रांची। पारा शिक्षकों की समस्याओं का 10 दिनों के भीतर समाधान होगा। लंबे समय से 65,000 पारा शिक्षक स्थायीकरण और वेतनमान को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इनकी मांगों को पूरा करने के लिए नई नियमावली बन गई है। शिक्षा विभाग ने यह नियमावली सरकार को भेजी है। यह बातें शिक्षा मंत्री जगन्नाथ महतो ने कही। बताते चलें कि बीते 18 अगस्त को शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों, शिक्षा मंत्री जगन्नाथ महतो और पारा शिक्षकों के प्रतिनिधियों के बीच मैराथन बैठक हुई थी। इस बैठक में बिहार की तर्ज पर नियमावली बनाने को लेकर चर्चा हुई थी। उस मैराथन बैठक के बाद अब एक बार फिर पारा शिक्षकों के पक्ष में निर्णय होने की उम्मीद दिख रही है। 18 अगस्त को भी बैठक में 1 हफ्ते के भीतर नई नियमावली बनाने की बात कही गई थी, लेकिन तभी प्राथमिक शिक्षा निदेशक का तबादला हो जाने से नियमावली को मूर्त रूप नहीं दिया जा सका था। अब शिक्षा मंत्री के बयान आने के बाद से एक बार फिर 65000 पारा शिक्षकों की उम्मीद जगी है।
रांची। झारखंड के 6 आदिवासी समुदाय के बच्चे उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड के ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जाएंगे। इनकी पढ़ाई का खर्च झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार उठाएगी। इनका चयन राज्य सरकार के मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा पारदेशीय छात्रवृत्ति योजना के तहत किया गया है। हालांकि, सरकार की तरफ से चयनित छात्रों का डिटेल नहीं शेयर किया गया है। बताया जा रहा है कि 23 सितंबर को इसके संबंध में पूरी डिटेल्स CM हेमंत सोरेन एक कार्यक्रम में शेयर करेंगे। राज्य सरकार की तरफ से पिछले साल ही इस योजना की शुरुआत की गई थी, लेकिन पहली बार 6 छात्रों का चयन किया गया है। सत्ताधारी दल JMM के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने बताया कि झारखंड से ऑक्सफॉर्ड पहुंचने वाले राज्य के मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा पहले स्टूडेंट्स थे। उनकी शताब्दी वर्ष पर यह बेहतर शुरुआत है। यह देश स्तर का एक बेंचमार्क है। सुप्रीयो भट्टाचार्य ने कहा कि रघुवर सरकार के कार्यकाल के दौरान उच्च और तकनीकी संस्थानों में SC-ST के छात्र के स्टाइपेंड को भी रोक दिया गया था, लेकिन हेमंत सोरेन की सरकार इन्हें पढ़ने के लिए विदेश भेज रही है। उन्होंने कहा कि BJP के नेता बस लंबी-लंबी बातें करते हैं। योजना के तहत हर साल 10 छात्रों का करना है चयन मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा पारदेशीय छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत झारखंड सरकार राज्य के अनुसूचित जाति के प्रतिभावान लड़के-लड़कियों को ऑक्सफोर्ड और कैंब्रिज जैसे प्रतिष्ठित विदेशी यूनिवर्सिटी में उच्च शिक्षा लेने का मौका दे रही है। ऐसा करने वाला झारखंड भारत का ऐसा राज्य है। इसके तहत SC-ST वर्ग के 10 विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा, जो अपनी उच्च शिक्षा मास्टर डिग्री एमफिल हेतु विदेशों में पढ़ने के लिए छात्रवृत्ति प्राप्त करेंगे। कौन से छात्र कर सकते हैं आवेदन : ग्रेजुएशन में कम से कम 55 फीसदी मास्क होने अनिवार्य है। आवेदक की आयु 40 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। जो छात्र झारखंड के निवासी हैं, वो ही इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। जयपाल सिंह मुंडा पारदेशीय छात्रवृत्ति योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक के पास अनुसूचित जनजाति का जाति प्रमाण पत्र होना आवश्यक है। आवेदन करने वाले छात्रों की वार्षिक आय 12 लाख रुपये प्रति वर्ष से कम होनी चाहिए। इस योजना का लाभ किसी भी विशेष पाठ्यक्रम के लिए मात्र एक बार ही दिया जाएगा।
रांची। झारखंड में कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण कर लिया गया है। दिन-प्रतिदिन कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या घटती जा रही है। यही वजह है कि रविवार को झारखंड में सिर्फ दो नये मरीज मिले हैं। राज्य में कोरोना के घटते केस पर सोमवार की सुबह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया है। उन्होंने अपने ट्वीट में राज्यवासियों से अपील करते हुए कहा कि सरकारी नियमों का कड़ाई से पालन करें। जनभागीदारी और जनसहयोग से ही हम कोरोना से लड़े हैं और आगे भी इसे हरायेंगे। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार रविवार को 20 कोरोना संक्रमित मरीज ठीक होकर घर लौटे हैं। इसके साथ ही राज्य में अब 56 एक्टिव केस शेष हैं। वहीं राज्य के 22 जिलों में रविवार को एक भी नया केस नहीं आया है। रविवार को 36,893 लोगों के सैंपल का टेस्ट हुआ, जिसमें सिर्फ दो सैंपल का रिजल्ट पॉजिटिव निकला। इसके साथ ही राज्य में अब तक 3,48,116 लोग कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं। वहीं 20 लोग कोरोना से स्वस्थ होकर अपने घर लौटे। इससे राज्य में 3,42,927 लोग कोरोना से ठीक हो चुके हैं। वहीं राज्य में अब तक कोरोना से 5,133 लोगों की मौत हो चुकी है।बफिलहाल राज्य में एक्टिव मरीजों की संख्या 56 है।राज्य में जो दो नए मरीज मिले हैं। इसमें एक रांची और दूसरा लोहरदगा में मिला है। वहीं राज्य में सबसे ज्यादा एक्टिव मरीज रांची में ही हैं। झारखंड में कोरोना का 7 डेज ग्रोथ रेट 0.00 फीसदी है, जबकि 7 डेज डबलिंग डेज 45648.1 डेज है। वहीं, झारखंड में रिकवरी रेट 98.5 फीसदी है। जबकि राज्य में मोर्टेलिटी रेट 1.47 फीसदी है।
एबीएन डेस्क। केंद्रीय कैबिनेट ने राष्ट्रीय संपत्ति पुनर्गठन कंपनी लिमिटेड (नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड) की ओर से जारी किए जाने वाली प्रतिभूति रसीद (सिक्योरिटी रिसीट्स) के लिए 30,600 करोड़ रुपये की गारंटी को मंजूरी दे दी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज प्रेस कांफ्रेंस के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एनएआरसीएल के साथ-साथ हम इंडिया डेब्ट रिजॉल्यूशन कंपनी लिमिटेड की भी स्थापना कर रहे हैं। वहीं, एनएआरसीएल में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की हिस्सेदारी 51 फीसदी होगी। वहीं, पब्लिक फाइनेंशियल इंस्टीयूशन्स की हिस्सेदारी 49 फीसदी होगी। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बैड बैंक या एनएआरसीएल लोन के लिए सहमत मूल्य का 15 फीसदी नकद में भुगतान करेगा और बाकी 85 फीसदी सरकार की गारंटी वाली प्रतिभूति रसीद में होगा। वित्त मंत्री ने कहा : ऋण के तेजी से समाधान के लिए 6 नए डीआरटी (डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल) गठित किए हैं। साथ ही इंडिया डेट रिजॉल्यूशन कंपनी लिमिटेड भी बनाई जा रही है। इसमें सार्वजनिक बैंकों का 49 फीसदी शेयर होगा। बाकी 51 फीसदी निजी बैंकों के लिए होगा। रिजर्व बैंक एआरसी लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में है। 2017-18 में सरकार ने बैंकों में 90 हजार करोड़ रुपये की पूंजी डाली थी। 2018-19 में यह राशि 1.06 लाख करोड़ रुपये थी। इसी तरह 2019-20 में 70 हजार करोड़ और 2020-21 में 20 हजार करोड़ रुपये बैंकों में डाले गए। इस वित्त वर्ष में भी 20 हजार करोड़ रुपये बैंकों में डालने की योजना है। पिछले छह वित्तीय वर्ष में सरकार चार फ पर आगे बढ़ी है, ये हैं- रिकॉग्निशन, रिजोल्यूशन, रिकैपिलाइजेशन और रिफॉर्म्स। इन्हें लागू किया गया जिसके बाद बैंकों ने कुल 5,01,479 रुपये वसूले। इस दौरान भूषण स्टील और एस्सार स्टील जैसी कंपनियों के बट्टे खाते में डाले गए ऋण को भी वसूल किया गया। 2015 में बैंकों की संपत्ति का आकलन किया गया था जिसमें बैंकों के भारी-भरकम एनपीए राशि के बारे में खुलासा हुआ था। वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकों की हालत लगातार सुधर रही है। 2018 में 21 में से सिर्फ दो सरकारी बैंक ही फायदे में थे, लेकिन 2021 में सिर्फ दो बैंकों को घाटा हुआ है। वित्त मंत्री ने बैंकों को एनपीए से उबारने के लिए बैड बैंक बनाने का फैसला किया है। इस बैंक की स्थापना का मुख्य उद्देश्य बैंकों को डूबे कर्ज से बाहर निकालना है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में इसके लिए 20 हजार करोड़ रुपये की घोषणा की थी। बैड बैंक ऐसे वित्तीय संस्थान को कहते हैं, जो कर्जदाताओं यानी बैंकों की खराब या फंसी परिसंपत्ति को लेकर उनकी मदद करता है। यह बैंकों के एनपीए की वसूली का समाधान निकालता है। देश की बैंकों की बैलेंस शीट सुधर जाएगी और उन्हें नए कर्ज देने में सुविधा होगी। सारे बैंकों का एनपीए इसमें समाहित हो जाएगा और वे फंसे कर्ज से मुक्त हो जाएंगे। इससे सरकार को भी फायदा होगा। यदि वह किसी सरकारी बैंक का निजीकरण करना चाहेगी तो उसमें आसानी होगी। वहीं बैड बैंक के जरिए एनपीए यानि डूबते कर्ज को वसूल किया जा सकेगा। इसका लक्ष्य कई जटिल मुद्दों को सुलझाकर बैंकों को बिजनेस पर फोकस करने के लिए स्वतंत्र रखना है।
रांची। केंद्र और राज्य के बीच समन्वय बनाने को लेकर नीति आयोग की अहम बैठक बुधवार को हुई। झारखंड मंत्रालय में हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य की ओर से 20-22 बिंदुओं पर नीति आयोग का ध्यान आकृष्ट कराया। बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने की। बैठक के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि नीति आयोग के समक्ष 20-22 बिंदुओं को रखा गया है। इसमें डीवीसी के द्वारा बकाया राशि झारखंड का 2800 करोड़ अब तक काटा गया है और 2200 करोड़ और काटे जाने हैं। इस विषय पर डीवीसी के साथ समाधान निकलने तक केंद्र सरकार राशि काटना बंद करे। इसके अलावा बैठक में सीसीएल की ओर से राज्य सरकार को रॉयल्टी नहीं मिलना, वासरी में रॉयल्टी नहीं मिलना, सरकारी जमीन का मुआवजा नहीं मिलना, जो हजारों करोड़ कोल इंडिया के माध्यम से झारखंड को मिलना है, वो प्राप्त नहीं हुआ है। नीति आयोग के समक्ष राज्य सरकार ने 15वें वित्त आयोग के तहत कुपोषण को लेकर करीब 300 करोड़ का आवंटन राज्य सरकार ने किया है। इसके अलावा धनबाद, रामगढ़ के लिए आईएनडी की करीब 600 करोड़ की परियोजना को स्वीकृत करने का आग्रह किया गया है, जिससे दामोदर नदी को स्वच्छ किया जा सके। पीएमवाई के तहत छूटे लोगों के लिए केंद्र द्वारा पोर्टल खोलने का आग्रह किया गया है। राज्य में कोरोना वैक्सीन की उपलब्धता एडवांस में करने की मांग सरकार ने की। खनन क्षेत्र में सामाजिक आर्थिक सर्वे कराने का आग्रह करते हुए राज्य सरकार ने ऐसे क्षेत्र के लोगों की स्थिति से अवगत कराया गया। नक्सल प्रभावित जिले कम करने पर सीएम ने जताई नाराजगी मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय से खनन कार्य के कारण इन क्षेत्रों से वास्तविक लाभ क्या हो रहा है, इसका पता चल सकेगा। राज्य सरकार बड़े उद्योगों के साथ-साथ छोटे उद्योगों को भी पुनर्जीवित कर रही है। इस दिशा में केंद्र भी मदद करे। झारखंड एससी-एसटी बहुल राज्य है। इसलिए एससी-एसटी इंटरप्रेन्योर को सीजीएसटी और अन्य तरह के टैक्स से छूट दी जाए। उद्योग के क्षेत्र में यहां के लोगों को लाभ मिल सके, इसके लिए नीति आयोग पहल करे। नक्सल प्रभावित जिले 13 से 8 किये जाने पर राज्य सरकार ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जिलों की संख्या को नहीं घटाया जाए और योजना को दो वर्ष के लिए बढ़ाया जाए। जीएसटी काउंसिल की बैठक से झारखंड को उम्मीद है कि इसमें कुछ न कुछ लाभ जरूर मिलेगा। बैठक में नीति आयोग की टीम में डॉ वीके पॉल, वरीय सलाहकार नीरज सिन्हा, संयुक्त सचिव शैलेंद्र कुमार द्विवेदी, उप सलाहकार थैयागाराजू बीएम, वरीय सहायक नमन अग्रवाल और युवा प्रोफेशनल सिद्धे जी शिंदे शामिल हुए। वहीं, राज्य सरकार की ओर से वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव के साथ मुख्य सचिव सुखदेव सिंह, सीएम के सचिव विनय कुमार चौबे और संबंधित विभागों के सचिव भी मौजूद रहे।
रांची। झारखंड सरकार ने धार्मिक स्थलों को खोलने की छूट दे दी है। प्रोजेक्ट भवन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में आपदा प्रबंधन की बैठक में यह फैसला लिया गया है। इसके अलावा छठी से ऊपर की कक्षाओं के संचालन की भी छूट दी गई है। रविवार को जो पाबंदियां लगी थी उसे भी हटा लिया गया है। साथ ही होटल और बार पर लागू शर्तों को भी हटा लिया गया है।
रांची। कोरोना संक्रमण को देखते हुए लंबे समय से झारखंड के धार्मिक स्थल श्रद्धालुओं के लिए बंद है। फिलहाल झारखंड में कोरोना संक्रमण के गिने-चुने एक्टिव मरीज हैं। लिहाजा, संक्रमण के नियंत्रण का हवाला देते हुए अब राज्य में धार्मिक स्थलों को खोलने की मांग उठने लगी है। देवघर से भाजपा विधायक नारायण दास ने इस मसले को लेकर आज विधानसभा के पोर्टिको में अनशन किया। उन्होंने अविलंब बाबा मंदिर खोलने की मांग की। इस पर सदन के भीतर मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि जल्द ही सरकार इस दिशा में निर्णय लेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे सभी वाकिफ हैं कि धार्मिक स्थलों को बंद करने की नौबत क्यों आई थी। सदन में आश्वासन के बाद मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार की बैठक मुख्यमंत्री के विधानसभा स्थित कक्ष में आयोजित की गई। मुख्यमंत्री को सचिव आपदा प्रबंधन अमिताभ कौशल ने बताया कि देवघर स्थित बाबा धाम मंदिर खोलने के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के संबंध में समाचार प्रकाशित हुए हैं। इसपर मुख्यमंत्री द्वारा सचिव आपदा प्रबंधन को निर्देश दिया गया कि मंदिर खोलने से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की प्रति यथा शीघ्र प्रस्तुत करें। निर्णय लिया गया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का अध्ययन कर धार्मिक स्थल को कोविड-19 के परिप्रेक्ष्य में खोलने पर विचार किया जाए। आदेश की प्रति प्राप्त होते ही अगले सप्ताह बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। बैठक में मंत्री आपदा प्रबंधन बन्ना गुप्ता, मुख्य सचिव सुखदेव सिंह, अपर मुख्य सचिव अरुण कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का, प्रधान सचिव वित्त विभाग अजय कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव विनय कुमार चौबे उपस्थित थे। सीएम से मिला था कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल : सोमवार को भी मंत्री बादल पत्रलेख के नेतृत्व में कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल सीएम से मिला था। प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के धार्मिक स्थलों को खोलने का आग्रह किया था। इस प्रतिनिधिमंडल में मंत्री बादल पत्रलेख के साथ ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री आलमगीर आलम, विधायक उमाशंकर अकेला, इरफान अंसारी, राजेश कच्छप और ममता देवी शामिल थीं।
रांची। विधानसभा भवन में नमाज कक्ष के आवंटन का विरोध जता रही भाजपा विस सदन में भी आक्रामक रुख अख्तियार किये हुए हैं। पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत भाजपा सदन की कार्यवाही नहीं चलने दे रही है। विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही 11:33 बजे से 12:45 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। मालूम हो कि दो दिनों के अवकाश के बाद झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र का आज पहला दिन है। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष के विधायक वेल में आकर हंगामा करने लगे। सदन के अंदर भी भाजपा विधायकों ने हरे राम हरे कृष्णा भजन गाया। जय श्री राम के नारे लगे। नमाज कक्ष के मुद्दे पर भाजपा की ओर से राज्य के सभी जिलों में रविवार को राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला फूंका गया है। भाजपा के सदस्य विस भवन में सभी धर्मों के लिये प्रार्थना भवन की मांग कर रहे हैं।
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