एबीएन डेस्क। राज्य के 64 हजार पारा शिक्षकों को ईपीएफ का लाभ मिलेगा। इसमें पारा शिक्षकों के मानदेय से छह फीसदी की राशि कटेगी और छह फीसदी राज्य सरकार देगी। स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया है। वित्त विभाग ने अपनी अनापत्ति दे दी है। अब इस पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को अंतिम निर्णय लेना है। राज्य सरकार इस पर बुघवार को पारा शिक्षकों की सेवा शर्त नियमावली के प्रस्ताव के साथ मंजूरी दे सकती है। अगर सहमति नहीं मिली, तो बजट सत्र में इसके प्रावधान किये जाएंगे और पारा शिक्षकों को इसका लाभ दिया जाएगा। ईपीएफ की सरकार मद की ओर से दी जाने वाली राशि मानदेय बढ़ोतरी के अतिरिक्त होगी। पारा शिक्षक एक जनवरी से सहायक अध्यापक कहलाएंगे। साथ ही, उनके मानदेय में भी 40 से 50 फीसदी बढ़ोतरी जनवरी से हो जाएगी। टेट पास पारा शिक्षकों का जहां 50 फीसदी, वहीं सिर्फ प्रशिक्षित पारा शिक्षकों के मानदेय में 40 फीसदी की बढ़ोतरी होगी। ईपीएफ में 12 फीसदी राशि जमा की जाती है। इसमें कर्मचारी का छह फीसदी और जिस विभाग के कर्मचारी हैं वह छह फीसदी राशि देता है। पारा शिक्षकों की सेवा शर्त नियमावली की मंजूरी के बाद राज्य के पारा शिक्षक एक जनवरी से सहायक अध्यापक कहलाएंगे। साथ ही, उनके मानदेय में भी बढ़तरी हो जाएगी। टेट पास पारा शिक्षकों का जहां 50 फीसदी, वहीं सिर्फ प्रशिक्षित पारा शिक्षकों के मानदेय में 40 फीसदी की बढ़ोतरी होगी। ऐसे में पहली से पांचवीं में पढ़ाने वाले प्रशिक्षित पारा शिक्षक (सहायक अध्यापक) को 4800 रुपये का मानदेय बढ़ने के बाद 1008 रुपये ईपीएफ के लिए अंशदान के रूप में देना होगा। वहीं, छठी से आठवीं के सिर्फ प्रशिक्षित पारा शिक्षकों को 1092 रुपये देने होंगे। इसके अलावा पहली से पांचवीं के टेट पास पारा शिक्षकों को 1260 रुपये और छठी से आठवीं के टेट पास पारा शिक्षकों को 1350 रुपये ईपीएफ में अंशदान के रूप में देने होंगे। इतनी ही राशि राज्य सरकार अपने मद से ईपीएफ में देगी।
टीम एबीएन, रांची। राज्य सरकार ने झारखंड एकेडमिक काउंसिल के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के नाम पर अपनी मुहर लगा दी है। शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने लगभग एक महीने पहले अनिल महतो को अध्यक्ष और विनोद सिंह को जैक का उपाध्यक्ष बनाए जाने को लेकर अपने आवास से ही घोषणा की थी। मामला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पास विचाराधीन था। मंगलवार को इसे लेकर अधिसूचना जारी कर दिया गया। झारखंड एकेडमिक काउंसिल के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पद 15 सितंबर 2021 से ही खाली थे। 15 सितंबर को काउंसिल के अध्यक्ष अरविंद प्रसाद सिंह और उपाध्यक्ष फूल सिंह का कार्यकाल समाप्त हो गया था। जैक अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की मंजूरी के बिना जैक की ओर से रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू करने में परेशानी आ रही थी। साथ ही और भी कई एकेडमिक कामकाज में परेशानी हो रही थी। हालांकि इस दिशा में पहल करते हुए लगभग एक महीने पहले शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने जैक अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के नाम पर मुहर लगा दी थी। लेकिन मामला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पास विचाराधीन था। मंगलवार को इसे लेकर एक अधिसूचना जारी कर दी गई है। अधिसूचना के मुताबिक डॉक्टर अनिल महतो को झारखंड एकेडमिक काउंसिल का अध्यक्ष बनाया गया है। जैक अध्यक्ष अनिल महतो रांची यूनिवर्सिटी एग्जामिनेशन कंट्रोलर रह चुके हैं। विनोद बिहारी विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति भी रह चुके हैं। वहीं विनोद सिंह को जैक का उपाध्यक्ष बनाया गया है। अब जैक अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की नियुक्ति होने से झारखंड शिक्षा बोर्ड में कई लंबित फैसले लिए जाएंगे। मैट्रिक और इंटर परीक्षा को लेकर भी असमंजस की स्थिति खत्म होगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्र सरकार 2022-23 में अपने समग्र सब्सिडी बिल को कम करने पर सक्रिय रूप से विचार कर रही है। सरकार अपने आगामी बजट 2022 में खाद्य और उवर्रक सब्सिडी को क्रमश: 2.60 लाख करोड़ और 90,000 करोड़ रुपये पर रख सकती है। यह वित्त वर्ष 2022 के लिए संशोधित अनुमानों के मुकाबले कम होगी। इस संबंध में जारी एक रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा वित्त वर्ष के लिए कुल सब्सिडी बिल करीब 5.35 से 5.45 लाख करोड़ रुपये होने की उम्मीद है, जिसे सरकार अगले वित्त वर्ष में कम करना चाहती है। गौरतलब है कि आगामी आम बजट एक फरवरी 2022 को पेश किया जाएगा। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सुबह 11 बजे संसद में कोरोना से प्रभावित अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए बजट घोषणाएं करेंगी। इस बार के आम बजट के तुरंत बाद देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में यह बजट लोक लुभावन होने की पूरी संभावना जताई जा रही है। एक अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि मौजूदा वित्त वर्ष के लिए खाद्य सब्सिडी बिल के संशोधित अनुमानों में करीब 3.90 लाख करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है, जो बजट में किए गए 2.43 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। लेकिन वित्त वर्ष 2021 के 4.22 लाख करोड़ रुपये से कम है। इसके अलावा रिपेार्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2022 के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) की कुल लागत 1.47 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है।
एबीएन डेस्क। दोपहिया वाले बीपीएल के लिए हर महीने 10 लीटर पेट्रोल पर 25 रुपये की सब्सिडी पाना आसान नहीं होगा। राज्य सरकार ने छूट को लेकर शनिवार को जो दिशा-निर्देश जारी किए हैं, उससे इसका पता चलता है। शनिवार को जिला प्रशासन तक यह सूचना एक फ्लो चार्ट के माध्यम से पहुंची। इस योजना के लाभुक मोबाइल एप के माध्यम से आवेदन करेंगे। आवेदक को राज्य के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम अथवा राज्य खाद्य सुरक्षा योजना का राशन कार्डधारक होना चाहिए। राशन कार्ड में परिवार के सभी सदस्यों का सत्यापित आधार नंबर अंकित होना चाहिए। आवेदक के आधार से जुड़ा बैंक अकाउंट नंबर और मोबाइल नंबर अपडेट होना चाहिए। आवेदक के वाहन का निबंधन उसी के नाम से होना चाहिए। उसका दोपहिया झारखंड में निबंधित होना चाहिए। आवेदन करते समय अपना राशन कार्ड एवं आधार नंबर एप में डालना होगा, उसके बाद उसके आधार सीडेड मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगा। ओटीपी सत्यापन के उपरांत राशन कार्ड में अपना नाम सेलेक्ट कर ड्राइविंग लाइेंसस नंबर डालना होगा। इसमें बताया गया है कि वाहन का नंबर डीटीओ की लॉगइन में जाएगा, जिसे वे सत्यापित करेंगे। सत्यापन के पश्चात सूची जिला आपूर्ति पदाधिकारी (डीएसओ) के लॉगइन में चली जाएगी। उपायुक्त की स्वीकृति के उपरांत डीएसओ द्वारा बिल ट्रेजरी में जमा किया जाएगा। ट्रेजरी बिल पास कर डीएसओ के पीएफएमएस खाते में पूरी राशि हस्तांतरित कर देगा। इसके बाद डीएसओ अपने पीएफएमएस लॉगइन से लाभुकों को डीबीटी के माध्यम से लाभुक के आधार सीडेड बैंक खाता में राशि भेज देंगे। यदि आवेदक के आधार से बैंक खाता सीडेड नहीं है तो राशन कार्ड सीडेड बैंक खाता में राशि भेजी जाएगी।
एबीएन डेस्क। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कोविड-19 प्रबंधन पर हुई बैठक में कहा कि राज्य सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र के ढांचे को सुदृढ़ करने के साथ बेहतर प्रबंधन के जरिए महामारी की पहली-दूसरी लहर को काफी हद तक काबू किया था और तीसरी लहर के लिए भी आवश्यक तैयारियां की है। सोरेन ने कहा, तीसरी लहर को नियंत्रित करने के लिए सभी आवश्यक और ठोस कदम उठाए जा रहे हैं और सरकार के इन्हीं कदमों की वजह से तीसरी लहर में राज्य में अफरातफरी नहीं है। सरकार द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, प्रधानमंत्री के साथ कोविड प्रबंधन पर मुख्यमंत्रियों की वर्चुअल बैठक में सोरेन ने कहा कि जिस तरह से कोविड मरीजों की संख्या बढ़ रही है, हमें बेहद सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है। लोगों से टीका लगवाने की अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, कोविड से निपटने के लिए टीका सबसे बड़ा हथियार है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूल- कॉलेज, जिम, पार्क समेत वैसे सभी संस्थान और सार्वजनिक स्थल बंद कर दिए गए हैं जहां से संक्रमण के फैलने का खतरा ज्यादा है। उन्होंने कहा, पिछड़ापन और भौगोलिक क्षेत्र जटिल होने के कारण झारखंड में कोविड-19 टीकाकरण में थोड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। लेकिन, बेहतर रणनीति बनाकर जांच में तेजी लाने के साथ ज्यादा से ज्यादा लोगों का टीकाकरण करने का कार्य तेज गति से चल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि टीकाकरण में तेजी लाने के लिए 150 मोबाइल टीकाकरण वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
एबीएन डेस्क। झारखंड में कोरोना संक्रमण को देखते हुए राज्य में जारी पाबंदी एक सप्ताह के लिए बढ़ाये जाने की संभावना है। शनिवार 15 जनवरी को इस संबंध में आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से गाइडलाइन जारी होगी। मिली जानकारी के अनुसार हेमंत सरकार कोरोना संक्रमण दर की समीक्षा करने के बाद गाइडलाइन जारी करेगी। गुरुवार को पीएम मोदी की समीक्षा बैठक के दौरान केन्द्र द्वारा दिये गए सुझाव को भी ध्यान में रखकर सरकार गाइडलाइन जारी करने जा रही है। राज्य में तेजी से फैल रहे कोरोना संक्रमण को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में 3 जनवरी को आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक हुई थी। बैठक में कोरोना के नये वैरिएंट ओमीक्रोन के खतरा और संक्रमण की समीक्षा करते हुए सरकार ने शैक्षणिक संस्थान को बंद करने, सरकारी और निजी संस्थान में 50 फीसदी क्षमता के साथ काम करने, अंत्येष्टि और शादी विवाह में अधिकतम 100 लोग ही शामिल होने और रात 8 बजे के बाद बार, रेस्टोरेंट और मेडिकल को छोड़कर अन्य सभी दुकानें बंद रखने का फैसला लिया था। 15 जनवरी तक सरकार ने कई पाबंदियां लगाई गई थी। सभी पार्क, स्विमिंग पूल, जिम, चिड़ियाघर, पर्यटन स्थल, खेल स्टेडियम 15 जनवरी 2022 तक पूर्णत: बंद रहेंगे। स्कूल, कॉलेज, कोचिंग इंस्टीट्यूट 15 जनवरी 2022 तक बंद रहेंगे, परंतु इन संस्थानों में 50% क्षमता के साथ प्रशासनिक कार्य होंगे। सिनेमा हॉल, रेस्टोरेंट, बार एवं शॉपिंग मॉल 50% क्षमता के साथ खुलेंगे। रेस्टोरेंट, बार एवं दवा दुकानें अपने नॉर्मल समय पर बंद होंगे, बाकी सभी दुकानें रात्रि 8 बजे तक ही खुली रहेंगी। आउटडोर आयोजन में अधिकतम एक सौ लोग शामिल हो सकेंगे। इनडोर आयोजनों में कुल क्षमता का 50% या 100 दोनों में से जो कम हो, क्षमता के साथ आयोजन हो सकेंगे। सरकारी एवं निजी संस्थानों के कार्यालय 50% क्षमता के साथ खुले रहेंगे। बायोमेट्रिक अटेंडेंस पर प्रतिबंध रहेगा। इसके अलावा राज्य में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए सभी अनिवार्य स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता के साथ दुरुस्त करने को कहा गया था जिससे किसी भी परिस्थिति में निपटा जा सके। राज्य सरकार ने स्थिति को ध्यान में रखते हुए राज्य के सभी जिलों को अलर्ट मोड में रहने का निर्देश दे रखा है।
एबीएन डेस्क। झारखंड सरकार चार लाख राशन कार्ड रद्द करेगी। ये चार लाख वैसे राशन कार्डधारी हैं, जिन्होंने पिछले आठ से 10 महीने के दौरान राशन का उठाव ही नहीं किया। झारखंड सरकार के वित्त एवं खाद्य आपूर्ति मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने यह जानकारी दी है। डॉ उरांव ने अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार इसके पहले एक लाख राशन कार्ड रद्द कर चुकी है। चार लाख राशन कार्ड रद्द करने पर यह आंकड़ा पांच लाख हो जाएगा। खाद्य आपूर्ति मंत्री ने बताया कि इनके अलावा 65 हजार ऐसे कार्डधारियों की भी समीक्षा की जा रही है, जो लोग गरीबी रेखा से नीचे नहीं आते हैं। लेकिन उन्हें इस योजना के तहत राशन कार्ड उपलब्ध कराया गया है। ये ऐसे लाभुक हैं जो 100 से लेकर 200 क्विंटल तक धान बेचते हैं। ऐसे में इन कार्डधारियों को इस श्रेणी में रखना उचित नहीं होगा। इनके राशन कार्ड भी वापस लिए जाएंगे। डॉ उरांव ने कहा कि कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर को देखते हुए जीवन और जीविका को आगे बढ़ाना है और आर्थिक गतिविधियां चालू रहेगी। नौ जनवरी को ओडिशा की अर्थव्यवस्था एवं राजस्व संग्रहण को देखने के लिए जाना था, लेकिन कोरोना महामारी की वजह से नहीं जा सके। लेकिन, सरकार अध्ययन कर रही है। 65 हजार ऐसे कार्डधारियों की भी समीक्षा की जा रही है, जो लोग गरीबी रेखा से नीचे नहीं आते हैं
एबीएन डेस्क। झारखंड में कोरोना मरीजों की संख्या में हो रही वृद्धि के साथ ही अस्पतालों में भी मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। बीते 13 दिनों में राज्य के अस्पतालों में लगभग 10 गुना मरीज बढ़े हैं। 31 दिसंबर को जहां 137 मरीज ही भर्ती थे वहीं मंगलवार को अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या 1191 हो गई। गुरुवार को यह संख्या 1322 पर पहुंच गयी है। अभी भी करीब 31 हजार मरीज होम आयसोलेशन में हैं। प्रतिशत के लिहाज से देखें तो 31 दिसंबर को राज्य में एक्टिव मरीजों के लगभग 7 प्रतिशत (137) अस्पतालों में भर्ती थे, बाकी होम आयसोलेशन में थे। रविवार को यह प्रतिशत 8 पर पहुंच गया था। बीते मंगलवार को राज्य भर के अस्पतालों में महज 4.10 प्रतिशत मरीज ही भर्ती थे। राज्य में जनवरी के 13 दिनों में कोरोना के 43787 नए मरीज मिले हैं। जिसमें से 13494 स्वस्थ हो चुके हैं। जबकि, इसी अवधि में 45 की मौत भी हुई। राज्य में 31 दिसंबर को एक्टिव मरीजों की संख्या 2002 थी, जो 13 दिसंबर को 32250 पहुंच चुकी है। यानी बीते 13 दिनों में एक्टिव मरीजों की संख्या 16.10 गुना बढ़ी है। दिसंबर में राज्यभर में रोज औसतन 30 हजार सैंपलों की जांच हो रही थी। जो 70 हजार पहुंच चुकी है। बावजूद पेंडिंग सैंपलों की संख्या जीरो नहीं हो रही है। 31 दिसंबर को 4316 सैंपलों की जांच पेंडिंग थी। 13 जनवरी भी भी राज्य में 9077 सैंपलों की जांच पेंडिंग है।
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