टीम एबीएन, रांची। झारखंड विधानसभा का बजट सत्र 25 फरवरी से शुरू है। 28 फरवरी यानी आज सरकार की ओर से सदन में वित्तीय वर्ष 2021-22 का तृतीय अनुपूरक बजट लाई जायेगी। इसके साथ प्रश्नकाल के साथ साथ राज्यपाल के अभिभाषण पर सदन में चर्चा होगी। इससे पहले 25 फरवरी को झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन राज्यपाल रमेश बैस ने अपने 40 मिनट के अभिभाषण से की। इस दौरान सरकार की उपलब्धियां गिनाई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने कृषि ऋण माफी योजना के तहत अब तक 2 लाख से ज्यादा किसानों के खातों में 836.57 करोड़ की राशि ट्रांसफर कर दी है। झारखंड में पहली बार साल 2021 से सीड टोकन के माध्यम से बीज वितरण की शुरुआत की गई है। 2021 में राज्य में कुल 37,047 क्विंटल खरीद और 2122 में अब तक 32,743 क्विंटल रबी बीज का वितरण किया गया है। राजकीय कृषि क्षेत्रों की भूमि में कृषक पाठशाला स्थापित करने और इनकी परिधि में स्थित गांवों को बिरसा ग्राम के रूप में विकसित करने के लिए 61 करोड़ की लागत से समेकित बिरसा ग्राम विकास योजना सह कृषक पाठशाला योजना लागू की गई है। राज्यपाल के अभिभाषण के बाद चर्चा शुरू हुई। लेकिन कुछ देर कार्यवाही चलने के बाद स्थगित कर दिया गया था। सोमवार को सदन में तृतीय अनुपूरक बजट और राज्यपाल के अभिभाषन पर चर्चा की जाएगी। एक मार्च को सदन की कार्यवाही नहीं होगी। 2 मार्च को प्रश्नकाल के अलावे तृतीय अनुपूरक बजट पर चर्चा होगी। 3 मार्च को सदन में 11 बजे बजट पेश किया जाएगा। वहीं, 4 मार्च को सदन में बजट पर वाद विवाद और प्रश्नकाल होगा। 5 और 6 मार्च को शनिवार रविवार होने के कारण सदन की कार्यवाही स्थगित रहेगा। 7 मार्च को मुख्यमंत्री प्रश्नकाल के अलावे सदन में बजट पर चर्चा होगी। 8, 9, 10 और 11 मार्च को प्रश्नकाल और वित्तीय वर्ष 2022-23 के बजट पर सदन में चर्चा होगी। 14 मार्च को प्रश्नकाल से सदन की कार्यवाही शुरू होगी। मुख्यमंत्री प्रश्नकाल और बजट पर सदन में चर्चा होगी। 15 मार्च को प्रश्नकाल और बजट पर सदन में चर्चा होगी। 16 से 20 मार्च तक सदन की कार्यवाही स्थगित रहेगा। 21 मार्च को प्रश्नकाल, मुख्यमंत्री प्रश्नकाल और बजट पर चर्चा सदन में होगी। 22 मार्च को प्रश्नकाल और बजट पर सदन में वाद विवाद होगा। 23 मार्च को बजट पर चर्चा के अलावे सदन में विनियोग विधेयक पेश किया जायेगा।।24 और 25 मार्च को सदन में सरकार की ओर से विधेयक पेश किया जायेगा।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड सरकार ने रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों के लिए रांची में नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है, जहां पर लगातार भारतीय बच्चों और उनके माता-पिता के भी फोन आ रहे हैं। नियंत्रण कक्ष प्रमुख जॉनसन टोपनो ने जानकारी देते हुए बताया कि अभी तक हमारे पास लगभग 70-80 कॉल आ चुके हैं जिसमें ज्यादातर छात्र हैं। वहां पर स्थिति काफी भयावह है। उन्होंने कहा कि हमने 60 से ज्यादा बच्चों को ट्रेस किया है और संख्या लगातार बढ़ रही है। हम लगातार काम कर रहे हैं और बच्चों के आने का पूरा खर्चा सरकार उठाएगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि चोरी करके ले जाई गई 200 से अधिक बहुमूल्य प्रतिमाओं और धरोहरों को पिछले सात सालों में विभिन्न देशों से वापस लाया गया है और यह सफलता भारत के प्रति बदल रहे वैश्विक नजरिए का एक उदाहरण है। आकाशवाणी के अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात की ताजा कड़ी में प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की जब कोई बहुमूल्य धरोहर वापस मिलती है तो स्वाभाविक है कि एक हिन्दुस्तानी के नाते सभी को संतोष मिलना बहुत स्वाभाविक है। मन की बात के प्रमुख अंश : • हजारों वर्षों के देश के इतिहास में एक-से-बढ़कर एक मूर्तियां हमेशा बनती रहीं और हर मूर्ति के इतिहास में तत्कालीन समय का प्रभाव भी नजर आता है। • यह धरोहर भारत की मूर्तिकला का नायाब उदाहरण तो हैं ही, भारतीयों की आस्था से भी जुड़ी थीं। लेकिन, अतीत में बहुत सारी मूर्तियां चोरी होकर भारत से बाहर जाती रहीं। कभी इस देश में, तो कभी उस देश में ये मूर्तियां बेचीं जाती रहीं और उनके लिए वो तो सिर्फ कलाकृति थी। न उनको उसके इतिहास से लेना देना था, न श्रद्धा से लेना देना था। • साल 2013 तक करीब-करीब 13 प्रतिमाएं भारत आयी थीं लेकिन पिछले सात सालों में 200 से ज्यादा बहुमूल्य प्रतिमाओं को, भारत, सफलता के साथ वापस ला चुका है। • तमिलनाडु के वेल्लूर से चोरी हुई 600 से 700 साल पुरानी भगवान आंजनेय्यर की मूर्ति इसी महीने ऑस्ट्रेलिया से प्राप्त हुई है। इसी प्रकार बिहार के गया के एक मंदिर से चोरी हुई अवलोकितेश्वर पद्मपाणि की हजार साल से भी ज्यादा पुरानी मूर्ति इटली से लाई गई है। • जिन देशों में ये मूर्तियां चोरी करके ले जाई गईं थीं, अब उन्हें भी लगने लगा कि भारत के साथ रिश्तों में "सॉफ्ट पावर" का जो कूटनीतिक चैनल होता है, उसमें इसका भी बहुत बड़ा महत्व हो सकता है। • अमेरिका, ब्रिटेन, हॉलैंड, फ्रांस, कनाडा, जर्मनी, सिंगापुर, ऐसे कितने ही देशों ने भारत की इस भावना को समझा है और मूर्तियां वापस लाने में हमारी मदद की है। • अभी आपने कुछ दिन पहले देखा होगा, काशी से चोरी हुई मां अन्नपूर्णा देवी की प्रतिमा भी वापस लाई गई थी। यह भारत के प्रति बदल रहे वैश्विक नजरिये का ही उदाहरण है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूक्रेन में फंसे सैकड़ों भारतीय नागरिकों को वापस लाने के लिए संचालित की जा रही एयर इंडिया की उड़ानों पर सात-आठ लाख रुपए प्रति घंटे की दर से लागत आ रही है। एयर इंडिया रूस के हमले का सामना कर रहे यूक्रेन में फंसे भारतीय विद्यार्थियों एवं अन्य नागरिकों को स्वदेश लाने के लिए बड़े आकार वाले ड्रीमलाइनर विमानों का इस्तेमाल कर रही है। युद्धग्रस्त यूक्रेन के पड़ोसी देशों रोमानिया और हंगरी के हवाईअड्डों पर ये विमान उतर रहे हैं और वहां पहुंचे भारतीयों को लेकर लौट रहे हैं। अभी तक 400 से ज्यादा भारतीय नागरिकों को इस अभियान के तहत वापस लाया जा चुका है। इन उड़ानों का संचालन भारत सरकार के निर्देश पर हो रहा है। प्रति घंटा करीब सात से आठ लाख रुपए खर्च हो रहे : एयर इंडिया के एक अधिकारी ने बताया कि इस अभियान में ड्रीमलाइनर विमान की उड़ान पर प्रति घंटा करीब सात से आठ लाख रुपए खर्च हो रहे हैं। अधिकारी ने कहा कि एक बचाव अभियान में आने वाली कुल लागत इस पर निर्भर करेगी कि विमान कहां पर जा रहा है और कितनी दूरी का सफर तय कर रहा है। इस हिसाब से एक अभियान में भारत से यूक्रेन के करीब जाने और वहां से भारतीय नागरिकों को लेकर लौटने पर 1.10 करोड़ रुपए से अधिक खर्च हो रहे हैं। चालक दल से लेकर ईधन पर खर्च : कुल लागत में विमान ईंधन, चालक दल के सदस्यों का पारिश्रमिक, नैविगेशन, लैंडिंग एवं पार्किंग शुल्क शामिल हैं। इस सूत्र ने नाम सामने न आने की शर्त पर कहा कि अभियान में लगने वाले लंबे समय को देखते हुए चालक एवं सहयोगी स्टाफ के दो समूह रखे जाते हैं। पहला समूह विमान को लेकर गंतव्य तक जाता है और फिर वापसी की उड़ान में दूसरा समूह कमान संभाल लेता है। फिलहाल, एयर इंडिया इस बचाव अभियान के तहत रोमानिया के शहर बुखारेस्ट और हंगरी के बुडापेस्ट के लिए उड़ानें संचालित कर रही है। इन दोनों ही गंतव्यों तक एयरलाइन की अधिसूचित हवाई सेवाएं नहीं हैं। उड़ानों को ट्रैक करने वाली वेबसाइट फ्लाइटअवेयर के मुताबिक, बुखारेस्ट से मुंबई आने वाली उड़ान करीब छह घंटे की थी। इसी तरह बुखारेस्ट से दिल्ली का सफर भी छह घंटे लंबा रहा। हालांकि, आने-जाने में लगने वाला समय बढ़ने पर बचाव अभियान की लागत भी बढ़ जाएगी। कई राज्य सरकारों ने खर्च उठाने की बात कही : हालांकि, सरकार यूक्रेन में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए चलाए जा रहे इस बचाव अभियान का कोई शुल्क नहीं ले रही है। कुछ राज्य सरकारों ने भी घोषणा की है कि वे अपने राज्यों के निवासियों को यूक्रेन से लाने पर लगने वाले खर्च का बोझ उठाएंगी। सूत्र ने कहा कि बचाव अभियान पूरा हो जाने के बाद इसपर आई पूरी लागत की गणना की जाएगी और वह सरकार को पूरा बिल भुगतान के लिए भेजेगी। इस अभियान में इस्तेमाल हो रहे ड्रीमलाइनर विमान में 250 से अधिक सीटें होती हैं। ड्रीमलाइनर के एक पायलट के मुताबिक इसकी उड़ान पर प्रति घंटे पांच टन विमान ईंधन की खपत होती है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर यूक्रेन में फंसे झारखंडियों वापस लाने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री ने गृह मंत्री को यूक्रेन में फंसे झारखंडियों की स्थिति से अवगत कराया। पत्र के साथ यूक्रेन में फंसे झारखंडियों की सूची भी हेमंत सोरेन ने अमित शाह को भेजी है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि यूक्रेन में बने नये गतिरोध के बीच अपने निजी खर्च से झारखंड वापस आने वाले राज्यवासियों के टिकट की राशि राज्य सरकार रिम्बर्स (प्रतिपूर्ति) करेगी। मुख्यमंत्री ने शनिवार को कहा कि राज्य सरकार, केंद्र सरकार के साथ मिलकर सभी झारखंडवासियों को हरसंभव मदद पहुंचाने का काम कर रही है।
एबीएन डेस्क। प्रखंड मुख्यालय स्थित सीएचसी में रविवार को पल्स पोलियो अभियान प्रमुख महतो भगत, उपप्रमुख डीकेआर, मुखिया सुशांति भगत, बीडीओ डॉ प्रवीण कुमार और सीओ सुमंत तिर्की ने संयुक्त रूप से बच्चों को पोलियोरोधी दवा पिलाकर किया। प्रमुख महतो भगत ने कहा कि सभी बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाना जरूरी है। यदि एक भी बच्चा छूट जाता है तो सुरक्षा चक्र टूट जाता है। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ सुमित्रा कुमारी ने बताया कि शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों को शत-प्रतिशत टीकाकरण करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए प्रखंड के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों, बाजार- हाट, बस स्टैंड और सभी पीएचसी केंद्रों सहित 239 केंद्रों में पल्स पोलियो का टीकाकरण किया जा रहा है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड की नई खेल नीति को लेकर कवायद तेज कर दी गई है। खेल विभाग ने विभिन्न विभागों से नई खेल नीति के ड्राफ्ट पर सुझाव मांगे हैं। सुझावों को शामिल करने के बाद नई खेल नीति पर कैबिनेट की स्वीकृति ली जाएगी। इसके बाद खेलकूद के लिये बेहतर और प्रतियोगी वातावरण बनाने के लिये नई खेल नीति लागू की जाएगी। राज्य में खेल को बढ़ावा देने, खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने और उनके सम्मानजनक जीवन और सुरक्षित भविष्य को ध्यान में रखते नई खेल नीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। दिव्यांग खिलाड़ियों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। नई खेल नीति में खिलाड़ियों को पेंशन, जिला विकास स्पोर्ट्स क्लब बनाने का प्रावधान किया जाएगा। हर पंचायत में क्लब, पंचायतों में खेल को प्रोत्साहित करने के लिए 25 हजार रुपये आवंटित करने को लेकर भी तैयारी की जा रही है। इससे पंचायत स्तर पर खेलों के आयोजन में सहूलियत होगी। नई खेल नीति के माध्यम से राज्य में पंचायत स्तर से राज्य स्तर तक खेलकूद के लिए वातावरण तैयार किया जाएगा। खिलाड़ियों को जरूरी संसाधन-सुविधाएं और समान अवसर दिया जाएगा। नई नीति के माध्यम से खेल संस्कृति को बढ़ावा, खेलकूद क्षमता का विस्तार, जीवन कौशल शिक्षा एवं प्रोत्साहन, उद्योग जगत को खेल के क्षेत्र में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करने के साथ खेल संरचना का विकास किया जाएगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूक्रेन में रूस की सैन्य कार्रवाई के बाद उपजी स्थिति को देख भारतीय वायुसेना ब्रिटेन में अगले महीने होने वाले कई देशों के "कोबरा वारियर अभ्यास" में हिस्सा नहीं लेगी। यह अभ्यास ब्रिटेन में 06 से 27 मार्च तक होना था और इसमें स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान अन्य देशों के विमानों के साथ भारतीय वायु सेना का प्रतिनिधित्व करने वाला था। वायुसेना ने शनिवार को एक ट्वीट कर कहा कि हाल के घटनाक्रम को देखते हुए वह इस अभ्यास में हिस्सा नहीं ले रही है। वायुसेना ने कहा, हाल की घटनाओं को देखते हुए वायु सेना ने निर्णय लिया है कि वह ब्रिटेन में होने वाले "कोबरा वारियर अभ्यास" में हिस्सा लेने के लिए अपने विमान नहीं भेजेगी। पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार अभ्यास में हिस्सा लेने के लिए पांच तेजस लड़ाकू विमानों को ब्रिटेन जाना था। इस अभ्यास में तेजस को अपनी करतबबाजी तथा मारक क्षमता का अन्य देशों की वायु सेना के समक्ष प्रदर्शन करने का अवसर मिला था। उल्लेखनीय है कि यूक्रेन में रूस की सैन्य कारर्वाई से दुनिया भर में सामान्य स्थिति प्रभावित हुई है तथा अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है।
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