टीम एबीएन, साहिबगंज। शहीद सिदो कान्हू की जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सोमवार सुबह बरहेट प्रखंड के भोगनाडीह पहुंचे। यहां सीएम हेमंत सोरेने ने शहीद सिदो कान्हू चांद भैरव की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और नमन किया। बता दें कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भोगनाडीह ग्राउंड में सरकारी कार्यक्रम में भाग लेंगे और वहां पहुंचने वाले लोगों को संबोधित भी करेंगे। इस मंच से ही परिसंपत्ति का वितरण भी करेंगे। शाम को 6:00 बजे बड़हरा प्रखंड के विंध्यवासिनी मंदिर में पूजा अर्चना भी करेंगे। इस भव्य मंदिर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा भी मुख्यमंत्री करेंगे। सीएम हेमंत सोरेन रात्रि विश्राम पतना प्रखंड के आवासीय कार्यालय में करेंगे। बाद में मंगलवार को रांची के लिए प्रस्थान करेंगे। मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर जिला प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। बरहेट से लेकर बरहरवा तक जगह-जगह चेक पोस्ट बनाया गया है। सुरक्षा का विशेष ख्याल रखा गया है। दर्जनों पुलिसकर्मी और पदाधिकारियों के साथ मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए हैं।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में त्रिस्तरीय पंचयात चुनाव 14 मई से 27 मई तक 4 चरणों में कराए जाएंगे। अब राज्य में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो गई। राज्य चुनाव आयुक्त डीके तिवारी ने शनिवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में त्रिस्तरीय पंचायत के चुनाव की घोषणा की, जिसके साथ ही राज्य में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो गई। इससे पूर्व राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया था कि राज्यपाल रमेश बैस ने राज्य में त्रिस्तरीय पंचयात चुनाव कराने हेतु अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है। उन्होंने बताया कि स्वीकृत कार्यक्रम के अनुसार झारखंड राज्य अंतर्गत त्रिस्तरीय पंचायत निकायों के ग्राम पंचायत सदस्य, मुखिया, पंचायत समिति सदस्य एवं जिला परिषद सदस्य के निर्वाचन हेतु कुल 4 चरणों 14 मई, 19 मई, 24 मई एवं 27 मई, 2022 को मतदान करवाए जाएंगे। तिवारी ने कहा कि राज्य में 4 चरणों में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पहले चरण का मतदान 14 मई को होगा जिसके लिए नामांकन 16 अप्रैल से 23 अप्रैल तक होगा। तिवारी ने कहा कि 19 मई को दूसरे चरण के होने वाले मतदान के लिए नामांकन 20 से 27 अप्रैल तक होगा। इसी तरह 24 मई को तीसरे चरण के होने वाले मतदान के लिए नामांकन प्रक्रिया 25 अप्रैल से 2 मई तक चलेगी। चौथे और अंतिम चरण का मतदान 27 मई को होगा, जिसके लिए नामांकन पत्र 29 अप्रैल से 6 मई तक भरे जाएंगे। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार पहले चरण की मतगणना 17 मई, दूसरे चरण की मतगणना 22 मई, तीसरे और चौथे चरण में होने वाले मतदान की मतगणना 31 मई को कराई जाएगी। तिवारी ने कहा कि राज्य के 24 जिले के 264 प्रखंड में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ग्राम पंचायतों की संख्या 4345 है, वहीं ग्राम पंचायत के प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या 53 हजार 479, ग्राम पंचायत के मुखिया के निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या 4345, पंचायत समिति के क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों की कुल संख्या 5341 और जिला परिषद के क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों की कुल संख्या 536 है। निर्वाचन आयुक्त ने बताया कि राज्य के कुल 53480 मतदान केंद्रों में 17698 अतिसंवेदनशील हैं। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव में 53480 मतदान केंद्रों में से 22961 संवेदनशील हैं। उन्होंने बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की पर्याप्त तैनाती की जाएगी। इस पंचायत चुनाव में 1,96,16,504 मतदाता हैं, जिनमें 95,45,702 महिला मतदाता हैं। उन्होंने बताया कि यह चुनाव मतदान पत्र के माध्यम से करवाया जाएगा, जिसके लिए 98,081 बड़ी मत पेटी और 3928 मध्यम आकार की मतपेटी की व्यवस्था की गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव के दौरान धन बल के प्रयोग पर अंकुश लगाने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। राज्य निर्वाचन आयुक्त डीके तिवारी के अनुसार प्रत्याशियों के निर्वाचन व्यय की अधिकतम सीमा भी निर्धारित की गई है, जिसके तहत ग्राम पंचायत सदस्य के निर्वाचन के लिए 14000 रु., ग्राम पंचायत के मुखिया के लिए 85,000 रु., पंचायत समिति सदस्य के लिए 71000 रु. और जिला परिषद सदस्य के प्रत्याशी के लिए 2,14000 रु. के व्यय की सीमा निर्धारित की गई है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में इन दिनों 1932 के खतियान आधरित नियोजन नीति को लागू करने को लेकर आंदोलन चल रहा है। वहीं कुछ इसका विरोध भी कर रहे हैं। झारखंड सरकार की सहयोगी पार्टी कांग्रेस, और राजद 1932 खतियान आधारित रोजगार नीति के विरोध में हैं। अब शिक्षा मंत्री ने जगरनाथ महतो ने भी 1932 को लेकर बड़ी बात कह दी है। शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने कहा कि 1932 के खतियान आधारित स्थानीय और नियोजन नीति जेएमएम के चुनावी एजेंडा में है। जेएमएम इसको लागू करने के पक्ष में है। गठबंधन सरकार में थोड़ी दिक्कत जरूर है। वहीं शिक्षा मंत्री ने कहा कि झारखंड के लोगों का 1932 खतियान आधारित स्थानीय, नियोजन नीति बपौती अधिकार है। इसे कोई नही रोक सकता है, जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं वह छुटभैया नेता हैं। सरकार के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता के द्वारा मैथिली, अंगिका, भोजपुरी भाषा के समर्थन करने पर यह बात शिक्षा मंत्री ने कही। स्वास्थ्य मंत्री को इसके लिये परेशानी उठानी पड़ी। वहीं लोबिन हेम्ब्रम, सीता सोरेन के अलग राह, नराजगी को लेकर कहा कि पार्टी में सब कुछ ठीक है। शिबू सोरेन पार्टी के सर्वेसवा हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के लोग सरकार को अस्थिर करने में लगे हैं। लेकिन कामयाब नहीं हो पाएंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के विधायक कौन मंत्री बनेगा, रहेगा यह कॉग्रेस को तय करना है। सरकार पर इसका कोई असर नही पड़ेगा। कांग्रेस के आलाकमान और राजद के लालू यादव के नेतृत्व में गठबंधन हुआ है। किसी के कुछ कहने बोलने से सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है।
टीम एबीएन, रांची। रामनवमी की सुरक्षा को लेकर राजधानी में चाक-चौबंद व्यवस्था की गयी है। एसएसपी सुरेंद्र कुमार झा ने शुक्रवार को बताया कि रविवार को रामनवमी जुलूस के दौरान 10 ड्रोन कैमरा से पूरे शहर की निगरानी होगी। जगह-जगह 2000 जवानों की तैनाती की जायेगी। रैपिड एक्शन फोर्स (रैफ) की दो कंपनी, क्यूआरटी की 10 कंपनी, आइआरबी, जैप, होमगार्ड व डंडा पार्टी को लगाया जायेगा। 10 डीएसपी, थाना प्रभारी के अलावा 10 इंस्पेक्टर को सुरक्षा व्यवस्था में लगाया जायेगा। रांची पुलिस किसी भी परिस्थिति से निबटने के लिए पूरी तरह से तैयार है। दूसरी ओर, रामनवमी के दौरान राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को दिखाने के लिए शुक्रवार को पुलिस ने रोड शो किया। इसमें पीसीआर, टाइगर मोबाइल, थाना गश्ती वाहन सहित 100 से अधिक वाहन शामिल रहे। दिन के 1:30 के करीब मोरहाबादी मैदान से रोड शो निकाला गया। इसका नेतृत्व एसएसपी सुरेंद्र कुमार झा कर रहे थे। साथ में सिटी एसपी अंशुमन कुमार, ग्रामीण एसपी नौशाद आलम सहित अन्य पुलिस अधिकारी थे। सिटी एसपी ने बताया कि रामनवमी की सुरक्षा के मद्देनजर रोड शो निकाला गया। इधर, सड़क पर एक साथ इतने वाहन निकलने से लोग भी हैरान थे। बाद में लोगों को पता चला कि रामनवमी की सुरक्षा को लेकर रोड शो निकाला गया है। रांची पुलिस रामनवमी को लेकर पूरी तरह चौकस है। रोड शो मोरहाबादी मैदान से निकल कर कचहरी, शहीद चौक, अलबर्ट एक्का चौक, हिंदपीढ़ी, सुजाता चौक, डोरंडा, हिनू, बिरसा चौक, हरमू बाइपास होते हुए अरगोड़ा चौक, किशोरगंज चौक, रातू रोड, पिस्का मोड़, पंडरा, कमड़े, रातू, तिरिल, रिंग रोड, बरियातू व लोअर बाजार होते हुए वापस मोरहाबादी पहुंचा। वहीं, रैफ के उप कमांडेंट राकेश कुमार के नेतृत्व में गांधी चौक, किशोरी यादव, न्यू मार्केट चौक, गाड़ी खाना, किशोरगंज, बड़ा तालाब होते हुए कोतवाली थाना तक फ्लैग मार्च निकाला गया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बनाए गए प्रधानमंत्री म्यूजियम का उद्घाटन पीएम नरेंद्र मोदी 14 अप्रैल को करेंगे। इसमें देश के अब तक के सभी प्रधानमंत्रियों के कार्यों का प्रदर्शन होगा। पहले यह नेहरू संग्रहालय भवन कहा जाता था। प्रधानमंत्री संग्रहालय में इसे भी समाहित कर लिया गया है। पिछले माह पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में नेहरू संग्रहालय को पीएम म्यूजियम में तब्दील करने का फैसला किया गया था। इस संग्रहालय में देश के सभी 14 पूर्व प्रधानमंत्रियों की यादों को सहेजा जायेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आंबेडकर जयंती यानी 14 अप्रैल को इसका उद्घाटन करेंगे। कैबिनेट बैठक के दौरान पीएम मोदी ने कहा था कि सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्रियों के योगदान को स्वीकार करने के लिए यह फैसला किया है। हम सभी पीएम के योगदान को मान्यता देना चाहते हैं। प्रधानमंत्री संग्रहालय में सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों के कार्यों को दिखाया गया है। पूर्व प्रधानमंत्रियों के बारे में बहुमूल्य जानकारी के लिए उनके परिवारों से भी संपर्क किया गया था। संग्रहालय में महत्वपूर्ण पत्राचार, कुछ व्यक्तिगत वस्तुओं, उपहार और यादगार वस्तुएं, सम्मान, पदक, स्मारक टिकट, सिक्के आदि भी प्रदर्शित किए गए हैं। दूरदर्शन, फिल्म डिवीजन, संसद टीवी, रक्षा मंत्रालय, मीडिया हाउस (भारतीय और विदेशी), प्रिंट मीडिया, विदेशी समाचार एजेंसियों, विदेश मंत्रालय आदि संस्थानों के माध्यम से जानकारी एकत्र की गई। नेहरू संग्रहालय ब्लॉक-1 में रहेगा : संग्रहालय पुराने नेहरू म्यूजियम और नए का सम्मिलित रूप है। इसमें तत्कालीन नेहरू संग्रहालय भवन भी शामिल है। इसे पीएम संग्रहालय ब्लॉक-1 के रूप में नामित किया गया है। इसमें अब पंडित जवाहरलाल नेहरू के जीवन और योगदान से संबंधित अब तक सारी जानकारियां उन्नत तकनीक के माध्यम से पेश की गई हैं। दुनिया भर से उन्हें मिले उपहार भी पुनर्निर्मित ब्लॉक क में प्रदर्शित किए गए हैं। डिजाइन उभरते भारत की प्रतीक : पीएम संग्रहालय भारत के स्वतंत्रता संग्राम से लेकर संविधान के निर्माण तक की कहानी बताएगा। इसमें बताया गया है कि कैसे हमारे प्रधानमंत्रियों ने विभिन्न चुनौतियों से देश को उबारा और देश की चौतरफा प्रगति सुनिश्चित की। संग्रहालय भवन की डिजाइन उभरते भारत की कहानी से प्रेरित है। इसे नेताओं के हाथों का आकार दिया गया है। डिजाइन में टिकाऊ और ऊर्जा संरक्षण के इंतजाम किए गए हैं। कोई पेड़ काटा नहीं गया : पीएम संग्रहालय परिसर में किसी भी पेड़ को काटा या प्रत्यारोपित नहीं किया गया है। इमारत का कुल क्षेत्रफल 10,491 वर्ग मीटर है। इमारत का लोगो राष्ट्र और लोकतंत्र का प्रतीक चक्र धारण करने वाले भारत के लोगों के हाथों का प्रतिनिधित्व करता है। अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल : प्रधानमंत्री संग्रहालय में युवाओं को सूचना आसान और रोचक तरीके से प्रस्तुत करने के लिए अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी-आधारित संचार सुविधाओं का इंतजाम किया गया है। प्रदर्शनी को अत्यधिक इंटरैक्टिव बनाने के लिए होलोग्राम, वर्चुअल रियलिटी, आॅगमेंटेड रियलिटी, मल्टी-टच, मल्टी-मीडिया, इंटरेक्टिव कियोस्क, कम्प्यूटरीकृत काइनेटिक मूर्तियां, स्मार्टफोन एप्लिकेशन, इंटरेक्टिव स्क्रीन आदि लगाई गई हैं।
टीम एबीएन, रांची। 24 मार्च की आधी रात को मालवाहक जहाज के गंगा में डगडमाने और 5 ओवर लोडेड ट्रकों के गंगा नदी में समाने के बाद बंद किए गए अंतर्राज्यीय फेरी सेवा को फिर से चालू कर दिया गया है। कटिहार जिला प्रशासन के आदेश के बाद फेरी सेवा की शुरुआत पर यात्रियों और व्यासायियों ने खुशी जाहिर की है। कटिहार जिला प्रशासन के आदेश के बाद मालवाहक जहाज और एक यात्री जहाज सुबह सुबह मनिहारी के लिए साहिबगंज से रवाना हुई। यात्रियों के मुताबिक गंगा पुल बनने तक फेरी सेवा ही एक ऐसा माध्यम है जिससे दोनों राज्यों के बीच व्यापार किया जा रहा है। फेरी सेवा की शुरुआत पर साहिबगंज के लोगों ने खुशी जताई है। गंगा नदी में मालवाहक जहाज के मनिहारी जाने क्रम में 5 लोडेड ट्रक और कुछ लोग गंगा में डूब गए थे। जिसके बाद रेस्क्यू अभियान जारी था। रेस्क्यू अभियान में चार ट्रक और 2 लोगों का शव बरामद हुआ था। जिसके बाद फेरी सेवा को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया था। लेकिन लोगों की परेशानी को देखते हुए एक बार फिर से फेरी सेवा चालू कर दी गई है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। वित्त विभाग ने वित्तीय वर्ष 2021-22 का लेखा-जोखा साझा किया है। इस वर्ष सरकार को केंद्रीय करों की हिस्सेदारी के रूप में 27,734 करोड़ की राशि प्राप्त हुई है, जो वित्तीय वर्ष 2020-21 की तुलना में 8,022 करोड़ ज्यादा है। हालांकि केंद्र सरकार से अलग अलग योजनाओं में प्राप्त होने वाले ग्रांट में करीब 713 करोड़ रुपए कम मिले हैं। सबसे खास बात है कि जहां वित्तीय वर्ष 2020-21 में ऋण के रूप में 14,910 करोड़ रुपए प्राप्त किए गये थे। इसकी तुलना में इस वर्ष महज 9,063 करोड़ का ऋण लिया गया। वित्तीय वर्ष 2021-22 में राजकोषीय घाटा सकल राज्य घरेलू उत्पाद 3,63,084 करोड़ का 1.29 प्रतिशत है। 31 मार्च को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में सबसे ज्यादा 15,237 करोड़ राजस्व की प्राप्ति कर वाणिज्य कर विभाग टॉप पर रहा। दूसरे स्थान पर 7,428 करोड़ के साथ खान एवं भूतत्व विभाग रहा। उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने 1,693 करोड़, परिवहन विभाग ने 1,187 करोड़, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने 1,621 करोड़ और निबंधन विभाग ने 985 करोड़ रुपए सरकार की तिजोरी में डाले। दूसरी तरफ 31 मार्च, 2022 तक स्कीम मद में 41,907.04 करोड़ रुपए की राशि का औपबंधिक व्यय हुआ है, जो संशोधित स्कीम बजट उपबंध (50,489.31 करोड़ रुपये) का कुल 83% है। इसी तरह स्थापना मद में 35,235.49 करोड़ का औपबंधिक व्यय हुआ है जो संशोधित स्थापना मद का 91 प्रतिशत है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में आदिवासी समाज की परंपरा और कला- संस्कृति को जीवंत, अक्षुण्ण और संरक्षित करने का प्रयास लगातार जारी है। इस कड़ी में आज राजधानी रांची के सिरोमटोली सरना स्थल के सौदर्यीकरण योजना का शिलान्यास किया जा रहा है। लगभग 5 करोड़ रुपए की लागत से इस सरना स्थल परिसर में कई सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य कि सभी सरना और मसना स्थल का संरक्षित करने का संकल्प राज्य सरकार ने लिया है, ताकि आने वाली पीढ़ी भी इसके ऐतिहासिक महत्व से भलीभांति वाकिफ रहे। उन्होंने राज्य वासियों से कहा कि अगर उनकी नजर में कोई उत्सव स्थल को विकसित और संरक्षित करने की जरूरत है तो उसकी जानकारी दें। इस दिशा में सरकार अवश्य पहल करेगी। सोरेन ने कहा कि विश्व की प्राचीनतम व्यवस्थाओं में आदिवासी समाज की व्यवस्था को जाना जाता है। हालांकि, आज की भौतिकवादी युग में सामंजस्य स्थापित करने में आदिवासी समाज थोड़ा पिछड़ सा गया है। लेकिन, आदिवासियों के हक और अधिकार तथा विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकार के अवसर पर पृथक रूप से आदिवासी कल्याण मंत्रालय बनाया गया है। यह मंत्रालय आदिवासियों के उत्थान के लिए लगातार कार्य कर रही है।
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