टीम एबीएन, रांची। आय से अधिक संपत्ति मामले में गिरफ्तार झारखंड की भ्रष्ट नौकरशाह आइएएस पूजा सिंघल के खिलाफ चल रहे मनी लांड्रिंग अनुसंधान में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के हाथ कई अहम जानकारियां लगी हैं। ये जानकारियां प्रेम प्रकाश, विशाल चौधरी, निशांत केशरी के ठिकानों पर छापेमारी व उनसे पूछताछ के दौरान ईडी को मिली हैं। इस पूरे मामले में सूत्रधार के रूप में हेमंत सोरेन के करीबी और विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा का नाम सामने आ रहा है। ईडी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, उसमें पता चल रहा है कि अवैध माइनिंग की मॉनिटरिंग पंकज मिश्रा करता है और उसके इशारे पर झारखंड का स्टोन चिप्स बांग्लादेश तक पहुंचता है। अब यह संभावना जताई जा रही है कि ईडी की ओर से जल्द ही पूछताछ के लिए पंकज मिश्रा को समन भेजा जा सकता है। इस बीच गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे के कल के ट्वीट ने कई लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। ईडी की कार्रवाई को लेकर निशिकांत दुबे का ट्वीट चर्चा का विषय बन गया है। सांसद ने ट्वीट किया है अब बारी झारखंड के मुख्यमंत्री जी के विभीषण व परम सलाहकार जिनके अंदर व बाहर दोनों दरबारी बिखर गए। वैसे परम ज्ञानी पिंटू श्रीवास्तव की है, जल्द ही माइनिंग लीज धौंस से लेने के खुशी में केंद्रीय एजेंसियों के सामने होंगे। ऐसे में कयास लगाया जा रहा है कि ईडी जल्द पंकज मिश्रा और पिंटू श्रीवास्तव से पूछताछ करेगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के करीबी उनके विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा ने पिछले दिनों मीडिया में यह बयान दिया था कि वे ईडी की जांच से डरने वाले नहीं हैं। वे भी तैयार बैठे हैं और उस दिन का इंतजार कर रहे हैं कि कब ईडी के अधिकारी उनसे पूछताछ करें। पंकज मिश्रा ने डंके की चोट पर कहा था कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है और वे हर सवाल का जवाब साक्ष्य के साथ देने में सक्षम हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अगले हफ्ते होने वाली अपनी मौद्रिक समीक्षा में रेपो दर में 0.40 प्रतिशत की एक और बढ़ोतरी कर सकता है। विदेशी ब्रोकरेज कंपनी बैंक ऑफ अमेरिका सिक्योरिटीज ने शुक्रवार को यह कहा। आरबीआई ने गत मई में भी रेपो दर में 0.40 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए 4.40 प्रतिशत कर दिया था। बढ़ती मुद्रास्फीति को काबू में लाने के लिए आरबीआई ने नीतिगत दर में बढ़ोतरी की थी। ब्रोकरेज कंपनी ने शुक्रवार को अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि मई में भी मुद्रास्फीति का आंकड़ा सात प्रतिशत रहने का अनुमान है, लिहाजा रिजर्व बैंक की तरफ से इस पर नियंत्रण के लिए कई और कदम उठाने की उम्मीद है। रिपोर्ट के मुताबिक, आरबीआई अगले हफ्ते रेपो दर में 0.40 प्रतिशत की एक और बढ़ोतरी कर सकता है। इसके अलावा अगस्त की समीक्षा में भी वह 0.35 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर सकता है। अगर ऐसा नहीं होता है तो आरबीआई अगले हफ्ते 0.50 प्रतिशत और अगस्त में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी का मन बना सकता है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने हाल ही में कहा है कि मुद्रास्फीति को छह प्रतिशत के संतोषजनक स्तर के भीतर लाने के दबावों को देखते हुए नीतिगत दर में एक और बढ़ोतरी होना कोई बड़ी बात नहीं है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड सरकार के उत्पाद विभाग ने दावा किया है कि राज्य की नई शराब नीति की वजह से मई 2022 के दौरान राजस्व संग्रहण में 70 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गयी जो एक कीर्तिमान है। विभाग ने कहा कि राज्य को 79 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हुआ। राज्य के आबकारी सचिव विनय चौबे ने बृहस्पतिवार को बताया कि नई शराब नीति लागू होने से पहले अप्रैल 2022 में सिर्फ 109 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्त हुआ था जबकि मई 2022 के दौरान 188 करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई। उन्होंने बताया कि नई नीति से जहां एक तरफ राजस्व में वृद्धि हुई है वहीं दूसरी ओर, नीति में चार बिंदुओं पर हुए बदलाव के कारण व्यवस्था में भी आमूल-चूल परिवर्तन आया है। चौबे ने कहा कि राज्य में नई शराब नीति को लेकर 31 मार्च को संकल्प जारी किया गया था। उन्होंने कहा कि एक महीने में नई शराब नीति तैयार कर 1 मई 2022 से उसे राज्य में लागू कर दिया गया। चौबे ने कहा कि एक महीने में सरकार को उत्पाद राजस्व में 188 करोड़ रुपये प्राप्त हुए जो एक कीर्तिमान है। उन्होंने कहा कि नई उत्पाद नीति को राजस्व वृद्धि के अनूकूल बनाया गया है जिसमें तीन बिंदुओं, यथा थोक विक्रेता, खुदरा विक्रेता और बार संचालन को लेकर नई नीतियां बनाई गई हैं और देशी शराब नीति में भी संशोधन किया गया है। उन्होंने कहा कि पिछली बार राज्य में बिक्री पर राजस्व का प्रावधान था जबकि इस बार की नीति में शराब के उठाव पर राजस्व का प्रावधान किया गया है साथ ही शराब का जहां उत्पादन हो रहा है सरकार नई नीति के अनुरूप वहीं पर आॅनलाइन होलोग्राम देकर कोड उपलब्ध करा रही है। उत्पाद आयुक्त अमित कुमार ने जानकारी दी कि वर्तमान में राज्य में शराब की कुल 1434 दुकानें सक्रिय हैं और बीते एक महीने में 49 दुकानों में ट्रैक एंड ट्रेस प्रणाली पायलट परियोजना के रूप में प्रारंभ की गई। उन्होंने बताया कि एक जून से पांच जिलों- रांची, जमशेदपुर, धनबाद, सरायकेला और बोकारो में भी ट्रैक एंड ट्रेस प्रणाली लागू की जा रही है। उन्होंने कहा कि उक्त व्यवस्था लागू होने से लीकेज की आशंका लगभग खत्म हो जायेगी।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन पर लगी रोक को सरकार ने हटा लिया है। सरकार के इस फैसले से करीब 60 हजार पदों पर प्रमोशन का रास्ता साफ हो गया है। इस संबंध में राज्य सरकार के कार्मिक विभाग के द्वारा चिठ्ठी जारी कर दिया गया है। झारखंड में 24 दिसंबर 2021 से सरकारी कर्मियों के प्रमोशन पर रोक लगी हुई थी। गौरतलब है कि झारखंड विधानसभा सत्र के दौरान राज्य कर्मियों की प्रोन्नति में अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के वरीय सरकारी सेवकों को प्रोन्नति से वंचित कर सामान्य वर्ग के कनीय कर्मियों को प्रोन्नति देने का मामला सदन में उठाया गया था। उठाये गये प्रश्न के बाद विधानसभा की एक विशेष समिति का गठन किया गया था।उसके बाद मामले की जांच की गयी थी। जिसके बाद राज्य सरकार द्वारा विभागीय पत्र 24.12.2021 के माध्यम से तत्काल प्रभाव से प्रोन्नति की प्रक्रिया स्थगित की गयी थी। सरकारी कार्यालयों में एससी, एसटी अधिकारियों व कर्मियों के प्रोन्नति में हुए विसंगति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी मामला चला। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राज्य के सरकारी कार्यालयों मंं एससी, एसटी अधिकारियों व कर्मियों प्रतिनिधित्व का आंकड़ा जुटाने के लिए प्रमोशन पर रोक लगा दी गई। इस रोक की वजह से सरकारी विभागों में विभिन्न पदों पर कार्यरत अधिकारियों व कर्मियों का प्रोन्नति रूक गयी। कई अधिकारी व कर्मचारी उच्च पदों पर प्रोन्नति पाये बगैर रिटायर हो गए। राज्य सरकार ने इस बीच अपर मुख्य सचिव एल खियांगते की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की। इस कमेटी को सरकारी कार्यालयों में एससी-एसटी के प्रतिनिधित्व का आंकड़ा जुटाने को कहा गया। पिछले वर्ष आठ अक्टूबर को कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सरकार को दी थी। इसके बाद विभाग ने रिपोर्ट के आधार पर एक विधेयक लाया और इसमें परिणामी वरीयता के आधार पर एससी-एसटी को प्रोन्नति देने की बात कही गई है। कार्मिक सचिव वंदना डाडेल के द्वारा जारी चिठ्ठी के बाद प्रोन्नति पर लगी रोक हट गई है और सरकार ने इसके लिए विस्तृत गाइडलाइन भी जारी कर सभी विभागों के प्रधानों और उपायुक्त को सूचित किया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। जीएसटी के मोर्चे पर एक बार फिर सरकार को भारी-भरकम कलेक्शन हुआ है। मई 2022 के महीने में एकत्र किया गया ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन 1,40,885 करोड़ रुपए है। इसमें सीजीएसटी 25,036 करोड़ रुपए, एसजीएसटी 32,001 करोड़ रुपए, आईजीएसटी 73,345 करोड़ रुपए और उपकर 10,502 करोड़ रुपए शामिल है। एक साल पहले क्या था हाल : मई 2022 का कलेक्शन पिछले वर्ष के इसी महीने में 97,821 करोड़ रुपए के जीएसटी राजस्व से 44 फीसदी अधिक है। बहरहाल, जीएसटी कलेक्शन का बढ़ना अच्छे संकेत हैं। यह अच्छी खबर ऐसे समय में आई है जब केंद्र सरकार ने बीते 31 मई को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 86912 करोड़ रुपए का जीएसटी क्षतिपूर्ति भी जारी किया है। लगातार तीसरे माह 1.40 लाख करोड़ : वहीं, ॠरळ लागू होने के बाद से चौथी बार है जब कलेक्शन 1.40 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंचा है। वहीं, मार्च 2022 से लगातार तीसरा महीना है जब कलेक्शन ने इस स्तर को पार किया है। आपको बता दें कि साल 2017 में जीएसटी लागू किया गया था। अप्रैल में टूटे थे सारे रिकॉर्ड : बीते अप्रैल माह में जीएसटी कलेक्शन के सारे रिकॉर्ड टूट गए थे। अप्रैल 2022 में ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन 1.68 लाख करोड़ रुपए का रहा, जो अब तक का सर्वाधिक है। यह पहली बार था जब जीएसटी कलेक्शन 1.50 लाख करोड़ रुपए का आंकड़ा पार कर गया।
टीम एबीएन, रांची। उत्पाद विभाग की नई शराब नीति की वजह से राजस्व संग्रहण में मई 2022 में 70 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गयी है, जो एक रिकॉर्ड है। नई नीति लागू होने के पूर्व अप्रैल 2022 में 109 करोड़ रू का राजस्व प्राप्त हुआ था जबकि मई 2022 में 188 करोड़ रू की प्राप्ति हुई। एक तरफ राजस्व में बढ़ोतरी हुई है। वहीं दूसरी ओर नीति में चार बिन्दुओं पर हुए बदलाव की वजह से सिस्टम में भी आमूल-चूल परिवर्तन आया है। ये बातें उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के सचिव विनय कुमार चौबे ने उत्पाद विभाग के कौटिल्य सभागार में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कही। श्री चौबे ने बताया कि राज्य में नई शराब नीति को लेकर 31 मार्च को संकल्प जारी किया गया था और एक महीने में नई नीतियों को तैयार कर 1 मई 2022 से राज्य में नई शराब नीति को लागू किया गया। एक महीने में सरकार को उत्पाद राजस्व में 188 करोड़ रूपये की प्राप्ति हुई है जो अब तक का रिकॉर्ड है। उन्होंने कहा कि नई उत्पाद नीति को राजस्व वृद्धि के अनूकूल बनाया गया है जिसमें तीन बिन्दुओं यथा थोक बिक्रेता, खुदरा बिक्रेता और बार संचालन को लेकर नई नीतियां बनाई गयी हैं जबकि देसी शराब नीति में संशोधन किया गया है। साथ ही मैन पावर, सुरक्षा गार्ड, ऑडिट, ट्रांसपोर्ट आदि के लिये अलग-अलग एजेंसियों का चयन ऑनलाईन टेंडर के माध्यम से पारदर्शिता के साथ किया गया है। नीति में चेक्स एंड बैलेंस के बीच संतुलन बनाया गया है। पिछली बार सेल्स पर राजस्व का प्रावधान था जबकि इस बार की नीति में उठाव पर राजस्व का प्रावधान किया गया है साथ ही शराब का जहां उत्पादन हो रहा है, हम नई नीति के अनुरूप् वहीं पर ऑनलाईन होलोग्राम देकर कोड उपलब्ध करा रहे हैं। उत्पाद सचिव ने जानकारी देते हुए कहा कि वर्ष 2017 के अगस्त में नई उत्पाद नीति जब लागू की गयी थी, उस वक्त लागू होने के अगस्त महीने में सिर्फ 23 करोड़ के राजस्व की प्राप्ति हुई थी जबकि एक मई 2022 को लागू नीति के बाद 188 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है तो इस नीति की सफलता की कहानी का दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि मई महीने में कंट्री लीकर की समस्या आई थी लेकिन आगामी दस दिनों के अन्दर इस समस्या से निजात मिल जायेगी। नियोजन नीति को लेकर उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर कमेटी गठित कर दी गयी है, जो सतत प्रक्रिया के बाद अर्हता पूरी करने वालों का नियोजन करेगी। उत्पाद आयुक्त अमित कुमार ने जानकारी दी कि वर्तमान में कुल 1434 दुकानें सक्रिय हैं और बीते एक महीने में 49 दुकानों में ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम पायलट प्रोजेक्ट के रूप में रन कर रहा है। उन्होंने बताया कि 1 जून से पांच जिलों रांची, जमशेदपुर, धनबाद, सरायकेला और बोकारो में भी ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम प्रारंभ किया जा रहा है। उक्त व्यवस्था लागू हो जाने से लिकेज की संभावना लगभग खत्म हो जायेगी।
टीम एबीएन, रांची। प्रोजेक्ट भवन सभागार में ग्रामीण महिलाओं के संकुल स्तरीय संगठनों के पदाधिकारियों का राज्य स्तरीय एकदिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम का उद्घाटन ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम ने किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री आलमगीर आलम ने कार्यक्रम के जरिए राज्य के सखी मंडल की दीदीयों को सशक्त कर आजीविका एवं आमदनी बढ़ोतरी समेत कई सामाजिक क्षेत्रों में विकास के लिए कार्य करने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम अंतर्गत संकुल संगठन की बहनों को झारखण्ड में उपलब्ध विभिन्न आजीविका के अवसरों का लाभ मिले इस हेतु विभाग नवीनतम रणनीति बनायें और सखी मंडल की दीदियों को प्रशिक्षित करें जिसके जरिए सखी मंडल एवं उच्चतर संगठन सरकार के लक्ष्यों के मुताबिक ग्रामीण विकास की परिकल्पना को साकार किया जा सके। इसी कड़ी में राज्य में बैंकिंग कॉरेस्पॉडेट पशु सखी, कृषक मित्र, वनोपज मित्र, सीआरपी समेत परियोजना क्रियान्वयन के लिए करीब 90 हज़ार सामुदायिक कैडर को प्रशिक्षित कर परियोजना के विस्तारण में लगाया गया है। श्री आलम ने बताया कि राज्य में अब तक करीब 35 लाख ग्रामीण महिलाए 2.79 लाख समूह से जुड़ कर आत्मनिर्भर बन चुकी है। राज्य की करीब 27 लाख बहनों को प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना से जोड़ा जा चुका है वहीं 16.79 लाख बहनों को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना से जोड़ा जा चुका है। गांव में बैंकिंग सुविधाओं को आसान बनाने में बीसी सखी की भूमिका की तारीफ करते हुए श्री आलम ने कहा कि अब तक 4647 बीसी सखी पंचायतों में घर-घर बैंकिंग सुविधाएं पहुंचा रही है। उन्होंने बताया कि सखी मंडल से जुड़ी 21 लाख ग्रामीण महिलाओं को आजीविका के सशक्त साधनों से जोड़ा जा चुका है। जिसके तहत दीदियां खेती, पशुपालन, वनोपज एवं उद्यमिता से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही है। उन्होंने कहा कि राज्य के विभिन्न जिलों में अब तक कुल 230 पलाश मार्ट की शुरूआत की जा चुकी है जो प्रशंसनीय है। वहीं इस पहल से 2 लाख से ज्यादा दीदियां लाभान्वित हो रही है। श्री आलम ने अपने संबोधन में कहा कि अब तक 128,374 समूह सदस्यों को अजीविका संवर्धन गतिविधियों हेतु 30,000/- रू से अधिक की व्यक्तिगत ऋण उपलब्ध करायी जा चुकी है। वहीं इस वित्तीय वर्ष में अब तक 209,118 समूह सदस्यों को व्यक्तिगत ऋण हेतू चिन्हित किया जा चुका है एवं इनको मुद्रा लोन / केसीसी लोन / अपने समूह से ऋण उपलब्ध कराने हेतु प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य के ग्रामीण इलाकों में फूलो झानो आशीर्वाद अभियान के जरिये हड़िया दारू निर्माण एवं बिक्री से जुड़ी 23,000 से ज्यादा महिलाओं को सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराया गया है। वहीं राज्य संपोषित जोहार परियोजना के तहत 17 जिलों के 68 प्रखंडों के 3815 गांव में 3922 उत्पादक समूह एवं 20 उत्पादक कंपनियों संचालन हो रहा है। जिसके तहत राज्य के करीब 2.21 लाख परिवारों को लाभ मिल रहा है। कार्यशाला को संबोधित करते हुए ग्रामीण विकास सचिव डॉ मनीष रंजन ने कहा कि इस कार्यशाला के जरिए संकुल संगठन के पदाधिकारियों को गांव के उत्पादों के संग्रहण, गुणवत्तापूर्ण संग्रहण एवं क्लस्टर तैयार करने से लेकर बाजार व्यवस्था पर प्रशिक्षित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सखी मंडल की प्रत्येक दीदी की आमदनी 10 हजार से 15 हजार करना हमारा लक्ष्य है। इस कार्यशाला में दीदियों को बिजनस प्लान के गुर एवं फायदे समेत पलाश के उत्पादों के बेहतर ब्रांडिंग, पैकेजिंग एवं गुणवत्ता पर भी मंथन किया जाएगा। ग्रामीण विकास सचिव ने दीदियों के शिकायत एवं सुझाव के लिए इंटरनल कंप्लेन सिस्टम पर कार्य करने की सलाह दी एवं आईटी टूल्स के उपयोग पर बल दिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जेएसएलपीएस के सीईओ सूरज कुमार ने कहा कि जिलावार क्लस्टर एप्रोच में कार्य करने के लिए सखी मंडल की दीदियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। आने वाले दिनों में दीदियां इस पहल से आत्मनिर्भरता के पथ पर बढ़ेगी एवं उनकी आमदनी में बढ़ोतरी होगी। कार्यक्रम में नाबार्ड के सीजीएम विनोद कुमार ने नाबार्ड के विभिन्न योजनाओं की जानकारी सखी मंडल की बहनों से साझा की। वहीं राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी के जीएम सुबोध कुमार ने सभी दीदियों से 8 जून को आयोजित होने वाले मेगा क्रेडिट कैंप में भाग लेने की अपील की। कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में संकुल संगठन के पदाधिकारियों को क्लस्टर एप्रोच, बिजनस प्लान, वित्तीय समावेशन पर प्रशिक्षित किया गया। इस अवसर पर राज्य के विभिन्न जिलों से 200 से ज्यादा संकुल संगठन की दीदियां उपस्थित थी। इस कार्यशाला में अपर सचिव राम कुमार सिन्हा, ग्रामीण विकास विभाग व अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित थे।
टीम एबीएन, रांची। राज्य सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी वंदना दादेल अपने कार्यों के साथ उद्योग विभाग के प्रधान सचिव का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। श्रीमती वंदना दादेल वर्तमान में कार्मिक प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की प्रधान सचिव है एवं मंत्रिमंडल सचिवालय समन्वय एवं निगरानी विभाग के प्रधान सचिव के अतिरिक्त प्रभार में भी है। इस सम्बन्ध में कार्मिक प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग अधिसूचना जारी की है।
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