वीं बैठक में आज कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। जीएसटी परिषद ने मंगलवार को कुछ वस्तुओं एवं सेवाओं पर टैक्स की दरों में बदलाव को मंजूरी दे दी। साथ ही राज्यों को सोना और मूल्यवान पत्थरों की राज्य के भीतर आवाजाही के लिये ई-वे बिल जारी करने की अनुमति भी दे दी गई। माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संबंधी नीति-निर्धारक इकाई जीएसटी परिषद की बैठक के पहले दिन जीएसटी में पंजीकृत कंपनियों के लिये कई अनुपालन संबंधी प्रक्रियाओं तथा मंत्री समूह (जीओएम) की कर चोरी रोकने संबंधी रिपोर्ट को भी मंजूरी दी गई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता वाली परिषद में राज्यों के वित्त मंत्री भी शामिल हैं। राज्यों की मांग : राज्यों को जून 2022 के बाद राजस्व क्षतिपूर्ति की व्यवस्था जारी रखने तथा कैसिनो, आॅनलाइन गेम और घुड़दौड़ पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगाने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा बुधवार को होगी। विपक्ष-शासित राज्य जीएसटी क्षतिपूर्ति व्यवस्था को पांच साल के लिए बढ़ाने या राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी मौजूदा 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 70-80 प्रतिशत करने की मांग कर रहे हैं। मंगलवार को हुई बैठक में परिषद ने राज्यों के वित्त मंत्रियों के समूह की तरफ से पेश अंतरिम रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज एस बोम्मई की अध्यक्षता वाले इस मंत्री समूह ने उलटा शुल्क ढांचा (तैयार वस्तुओं के मुकाबले कच्चे माल पर अधिक कर) और कुछ वस्तुओं पर कर छूट समाप्त करने समेत दरों को युक्तिसंगत बनाने से जुड़ी अनुशंसाएं दी हैं। कम किराया वाले होटल कमरों टैक्स का सुझाव : जीओएम ने कई सेवाओं पर जीएसटी छूट समाप्त करने का सुझाव दिया है। इसमें 1,000 रुपये प्रतिदिन से कम किराया वाले होटल कमरों पर 12 प्रतिशत की दर से कर लगाने का सुझाव शामिल है। अभी इस पर कोई कर नहीं लगता है। इसके साथ ही अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिये 5,000 रुपये से अधिक किराये वाले कमरों (आईसीयू को छोड़कर) पर पांच प्रतिशत जीएसटी लगाने की भी सिफारिश की गई है। जीओएम ने पोस्टकार्ड और अंतदेर्शीय पत्र, ‘बुक पोस्ट’ और 10 ग्राम से कम वजन के लिफाफे को छोड़कर अन्य डाकघर सेवाओं पर कर लगाने का सुझाव दिया है। ई-वे बिल : राज्यों के भीतर, सोना, आभूषण और मूल्यवान पत्थरों की आवाजाही को लेकर ई-वे बिल के संदर्भ में परिषद ने सिफारिश की है कि राज्य एक सीमा तय कर सकते हैं जिसके ऊपर इलेक्ट्रॉनिक बिल जारी करना अनिवार्य होगा। मंत्रियों के समूह ने सीमा दो लाख रुपये या उससे ऊपर रखने की सिफारिश की है। उच्च जोखिम वाले करदाताओं के संदर्भ में मंत्री समूह की रिपोर्ट में जीएसटी के तहत उच्च जोखिम वाले करदाताओं के पंजीकरण के बाद सत्यापन का सुझाव दिया गया है। ऐसे करदाताओं की पहचान के लिये इसमें बिजली बिल के ब्योरे और बैंक खातों का सत्यापन की भी बात कही गयी है।
टीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दिल्ली में हैं। उन्होंने दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इससे मुलाकात को शिष्टाचार मुलाकात बताया जा रहा है। इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे से उनके आवास पर जा कर मुख्यमंत्री ने मुलाकात की। मुख्यमंत्री सोमवार को ही विशेष विमान से दिल्ली गए हैं। झामुमो सूत्रों का कहना है कि झारखंड से जुड़े कई ऐसे मुद्दे हैं, जिससे उनको अवगत कराया जाना है। संभावना जताई जा रही है कि एनडीए की तरफ से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में पार्टी का स्टैंड भी क्लियर कर सकते हैं। दूसरी खास बात है कि 28 जून को आॅफिस आॅफ प्रॉफिट मामले में सीएम की तरफ से चुनाव आयोग में पक्ष रखा जाना है। फरवरी माह में भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल रमेश बैस से मुलाकात कर सीएम पर आॅफिस आॅफ प्रॉफिट के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए सदस्यता समाप्त करने की मांग की थी। भाजपा का आरोप था कि खान मंत्री के पद पर रहते हुए मुख्यमंत्री ने अपने नाम से अनगड़ा में स्टोन माइंस अलॉट कराया है, जो आॅफिस आॅफ प्रॉफिट के दायरे में आता है। भाजपा के इस मेमोरेंडम को राज्यपाल ने चुनाव आयोग को प्रेषित कर दिया था। इस पर चुनाव आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव से मार्च महीने में कागजात की मांग की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री को नोटिस जारी हुआ था जिस पर 28 जून को सुनवाई होनी है। जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से झारखंड हुई कानूनी और राजनीतिक गतिविधियों के कारण केंद्र और राज्य के बीच की दूरी बढ़ी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ शिव शंकर शर्मा ने माइनिंग लीज को लेकर पीआईएल संख्या 727/ 2022 और शेल कंपनियों में भागीदारी को लेकर यह संख्या 4297/2022 दायर कर रखा है जिस पर हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है। हालांकि इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर किया गया है। संभावना जताई जा रही है कि राष्ट्रपति चुनाव की आड़ में कुछ आंतरिक मुद्दों को सुलझाने की कोशिश की जाएगी।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र 29 जुलाई शुरू होने की संभावना है। अगस्त के पहले सप्ताह तक इस सत्र का आयोजन किया जाएगा। संसदीय कार्यमंत्री आलमगीर आलम ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि 5 से 6 दिनों का कार्य दिवस होने की संभावना है, जिसमें सरकार की तरफ से कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य किए जाएंगे। राज्य सरकार द्वारा जल्द ही इसकी औपचारिक रुप से घोषणा की जायेगी। सत्र की शुरुआत होने के बाद 30 और 31 को शनिवार-रविवार के कारण सदन की कार्यवाही नहीं होगी। सोमवार यानी एक अगस्त से सदन की कार्यवाही चलेगी जिसमें विधायी कार्यों के अलावे सरकार द्वारा पिछले दिनों राजभवन से लौटाई गई कई बिलों को सदन के पटल पर रखा जायेगा। उन्होंने कहा कि इस दौरान विधायक अपने अपने क्षेत्र की समस्या को सदन में रखेंगे। इसके अलावे सदन के पहले दिन मांडर की नवनिर्वाचित विधायक शिल्पी नेहा तिर्की सदन की सदस्यता ग्रहण करेंगी। संवैधानिक व्यवस्था के तहत एक सत्र से दूसरे सत्र की अधिकतम अवधि 06 महीने का होना चाहिए। झारखंड विधानसभा का बजट सत्र 25 फरवरी से 25 मार्च तक हुआ था। इस तरह मानसून सत्र 25 सितंबर से पहले होना चाहिए। 2021 में 03 से 09 सितंबर तक मानसून सत्र चला था वहीं 2020 में कोरोना के कारण 18 से 22 सितंबर तक मानसून सत्र आयोजित हुए थे जबकि 2019 में 22 से 26 जुलाई तक आयोजित हुआ था। विधानसभा सत्र सामान्य तौर पर साल में तीन बार आहूत किए जाते हैं जो कि बजट सत्र, मानसून सत्र और शीतकालीन सत्र के रुप में जाना जाता है। संवैधानिक व्यवस्था के तहत राज्य सरकार की अनुशंसा पर राज्यपाल द्वारा सदन की कार्यवाही प्रत्येक 06 माह में कम से कम एक बार बुलाया जाता है। जाहिर है मानसून सत्र को लेकर सरकार के पास अभी पर्याप्त दिन शेष हैं। बजट सत्र को छोड़कर मानसून और शीतकालीन सत्र अमूमन कम दिनों का बुलाया जाता है। 2019 और 2020 में मानसून सत्र महज पांच दिनों का ही बुलाया गया था।
टीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि 15 अगस्त 2022 तक राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत सरकारी कर्मियों को पुरानी पेंशन स्कीम का सौगात देगी राज्य सरकार। 15 अगस्त तक सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू होगी। आपकी झारखंडी सरकार सभी वर्गों के सामाजिक सुरक्षा के प्रति संवेदनशील है। मेरी कोशिश है 15 अगस्त 2022 तक झारखंड के सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करूंगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि वैश्विक महामारी काल से उबरने के बाद अब राज्य सरकार विकास कार्यों को गति देने में लगी है। सरकार की योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने में आप सभी कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। आप सभी लोग राज्य सरकार के अभिन्न अंग हैं। राज्य को बेहतर दिशा देने में सभी वर्गों का साथ चाहिए तभी राज्य आगे बढ़ेगा। हमारी सरकार आपकी समस्याओं का समाधान कर रही है। राज्य के पारा शिक्षकों तथा आंगनबाड़ी कर्मियों की समस्याओं का निदान भी वर्तमान सरकार ने किया है। उक्त बातें मुख्यमंत्री ने आज बिरसा फुटबॉल स्टेडियम मोरहाबादी में आयोजित पेंशन जयघोष महासम्मेलन में कही। राज्य के सर्वांगीण विकास में सभी का सहयोग जरूरी : मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि इस फुटबॉल स्टेडियम में उपस्थित आप सभी पदाधिकारी, कर्मीगण के कंधों पर एक बड़ी जिम्मेदारी है। आप सभी लोग सरकार का आंख, कान, नाक तथा हाथ-पांव बनकर कार्य करते हैं। झारखंड प्रदेश जहां की भौगोलिक संरचना कई मायनों में काफी अलग है। यहां लोग पहाड़, पर्वत, जंगल सहित अनेकों दुर्गम जगहों पर निवास करते हैं, उन तक सरकार की योजनाओं और संदेशों को आप के माध्यम से पहुंचाया जाता है। सरकार और आपके आपसी समन्वय से इस राज्य को विकास की श्रेणी में अग्रणी राज्यों की पंक्ति में खड़ा किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार इस राज्य की परिस्थिति को देखते हुए सभी समस्याओं को सुलझाते हुए कदम बढ़ा रही है। हमें किसी भी हाल में हारना नहीं है। सरकार समस्याओं के जड़ तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। जनहित के सभी कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जा रहा है। कोरोना संक्रमण काल में आप सभी ने सराहनीय कार्य किया : मुख्यमंत्री ने कहा कि वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण काल के समय आप सभी के द्वारा किया गया कार्य काफी सराहनीय रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमित संसाधनों के साथ राज्य सरकार के साथ मिलकर जनहित में जो कार्य आप सभी ने कर दिखाया उसे भुलाया नहीं जा सकता है। वैश्विक संक्रमण के समय राज्य के अस्पतालों में डॉक्टर, नर्स, इत्यादि पर्याप्त संख्या में नहीं थे, ऐसी स्थिति में भी हम सभी ने मिलकर राज्य को इस संक्रमण से निकालने का काम कर दिखाया है। ये सब आपके सहयोग से ही संभव हो पाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब लोग अपने अपने घरों में कैद थे। तभी गरीब, किसान, मजदूर, जरूरतमंदों तक आंगनबाड़ी कर्मी, सहिया दीदियां एवं सेल्फ हेल्प ग्रुप की महिलाओं सहित विभिन्न संस्थान के लोगों ने भोजन पहुंचाया। राज्य सरकार ने झारखंड में किसी को भी भूखा मरने नहीं दिया। हम सभी ने मिलकर उस समय एक बेहतर प्रबंधन का मिसाल कायम किया। सभी के विश्वास पर खरा उतरने की कोशिश : मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि जिस आशा और विश्वास के साथ हमारी सरकार बनी है, इन आशा और विश्वास पर हमें खरा उतरना है। सरकार ने जो वादे किए हैं उन वादों को प्राथमिकता के साथ पूरा करने की कोशिश की जा रही है। 32 वर्ष बाद राज्य में कृषि पदाधिकारी तथा राज्य गठन के बाद पहली बार विधि प्रयोगशालाओं में राज्य के स्थानीय बच्चों की नियुक्ति की गई है। झारखंड कृषि प्रधान राज्य है। कृषि पदाधिकारियों के अभाव में आधुनिक संसाधनों का उपयोग यहां के किसान नहीं कर पा रहे थे। मुझे विश्वास है कि अब नवनियुक्त पदाधिकारियों द्वारा किसानों को आधुनिक तकनीक की जानकारी तथा प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिससे किसानों को लाभ मिलेगा। राज्य विधि प्रयोगशालाओं में फॉरेंसिक जांच के लिए कर्मी नहीं थे। अब हमें फॉरेंसिक जांच सहित कई जांचों के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। जन-जीवन को सुरक्षित करना लक्ष्य : मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि राज्य में जन-जीवन को सुरक्षित करना हमारा लक्ष्य है। सामाजिक सुरक्षा राज्य सरकार की प्राथमिकता है। हमारी सरकार ने राज्य में सर्वजन पेंशन योजना लागू करने का काम किया है। पात्र लोगों को खोज-खोज कर सरकार पेंशन देने का काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठने वाले लोगों को संवेदनशील होना चाहिए। जनहित के निर्णय लेने से पहले सभी पहलुओं को देखने की आवश्यकता पड़ती है। इस पीढ़ी के साथ-साथ आने वाली पीढ़ी की भी चिंता करना जरूरी है। वर्तमान राज्य सरकार बिना किसी भेदभाव के कई योजनाओं को धरातल पर उतारने का काम किया है। हमारी सरकार के ढाई वर्ष के कार्यकाल में विभिन्न सरकारी विभागों के कर्मियों द्वारा धरना प्रदर्शन न के बराबर किया गया है। हमारी सरकार सभी लोगों के साथ संवेदना रखती है। हमारी सरकार में लाठी-डंडा, शोषण या बेवजह परेशान करने की इजाजत नहीं है। पहले राज्य के पारा शिक्षक साल के 12 महीनों में 11 महीना धरना प्रदर्शन ही करते दिखते थे, परंतु सरकार गठन के बाद हमने उनके समस्याओं को सुलझाने का काम किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों की उदासीन रवैया से राज्य में समस्याओं का अंबार लगा पड़ा है। हमारी सरकार हरसंभव इन समस्याओं को सुलझाने में लगी है। मुख्यमंत्री का परंपरागत स्वागत किया गया : मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के सभा स्थल पर पहुंचते ही तालियों की गूंज से स्टेडियम गुंजायमान हो गया। नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम झारखंड (एनएमओपीएस) के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री का परंपरागत स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को एक शिक्षिका रजनी कुमारी ने उनका तथा राज्यसभा सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन का पेंटिंग सप्रेम भेंट किया। मौके पर राज्यसभा सांसद महुआ माजी, विधायक अंबा प्रसाद, पदमश्री मुकुंद नायक, एनएमओपीएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु, प्रदेश अध्यक्ष विक्रांत कुमार सिंह, प्रदेश महिला अध्यक्ष डॉ सुधा शर्मा सहित अन्य राज्य के प्रतिनिधि तथा झारखंड के विभिन्न जिलों एवं प्रखंडों से पहुंचे पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।
टीम एबीएन, रांची। राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की उम्मीदवार झारखंड की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को समर्थन देने के मुद्दे पर राज्य की सत्ताधारी झामुमो भारी पसोपेश में है। राष्ट्रपति पद के लिए 18 जुलाई को होने वाले चुनाव को लेकर उसने शनिवार को तय किया कि इस मुद्दे पर कोई निर्णय लेने से पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्वयं केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे। झामुमो ने राष्ट्रपति चुनाव को लेकर शनिवार को महत्वपूर्ण बैठक बुलायी थी, जिसमें पार्टी अध्यक्ष शिबू सोरेन की अध्यक्षता में पार्टी के सभी विधायक और सांसद मौजूद थे। लेकिन दो घंटे तक चली इस मैराथन बैठक में पार्टी यह तय नहीं कर सकी कि राष्ट्रपति चुनाव में वह द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करेगी अथवा संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा का समर्थन करेगी। झामुमो के विधायक नलिन सोरेन ने बताया कि मोरहाबादी स्थित शिबू सोरेन के आवास पर हुई इस बैठक में पार्टी ने तय किया कि केन्द्र सरकार से कुछ मुद्दों पर पहले बात की जाएगी और उसके बाद ही पार्टी द्रौपदी मुर्मू की उम्मीदवारी को समर्थन देने के बारे में अंतिम फैसला करेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन राष्ट्रपति चुनाव में पार्टी का रुख तय करने से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे। हालांकि पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने बैठक के बाद कहा कि अभी राष्ट्रपति पद पर समर्थन के मुद्दे पर पार्टी ने कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है और इस बारे में अंतिम निर्णय लेने से पूर्व पार्टी के विधायकों एवं सांसदों की एक और बैठक की जायेगी। बैठक के बाद झामुमो नेता और राज्य के मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने भी कहा कि बैठक में राज्य हित और देश हित के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा, अभी तक हम लोगों ने फैसला नहीं किया है कि किसके पक्ष में मतदान करना है। पार्टी की एक और बैठक होगी उसके बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। द्रौपदी मुर्मू मूल रूप से ओडिशा के मयूरभंज जिले की हैं और वह संथाल समुदाय से संबन्ध रखती हैं। वह झारखंड की राज्यपाल रहीं है और इस दौरान उनके झामुमो के साथ बहुत निकट संबंध रहे। विपक्षी उम्मीदवार यशवंत सिन्हा का भी झारखंड से गहरा नाता है। यशवंत सिन्हा झारखंड के हजारीबाग से कई बार सांसद रहे और फिलहाल उनके बेटे जयंत सिन्हा हजारीबाग से ही भाजपा के लोकसभा सांसद हैं। इस बीच झामुमो ने बयान जारी कर बताया कि पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष शिबू सोरेन की अध्यक्षता में पार्टी के सभी सांसदों एवं विधायकों की बैठक हुई। बयान में कहा गया, बैठक में राष्ट्रपति चुनाव के संबंध में चर्चा की गई और इसके बाद सर्वसम्मति से निर्णय लेने हेतु माननीय केंद्रीय अध्यक्ष शिबू सोरेन को अधिकृत किया गया।
टीम एबीएन, रांची। राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को समर्थन देने के मुद्दे पर झारखंड मुक्ति मोर्चा असमंजस की स्थिति में है। शनिवार दोपहर कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास पर हुई बैठक में जेएमएम के विधायक-सांसद इस मुद्दे पर एकमत नहीं हो पाये जिस वजह से पार्टी ने मतदान पूर्व एक बार फिर बैठक कर निर्णय लेने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और गुरुजी शिबू सोरेन की मौजूदगी में हुई इस बैठक में पार्टी के विधायक और सांसद मौजूद थे। कई घंटों तक हुई इस बैठक में पार्टी विधायक और सांसदों ने अपनी अपनी राय रखी। कुछ विधायकों का मानना था कि यशवंत सिन्हा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। इससे विपक्षी एकता में खटास होगी तो कुछ विधायक का मानना था कि दलगत भावना से उठकर एनडीए प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू को समर्थन करना चाहिए। फिलहाल विधायक की अलग अलग राय के बाद केन्द्रीय अध्यक्ष को इस मुद्दे पर निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया गया। इसके अलावा मतदान से पहले एक बार फिर पार्टी विधायक-सांसदों की बैठक करने का फैसला लिया गया। इसके अलावा बैठक में कुछ विधायक द्वारा मुख्यमंत्री को केन्द्रीय गृहमंत्री से मिलकर झारखंड की वर्तमान परिस्थिति से अवगत कराने की सलाह दी गई। जेएमएम विधायक वैद्यनाथ राम ने मीडियाकर्मियों को जानकारी देते हुए कहा कि बैठक में लोगों ने खुलकर विचार रखे हैं और आगे मुख्यमंत्री इसपर निर्णय लेंगे। वहीं जेएमएम नेता सुप्रीयो भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी देशहित और राज्यहित में फैसला लेगी। फिलहाल बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई है। बैठक में मंत्री मिथिलेश ठाकुर, मंत्री चंपाई सोरेन, मंत्री जगरनाथ महतो, विधायक मथुरा महतो, विधायक वैद्यनाथ राम सहित कई मौजूद थे।
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