एबीएन डेस्क। सरकार की योजना मौजूदा और भविष्य में कोयला खानों के परिचालन में नई प्रौद्योगिकियों के क्रियान्वयन और डिजिटल ढांचे के निर्माण की है। इससे देश की कोयले के आयात पर निर्भरता को कम किया जा सकेगा। कोयला खनन में प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल परिचालन को अधिक उत्पादक बना रहा है। सरकार के कोयला क्षेत्र के लिए प्रौद्योगिकी की रूपरेखा पर मसौदे के अनुसार, इसका उद्देश्य नई प्रौद्योगिकियों को लागू करना और खानों के वर्तमान और भविष्य के विस्तार को समर्थन देने के लिए डिजिटल बुनियादी ढांचे का निर्माण करना है। इसमें कहा गया है कि इसके तहत एक मजबूत, बहु-गति की सूचना प्रौद्योगिकी और ढांचागत प्रणाली के आधार की जरूरत है। मसौदा कहता है, इस तरह की प्रणाली के निर्माण के लिए नए पीढ़ी के पारिस्थितिक तंत्र (मसलन स्टार्टअप, स्थापित वेंडर, शोध संस्थान) तक पहुंच की आवश्यकता होगी। प्रौद्योगिकी बदलाव के लिए संगठन में एक संस्कृति बनाने की जरूरत भी होगी। मसौदे में कहा गया है कि आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के लिए एक अरब टन के लक्ष्य तक पहुंचना महत्वपूर्ण है, जिससे प्रौद्योगिकी बदलाव की यात्रा शुरू हो सके। मसौदे के अनुसार, नई प्रौद्योगिकी के सुरक्षा और उत्पादकता, पर्यावरण संरक्षण और महिलाओं के लिए अवसरों सहित खनन कार्यों सहित कई प्रभाव हो सकते हैं। इसमें कहा गया है कि बेहतर भूमिगत संचार, स्वचालन, अधिक परिष्कृत खनिज और धातु परिवहन और आपात प्रतिक्रिया उपायों के माध्यम से खनन परियोजनाओं में प्रौद्योगिकी को एकीकृत कर सुरक्षित काम करने की स्थिति हासिल की जाती है। मसौदे में कहा गया है कि भारत के पास कुल कोयला भंडार 344.02 अरब टन था। पिछले चार दशकों में देश में वाणिज्यिक प्राथमिक ऊर्जा खपत में 700 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ऊर्जा की मांग में वृद्धि के प्रमुख कारक अर्थव्यवस्था का विस्तार, बढ़ती जनसंख्या और जीवन की गुणवत्ता में सुधार हैं। अन्य ऊर्जा स्रोतों की सीमित संभावनाओं की वजह से अगले कुछ दशकों तक देश के ऊर्जा परिवेश में कोयला प्राथमिक स्रोत के रूप में बना रहेगा।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड एकडेमिक काउंसिल की ओर से राज्य के दिव्यांग परीक्षार्थियों के लिए इस वर्ष परीक्षा के दौरान कई प्रावधान किए गए हैं। इन परीक्षार्थियों को परेशानी ना हो इसे लेकर सहूलियत दी जाएगी। वहीं अगले सत्र से दसवीं के दिव्यांग बच्चों को परीक्षा शुल्क नहीं देना पड़ेगा। इसका प्रावधान कर दिया गया है। इसी कड़ी में झारखंड एकेडमिक काउंसिल ने अगले सत्र से दिव्यांग बच्चों को परीक्षा शुल्क में राहत दी है। झारखंड में दिव्यांग जनों के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। दिव्यांग बच्चों को स्कूली शिक्षा समेत उच्च शिक्षा में भी कई योजनाओं के साथ जोड़ा जा रहा है। इसी कड़ी में झारखंड एकेडमिक काउंसिल की ओर से एक बेहतर पहल की जा रही है। जैक (JAC) ने निर्णय लिया है कि अगले सत्र से दसवीं के दिव्यांग बच्चों को परीक्षा शुल्क नहीं देना पड़ेगा। इसे लेकर प्रावधान कर दिया गया है। प्रत्येक वर्ष मैट्रिक और इंटर की परीक्षा में सैकड़ों परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल होते हैं। इस वर्ष इन दिव्यांग परीक्षार्थियों से जैक की ओर से आवेदन शुल्क लिया गया है। लेकिन अगले सत्र से इन दिव्यांग परीक्षार्थियों का परीक्षा शुल्क देना नहीं पड़ेगा। इस बार इन बच्चों के लिए परीक्षा के दौरान कई सहूलियत दी जाएगी। परीक्षा लिखने और प्रश्न पत्र समझाने के लिए एक व्यक्ति एक परीक्षार्थी के लिए उपलब्ध होंगे ताकि ऐसे परीक्षार्थियों को प्रश्न का उत्तर देने में कोई कठिनाई ना आए। झारखंड एकडेमिक काउंसिल के सचिव महीप कुमार सिंह ने जानकारी देते हुए कहा कि परीक्षार्थियों के लिए परीक्षा केंद्रों पर हर वह सुविधा होगी, जिनकी उन्हें जरूरत है। आने वाले सत्र में व्यवस्था में बढ़ोतरी की जाएगी। परीक्षा शुल्क और रजिस्ट्रेशन शुल्क भी इन परीक्षार्थियों से नहीं लिया जाएगा। वहीं स्कूल प्रबंधकों ने भी झारखंड एकेडमिक काउंसिल की ओर से लिए गए इस फैसले का स्वागत किया है। उनकी मानें तो समाज का नैतिक कर्तव्य है ऐसे विद्यार्थियों की ओर ध्यान देना और उन्हें मुख्यधारा के साथ जोड़ते हुए एक बेहतरीन इंसान बनाना।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) संगठित क्षेत्र के 15,000 रुपये से अधिक का मूल वेतन पाने वाले तथा कर्मचारी पेंशन योजना-1995 (ईपीएस-95) के तहत अनिवार्य रूप से नहीं आने वाले कर्मचारियों के लिए एक नई पेंशन योजना लाने पर विचार कर रहा है। वर्तमान में संगठित क्षेत्र के वे कर्मचारी जिनका मूल वेतन (मूल वेतन और महंगाई भत्ता) 15,000 रुपये तक है, अनिवार्य रूप से ईपीएस-95 के तहत आते हैं। एक सूत्र ने कहा, ईपीएफओ के सदस्यों के बीच ऊंचे योगदान पर अधिक पेंशन की मांग की गई है। इस प्रकार उन लोगों के लिए एक नया पेंशन उत्पाद या योजना लाने के लिए सक्रिय रूप से विचार किया जा रहा है, जिनका मासिक मूल वेतन 15,000 रुपये से अधिक है। सूत्र के अनुसार, इस नए पेंशन उत्पाद पर प्रस्ताव 11 और 12 मार्च को गुवाहाटी में ईपीएफओ के निर्णय लेने वाले शीर्ष निकाय केंद्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) की बैठक में आ सकता है। बैठक के दौरान सीबीटी द्वारा नवंबर, 2021 में पेंशन संबंधी मुद्दों पर गठित एक उप-समिति भी अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। सूत्र ने बताया कि ऐसे ईपीएफओ अंशधारक हैं जिन्हें 15,000 रुपये से अधिक का मासिक मूल वेतन मिल रहा है, लेकिन वे ईपीएस-95 के तहत 8.33 प्रतिशत की कम दर से ही योगदान कर पाते हैं। इस तरह उन्हें कम पेंशन मिलती है। ईपीएफओ ने 2014 में मासिक पेंशन योग्य मूल वेतन को 15,000 रुपये तक सीमित करने के लिए योजना में संशोधन किया था। 15,000 रुपये की सीमा केवल सेवा में शामिल होने के समय लागू होती है। संगठित क्षेत्र में वेतन संशोधन और मूल्यवृद्धि की वजह से इसे एक सितंबर, 2014 से 6,500 रुपये से ऊपर संशोधित किया गया था। बाद में मासिक बेसिक पे की सीमा को बढ़ाकर 25,000 रुपये करने की मांग हुई और उसपर विचार-विमर्श किया गया, लेकिन प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल पाई। उद्योग के अनुमान के अनुसार, पेंशन योग्य वेतन बढ़ाने से संगठित क्षेत्र के 50 लाख और कर्मचारी ईपीएस-95 के दायरे में आ सकते हैं। पूर्व श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने दिसंबर, 2016 में लोकसभा में एक लिखित जवाब में कहा था, कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 के तहत कवरेज के लिए वेतन सीमा 15,000 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 25,000 रुपये मासिक करने का प्रस्ताव ईपीएफओ ने पेश किया था, लेकिन इसपर कोई निर्णय नहीं हुआ। सूत्र ने कहा कि उन लोगों के लिए एक नए पेंशन उत्पाद की आवश्यकता है जो या तो कम योगदान करने के लिए मजबूर हैं या जो इस योजना की सदस्यता नहीं ले सके हैं, क्योंकि सेवा में शामिल होने के समय उनका मासिक मूल वेतन 15,000 रुपये से अधिक था।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में कोरोना संक्रमण की दर अब सामान्य स्तर पर है। इसलिए मार्च के पहले हफ्ते में क्लास 1 से रांची समेत सात जिलों में भी स्कूल खोले जा सकते हैं। इसके संकेत शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने दी है। सरकार ने कुछ दिन पहले राज्य में स्कूलों को खोलने का फैसला संक्रमण दर का आकलन करने के बाद लिया था। जिसमें आपदा विभाग द्वारा झारखंड के सात जिलों में संक्रमण दर अधिक होने के कारण कक्षा एक से आठ तक की पढ़ाई की अनुमति नहीं दी थी। इन जिलों में रांची, पूर्वी सिंहभूम, बोकारो, चतरा, देवघर, सरायकेला और सिमडेगा शामिल थे। लेकिन इन जिलों में संक्रमण दर 5% से भी अब कम है। इस वजह से संभावना जताई जा रही है कि मार्च महीने से इन जिलों में स्कूल खोले जा सकते हैं। इसे लेकर शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने संकेत दिए हैं। गौरतलब है कि कोरोना महामारी के कारण पूरे देश के साथ-साथ झारखंड में भी शिक्षा व्यवस्था काफी प्रभावित हुई है। पिछले 2 साल से राज्य के शिक्षण संस्थान बंद पड़े थे। फिर धीरे-धीरे कोरोना प्रोटोकॉल के तहत छूट दिए जाने के बाद स्कूल कॉलेज खुलने लगे। लेकिन कोरोना महामारी के विभिन्न लहर के कारण स्कूल कॉलेज प्रभावित होता रहा। लेकिन अब कयास लगाए जा रहे हैं कि धीरे-धीरे तमाम क्षेत्र सामान्य हो रहे है। ऐसे में स्कूली शिक्षा पर भी कम असर पड़ेगा। शिक्षा मंत्री ने दिए संकेत : फिलहाल झारखंड में कोरोना प्रोटोकॉल के तहत लॉकडाउन के कारण राज्य के रांची समेत सात जिलों में क्लास वन से कक्षाएं संचालित नहीं हो रही हैं। इन जिलों में सीनियर बच्चों के लिए शिक्षण संस्थान खोली गई है। अन्य 17 जिलों में क्लास वन से कक्षाएं संचालित हो रही है। जहां जूनियर और सीनियर बच्चे भी स्कूल कॉलेज जा रहे हैं। इधर, शिक्षा मंत्री ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही रांची और अन्य छह जिलों में मार्च महीने से स्कूल खोले जा सकते हैं।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में ग्रामीण विकास योजनाओं की बारीकियों को देखने व राज्य के ग्रामीण मॉडल को समझने, केंद्र तथा राज्य संपोषित ग्रामीण विकास की योजनाओं की धरातल पर क्या स्थिति है, इसको लेकर सरकार की योजनाओं की समीक्षा करने केंद्र से आई सीआरएम की टीम ने ग्रामीण विकास विभाग के पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। केंद्रीय टीम ने झारखंड में मनरेगा, पीएम आवास योजना ग्रामीण, श्यामा प्रसाद रूर्बन मिशन योजना, एनआरएलएम, पीएमजीएसवाई सहित अन्य सभी ग्रामीण विकास की योजनाओं की जानकारी ली और केंद्र सरकार के लक्षित मानकों की जानकारी दी। केंद्र की सीआरएम टीम आगामी 19 फरवरी से 22 फरवरी तक राज्य के विभिन्न जिलों का दौरा कर ग्रामीण विकास योजनाओं के निरीक्षण भी करेगी। रामगढ़, हजारीबाग, बोकारो सहित सात जिलों में जाएगी केंद्रीय टीम, ग्रामीण विकास की योजनाओं की समीक्षा करेगी। संबंधित जिलों के उपायुक्तों, उप विकास आयुक्त के साथ टीम बैठक भी करेगी। ग्राम पंचायत में चल रही योजनाओं का निरीक्षण भी किया जाएगा। केंद्रीय टीम का नेतृत्व तमिलनाडु के पूर्व मुख्य सचिव डॉ राजीव रंजन कर रहे हैं। टीम में नाबार्ड के पूर्व जीएम धरनीधर मिश्रा, रिटायर प्रोफेसर सेंटर फॉर रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर एनआईआरडी एंड पीआर हैदराबाद पोलंकी शिवाराम व एसोसिएट प्रोफेसर हेमंता कुमार उन्मति शामिल हैं। समीक्षा बैठक में सचिव ग्रामीण विकास विभाग डॉ मनीष रंजन, मनरेगा आयुक्त राजेश्वरी बी, सीईओ जेएसएलपीएस नैंसी सहाय, सीईओ जलछाजन विनय कान्त मिश्रा, अपर सचिव ग्रामीण विकास विभाग राम कुमार सिन्हा, अन्य अधिकारी मौजूद थे।
टीम एबीएन, रांची। विपक्ष के भारी दबाव में झारखंड सरकार ने आखिरकार शुक्रवार को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (झारखंड एसएससी) की मैट्रिक तथा इंटरमीडिएट स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में जिलास्तरीय पदों के लिए क्षेत्रीय/जनजातीय भाषाओं की सूची में मगही, अंगिका एवं भोजपुरी को भी शामिल कर लिया। राज्य सरकार ने देर शाम जारी अधिसूचना में कहा है कि पिछले वर्ष 24 दिसंबर को इस संबंध में जारी अधिसूचना को रद्द करते हुए एक नई अधिसूचना जारी की जा रही है और इस अधिसूचना में राज्य सरकार ने विशेषकर पलामू, गढ़वा एवं चतरा जिलों के लिए भाषा परीक्षण की सूची में मगही और भोजपुरी को भी शामिल कर लिया है। अधिसूचना में कहा गया है कि इसके अलावा दुमका तथा संथाल परगना के कई जिलों की भाषा की सूची में अंगिका को भी शामिल कर लिया गया है। पहले राज्य सरकारा द्वारा इस परीक्षा के उद्देश्य से अधिसूचित सूची में इन भाषाओं को स्थान नहीं दिया गया था, जिसे लेकर भोजपुरी और मगही भाषा भाषियों में भारी रोष था। इससे पूर्व बृहस्पतिवार को इस मुद्दे पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर के नेतृत्व में कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिला था और उनके समक्ष इस मामले में अपना पक्ष रखा था।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के 300 थानों में महिला हेल्प डेस्क जल्द खोल दिये जायेंगे, महिला डेस्क को बेहतरीन तरीके से चलाने के लिए झारखंड सीआईडी की टीम निर्भया फंड से 300 स्कूटी की खरीदारी करेगी। सीआईडी ने झारखंड में महिला हेल्प डेस्क को सुचारू रूप से चलाने के लिए 300 स्कूटी की खरीद की प्रक्रिया शुरू कर दी है। स्कूटी केंद्र सरकार के द्वारा मिलने वाले निर्भया फंड से खरीदी जाएगी। स्कूटी की खरीद पर तकरीबन 3.24 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सीआईडी मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार झारखंड के चिह्नित 300 थानों में महिला हेल्प डेस्क खोला जा रहा है। हेल्प डेस्क में महिलाओं से जुड़ी शिकायतों पर तत्काल सुनवाई होगी। महिला डेस्क में महिला एसआई, एएसआई, हवलदार और सिपाहियों की तैनाती होगी ताकि महिलाएं अपनी शिकायत खुलकर महिला पुलिसकर्मियों के समक्ष रख सकें। 300 थानों में महिला हेल्प डेस्क खोलने के लिए लैपटॉप, टैब की खरीद भी की जा रही है। तत्काल कार्रवाई करने की जरूरत पड़ने पर महिला पदाधिकारी मौके पर जा सकें, इसके लिए स्कूटी की खरीद की जा रही है। राजधानी रांची में भी 23 थानों में महिला हेल्प डेस्क खोला जाना है। एनसीआरबी के आंकड़ों के हिसाब से महिला अपराध के मामले में झारखंड 13वें स्थान पर हैं। एनसीआरबी और राज्य पुलिस के आंकड़ों के हिसाब से दुष्कर्म या यौन अपराध के अधिकांश मामलों में परचितों या रिश्तेदारों की भूमिका रही है। कई बार हिचक के कारण महिलाएं अपनी बात थाने तक नहीं रख पाती है। वहीं थानों में पुरूष पुलिसकर्मियों के कारण महिलाओं को बात रखने में सहज अनुभव नहीं होता है। ऐसे में पहले चरण में 300 थानों में महिला हेल्प डेस्क खोला जा रहा है। महिला हेल्प डेस्क में महिला अधिकारी और महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी जहां महिला पुलिसकर्मी महिलाओं की शिकायतें सुनेंगी। इसके बाद उनकी जिम्मेदारी इस संबंध में कार्रवाई करने की होगी। अनुसंधान की दिक्कत न हो इसके लिए ही स्कूटी की खरीद भी महिला हेल्प डेस्क के लिए की जा रही है ताकि तत्काल भी महिला की शिकायत पर कार्रवाई की जा सकें।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड की राजधानी रांची में विकसित हो रही स्मार्ट सिटी में निवेश के लिए सभी जरूरी आधारभूत संरचना तैयार हो गयी है। उसके बाद कॉरपोरेशन निवेशकों के बीच पहुंचा है। अगर कोई निवेशक खुद को बेहतर समझते हैं, तो रांची स्मार्ट सिटी निवेश के लिहाज से उनके लिए सबसे बेहतर डेस्टिनेशन है। 18 फरवरी को रांची स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन की ओर से नई दिल्ली में आयोजित इन्वेस्टर्स मीट 2022 में बोलते हुए रांची स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन के सीईओ अमित कुमार ने ये बात कही। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी की ओर से लैंड ऑक्शन के लिए बना प्लेटफॉर्म पूरी तरह से पारदर्शी, कंटैक्टलेस और सुगम है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार और माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद निवेशकों को लेकर बेहद संवेदनशील, सजग और सकारात्मक हैं। इसलिए दिल्ली के निवेशकों को रांची में निवेश को लेकर अपनी तत्परता दिखानी चाहिए। कार्यक्रम में बोलते हुए रांची के नगर आयुक्त मुकेश कुमार ने भी दिल्ली के निवेशकों से रांची आने, स्मार्ट सिटी को नजदीक से जानने और यहां निवेश के लिए अपील की। उन्होंने कहा कि हमारा शहर और हमारा राज्य वो सभी अर्हता रखता है, जो एक निवेशक लिए जरूरी होता है। उन्होंने बताया कि स्मार्ट सिटी की योजना क्रियान्वयन में रांची अग्रणी शहरों में शामिल है, तो झारखंड इज ऑफ डूइंग बिजनेस में नंबर वन है। निवेशकों के लिए सिंगल विन्डो सिस्टम है, इसलिए यहां निवेश में किसी प्रकार का संकोच नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर आप निवेश करते हैं, तो रांची और झारखंड में आपके लिए पहले से बाजार भी तैयार है। इन्वेस्टर्स मीट में सीईओ द्वारा कही गयी खास बातें : रांची स्मार्ट सिटी में आपके लिए बेहतर अवसर उपलब्ध, शैक्षणिक क्षेत्र को बढ़ावा देने पर है राज्य सरकार का जोर, सीएम चाहते हैं कि जन अकांक्षाओं के अनुरुप बनें स्मार्ट सिटी, रांची में शैक्षणिक हब बनने के सभी गुण मौजूद, शैक्षणिक पलायन रोकने पर है स्मार्ट सिटी का जोर, स्मार्ट सिटी के विकास से जुड़ा है रांची शहर का विकास, व्यावसायिक क्षेत्र के सभी प्लॉट 45 मीटर चौड़ी सड़क पर, निवेशकों के लिए ज्वाइंट वेन्चर का भी है प्रावधान, ई ऑक्शन की प्रक्रिया पूरी तरह से है कॉटैक्टलेस, स्मार्ट सिटी में पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर भी है जोर। इन्वेस्टर्स मीट में नगर आयुक्त द्वारा कही गई महत्वपूर्ण बातें : योजनाओं के क्रियान्वयन में रांची अग्रणी शहरों में, इज ऑफ डूइंग बिजनेस में झारखंड है नंबर वन, लेबर रिफॉर्म्स में भी झारखंड लगातार है नंबर वन, झारखंड है देश का नंबर वन प्रॉमिशिंग स्टेट। मॉडर्न सोसाइटी के साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर भी है जोर। स्मार्ट सिटी रांची के महाप्रबंधक राकेश कुमार नंदक्योलियार ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के जरिए निवेशकों के बीच स्मार्ट सिटी की योजना, कार्य प्रगति और अवसर पर चर्चा की। इसके साथ ही निवेशकों के सवालों का जवाब भी दिया। कार्यक्रम में शारदा ग्लोबल यूनिवर्सिटी के वीसी, प्रो पीसी गुप्ता, जीएनआईओटी ग्रुप के निदेशक डॉ आरके पाठक, आईआईएमटी के डीन अमित रंजन, एसएमडी ग्रुप के सिद्धार्थ कश्यप, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय से डॉ गौरव तिवारी सहित 60 से ज्यादा संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सभी ने स्मार्ट सिटी रांची के मास्टर प्लान और सरकार के सकारात्मक अप्रोच की सराहना की। मौके पर रांची स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन के पीआरओ अमित कुमार भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के बाद विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने नगर आयुक्त और स्मार्ट सिटी के सीईओ से वन टू वन मुलाकात भी की। मौके पर क्रेडाई नेशनल और पीएचडी चैंबर नेशनल के भी कई सदस्य मौजूद थे।
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