टीम एबीएन, रांची। राष्ट्रपति चुनाव में जीत के बाद द्रौपदी मुर्मू को बधाई देने का सिलसिला जारी है। दिल्ली दौरे पर गए सीएम हेमंत सोरेन ने भी द्रोपदी मुर्मू से मुलाकात कर उनको जीत के लिए झारखंड के लोगों की तरफ से शुभकामनाएं दी है। सीएम हेमंत सोरेन ने ट्वीट कर राष्ट्रपति से मुलाकात जानकारी साझा की है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है कि देश की नव निर्वाचित राष्ट्रपति आदरणीय द्रौपदी मुर्मू से दिल्ली में भेंट हुई, आदरणीय द्रौपदी जी को समस्त झारखंड वासियों की ओर से अनेक-अनेक शुभकामनाएं और जोहार। बता दें कि सीएम हेमंत सोरेन दिल्ली दौरे पर हैं। उन्होंने शनिवार को दिल्ली में झारखंड पर्यटन नीति 2021 का शुभारंभ किया था। इस दौरान सीएम ने देश और दुनिया को झारखंड देखने आने का न्योता दिया था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सरकार ने ध्वज संहिता में बदलाव किया है। इसके साथ अब तिरंगे को दिन और रात दोनों समय फहराया जा सकता है। साथ ही मशीन और पॉलिएस्टर से बने ध्वजों का उपयोग करने की भी अनुमति होगी। सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब वह आजादी का अमृत महोत्सव के तहत 13 से 15 अगस्त तक "हर घर तिरंगा" अभियान शुरु करने जा रही है। सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के सचिवों को लिखे एक पत्र में केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय ध्वय का प्रदर्शन, फहराना और उपयोग भारतीय ध्वज संहिता, 2002 और राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत आता है। दिन-रात फहराया जा सकता है राष्ट्रीय ध्वज : पत्र में कहा गया है, भारतीय ध्वज संहिता, 2002 को 20 जुलाई 2022 के एक आदेश के जरिए संशोधित किया गया है और अब भारतीय ध्वज संहिता, 2002 के भाग-दो के पैरा 2.2 के खंड (II) को इस तरह पढ़ा जाएगा : जहां ध्वज खुले में प्रदर्शित किया जाता है या किसी नागरिक के घर पर प्रदर्शित किया जाता है, इसे दिन-रात फहराया जा सकता है। पहले सूर्योदय से सूर्यास्त तक थी अनुमति : इससे पहले तिरंगे को केवल सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराने की अनुमति थी। इसी तरह ध्वज संहिता के एक अन्य प्रावधान में बदलाव करते हुए कहा गया, राष्ट्रीय ध्वज हाथ से काता और हाथ से बुना हुआ या मशीन से बना होगा। यह कपास/पॉलिएस्टर/ ऊन/ रेशमी खादी से बना होगा। इससे पहले मशीन से बने और पॉलिएस्टर सेबने राष्ट्रीय ध्वज के उपयोग की अनुमति नहीं थी। आजादी के 75 साल के उपलक्ष्य में मनाया जा रहा आजादी का अमृत महोत्सव : आजादी का अमृत मोहत्सव एक प्रगतिशील स्वतंत्र भारत के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में मनाया जा रहा है। 13 अगस्त से 15 अगस्त तक नागरिकों को अपने घरों में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए "हर घर तिरंगा" अभियान शुरु किया गया है। गृह सचिव ने पत्र बताई ध्वज संहिता की मुख्य विशेषताएं : गृह सचिव ने अपने पत्र के साथ ध्वज संहिता की मुख्य विशेषताओं को भी संलग्न किया जिसमें 30 दिसंबर 2021 और 20 जुलाई 2022 को किए गए बदलावों और राष्ट्रीय ध्वज के उपयोग और प्रदर्शन के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल शामिल हैं। गृह सचिव ने पत्र में कहा, आपसे यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया जाता है कि ये आपके प्रशासनिक नियंत्रण के तहत विभिन्न संगठनों, सार्वजनिक उपक्रमों के बीच व्यापक रूप से प्रसारित हो।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। निवर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद रविवार को राष्ट्र को संबोधित करेंगे। राष्ट्रपति भवन ने शनिवार को जारी एक बयान में यह जानकारी दी। बयान के अनुसार, राष्ट्र के नाम संबोधन को आकाशवाणी और दूरदर्शन के सभी चैनलों पर पहले हिंदी तथा उसके बाद अंग्रेजी में प्रसारित किया जाएगा। बयान में कहा गया है कि संबोधन का हिंदी और अंग्रेजी में प्रसारण किये जाने के बाद दूरदर्शन के सभी क्षेत्रीय चैनलों द्वारा इसे क्षेत्रीय भाषाओं में प्रसारित किया जाएगा। बयान के अनुसार, आकाशवाणी अपने क्षेत्रीय नेटवर्क पर संबोधन को क्षेत्रीय भाषाओं में रात साढ़े नौ बजे से प्रासरित करेगा। द्रौपदी मुर्मू बृहस्पतिवार को देश की अगली राष्ट्रपति निर्वाचित हुईं। वह सोमवार को संसद के केंद्रीय कक्ष में राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगी।
टीम एबीएन, रांची। राज्य में अभी तक बेहद कम मानसूनी बारिश हुई है। एक जून से लेकर 22 जुलाई तक के आंकड़े बताते हैं कि झारखंड में अभी तक सामान्य से 51 फीसदी कम वर्षा हुई है। कोल्हान प्रमंडल के पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम को छोड़कर बाकी सभी 22 जिलों में सामान्य से कम बेहद कम बारिश रिकॉर्ड किया गया है। ऐसे में राज्य में खरीफ की फसल पर इसका बेहद बुरा असर पड़ रहा है। राज्य के ज्यादातर जिलों में खेतों में लगाया गया धान का बिचड़ा सूखने लगा है तो पानी के अभाव में धान की रोपनी भी नहीं के बराबर हुई है। राज्य में 22 जुलाई तक 11-12% क्षेत्र में ही धान का आच्छादन हुआ है, जो चिंताजनक है। राज्य में कम बारिश की वजह से धान की खेती करने वाले किसान परेशान हैं। ऐसे में उप कृषि निदेशक ने राज्य के अन्नदाताओं को सलाह दी है कि वह 120 दिन से कम समय मे तैयार होने वाले धान की किस्में लगाएं, जिसमें सहभागी, आईआर 64DRT, अंजली, वंदना, बिरसा विकास धान जो ना सिर्फ कम समय में तैयार होता है बल्कि कम बारिश में के लिए भी मुफीद है। उन्होंने ईटीवी भारत से बातचीत में कहा कि सभी जिलों में कम दिनों में तैयार होने वाली किस्मों के कितने बीज की आवयश्कता है इसका आकलन करने का निर्देश जिला कृषि पदाधिकारियों को दिया गया है। उन्होंने कहा कि बीज निगम के पास पर्याप्त मात्रा में कम समय मे तैयार होने वाले प्रभेद के बीज उपलब्ध है और कोई दिक्कत नहीं होगी। कृषि उपनिदेशक ने कहा कि अब किसान भाई कम दिनों में तैयार होने वाली धान के प्रभेदों का सीधा बुआई करें। कृषि उपनिदेशक ने कहा कि किसान धान की जगह तिलहन और दलहन की खेती की ओर बढ़ें, क्योंकि उसमें पानी की जरूरत कम पड़ती है। राज्य में 18 लाख हेक्टेयर में धान की खेती होती है. वर्ष 2021-22 में राज्य में 53.5 लाख टन धान की उपज हुई थी जो झारखंड बनने के बाद एक रिकॉर्ड है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र 29 जुलाई से शुरू हो रहा है। हर बार की तरह इस बार भी छोटे मानसून सत्र को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने है। छोटे मानसून सत्र में जनता से जुड़े बड़े मामलों का सदन में आने की संभावना है, पर ये तभी संभव हो पायेगा जब सदन की कार्यवाही शांतिपूर्ण तरीके से संचालित होगी। झारखंड में 29 जुलाई से मानसून सत्र का आगाज होने जा रहा है। इस बार मानसून सत्र 5 अगस्त तक संचालित होगा। मतलब मात्र 6 दिनों का कार्य दिवस। सरकार चाहे जिस किसी भी दल या गठबंधन की हो, एक साल में सदन की कार्यवाही 40 से 45 दिन तक ही चल पाती है। इस बार भी झारखंड की जनता से जुड़े सवालों की कोई कमी नहीं है, पर जनता के सवाल को सदन के पटल तक आने के लिये समय नहीं है। राज्य की मुख्य विपक्षी दल बीजेपी के विधायक सीपी सिंह के अनुसार खनन लीज से लेकर गिरती कानून व्यवस्था को लेकर तैयारी पूरी है, लेकिन बीजेपी विधायकों को भी पता है कि सदन का संचालन कम और स्थगन की तस्वीर ज्यादा देखने को मिलेगी। सीपी सिंह के अनुसार हर साल 60 दिनों तक का सत्र संचालन होना चाहिये। मानसून सत्र के तीसरे दिन यानी कि 2 अगस्त को सदन में अनुपूरक बजट पेश होगा। पहले दिन शोक प्रस्ताव के बाद हर दिन प्रश्नकाल के लिये अवधि तय किया गया है। मौजूदा हेमंत सोरेन सरकार ने भी मानसून सत्र को लेकर तैयारी पूरी कर ली है। संसदीय कार्य मंत्री आलमगीर आलम का कहना है कि छोटे सत्र को भी उपयोगी बनाया जा सकता है। बशर्ते की सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष को जनता से जुड़े सवाल को सदन के पटल आने देना होगा। सरकार हर सवाल का जवाब देने के लिये तैयार है। झारखंड में विधानसभा सत्र के इतिहास को देखे तो काम कम और हंगामा ज्यादा की हकीकत सामने आएगी। सदन में कभी विपक्ष का सदन नहीं चलने देना, तो कभी सत्ता पक्ष का विधायकों के सवाल से भागना हंगामे की मुख्य वजह बन जाती है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया आज झारखंड में रहेंगे। अपने एक दिवसीय दौरे के दौरान मुख्य न्यायाधिश चांडिल और गढ़वा कोर्ट भवन का उद्घाटन करेंगे। इसके अलावे वे वैसे बच्चों को स्कॉलरशिप भी देंगे, जिन्होंने कोरोना के दौरान अपने माता-पिता को खो दिया है। मेमोरियल लेक्चर में लेंगे हिस्सा: आज रांची में आयोजित जस्टिस एसबी सिन्हा मेमोरियल लेक्चर में चीफ जस्टिस शामिल होंगे। इसके बाद सुबह वे झालसा और झारखंड ज्यूडिशीयल अकादमी के कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगे। रांची में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्य न्यायाधीश प्रमंडलीय न्यायालय चांडिल और नगर उंटारी का ऑनलाइन उदघाटन करेंगे। इसके बाद झालसा के प्रोजेक्ट शिशू के तहत कोरोना काल में अपने माता-पिता को खोनेवाले बच्चों के बीच छात्रवृत्ति का भी वितरण करेंगे। इसके अलावा सीजेआई ने निराश्रितों की सुरक्षा और उनके अधिकारियों को संरक्षित करने में मध्यस्थता की भूमिका पर भी एक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे और उन्हें संबोधित करेंगे। इस कार्यक्रम में सीजेआई निराश्रितों को उनके अधिकार से अवगत कराएंगे। जानकारी के मुताबिक चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया कार्यक्रम समापन के पश्चात दिन के 3.30 बजे वापस दिल्ली रवाना होंगे।
टीम एबीएन, रांची। सीएम हेमंत सोरेन ने वन महोत्सव 2022 की शुरूआत की है। इस मौके पर राज्य में पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। जिसके तहत लोगों को अपने घरों के कैंपस में पेड़ लगाने पर झारखंड सरकार प्रति पेड़ 5 यूनिट बिजली फ्री में देगी। वन एवं पर्यावरण विभाग द्वारा आयोजित 73 वें वन महोत्सव के दौरान इसकी घोषणा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने की। आईआईएम सभागार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य में वनों की कटाई पर चिंता जताते हुए लोगों से पेड़ लगाने की अपील की। इस मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आईआईएम कैंपस में सखुआ का पेड़ लगाकर वन महोत्सव की शुरूआत की। इस अवसर पर हटिया विधायक नवीन जायसवाल की मौजुदगी में मुख्यमंत्री ने गुब्बारा छोड़कर वन संरक्षण के प्रति संदेश देने का काम किया। इस मौके पर सीएम हेमंत सोरेन ने संबोधित करते हुए कहा कि आज वनों को लेकर हमलोगों की चिंता बढ़ी हुई है। दुनिया में इसको लेकर बड़ी बड़ी गोष्ठियां हो रही हैं। लेकिन मेरा मानना है कि इस धरती का कोई दुश्मन है तो मनुष्य से बड़ा कोई दुश्मन नहीं है जो बनाता भी है और बिगाड़ता भी है। मुख्यमंत्री ने देश के विभिन्न राज्यों में उत्पन्न हुई सुखाड़ की स्थिति के लिए पर्यावरण संकट को वजह मानते हुए लोगों को सचेत किया। झारखंड का लगभग 30 प्रतिशत क्षेत्र वन से आच्छादित है। विकास आयुक्त अरुण कुमार सिंह ने संबोधित करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन एक बहुत बड़ी चुनौती है। अधिक से अधिक पेड़ लगाने की आवश्यकता है। फल, जलावन, जल संरक्षण आदि के दृष्टि से इसका खास महत्व है। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा इस वर्ष 2 लाख 34 हजार पेड़ लगाने का लक्ष्य है। लोगों से पेड़ लगाने की अपील करते हुए कहा कि हम इको टूरिज्म से रोजगार का साधन उपलब्ध करा सकते हैं।
टीम एबीएन, मेदिनीनगर, (पलामू)। पलामू प्रमंडल क्षेत्र में कमजोर मानसून के मद्देनजर कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री श्री बादल आज पलामू प्रमंडल के जिलों का दौरा किया। किया। इस दौरान उन्होंने फसलों के अच्छादन का आकलन किया, तो स्थिति चिंताजनक मिली। प्रमंडलीय मुख्यालय स्थित परिसदन भवन, पलामू में संवाददाता सम्मेलन कर उन्होंने पलामू भ्रमण के दौरान किये गये आकलन की विस्तृत जानकारी दी। साथ ही उन्होंने कहा कि मानसून की स्थिति को देखते हुए सरकार व स्थानीय प्रशासन किसानों के लिए संवेदनशीलता के साथ खड़ा है। पलामू प्रमंडल सहित राज्य में सुखाड़ की स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। किसानों को झारखंड राज्य फसल राहत योजना का लाभ दिया जाएगा। इसके तहत फसल में 30% से 50% की क्षति पर 3,000 रुपए प्रति एकड़ अधिकतम 15,000 रुपए एवं 50% से अधिक के फसल नुकसान पर क्षतिपूर्ति के रूप में 4,000 रुपए प्रति एकड़ अधिकतम 20,000 रुपए का लाभ दिये जाने का प्रावधान किया गया है। यह प्रावधान रैयती जमीन एवं बटाई पर खेत लेकर खेती करने वालों किसानों पर लागू होगी। मंत्री ने कहा कि सुखाड़ की स्थिति होने पर आपदा प्रबंधन के साथ केंद्र एवं राज्य सरकार मिलकर राहत कार्य चलाएगी। उन्होंने ने कहा कि मंगलवार को सभी विभागों की संयुक्त बैठक हो गई है। इसमें पलामू में वैकल्पिक व्यवस्था पर भी विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी बात उपायुक्त से हुई है और उपायुक्त ने 15वें वित्त की राशि से पुराने बांध के जीर्णोद्धार का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि पशुओं को भी सुरक्षित रखने की योजना है। उनके लिए खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए पशुपालन पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि पशुओं के चारे के लिए एक्शन प्लान तैयार करें। पलामू में हर वर्ष सुखाड़ की स्थिति की विभीषिका देखते हुए यहां के लिए स्थाई समाधान की तैयारी भी सरकार कर रही है। मजबुत एक्शन प्लान तैयार किया जाएगा और वैकल्पिक खेती कराने की पहल होगी, लेकिन तत्काल वर्तमान स्थिति निपटने की तैयारी है। मंत्री ने कहा कि पलामू प्रमंडल का दौरा कर उन्होंने फसलों के अच्छादन का आकलन किया, तो पाया कि गढ़वा जिले में एक से डेढ़ प्रतिशत बुआई हुआ है, जबकि पलामू जिले में अबतक 0.25% ही बुआई का कार्य हो पाया है, जबकि 15 मई से 15 अगस्त तक बुआई का मुख्य समय होता है। करीब 2 माह अधिक समय बीतने के बाद भी स्थिति भयावह है। यहां वास्तविक रेनफॉल 83% कम हुआ है। उन्होंने कहा कि भ्रमण के दौरान पाया कि पलामू के सतबरवा के कुछ हिस्सों में करीब 5 से 6 एकड़ धान का आच्छादन हुआ है। वहीं हजारों-हजार एकड़ खेत खाली पड़े हैं। उन्होंने किसानों से जब बातचीत की तो किसान हताश एवं निराश थे। कृषि मंत्री ने कहा कि 10 दिनों के अंदर यहां बारिश नहीं होती है, तो 30 साल पूर्व की सुखाड़ वाली स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। उन्होंने कहा कि पुराने बांधों का जीर्णोद्धार एवं तालाबों से गाद निकालने के लिए भी एक्शन प्लान तैयार किए जा रहे हैं। साथ ही प्रधानमंत्री टपक सिंचाई का दायरा भी बढ़ाने की तैयारी है। सरकार के साथ स्थानीय जिला प्रशासन किसानों की समस्या को देखते हुए संवेदनशीलता के साथ कार्य करेगी। प्रेसवार्ता में श्री बादल के साथ बिट्टू पाठक, राजेंद्र सिन्हा आदि उपस्थित थे।
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