एबीएन सेंट्रल डेस्क। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की तुर्कमेनिस्तान यात्रा के दौरान भारत और तुर्कमेनिस्तान ने चार परियोजनाओं पर हस्ताक्षर किये हैं। राष्ट्रपति कोविंद और तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति एस बेर्डिमुहमडोव की मौजूदगी में तुर्कमेनिस्तान की राजधानी में शनिवार को इन समझौतों पर हस्ताक्षर किये गये। इन समझौतों में भारत की वित्तीय आसूचना एकक और तुर्कमेनिस्तान के वित्त तथा अर्थव्यवस्था मंत्रालय के बीच समझौता ज्ञापन, तुर्कमेनिस्तान और भारत के बीच आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग पर समझौता ज्ञापन और दोनों देशों के बीच संस्कृति तथा कला के क्षेत्र में वर्ष 2022 से 2025 तक के लिए समझौता ज्ञापन शामिल है। इसके अलावा दोनों देशों के खेल तथा युवा मामलों के मंत्रालय के बीच सहयोग को लेकर भी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये गये हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और ऑस्ट्रेलिया के व्यापार, पर्यटन एवं निवेश मंत्री डैन टेहान ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन की मौजूदगी में भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (इंडऑस एकता) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते से द्विपक्षीय व्यापार पांच वर्ष में बढ़कर 45 से 50 अरब अमेरिकी डॉलर के बराबर पहुंचने की उम्मीद है, जो इस समय 27 अरब अमेरिकी डॉलर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि दोनों देश बहुत कम समय में इस समझौते पर पहुंचे हैं, जो दोनों देशों के बीच परस्पर विश्वास का सबूत है। न्होंने कहा कि यह समझौता वैश्विक आपूर्ति शृंखला को भरोसेमंद बनाने और भारत-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता में सहायक होगा। उन्होंने दोनों मंत्रियों और वार्ता में शामिल दोनों देशों के अधिकारियों की टीम को बधाई दी और कहा कि वह (श्री मोदी) इससे बहुत खुश हैं। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मॉरिसन ने कहा कि यह समझौत (इंडऑस एकता) दोनों देशों के बीच निरंतर प्रगाढ़ हो रहे संबंधों में एक और ऐतिहासिक आयाम जुड़ गया है। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया कोयला, तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी), दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति के माध्यम से भारत के विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि में सहयोग बढ़ा सकेगा। उन्होंने कहा कि आर्थिक एवं व्यापारिक सहयोग में स्थिरता क्वाड समूह के नेताओं के बीच बातचीत का एक मुख्य विषय रहता है। मॉरिसन ने कहा कि इस समझौते से शिक्षा, व्यापार, पर्यटन और अन्य क्षेत्रों में विस्तार होगा और यह अवसरों का एक विशाल द्वारा खेलने वाला समझौता है। वहीं, वाणिज्य मंत्री गोयल ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया स्वाभाविक भागीदार हैं और दोनों देशों ने कोविड-19 महामारी के दौरान दो भाइयों की तरह आपस में सहयोग किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री मॉरिसन के बीच घनिष्ठता और दोनों की प्रेरणा से यह समझौता इतनी शीघ्रता से हो सका है। उन्होंने कहा कि इससे आने वाले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापारी वर्तमान 27 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 45 से 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के द्वारा एनएच 75 पर खजूरी से विंढ़मगंज तक फोर लेन बनाने के लिए मंजूरी मिल गई है। एनएचआई ने 1232 करोड़ रुपये राशि स्वीकृत की है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इस संबंध में ट्वीट कर जानकारी दी है। खजूरी विंढ़मगंज नेशनल हाइवे भारत माला प्रोजेक्ट का हिस्सा है। भारत माला प्रोजेक्ट के तहत रांची से वाराणसी तक फोर लेन रोड तैयार किया जाना है। पलामू सांसद विष्णुदयाल राम ने डाल्टनगंज से कुडू तक फोरलेन निर्माण के लिए कई बार पहल की है। पहले चरण में रांची से कुडू तक फोरलेन का कार्य किया गया, वहीं दूसरे चरण में खजूरी से यूपी के विंढ़मगंज तक फोर लेन का काम होना था। अब जब केंद्रीय मंत्रालय ने निर्माण के लिए फंड जारी कर दिया है, तो तीसरे चरण में डाल्टनगंज से कुडू तक फोरलेन का काम भी हो सकेगा। नेशनल हाइवे 75 फोर लेन होने के बाद डालटनगंज से रांची की दूरी करीब ढाई घंटे की हो जाएगी। वर्तमान में डालटनगंज से रांची जाने में 5 घंटे का सफर लोगों को तय करना पड़ता है।
टीम एबीएन, रांची। झामुमो की जामा विधायक सीता सोरेन अपनी ही सरकार के खिलाफ शुक्रवार को राजभवन पहुंचीं। राज्यपाल से मुलाकात कर विधायक ने कई समस्याओं को लेकर उन्हें अवगत कराया और उचित कार्रवाई का आग्रह किया। सत्तारुढ़ दल झामुमो की जामा विधायक सीता सोरेन अपनी ही सरकार के खिलाफ शुक्रवार को राजभवन पहुंचीं। राज्यपाल से मुलाकात कर विधायक ने कई समस्याओं को लेकर उन्हें अवगत कराया और उचित कार्रवाई का आग्रह किया। राज्यपाल से मुलाकात के बाद सीता सोरेन ने कहा कि उनकी शिकायतों पर सरकार की ओर से कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्होंने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने बताया कि चतरा के टंडवा प्रखंड अंतर्गत आरक्षित वन क्षेत्र में बिना अनुमति जंगल की कटाई और अवैध कोयला परिवहन पर तत्काल रोक लगाने की राज्यपाल से मांग की है। सीता सोरेन ने कहा कि राज्यपाल ने उन्हें मामले की जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। विधायक सीता सोरेन ने अपनी ही पार्टी के कुछ विधायकों द्वारा भाजपा के संपर्क में रहकर सरकार को अस्थिर करने के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा है कि वह भाजपा के संपर्क में नहीं हैं। कहा कि यह सवाल झामुमो के उन विधायकों से पूछा जाना चाहिये, जो चार्टर्ड प्लेन से दिल्ली गये थे। हालांकि उन्होंने इन विधायकों का नाम नहीं बताया। सीता सोरेन ने कहा कि अपनी ही सरकार के अधिकारी उनकी बात नहीं सुनते हैं। भ्रष्टाचार और जमीन की लूट के मुद्दे पर राज्यपाल रमेश बैस से मिलने बाद पत्रकारों के सवालों का जवाब दिया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। राज्यसभा चुनावों में असम, त्रिपुरा और नागलैंड की एक-एक सीटों पर जीत हासिल करने के बाद इतिहास में पहली बार उच्च सदन में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्यों का आंकड़ा 100 पर पहुंच गया। हाल में छह राज्यों की राज्यसभा की 13 सीटों पर हुए राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव में भाजपा को पंजाब में एक सीट का नुकसान हुआ लेकिन उपरोक्त तीनों राज्यों और हिमाचल प्रदेश में उसे एक-एक सीटों का फायदा हुआ। इन राज्यों के सेवानिवृत्त राज्यसभा सदस्य विपक्षी दलों से थे। पंजाब की सभी पांच सीटों पर आम आदमी पार्टी के सदस्य निर्वाचित हुए हैं। राज्यसभा की वेबसाइट पर नए सदस्यों संबंधी आंकड़े हालांकि अभी अपडेट नहीं हुए हैं लेकिन यदि हाल में हुए चुनाव संबंधी आंकड़े यदि उसमें जोड़ दिए जाएं तो भाजपा के सदस्यों की संख्या 100 हो जाएगी। वर्तमान में राज्यसभा में भाजपा के 97 सदस्य हैं। हालांकि इसके बावजूद 245-सदस्यीय राज्यसभा में भाजपा अभी तक बहुमत से दूर है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2014 के लोकसभा चुनाव में जीत के बाद भाजपा का ग्राफ लगातार बढ़ता चला गया है। वर्ष 2014 में उच्च सदन में भाजपा के सदस्यों की संख्या 55 थी। उसके बाद कई राज्यों में चुनावी जीत दर्ज करने के बाद उसके आंकड़े बढ़ते रहे और अब वह सौ पर पहुंच गयी है। इससे पहले 1990 में कांग्रेस के 108 सदस्य राज्यसभा में थे। इसके बाद कांग्रेस के सदस्यों की संख्या लगातार घटती चली गई। एक-एक कर कई राज्यों में उसे अपनी सरकारें गंवानी पड़ी और इसका असर राज्यसभा में उसके सदस्यों की संख्या पर पड़ा। हालांकि आने वाले दिनों में भाजपा की इस बढ़त पर रोक लग सकती है क्योंकि आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, राजस्थान और झारखंड में राज्यसभा के चुनाव होने हैं और इन राज्यों में विरोधी दलों की सरकारें हैं। उत्तर प्रदेश में भाजपा को बढ़त मिलने के आसर हैं। उत्तर प्रदेश में 11 सीटें खाली हुई हैं और इनमें से भाजपा कम से कम नौ सीटें जीत सकने की स्थिति में है। राज्यसभा से सेवानिवृत्त हो रहे 11 सदस्यों में पांच भाजपा के हैं।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में गर्मी की दस्तक के साथ ही लगभग 12 लाख आबादी को पानी की चिंता सताने लगती है। राजधानी में रांची नगर निगम ही पेयजल आपूर्ती करता है। हालांकि ग्राउंड वाटर लेबल के नीचे चले जाने के कारण कई जगहों पर पानी की किल्लत होने लगती है। ऐसे में नगर निगम के सामने बड़ा सवाल है कि वे लोगों को पानी की किल्लत से कैसे बचाए। मेयर आशा लकड़ा का कहना है कि रांची के लोगों को पीने के पानी की कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी इसके लिए पूरी तैयारी कर ली गई है।रांची नगर निगम की मेयर आशा लकड़ा का दावा है कि वे राजधानी के लोगों को हर सुविधा बेहतर ढंग से देने के लिए तैयार है। उनका कहना है कि पिछले दो वर्षों में अच्छी बारिश हुई है और रांची के डैम में पानी भी इसलिए रांची में पानी की कोई कमी नहीं होगी। आशा लकड़ा का कहना है कि इसके बाद भी अगर कहीं पानी की समस्या होती है तो वहां टैंकर के जरिए पानी पहुंचाने की तैयारी की गई है। मेयर आशा लकड़ा का कहना है कि रांची नगर निगम में जहां पानी की किल्लत है वहां इसी महीने से लोगों के घरों में टैंकर से पानी पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल 200 से अधिक जगहों को चिन्हित किया गया है जहां पानी की किल्लत होती है। रांची नगर निगम की यह कोशिश है वहां तक समुचित मात्रा में पानी पहुंचे फिर चाहे वह स्मल एरिया हो या फिर पॉश इलाका। आशा लकड़ा ने कहा कि रांची में कई अपार्टमेंट ऐसे हैं जहां गर्मियों में पानी नहीं मिलता, ग्राउंड वाटर नीचे चले जाने से उन्हें पानी की समस्या होती है। ऐसे जगहों के लिए जून तक के लिए टैंकर की बुकिंग कराई गई है। मेयर का कहना है कि निगम के पास जो टैंकर है उसके जरिए पानी पहुंचाने का काम तो किया ही जा रहा है लेकिन फिर भी अगर जरूरत पड़ेगी तो किराए पर टैंकर लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकार से लगातार पत्राचार किया जा रहा है और टैकरों के लिए 19 करोड़ की राशि की मांग की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही है। अब तक सरकार की ओर से नगर निगम को कोई राशि नहीं मिली है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस-यूक्रेन जंग के बीच रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने आज नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की। वह गुरुवार को दो दिवसीय भारत यात्रा पर पहुंचे थे। कूटनीतिक और यूक्रेन से जंग के लिहाज से सर्गेई की भारत यात्रा को बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनकी इस यात्रा पर अमेरिका समेत कई यूरोपीय देश भी नजरें टिकाए हुए हैं। बैठक के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि यह बैठक कोरोना महामारी व कठिन अंतरराष्ट्रीय वातावरण के बीच हो रही है। हमारे कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय रिश्ते बने हुए हैं। भारत हमेशा कूटनीति के जरिए विवादों को सुलझाने के पक्ष में रहा है। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात के दौरान रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि भारत और रूस सामरिक भागीदारी विकसित करते रहे हैं। यह हमारी प्राथमिकता का हिस्सा है। हम निश्चित रूप से विश्व व्यवस्था में संतुलन बनाने में रुचि रखते हैं। हमारे राष्ट्रपति ने पीएम मोदी को शुभकामनाएं भेजी हैं। उन्होंने आगे कहा कि हम भारत की सराहना करते हैं कि भारत इस मुद्दे पर एकतरफा दबाव में न आकर पूरी सूझबूझ के साथ आगे बढ़ रहा है। यूक्रेन पर रूस की ओर से हमले की शुरुआत करने के बाद से रूसी विदेश मंत्री की यह पहली भारत यात्रा है। यूक्रेन के खिलाफ अपनी कार्रवाई को रूस एक विशेष सैन्य अभियान कहता है। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जराखोवा ने बताया था कि लावरोव शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे। हालांकि, लावरोव की यात्रा को लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से जारी की गई मीडिया एडवायजरी में पीएम के साथ लावरोव की बैठक का कोई उल्लेख नहीं है। इस मुलाकात से पहले अमेरिका की ओर से भारत-रूस संबंध पर बयान जारी किया गया था। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा है कि विभिन्न देशों के रूसी संघ के साथ अपने संबंध रहे हैं। यह इतिहास का तथ्य है। एक भौगोलिक सच है। हम इसे बिल्कुल नहीं बदलना चाहते हैं। हम यह देखने का प्रयास कर रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय एक स्वर में बोल रहा है कि नहीं। उन्होंने कहा कि भारत समेत कई देशों को इस अनुचित, अकारण आक्रामकता के खिलाफ प्रमुखता से बोलना चाहिए और हिंसा को खत्म करने का आह्वान करना चाहिए।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूक्रेन संकट के बीच रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव बृहस्पतिवार की शाम को भारत के दौरे पर पहुंच चुके हैं। सर्गेई शुक्रवार को अपने समकक्ष और भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात करेंगे। इस दौरान द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा होने की संभावना है। बता दें कि पिछले 36 दिनों से रूस यूक्रेन पर लगातार बम और मिसाइलों से हमला कर रहा है। ऐसे में यूरोपीय देशों और अमेरिका ने रूस पर कई तरह के कड़े प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे रूस की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है।
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