टीम एबीएन, रांची। झारखंड के कैंसर मरीजों के लिए राहत वाली खबर है। राज्य के सभी जिला अस्पतालों में कैंसर जांच की मशीन जल्द लगाई जाएगी। स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने खुद इसकी जानकारी दी। इसके लिए केन्द्र सरकार से मिलने वाली 1 करोड़ 32 लाख की राशि का उपयोग किया जाएगा। मंगलवार को एनएचएम परिसर में स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता की अध्यक्षता में कारसिनोमा सर्विक्स से संबंधित विषय पर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में राज्य के सभी जिलों के सिविल सर्जन, सरकारी स्त्री रोग विशेषज्ञ, सभी जिलों के अस्पताल प्रबंधक और उपाधीक्षकों को ऑनलाइन जोड़ा गया। इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा कि सरकार ने बजट में 1 करोड़ 32 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे राज्य के सभी जिला अस्पतालों में डिजिटल वीडियो कॉलपोस्कोप और क्रायो मशीन लगायी जाएगी। उन्होंने सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग का दिए गए लक्ष्य के विरुद्ध बेहद खराब प्रदर्शन के लिए जमशेदपुर, रांची, चतरा और लातेहार के संबंधित पदाधिकारियों को बर्खास्त करने की चेतावनी दी। उन्होंने बताया कि साहियाओं के मानदेय को बढ़ाने के लिए बात की गई है। उन्होंने मातृत्व कोषांग प्रभारी डॉ दीपावली को निर्देश दिया कि गर्भावस्था के समय और प्रसव के बाद आने वाली महिलाओं में भी अगर सर्वाइकल फ्री कैंसर के लक्षण हैं, तो उनकी जांच करवाई जाए। समीक्षा बैठक में अपर मुख्य सचिव अरुण सिंह ने कहा कि डिस्ट्रिक्ट एक्शन प्लान बनाया जाएगा, जो जागरुकता प्रशिक्षण और इलाज, इन तीनों ही मुद्दों पर काम करेगा। इसके क्रियान्वयन के लिए हर जिले में कमेटी बनायी जाएगी। जिसमें सरकारी डॉक्टर के साथ-साथ जिला स्तर पर वीमेन डॉक्टर्स विंग आईएमए के सदस्य भी रहेंगे। आईएमए वीमेन डॉक्टर्स विंग की अध्यक्ष डॉ भारती कश्यप ने बताया कि वीमेन डॉक्टर्स विंग लगातार वेबिनार एवं स्वास्थ्य शिविर में मशीनों पर हैंड्स ऑन प्रशिक्षण दे रहा है। 89,541 महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग पिछले 9 माह में प्रशिक्षित सरकारी स्त्री रोग विशषज्ञों ने की है। बता दें कि एक साल में करीब 2,70,000 प्रजनन क्षमता वाली महिलाओं के सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग का लक्ष्य था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में हर घर तक नल से जल पहुंचाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे जल जीवन मिशन के तहत ढाई साल की अवधि में 5.77 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल से पेयजल पहुंचाया गया और अब 9 करोड़ परिवारों को यह सुविधा मिल रही है। जल शक्ति मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, वर्ष 2024 तक हर घर तक नल से जल पहुंचाने के उद्देश्य से 15 अगस्त 2019 को जल जीवन मिशन की घोषणा की गई थी। उस समय भारत में केवल 3.23 करोड़ परिवारों (17 प्रतिशत) को नल से जल प्राप्त हो रहा था । जल शक्ति मंत्रालय ने बताया कि इसके बाद करीब ढाई साल के दौरान 5.77 करोड़ ग्रामीण परिवारों तक नल से पेयजल पहुंचाया गया और अब नौ करोड़ ग्रामीण परिवारों को यह सुविधा प्राप्त हो गई है। जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने ट्वीट किया, ग्रामीण भारत में हर घर जल तेजी से हकीकत बन रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "सबका साथ, सबका विकास" की सोच के साथ जल जीवन मिशन से भारत के सुदूर हिस्सों में लोगों का जीवन आसान हो रहा है और ग्रामीण महिलाओं को सम्मानपूर्ण जीवन मिल रहा है। मंत्रालय के अनुसार, पांच वर्ष के दौरान प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है और इस उद्देश्य से वर्ष 2022-23 के केंद्रीय बजट में 3.8 करोड़ ग्रामीण परिवारों तक नल से जल पहुंचाने के लिए 60 हजार करोड़ रूपये आवंटित किए गए हैं ।
टीम एबीएन, रांची। चारा घोटाला मामले में लालू यादव को रांची सीबीआई कोर्ट ने दोषी करार दिया है। मामला डोरंडा कोषागार से अवैध निकासी से जुड़ा हुआ है। इधर, लालू प्रसाद यादव के जेल जाने की सूचना मिलते ही रिम्स प्रबंधन भी अलर्ट पर है। रिम्स के पेइंग वार्ड के पहले तल्ले का कमरा ए 11 की सफाई लालू प्रसाद यादव के रिम्स पहुंचने के पूर्व करा ली गई थी। वहीं कमरे में लगे फ्रिज, टीवी, एसी, गीजर समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की टेस्टिंग भी की गई है। बताया जा रहा है कि लालू रिम्स आते ही उनके इलाज के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाएगा। बोर्ड में कई विभागों के विशेषज्ञ चिकित्सक रहेंगे। बता दें कि लालू यादव डाइबिटीज, ब्लड प्रेशर, ह्रदय रोग, किडनी की बीमारी, किडनी में स्टोन, तनाव, थैलीसीमिया, प्रोस्टेट का बढ़ना, यूरिक एसिड का बढ़ना, ब्रेन से सम्बंधित बीमारी, कमजोर इम्युनिटी, दाहिने कंधे की हड्डी में दिक्कत, पैर की हड्डी की समस्या, आंख में दिक्कत है। उनकी किडनी फोर्थ स्टेज यानी लास्ट स्टेज में है। लालू यादव के होटवार जेल से रिम्स पहुंचने के दौरान पूर्व मंत्री श्याम रजक और जयप्रकाश नारायण यादव ने उनके स्वास्थ्य पर चिंता जाहिर की है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। खुदरा महंगाई दर जनवरी में नई ऊंचाई पर पहुंच गई। सरकारी की ओर से जारी डेटा के मुताबिक, पिछले महीने खाद्य उत्पादों की कीमतों में हुई बढ़ोतरी की वजह से खुदरा मंहगाई दर में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। जनवरी में यह 6.01 फीसदी तक पहुंच गई, जबकि दिसंबर में यह दर 5.66 पर थी। यह आरबीआई की ओर से सालाना आधार पर तय किए गए मुद्रास्फीति लक्ष्य से भी ज्यादा है। इस बीच, दिसंबर 2021 की मुद्रास्फीति के आंकड़े को 5.59 प्रतिशत से संशोधित कर 5.66 प्रतिशत कर दिया गया है। जनवरी 2021 में यह 4.06 प्रतिशत थी। इससे पहले, जून 2021 में मुद्रास्फीति 6.26 प्रतिशत के उच्च स्तर पर रही थी। राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (एनएसओ) के सोमवार को जारी मुद्रास्फीति आंकड़ों के अनुसार खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर जनवरी 2022 में 5.43 प्रतिशत रही जो इससे पिछले महीने 4.05 प्रतिशत थी। सोमवार को जारी आधिकारिक आंकड़े के अनुसार तेल और वसा खंड में खुदरा मुद्रास्फीति 18.7 प्रतिशत रही। ईंधन एवं प्रकाश, कपड़ा और जूता-चप्पल (फुटवियर) तथा परिवहन एवं संचार क्षेत्रों समेत अन्य खंडों में महंगाई दर सालाना आधार पर 9 प्रतिशत बढ़ी। अनाज और उसके उत्पादों की महंगाई दर बढ़कर जनवरी में 3.39 प्रतिशत रही जो दिसंबर 2021 में 2.62 प्रतिशत थी।इसके अलावा मांस और मछली श्रेणी में मुद्रास्फीति बढ़कर 5.47 प्रतिशत रही जो पिछले महीने 4.58 प्रतिशत थी। सब्जियों के मामले में महंगाई दर बढ़कर 5.19 प्रतिशत हो गयी जबकि दिसंबर में इसमें 2.99 प्रतिशत की गिरावट आयी थी। हालांकि तेल एवं वसा खंड में महंगाई दर नरम होकर 18.70 प्रतिशत रही। ईंधन अैर प्रकाश खंड में मुद्रास्फीति कम होकर 9.32 प्रतिशत रही जो दिसंबर में 10.95 प्रतिशत थी। रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति पर विचार करते समय मुख्य रूप से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति पर गौर करता है। सरकार ने केंद्रीय बैंक को दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ खुदरा महंगाई दर चार प्रतिशत पर बनाए रखने की जिम्मेदारी दी हुई है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने 26,275 करोड़ रुपए की वित्तीय लागत से 2025-26 तक व्यापक पुलिस आधुनिकीकरण योजना को जारी रखने को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बताया कि इस योजना में जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर राज्यों तथा माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा संबंधी व्यय, नई बटालियानों के गठन, उच्च प्रौद्योगिकी से लैस अपराध प्रयोगशालाओं और अन्य जांच प्रविधियों के विकास का खर्च शामिल है। एक सरकारी बयान के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्री मोदी के नेतृत्व में सरकार ने व्यापक पुलिस बल आधुनिकीकरण (MPF) योजना को जारी रखने को मंजूरी दी है। यह मंजूरी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिसबलों को आधुनिक बनाने एवं उनके कामकाज में सुधार लाने की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की पहल को आगे ले जाएगी। बयान के मुताबिक इस योजना में वे सभी प्रासंगिक योजनाएं हैं जो 26,275 करोड़ रुपए की कुल केंद्रीय वित्तीय लागत से आधुनिकीरण एवं सुधार में योगदान देंगी। मंत्रालय का कहना है कि यह व्यवस्था अंदरूनी तथा कानून व्यवस्था तथा पुलिस द्वारा आधुनिक प्रौद्योगिकी को अपनाने के तहत की गयी है। उसके अंतर्गत देश में ठोस अपराध विज्ञान तंत्र विकसित करने और राज्यों को मादक पदार्थों पर काबू पाने तथा आपराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत करने के लिए सहायता दी जाएगी। जम्मू कश्मीर, उग्रवाद प्रभावित पूर्वोत्तर राज्यों तथा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा संबंधी व्यय के लिए 18,839 करोड़ रुपए का केंद्रीय व्यय निर्धारित किया गया है। राज्यों को राज्य पुलिस बलों के आधुनिकीकरण के लिए केंद्र 4,846 करोड़ रुपए देगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय रेलवे ने नागपुर और मुंबई के बीच जो बुलेट ट्रेन संचालित करने का प्रस्ताव रखा है, उसके माध्यम से लगभग 766 किलोमीटर की दूरी महज साढ़े तीन घंटों में पूरी की जा सकेगी। इस ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 350 किलोमीटर प्रतिघंटा होगी। वर्तमान में यह दूरी तय करने में कम से कम 12 घंटे का समय लगता है। केंद्रीय मंत्री रावसाहेब दानवे ने शनिवार को कहा कि प्रस्तावित मुंबई-नागपुर हाई स्पीड रेल कॉरिडोर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) इस महीने के अंत तक या मार्च के पहले सप्ताह तक तैयार हो जाएगी। उन्होंने बताया कि इस समय ऐसे सात कॉरिडोर के लिए बुलेट ट्रेन की डीपीआर का काम किया जा रहा है। 70 फीसदी जमीन है, 30 फीसदी का अधिग्रहण करना होगा : दानवे ने कहा, इमने इस सुपरफास्ट ट्रेन का प्रस्ताव समृद्धि हाईवे प्रोजेक्ट के साथ रखा है। हमारे लिए अच्छी बात यह है कि 70 फीसदी भूमि पहले ही हमारे पास है। हमें निजी पक्षों से केवल 30 फीसदी जमीन का अधिग्रहण करने की आवश्यकता है। बुलेट ट्रेन से दोनों शहरों के बीच परिवहन का एक बेहतर विकल्प मिल सकेगा। परियोजना के लिए किसानों को जमीन छोड़नी नहीं पड़ेगी : उन्होंने इस परियोजना को लेकर कहा कि नागपुर से इगतपुरी तक भूमि का अधिग्रहण करने की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि ट्रेन समृद्धि हाईवे के पास चलेगी। इगतपुरी से मुंबई तक भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता होगी। दानवे ने कहा कि किसानों को जमीन नहीं छोड़नी पड़ेगी क्योंकि पूरा कॉरिडोर एलिवेटेड ट्रैक पर होगा। डीपीआर रिपोर्ट में मिलेगी स्टेशनों की संख्या की जानकारी : केंद्रीय मंत्री ने कहा, इगतपुरी के बाद एक मोड़ पड़ता है जहां से हमें ट्रेन का रास्ता बदलना पड़ेगा। डीपीआर रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया जाएगा कि ट्रेन के रास्ते में स्टेशनों की संख्या कितनी होगी। परियोजना के दायरे में 10 जिलों के आने की उम्मीद है लेकिन स्टेशनों की संख्या कितनी होगी, ये अभी स्पष्ट नहीं है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सामाजिक सुरक्षा विभाग की ओर से पेंशन योजनाओं का वार्षिक भौतिक सत्यापन किया जाना है। इस संबंध में विभाग की ओर से पिछले दिनों सभी जिलों को पत्र भी भेजा जा चुका है। इसके तहत पंचायतों में पेंशन योजनाओं (विधवा, वृद्ध व अन्य) का लाभ उठा रहे लाभुकों की वास्तविकता और वस्तुस्थिति की समीक्षा होगी। इसके लिए अलग-अलग जिलों में पंचायत स्तरीय सोशल ऑडिट यूनिट के गठन की प्रक्रिया भी शुरू हो गयी है। अगले एक सप्ताह में तकरीबन सभी जिलों में सोशल ऑडिट यूनिट तैयार कर लिए जाने और उनकी ट्रेनिंग का काम भी पूरा किये जाने की उम्मीद है। सभी जिलों में 31 मार्च तक ऑडिट का काम पूरा कर लिए जाने का टारगेट रखा गया है। हजारीबाग में 17 फरवरी को ऑडिट यूनिट का गठन कर लिया जायेगा। 19 को प्रखंड स्तर पर ऑडिट यूनिट की ट्रेनिंग होगी और भौतिक सत्यापन सामग्री उपलब्ध करा दी जायेगी। इसी दिन से लेकर 26 फरवरी तक पंचायत के सभी लाभुकों का फिजिकल वेरिफिकेशन किया जाना तय किया गया है। 28 फरवरी को सभी पंचायतों के प्रतिवेदन का समेकन होगा। संबंधित लाभुकों को नोटिस जारी होगा। 2 मार्च को मृत, अयोग्य और अनुपस्थित लाभुकों की सूची सार्वजनिक की जायेगी। 14 मार्च को प्राप्त आपत्ति का निराकरण और फिजिकल वेरिफिकेशन कर इसे जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग कार्यालय को भेजा जायेगा। 15 मार्च से 31 मार्च तक मृत, अयोग्य और अनुपस्थित लाभुकों का नाम आपत्ति के निराकरण के साथ एनएसएपी पोर्टल से हटा दिया जायेगा।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में विकास की गति को तेज करने के लिए नए एक्सप्रेस-वे का निर्माण किया जाएगा। भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत ओडिशा के संबलपुर से झारखंड के रांची तक एक्सप्रेस-वे बनेगा। एक्सप्रेस-वे की कुल लंबाई 146.2 किलोमीटर होगी। डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार वहीं सुरक्षा के दृष्टिकोण से सड़क का निर्माण इस तरीके से कराया जाएगा, ताकि ये दुर्घटनामुक्त रहे। इसके लिए सारे उपाय किए जाएंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसके लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार किया गया है। एक्सप्रेस-वे पर वाहनों की स्पीड लिमिट 120 किमी प्रति घंटे होगी। वहीं, रोड पर अचानक गाड़ी या जानवर न आ पाए, इसके लिए भी उपाए किए जाएंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस योजना पर जल्द ही कार्य शुरू कर दिए जाएंगे। इसके बन जाने से राज्य में सड़क परिवहन सुगम हो जाएगा और साथ ही झारखंड की तस्वीर भी बदल जाएगी। इसके निर्माण के बाद ट्रांसपोर्टिंग बेहतर होगी और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। वहीं समय की भी बचत हो सकेगी। DPR में यह व्यवस्था की गई है कि पूरी सड़क पर दोनों ओर आठ फीट ऊंचा गार्डवाल बनाया जाए। ताकि सड़क पर अचानक गाड़ी या जानवर नहीं आ सकें। वहीं, जानवरों के सड़क पार करने के लिए अंडर पास का निर्माण कराया जाएगा। इसका पूरा ख्याल रखा जाएगा कि सड़क बन जाने से जानवरों का मार्ग अवरुद्ध न हो। भारतमाला प्रोजेक्ट के अंतर्गत एक्सप्रेस-वे का निर्माण संबलपुर से रांची तक ग्रीन फील्ड प्रोजेक्ट के रूप में होगा। इस प्रोजेक्ट के तहत रांची, धनबाद और बोकारो को एक्सप्रेस-वे से जोड़ने की कवायद हो रही है।
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