राज काज

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Published / 2022-03-29 15:18:51
कृषि क्लस्टर के रूप में विकसित होंगे झारखंड के 100 गांव

टीम एबीएन, रांची। झारखंड के किसान आत्मनिर्भर बनें इस दिशा में कृषि विभाग लगातार कोशिश कर रही है। इसी कड़ी में कृषि विभाग ने प्रदान नाम की संस्था के साथ एमओयू किया है। झारखंड के कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा की कृषि योजनाओं के कार्यान्वयन में किसी भी प्रकार की त्रुटि ना रहे और उसकी क्लोज मॉनिटरिंग की जा सके इसके लिए प्रदान नाम की संस्था के साथ विभाग ने एक एमओयू किया है कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में मिसिंग ऐप को पूरी तरह से धरातल पर उतारने के लिए रिसोर्स पर्सन का सहयोग लेने के लिए प्रदान के साथ एमओयू किया गया है। प्रदान संस्था कृषि के क्षेत्र में अपनी निशुल्क सेवाएं कृषि विभाग को देगा। इससे किसी भी प्रकार के राजस्व का अतिरिक्त बोझ सरकार पर नहीं आएगा। बादल पत्रलेख ने बताया कि प्रदान संस्था योजनाओं को सफलीभूत बनाने के लिए क्षेत्र के मौसम के अनुसार योजनाएं तैयार कर विभाग को सुझाव देगा। प्रदान संस्था अन्य राज्यों में कृषि पद्धति का आकलन कर महत्वपूर्ण सुझाव भी प्रदान संस्थान द्वारा दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि कृषि कलेक्टर के रूप में पूरे राज्य में 100 गांव को मॉडल विलेज के रूप में विकसित किया जाएगा। प्रदान संस्था मुख्य रूप से एफपीओ को क्रियान्वित करेगा साथ ही कृषि उत्पाद को बाजार उपलब्ध कराएगा एवं कृषि से जुड़े जागरुकता अभियान में अपनी भूमिका निभाएगा। प्रदान संस्था के पदाधिकारी बिंजू इब्राहिम ने बताया कि किसानों के पास प्रभावशाली तरीके से पहुंचना ही लक्ष्य है छोटी-छोटी सिविल सोसाइटी संगठन मिलकर सरकार के लिए काम करते हैं। ऐसे आगेर्नाईजेशन को जोड़कर ही कृषि के क्षेत्र को क्लस्टर का रूप देने का प्रयास किया जाएगा। जल प्रबंधन पशुधन सहित कई योजनाओं पर काम करेंगे। कृषि के क्षेत्र में निवेशकों लाया जाएगा।

Published / 2022-03-29 13:13:04
झारखंड में नई खेल नीति : जमीन पर उतारने की कोशिश में हेमंत सरकार

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। खेल के क्षेत्र में भी यह राज्य बेहतर है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यहां के कई खिलाड़ियों ने अपना दबदबा कायम रखा है। हालांकि खेल नीति नहीं होने के कारण झारखंड के खिलाड़ियों को कई समस्याओं से जूझना पड़ता है। हेमंत सरकार ने नई खेल नीति बनाने को लेकर योजना तैयार की है। जल्द ही इसे धरातल पर उतारने की बात कही जा रही है।किसी भी राज्य के खेल और खिलाड़ियों के विकास के लिए एक नीति जरूरी है। झारखंड में एक लंबे समय से खेल नीति पर सिर्फ चर्चा ही हो रही है। इस बीच सूबे के हेमंत सरकार ने नई खेल नीति बनाने को लेकर पहल की है। अब तक इस नीति को धरातल पर लाने के लिए कई पहलुओं पर चर्चा हुई है। वहीं, राज्य सरकार के खेल विभाग मुख्यमंत्री के निर्देश पर एक ड्राफ्ट तैयार कर इसे कैबिनेट से पारित करने के तैयारी में है। जानकारी के मुताबिक राज्य की खेल नीति बनकर तैयार है। मुख्यमंत्री ने भी सहमति दे दी है। जल्द ही इसे धरातल पर उतार लिया जाएगा। खेल मंत्री हफीजुल हसन अंसारी ने जानकारी देते हुए कहा है कि खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों का डेटाबेस भी तैयार कर लिया गया है। उनके योग्यता के अनुसार उन्हें नियुक्त भी किया जाएगा। खेल नीति में ऐसे खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों का पूरा डाटाबेस समाहित होगा। झारखंड की नई खेल नीति को लेकर विभिन्न विभागों से भी सुझाव लेकर ड्राफ्ट तैयार हुआ है। खेलकूद के लिए बेहतर और प्रतियोगी माहौल बनाने के लिए राज्य सरकार नई खेल नीति को तैयार किया है। इसमें खिलाड़ियों को सम्मानजनक जीवन और सुरक्षित भविष्य तैयार करने की बात भी कही गई है। राज्य में खेल को बढ़ावा देने खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने और उनके सम्मानजनक जीवन और सुरक्षित भविष्य को ध्यान में रखते हुए ही नई खेल नीति को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसमें दिव्यांग खिलाड़ियों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। नई खेल नीति में खिलाड़ियों को पेंशन जिला विकास स्पोर्ट्स क्लब बनाने का प्रावधान भी बनाया गया है। हर पंचायत में क्लब पंचायत में खेल को प्रोत्साहित करने के लिए फंड की भी व्यवस्था होगी। इससे पंचायत स्तर पर खेलों के आयोजन में सहूलियत होगी। खेलकूद के लिए वातावरण तैयार करने का पहल है। नई खेल नीति के माध्यम से राज्य में प्रखंड से लेकर पंचायत स्तर पर खेलकूद का एक प्लेटफार्म तैयार किया जा रहा है। खिलाड़ियों को जरूरी संसाधन सुविधाएं और समान अवसर मिले इस पर जोर है। खेल नीति के माध्यम से खेल संस्कृति को बढ़ावा खेलकूद क्षमता का विस्तार जीवन कौशल शिक्षा उद्योग जगत को खेल के क्षेत्र में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करने के साथ-साथ खेल संरचना का विकास और शिक्षा के साथ खेल जगत का तालमेल कैसे बने इस पर भी जोर दिया जा रहा है। विभिन्न खेल संघ और खेल प्रशासकों ने नई खेल नीति का अध्ययन भी किया है। इनकी मानें तो यह खेल नीति अगर राज्य में पूरी तरह से लागू कर दिया जाए, तो इस राज्य के लिए यह नीति मील का पत्थर साबित होगा। खिलाड़ियों के साथ-साथ अन्य क्षेत्र के खेल से जुड़े लोगों को भी इस खेल नीति से फायदा मिलेगा। जल्द ही यह खेल नीति धरातल पर आए इसे लेकर खेल संघों ने भी राज्य सरकार से अपील किया है। झारखंड गठन के बाद ऐसे कई नीतियां हैं जो इस राज्य को जरूरी है। लेकिन अब तक उन क्षेत्रों में काम नहीं किया गया है। हालांकि अब कयास लगाया जा रहा है कि इस राज्य को नई खेल नीति जल्द ही मिलेगी। अब देखने वाली बात यह होगी कि जो बातें इस नई खेल नीति को लेकर कहीं जा रही है उन बातों पर कितना अमल किया जाता है।

Published / 2022-03-29 13:12:20
रांची : एसएसपी कार्यालय घूसखोर क्लर्क गिरफ्तार

टीम एबीएन, रांची। राजधानी के एसएसपी कार्यालय में कार्यरत लिपिक (क्लर्क) को एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया। एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने यह कार्रवाई एसएसपी के कचहरी स्थित कार्यालय में की है। क्लर्क दीपक कुमार, शैलेंद्र कुमार पांडे नाम के एक व्यक्ति से 5 हजार रुपये रिश्वत की डिमांड कर रहा था। जिसकी शिकायत एसीबी से पहले ही कर दी गई थी। मामले में उचित सबूत मिलने के बाद एसीबी ने यह कार्रवाई की है। फिलहाल गिरफ्तार क्लर्क दीपक कुमार से एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम पूछताछ कर रही है बता दें कि रांची जिला बल में पदस्थापित सब इंस्पेक्टर शैलेंद्र कुमार पांडे 31 मार्च को रिटायर होने वाले हैं। शैलेन्द्र पांडे अपने पेंशन और टीए संबंधी कार्य को लेकर लगातार एसएसपी कार्यालय जा रहे थे। आरोप है कि एसएसपी कार्यालय के लिपिक दीपक उनसे इस कार्य के लिए पैसे की डिमांड कर रहा था। मामले को लेकर शैलेन्द्र कुमार पांडे द्वारा कई बार दीपक को समझाया भी किया, लेकिन वह नहीं माना। तंग आकर सब इंस्पेक्टर ने एंटी करप्शन ब्यूरो में जाकर अपनी शिकायत दर्ज करवा दी।

Published / 2022-03-27 12:27:45
झारखंड : पांच अप्रैल से चलेगा प्राइमरी में दाखिले का अभियान

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में पांच अप्रैल से स्कूल चले चलाएं अभियान चलेगा। यह अभियान चार मई तक चलेगा। इसमें प्राथमिक स्कूलों के बच्चों का शत प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित किया जाएगा। कोरोना की वजह से दो साल बाद बच्चे स्कूल जा पा रहे हैं। ऐसे में उनके लर्निंग लॉस को कम करने के लिए समुदाय को भी संवेदनशील बनाएंगे। बच्चों के माता-पिता, अभिभावक, शिक्षक और विद्यालय प्रबंध समिति के आपसी समन्वय से इसे पूरा किया जाएगा। इसके लिए झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद की राज्य परियोजना निदेशक किरण कुमारी पासी ने सभी जिलों को निर्देश दे दिया है। किरण कुमारी पासी ने सभी आरजेडीई, डीईओ और डीएसई को निर्देश दिया है कि जिला स्तर पर जनप्रतिनिधि, सभी विभागों के जिला स्तरीय पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, क्षेत्र शिक्षा पदाधिकारी और प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी, बीआरपी-सीआरपी, गैर सरकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि ई विद्यावाहिनी के माध्यम से बच्चों के नामांकन और उनकी उपस्थिति की समीक्षा करेंगे। जिला स्तर पर प्राथमिक विद्यालयों का मध्य विद्यालयों, मध्य विद्यालयों का उच्च विद्यालयों के साथ मैपिंग करने की कार्रवाई की जाए, ताकि पांचवीं के बच्चों का छठी में, आठवीं के बच्चों का नौवीं में और 10वीं के बच्चों को 11वीं में छीजन न हो। आउट ऑफ स्कूल के बच्चों, अप्रवासी परिवार के बच्चों, विशेष आवश्यकता वाले बच्चे, कोरोना प्रभावित बच्चों को डहर एप के माध्यम से चिह्नित कर उनका नामांकन सुनिश्चित कराने की कार्रवाई करेंगे। आंगनबाड़ी केंद्रों और नजदीक के स्कूलों के बीच विभागीय समन्वय स्थापित करने की पहल की जाए। निजी विद्यालयों के प्रारंभिक कक्षाओं में भी जरूरतमंद बच्चों का शत प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित की जाए। सभी स्कूलों का आवश्यकतानुसार रंग-रोगन, क्लास रूम की मरम्मत, शौचालय और पेयजल का समुचित व्यवस्था की जाएगी। प्रखंड स्तर पर भी यह काम किए जाएंगे। इसके अलावा जिला स्तर पर एक कोषांग का गठन किया जाए और हर दिन बच्चों की उपस्थिति व उनकी गतिविधि की रिपोर्ट तैयार की जाए। डहर ऐप के माध्यम से चिन्हित कर नामांकन सुनिश्चित कराने की कार्रवाई की योजना और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के नामांकन और उनकी उपस्थिति की स्थिति बतानी होगी।

Published / 2022-03-26 17:46:35
दो साल बाद कल से नियमित उड़ान भरेंगी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें

एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोविड-19 महामारी की रोकथाम के लिए लगी पाबंदियों की वजह से दो साल तक बंद रहने के बाद भारत से नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का परिचालन रविवार से दोबारा शुरू होने जा रहा है। दो साल बाद नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के परिचालन के लिए हवाईअड्डों और विमानन कंपनियों ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। भारतीय एयरलाइंस के अलावा एमिरेट्स और वर्जिन अटलांटिक जैसी विदेशी एयरलाइंस भी नियमित उड़ानों की बहाली को लेकर खासी रोमांचित हैं। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में खासी तेजी आएगी : राजधानी दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे (आईजीआईए) को उम्मीद है कि अप्रैल के पहले हफ्ते से नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में खासी तेजी आएगी। महामारी से बुरी तरह प्रभावित रहा विमानन उद्योग धीरे-धीरे पटरी पर लौटने लगा है और नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू होने से उसमें नई जान आने की संभावना है। भारत में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का परिचालन 23 मार्च 2020 से ही बंद है। समय के साथ पाबंदी बढ़ती चली गई : कोविड महामारी की पहली लहर आने के साथ ही इस पर रोक लगी थी और समय के साथ वह पाबंदी बढ़ती चली गई। लेकिन अब यह रोक खत्म होने का वक्त आ गया है। रविवार से भारत से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें नियमित तौर पर शुरू हो जाएंगी। हालांकि कुछ देशों के साथ बायो-बबल व्यवस्था के तहत कोरोना काल में भी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें संचालित होती रही हैं लेकिन वह एक सीमित व्यवस्था रही है।नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने गत आठ मार्च को ऐलान कर दिया था कि 27 मार्च 2022 से नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू हो जाएंगी। इसके साथ ही कोविड रोकथाम संबंधी प्रावधानों को भी संशोधित किया गया है। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के मुख्य वाणिज्यिक अधिकारी विली बोल्टर ने शनिवार को एक बयान में कहा कि इंडिगो अंतरराष्ट्रीय परिचालन को कोविड-पूर्व स्तर पर ले जाने को उत्सुक है लेकिन यह अन्य देशों के आगमन संबंधी नियमों पर भी निर्भर करेगा। देश के सबसे बड़े हवाईअड्डे आईजीआईए का परिचालन करने वाली कंपनी डीआईएएल ने उम्मीद जताई है कि यहां से 60 से अधिक अंतरराष्ट्रीय उड़ानें संचालित होने लगेंगी।

Published / 2022-03-26 17:36:12
पीएम अन्न योजना : 80 करोड़ लोगों को 6 महीने तक मिलता रहेगा फ्री राशन

एबीएन सेंट्रल डेस्क। सरकार ने मुफ्त खाद्यान्न वितरण कार्यक्रम प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएआई) को इस साल सितंबर तक बढ़ाने का फैसला किया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल की शनिवार को हुई बैठक में यह फैसला लिया गया। इस बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री पीयूष गोयल ने एक ट्वीट में इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि पीएमजीकेएवाई को छह महीने बढ़ाया जा रहा है। इस तरह इस कार्यक्रम की अवधि बढ़कर सितंबर 2022 हो गई है। पहले यह योजना मार्च 2022 के अंत में खत्म होने वाली थी। गोयल ने कहा कि कोविड-19 महामारी का असर काफी हद तक खत्म हो जाने के बावजूद मुफ्त राशन वितरण कार्यक्रम की अवधि बढ़ाने का यह फैसला गरीबों के प्रति प्रधानमंत्री की संवेदनशीलता को दर्शाता है। इस कार्यक्रम के तहत सरकार गरीब परिवारों को 1,003 लाख टन अनाज का वितरण करेगी जिस पर 3.4 लाख करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। इससे पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शनिवार को मंत्रिमंडल की पहली बैठक में कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू की गई मुफ्त राशन योजना को तीन महीने तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया। मार्च 2022 तक के लिए लागू की गई योजना अब जून तक जारी रहेगी। इसमें 15 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन देने का प्रावधान है। इस योजना के तहत अगले तीन और माह तक खाद्यान्न योजना के तहत प्रदेश के 15 करोड़ लोगों को दाल, नमक, चीनी के साथ खाद्यान्न मिलता रहेगा। माना जा रहा है कि इस बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत में मुफ्त राशन की इस योजना का जबरदस्त प्रभाव रहा है। शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण के बाद योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार की पहली कैबिनेट बैठक शनिवार सुबह यहां लोकभवन में हुई। मुख्यमंत्री ने कहा, कोरोना वायरस महामारी के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के हर नागरिक के लिए प्रधानमंत्री अन्न योजना प्रारंभ की थी। इस योजना के अन्तर्गत देश की 80 करोड़ जनता को इसका लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा, मार्च-अप्रैल 2020 से लेकर मार्च 2022 तक इस योजना का लाभ लोगों को प्राप्त हुआ है। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी राज्य के अंत्योदय के लाभार्थी और पात्र गृहस्थी कार्ड धारक परिवारों सहित 15 करोड़ लाभार्थियों के लिए यह योजना अपनी ओर से अप्रैल 2020 से आरंभ की थी। मुख्यमंत्री ने कहा, यह योजना मार्च 2022 तक थी। इसलिए मंत्रिमंडल ने शनिवार को निर्णय लिया कि अगले तीन महीनों तक प्रदेश के 15 करोड़ लोगों के लिए यह योजना जारी रहेगी। डबल इंजन की सरकार पहले भी जनता के साथ खड़ी रही। महामारी के दौरान निशुल्क इलाज, नि:शुल्क टीका उपलब्ध कराया गया। राशन वितरण की पारदर्शी व्यवस्था पर जोर देते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि 80 हजार उचित दर की दुकानों पर ई-पॉश मशीनें लगी हैं, इससे सही लाभार्थी तक राशन वितरण संभव हो रहा है। गौरतलब है कि अप्रैल 2020 से केंद्र सरकार के अलावा राज्य सरकार अपने संसाधनों से राज्य के 15 करोड़ गरीब लोगों को मुफ्त राशन उपलब्ध करा रही है। योजना के तहत अंत्योदय कार्ड धारकों को राज्य सरकार द्वारा 35 किलोग्राम खाद्यान्न दिया जाता है, जबकि पात्र परिवार को प्रति यूनिट पांच किलोग्राम खाद्यान्न मिल रहा है। इसके अलावा दिसंबर 2021 से राज्य सरकार खाद्यान्न के साथ-साथ एक लीटर रिफाइंड तेल, एक किलो दाल और एक किलो नमक भी दे रही है। जबकि, अंत्योदय श्रेणी के परिवारों को एक किलो चीनी भी मुहैया कराई जा रही है। संवाददाता सम्मेलन में योगी आदित्यनाथ के साथ उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, बृजेश पाठक तथा कैबिनेट मंत्री सुरेश कुमार खन्ना एवं स्वतंत्र देव सिंह भी मौजूद थे।

Published / 2022-03-26 07:48:09
जांच के नाम पर रिम्स को हर महीने लग रही करीब 50 लाख की चपत

टीम एबीएन, रांची। झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में निजी जांच एजेंसी को लाभ पहुंचाने का खेल चल रहा है। हैरत की बात यह है कि रिम्स में चल रहे इस खेल में कमोबेश रिम्स के सभी डॉक्टर शामिल हैं। जांच के नाम पर रिम्स को हर महीने करीब 50 लाख का चूना लगाया जा रहा है। रिम्स के जनसम्पर्क अधिकारी डॉ दीपेश कुमार सिन्हा ने भी रिम्स को होने वाले घाटे की बात को स्वीकार किया है और इस पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। दरअसल, रिम्स में इलाज के लिए आनेवाले मरीजों की सुविधा के लिए पूर्ववर्ती सरकार ने मेडाल नाम की निजी जांच एजेंसी के साथ एक करार किया था। जिसके तहत वैसे किसी भी पैथोलॉजिकल जांच जिसकी सुविधा रिम्स में नहीं है, उसके लिए मरीज मेडाल में जांच करवा सकते हैं। रिम्स की तरह मेडाल में भी सामान्य मरीजों को निर्धारित कम दर पर जांच और वैसे मरीज जिसकी पात्रता नि:शुल्क जांच की है उसके लिए मेडाल में निशुल्क जांच की बात कही गयी। MOU में यह भी स्पष्ट था कि निशुल्क जांच के बदले मेडाल को झारखंड सरकार भुगतान करेगी। इसी बात का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। निजी जांच एजेंसी मेडाल को लाभ पहुंचाने के लिए डॉक्टर्स नि:शुल्क इलाज की पात्रता रखने वाले गरीब मरीजों की कोई भी जांच कराते हैं, उस पर्चे में मेडाल लिख देते हैं। ऐसे में मरीज या उनके परिजन मेडाल में अपना सैम्पल दे देते हैं। मरीजों का जांच तो नि:शुल्क हो जाता है लेकिन उसके बदले रिम्स को मेडाल को तय दर से भुगतान करना पड़ता है। ये राशि कोई छोटी मोटी राशि नहीं होती बल्कि हर महीने लगभग 50 लाख की होती है। इतनी बड़ी राशि को कम किया जा सकता था जब MOU के अनुसार सिर्फ वहीं सैम्पल जांच मेडाल से कराया जाए जिसकी जांच की व्यवस्था रिम्स के सेंट्रल पैथोलॉजी सेंटर में न हो, लेकिन खून में हीमोग्लोबिन तक की जांच मेडाल में करायी जाती है। क्या कहते हैं रिम्स के जनसम्पर्क अधिकारी : रिम्स को हर महीने करीब 50 लाख की राशि के नुकसान बेवजह होने की बात स्वीकारते हुए जनसम्पर्क अधिकारी डॉ दीपेश कुमार सिन्हा कहते हैं कि MOU में स्पष्ट है कि सिर्फ वहीं जांच मेडाल में कराया जाए, जिसकी सुविधा रिम्स में नहीं है। ऐसे में जो डॉक्टरों के द्वारा सामान्य और रिम्स के सेंट्रल पैथोलॉजी में उपलब्ध जांच को भी मेडाल से करवाने की सलाह पर्चे पर लिख देना गलत है। रिम्स पीआरओ ने कहा कि जो भी डॉक्टर इस तरह की हरकत के लिए दोषी पाए जाएंगे उनके प्रैक्टिस पर रोक लगाई जाएगी।

Published / 2022-03-26 07:42:44
सीएम ने गृह सचिव को दिया आदेश- धनबाद में पार्वती मौत मामले की जांच करेगी सीआईडी

टीम एबीएन, रांची। बीसीसीएल पीबी एरिया क्षेत्रीय कार्यालय के बाथरूम में 21 मार्च को मिले पार्वती नामक युवती के शव पर जारी सियासत के बीच सीएम हेमंत सोरेन ने सीआईडी जांच के आदेश दिए है। सीएम के आदेश के बाद अब पूरे मामले की जांच सीआईडी करेगी। धनबाद विधायक राज सिन्हा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलकर मामले की न्यायिक जांच की मांग की थी। जिसके बाद मुख्यमंत्री ने सीआइडी जांच कराने का निर्देश गृह सचिव राजीव अरुण एक्का को दिया है। पिछले 21 मार्च को पीबी एरिया के जीएम कार्यालय में पार्वती कुमारी नामक युवती का शव बाथरूम में फांसी के फंदे से लटका हुआ पाया गया था। जिसके बाद परिजनों ने बीसीसीएल पीबी एरिया के क्षेत्रीय कार्यालय के जीएम पीके मिश्रा, कार्मिक प्रबंधक प्रभात कुमार की गिरफ्तारी की मांग को लेकर पिछले 5 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। परिजनों के अनुसार पार्वती की मौत के लिए दोनों अधिकारी जिम्मेवार हैं और पुलिस उन पर कार्रवाई नहीं कर रही है। ग्रामीणों ने दोनों अधिकारियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर उग्र आंदोलन की भी चेतावनी दी है। क्या है पूरा मामला : आपको बता दें कि 21 मार्च को बलिहारी गांव के रहने वाले फकीर चंद की पुत्री पार्वती का शव पीबी एरिया स्थित जीएम कार्यालय के महिला शौचालय में फंदे से झूलता पाया गया था। इसके बाद मामले की जानकारी मृतका के परिजन और पुलिस को दी गई थी। पार्वती के परिजनों ने पार्वती की हत्या का आरोप पीबी एरिया के महाप्रबंधक पीके मिश्रा और कार्मिक प्रबंधक प्रभात कुमार पर लगाया था। दोनों के खिलाफ हत्या का लिखित शिकायत दर्ज कराने के बाद भी पुलिस के द्वारा अब तक आरोपियों को गिरफ्तार नहीं करने के विरोध में ग्रामीण शव के साथ 4 दिनों से धरने पर बैठे हैं। वहीं फिलहाल इस मामले में एसआईटी की टीम गठित कर पूरे मामले की जांच कर रही है।

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