एबीएन स्पोर्ट्स डेस्क। बायर्न म्युनिख के फॉरवर्ड रॉबर्ट लेवांडोवस्की एक बार फिर दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पुरूष फुटबॉलर चुने गए हैं जिन्होंने लियोनेल मेस्सी और मोहम्मद सालाह जैसे सितारों को पछाड़ा। पिछले महीने मेस्सी ने उन्हें पछाड़कर बलोन डी ओर पुरस्कार जीता था। अर्जेंटीना को 2021 कोपा अमेरिका खिताब दिलाने वाले मेस्सी फीफा के सर्वश्रेष्ठ फुटबॉलर की दौड़ में दूसरे और लिवरपूल के सालाह तीसरे स्थान पर रहे। लेवांडोवस्की ने म्युनिख से वीडियो लिंक के जरिए कहा, यह पुरस्कार जीतकर मैं गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। क्लब अधिकारियों ने उन्हें आनलाइन ट्रॉफी प्रदान की। लेवांडोवस्की 200 से अधिक देशों के राष्ट्रीय टीम कप्तानों और कोचों के साथ चुनिंदा मीडिया की पहली पसंद थे। मेस्सी को दुनिया भर के प्रशंसकों से पोलैंड के कप्तान से दुगुने से भी ज्यादा वोट मिले। तीनों उम्मीदवारों ने भी अपनी अपनी टीम के कप्तान के तौर पर वोट डाले। लेवांडोवस्की ने मेस्सी को दूसरे नंबर पर रखा जबकि सालाह ने अपने शीर्ष तीन में दोनों को रख। मेस्सी ने शीर्ष तीन में नेमार और काइलान एमबाप्पे को रखा जो अब पेरिस सेंट जर्मेन में उनके साथ खेलते हैं। लेवांडोवस्की ने 2020.21 सत्र में बायर्न को खिताब दिलाने के साथ बुंडेस्लिगा में रिकॉर्ड 41 गोल किए। उन्होंने 2021 में 43 गोल करके गर्ड म्यूलर के दोनों रिकॉर्ड तोड़े। उन्होंने कहा, अगर कुछ साल पहले आप मुझसे पूछते कि क्या यह संभव है तो मैं कहता कि नहीं। बुंडेस्लिगा में इतने गोल करना असंभव है। महिला वर्ग में बलोन डि ओर विजेता एलेक्सिया पुतालेस को ही इस पुरस्कार के लिए चुना गया। वह बासीर्लोना की कप्तान थी जिसने पहली महिला चैम्पियंस लीग जीती। चेलसी की सैम केर दूसरे स्थान पर रही जबकि बासीर्लोना की जेनिफर हरमोसो तीसरे स्थान पर रही। कोचिंग के दोनों पुरस्कार चेलसी के नाम रहे। थॉमस टचेल को सर्वश्रेष्ठ पुरूष कोच और एम्मा हायेस को सर्वश्रेष्ठ महिला कोच चुना गया। टचेल ने मैनचेस्टर सिटी के पेप गार्डियोला को पछाड़ा। फीफा विश्व एकादश में सालाह को जगह नहीं मिली चूंकि फॉरवर्ड पंक्ति में मेस्सी, लेवांडोवस्की, एर्लिंग हालैंड और क्रिस्टियानो रोनाल्डो को चुना गया। रोनाल्डो समारोह के मुख्य अतिथि भी थे जो खुद वहां मौजूद थे और पुरूष राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के लिए सर्वाधिक गोल करने का सर्वकालिक रिकॉर्ड तोड़ने के लिए उन्होंने विशेष पुरस्कार लिया।
एबीएन स्पोर्ट्स डेस्क। जिस टीम के पास कप्तान के रूप में किरोन पोलार्ड, ऑलराउंडर के रूप में जेसन होल्डर, बल्लेबाज के रूप में निकोलस पूरन, शाई होप और रोस्टन चेज जैसे खिलाड़ी हों। गेंदबाजी में भी टीम के पास अच्छे खिलाड़ी हों। अपनी परिस्थितियां हों, लेकिन फिर भी टीम को वनडे सीरीज में हार मिल जाए तो आप इसे शर्मनाक प्रदर्शन ही कहेंगे। ऐसा ही कुछ वेस्टइंडीज की टीम के साथ हुआ है और आयरलैंड ने इतिहास रच दिया है। आयरलैंड की टीम ने वनडे सीरीज में मेजबान वेस्टइंडीज को हरा दिया। जमैका के सबीना पार्क में खेली गई तीन मैचों की वनडे सीरीज को आयरलैंड ने 2-1 से अपने नाम किया है। इससे पहले आयरलैंड की टीम ने कभी भी वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज नहीं जीती थी। आयरलैंड के लिए ये किसी ऐतिहासिक पल से कम नहीं है कि उसने एक ऐसी टीम को हराया है, जो विश्व क्रिकेट में वर्चस्व रखती है। हालांकि, इन दिनों टीम इतनी अच्छी नहीं है। बता दें, आयरलैंड की टीम ने वनडे सीरीज में पहली बार किसी ऐसी टीम को हराया है, जिसने दो बार आईसीसी विश्व कप जीता है। आयरलैंड की टीम कभी भी ऐसी टीम के खिलाफ इससे पहले वनडे सीरीज नहीं जीत पाई है। इस सीरीज में जीत की शुरुआत भले ही वेस्टइंडीज की टीम ने की थी, लेकिन जीत के साथ अंत आयरलैंड की टीम ने किया है। दूसरा मैच आयरलैंड ने 5 विकेट से और आखिरी मैच 2 विकेट से जीता है। इस मैच की बात करें तो आयरलैंड की टीम ने टॉस जीतकर गेंदबाजी चुनी थी और वेस्टइंडीज की टीम को 212 रन पर ढेर कर दिया था। कैरेबियाई टीम के लिए 53 रन की पारी शाई होप और 44 रन की पारी जेसन होल्डर ने खेली थी। आयरिश टीम के लिए 4 विकेट एंडी मैकब्रिन और 3 विकेट क्रेग यंग ने चटकाए। वहीं, बल्लेबाजी में भी मैकब्रिन ने अपनी ताकत दिखाई और 59 रन की पारी खेली। 52 रन हैरी टेक्टर ने बनाए, जबकि 44 रन कप्तान पॉल स्ट्रलिंग ने बनाए। मैकब्रिन को प्लेयर ऑफ द मैच के साथ-साथ प्लेयर ऑफ द सीरीज भी चुना गया। उन्होंने सीरीज में दस विकेट लिए और 128 रन बनाए।
एबीएन स्पोर्ट्स डेस्क। ऑस्ट्रेलिया ने पांच टेस्ट मैचों की सीरीज के आखिरी मुकाबले में इंग्लैंड को 146 रन हरा दिया। इसी के साथ उसने सीरीज को 4-0 से अपने नाम कर लिया। कंगारू टीम ने पांचवीं बार एशेज को 4-0 के अंतर से अपने नाम किया है। इससे पहले 1948, 1958-59, 1989 और 2017-18 में ऐसा किया था। वह घरेलू मैदान पर लगातार 15 एशेज टेस्ट में नहीं हारा है। इस दौरान 13 जीते और दो ड्रॉ रहे हैं। होबार्ट में मिली जीत एशेज में इंग्लैंड के खिलाफ उसकी 150वीं टेस्ट जीत है। दूसरी ओर, 0-4 से सीरीज हारने वाली इंग्लैंड की टीम का प्रदर्शन बहुत ही खराब रहा। यहां तक कि 59 साल में टेस्ट क्रिकेट में उसका यह सबसे शर्मनाक प्रदर्शन है। इंग्लैंड की टीम 1963 के बाद पहली बार किसी पांच टेस्ट मैचों की सीरीज में 300 से ज्यादा रन किसी भी पारी में नहीं बना सकी। पहली बार 1906 में दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर उसके साथ ऐसा हुआ था। फिर 1958-59 में ऑस्ट्रेलिया और 1963 में वेस्टइंडीज के दौरे पर पांच टेस्ट की सीरीज में वो 300 रन का आंकड़ा नहीं छू सकी थी। बल्लेबाजी औसत के हिसाब से पांच टेस्ट मैचों की सीरीज में इंग्लैंड का यह तीसरा सबसे शर्मनाक प्रदर्शन है। इस बार पांच टेस्ट में उसका बल्लेबाजी औसत 20.21 रहा। इससे पहले 1986 में वेस्टइंडीज के खिलाफ 20.20 और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 1906 में 19.25 का औसत रहा था। टेस्ट कप्तान के तौर पर जो रूट को होबार्ट में 25वीं हार मिली है। उनसे ज्यादा टेस्ट बतौर कप्तान वेस्टइंडीज के ब्रायन लारा (26), न्यूजीलैंड के स्टीफेन फ्लेमिंग (27) और दक्षिण अफ्रीका के ग्रीम स्मिथ (29) हारे हैं। एशेज सीरीज में बतौर कप्तान जो रूट को 10वीं बार मिली है। उनसे ज्यादा हार सिर्फ इंग्लैंड के आर्ची मैकलारेन (11 हार) को मिली थी। रूट ऑस्ट्रेलिया में सबसे ज्यादा 12 टेस्ट हारने वाले पांचवें कप्तान बन गए हैं। इस मामले में एलिस्टर कुक और जिम्मी एंडरसन संयुक्त रूप से पहले स्थान पर हैं। दोनों ने 15-15 टेस्ट ऑस्ट्रेलिया में गंवाए थे। उनके बाद जैक हॉब्स 14 टेस्ट में हारे थे। विलफ्रेड रोड्स 12 टेस्ट ऑस्ट्रेलिया में हारे थे। वे रूट के साथ संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर हैं। ऑस्ट्रेलिया के कप्तान पैट कमिंस एशेज सीरीज में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बनकर उभरे हैं। उन्होंने पांच टेस्ट मैचों की सीरीज के चार मुकाबलों में हिस्सा लिया। इस दौरान 21 विकेट लिए। एक मैच चोट के कारण नहीं खेल पाए थे। कमिंस लगातार तीसरी बार एशेज सीरीज के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज साबित हुए हैं। स्टार्क ने पिछले तीन एशेज के 14 मैचों में 20.75 की औसत से 73 विकेट लिए हैं। उन्होंने 2017-18 में 23 विकेट, 2019 में 29 विकेट और 2021-22 में 21 विकेट अपने नाम किए हैं। इस बार एशेज में शीर्ष पांच गेंदबाजों में तीन ऑस्ट्रेलिया के हैं। कमिंस ने 21, मिशेल स्टार्क ने 19 और स्कॉट बोलैंड ने 18 विकेट लिए। इन तीनों के अलावा इंग्लैंड के मार्क वुड ने 17, ऑस्ट्रेलिया के ऑफ स्पिनर नाथन लियोन ने 16, कैमरून ग्रीन ने 13, इंग्लैंड के स्टुअर्ट ब्रॉड ने 13 और ओली रॉबिंसन ने 11 विकेट लिए।
एबीएन स्पोर्ट्स डेस्क। लक्ष्य सेन ने इंडिया ओपन के एकल स्पर्धा का ख़िताब अपने नाम कर लिया है। 20 वर्षीय लक्ष्य ने मौजूदा विश्व चैंपियन लोह कीन येव को सीधे सेटों में हराकर अपना पहला इंडिया ओपन खिताब जीता। विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने वाले अल्मोड़ा के लक्ष्य पहली बार बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर सुपर 500 इवेंट के फाइनल में पहुंचे थे। टूर्नामेंट के तीसरे वरीय लक्ष्य ने अपना शानदार फॉर्म बरकरार रखते हुए खिताबी मुकाबले में सिंगापुर के लोह कीन को एकतरफा अंदाज में 24-22, 21-17 से पटखनी दी। दुनिया के 17वें नंबर के खिलाड़ी लक्ष्य ने इससे पहले सेमीफाइनल में भी शानदार प्रदर्शन किया था। वहां उनकी शुरुआत अच्छी नहीं रही थी और उन्हें 60वीं रैंक वाले योंग के हाथों पहला सेट 19-21 से गंवाना पड़ा। लेकिन इसके बाद उन्होंने जोरदार वापसी की और आखिरी के दोनों सेट अपने नाम किया। टूर्नामेंट के महिला एकल के फाइनल में थाईलैंड की बुसानन ओंग्बारुंगफान ने हमवतन सुपानिदा कातेथोंग को हराकर खिताब पर कब्जा किया।
एबीएन स्पोर्ट्स डेस्क। चिराग शेट्टी और सात्विकसाईराज रंकिरेड्डी की स्टार भारतीय जोड़ी ने इंडिया ओपन के युगल स्पर्धा का खिताब अपने नाम कर लिया है। टूर्नामेंट की इस दूसरी वरीय जोड़ी ने तीन बार की विश्व चैंपियन और शीर्ष वरीय मोहम्मद अहसान और हेंड्रा सेतियावान की जोड़ी को सीधे सेटों में 21-16, 26-24 से हराया। भारतीय जोड़ी ने पहले सेट में जोरदार खेल दिखाया और इंडोनेशियाई जोड़ी के खिलाफ 21-16 से जीत दर्ज की। हालांकि इसके बाद अहसान-हेंड्रा की जोड़ी ने वापसी की और दूसरे सेट में कड़ी टक्कर दी लेकिन अंत में चिराग-सात्विक ने बाजी अपने नाम की। दुनिया के 10वें नंबर की भारतीय जोड़ी ने फाइनल मुकाबले में बेहतरीन खेल दिखाया और महज 43 मिनट के अंदर अपने प्रतिद्वंदी को शिकस्त दी। इसके साथ ही चिराग-सात्विक की जोड़ी अब इंडिया ओपन का खिताब जीतने वाली पहली भारतीय पुरुष टीम बन गई है।
एबीएन स्पोर्ट्स डेस्क। ऑस्ट्रेलियन ओपन 2022 के आयोजकों ने कुछ ही घंटे पहले इस बात की जानकारी दी थी कि दुनिया के नंबर वन टेनिस खिलाड़ी नोवाक जोकोविच टूर्नामेंट में खेलेंगे। सोमवार को नोवाक जोकोविच का पहला मैच सर्बिया के ही खिलाड़ी से होना था, लेकिन अब पुष्टि हो गई है कि नोवाक जोकोविच को स्वदेश लौटना होगा। नोवाक जोकोविच का वीजा दूसरी बार ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने कैंसिल किया था और वे इसके खिलाफ कोर्ट गए थे, लेकिन कोर्ट में वे केस हार चुके हैं। अब उन्हें मेलबर्न से डिपोर्ट किया जाएगा। 20 बार ग्रैंडस्लैम जीत चुके महान टेनिस खिलाड़ी नोवाक जोकोविच की ऑस्ट्रेलियन ओपन में खेलने की उम्मीदें रविवार को तब धराशायी हो गईं, जब एक अदालत ने निर्वासन आदेश के खिलाफ शीर्ष क्रम के टेनिस स्टार की अपील को खारिज कर दिया। फेडरल कोर्ट के तीन जजों ने जनहित के आधार पर 34 वर्षीय सर्बियाई खिलाड़ी के वीजा को कैंसिल करने के आव्रजन मंत्री द्वारा शुक्रवार को किए गए फैसले को बरकरार रखा। इतना ही नहीं, नोवाक जोकोविच पर ऑस्ट्रेलिया आने पर तीन साल का बैन भी लगाया जा सकता है। वीजा कैंसिल और फिर डिपोर्ट करने के निर्णय की संभावना का मतलब है कि जोकोविच, जिन्होंने COVID-19 का टीका नहीं लगवाया है, मेलबर्न में तब तक नजरबंद रहेंगे जब तक उन्हें निर्वासित नहीं किया जाता। निर्वासन आदेश में आमतौर पर ऑस्ट्रेलिया लौटने पर तीन साल का प्रतिबंध भी शामिल होता है। मंत्री ने इस आधार पर वीजा कैंसिल कर दिया था कि ऑस्ट्रेलिया में जोकोविच की उपस्थिति ऑस्ट्रेलियाई जनता के स्वास्थ्य और अच्छे आदेश के लिए एक जोखिम हो सकती है और ऑस्ट्रेलिया में अन्य लोगों द्वारा टीकाकरण के प्रयासों के लिए प्रतिकूल हो सकती है।
एबीएन खेल डेस्क। भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली द्वारा टेस्ट कप्तानी भी छोड़ देने के बाद सोशल मीडिया पर क्रिकेट दिग्गजों ने उन्हें शानदार करियर के लिए बधाई दी। इसी बीच बीसीसीआई का विराट कोहली को लेकर किया गया ट्विट भी चर्चा का विषय रहा। विराट की घोषणा वाले ट्विट को रीट्विट करते हुए बीसीसीआई ने बधाई संदेश दिया। ट्विट में लिखा गया- विराट कोहली जो अपने प्रशंसनीय नेतृत्व गुणों के साथ टेस्ट टीम को अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर ले गए। उन्होंने 68 मैचों में भारत का नेतृत्व किया और 40 जीत के साथ सबसे सफल कप्तान रहे हैं। बीसीसीआई से चल रहा था विवाद : टी-20 विश्व कप से पहले ही विराट कोहली ने अचानक टी-20 कप्तानी छोडऩे का फैसला कर लिया था। इस बीच बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली का बयान आया कि उन्होंने विराट से कप्तान न छोडऩे का आगृह किया था। वहीं, विराट ने प्रेस वार्ता के दौरान साफ तौर पर बोल दिया कि उन्हें किसी भी बीसीसीआई अधिकारी ने कप्तानी न छोडऩे के लिए नहीं कहा। मामला बढ़ा तो इसी बीच दक्षिण अफ्रीका में वनडे सीरीज के घोषणा का दिन आ गया। मुख्य चयनकत्र्ता चेतन शर्मा ने टीम की घोषणा के साथ ही कहा कि विराट वनडे कप्तान नहीं रह सकते क्योंकि हमेें लगता है कि सफेद गेंद फॉर्मेट में अलग-अलग कप्तानी रखना अच्छी बात नहीं है। वहीं, विराट कोहली के उस दावे पर कि किसी बीसीसीआई अधिकारी ने उन्हें कप्तानी न छोडऩे के लिए नहीं कहा, पर चेतन शर्मा ने कहा कि हम पांचों सिलेक्टर्स ने मीटिंग में विराट को टी-20 विश्व कप से ठीक पहले कप्तानी न छोडऩे के लिए कहा था। हमें लग रहा था कि इससे गलत मैसेज जाएगा। लेकिन विराट नहीं माने। मीडिया चेतन के बयान के बाद कोहली की प्रतिक्रिया देख रहा था। कोहली सामने आए और उन्होंने घुमाकर कहा कि वह किसी को सफाई नहीं देना चाहते। इस बीच अब कोहली द्वारा टेस्ट कप्तानी भी छोडऩे की बात सामने आ गई है।
एबीएन स्पोर्ट्स डेस्क। भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली ने वनडे और टी-20 के बाद टेस्ट टीम की कप्तानी भी छोड़ दी है। टीम इंडिया की अगुवाई में विराट ने अभी दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीन टेस्ट मैचों की सीरीज खेली थी जिसमें भारतीय टीम को हार झेलनी पड़ी थी। विराट ने एक ट्विट कर कप्तानी छोड?े की पुष्टि की है। विराट टी-20 विश्व कप से पहले ही टी-20 की कप्तानी छोड़ चुके थे। इसके बाद वह वनडे के कप्तान भी नहीं रहे क्योंकि बीसीसीआई सफेद गेंद फॉर्मेट में किसी एक को ही कप्तान रखना चाहती थी। विराट ने बतौर कप्तान 68 मैच खेले। जिसमें 40 जीत और 17 मैचों में हार का सामना करना पड़ा। उनका जीत प्रतिशत 58.82 है। बहरहाल, विराट कोहली ने ट्विटर पर कप्तानी छोड़ने के कारणों पर एक लंबा नोट भी डाला है। कोहली ने लिखा है- टीम इंडिया को सही दिशा में ले जाने के लिए रोजाना 7 सालों की मेहनत, कठिन परिक्षम और अथक प्रयास किए हैं। इस दौरान मैंने अपना काम ईमानदारी से निभाया। हर चीज का किसी न किसी मोड़ पर अंत होता है जैसे मेरा टीम इंडिया के लिए टेस्ट कप्तानी का था। इस दौरान करियर में कई तरह के उतार-चढ़ाव रहे लेकिन कभी भी मैंने कोशिश में कोई कमी नहीं रहने दी। मैंने हमेशा कोशिश की है कि जो भी कुछ करूं उसमें अपना 120 फीसदी योगदान दूं। मुझे पता है कि यह ऐसा करने के लिए सही समय नहीं है। लेकिन मेरे दिमाग में इसको लेकर पूरी स्पष्टता है और मैं टीम को लेकर बेईमान नहीं हूं। मैं टीम इंडिया को इतने लंबे समय तक लीड करने का मौका देने के लिए बीसीसीआई का धन्यवाद करना चाहता हूं। इसके साथ ही अपने टीम के साथियों को भी जिन्होंने टीम के विजन को आगे रखते हुए हर स्थिति में हरसंभव प्रयास किया। आप लोगों ने इस इस सफर के और भी यादगार और खूबसूरत बना दिया है। रवि भाई और सहयोगी साथी इस गाड़ी के इंजन रहे, जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में निरंतर सफलता दिलाई। आप सभी ने मेरी जिंदगी में बड़ा रोल निभाया। अंत में महेंद्र सिंह धोनी का शुक्रिया जिन्होंने बतौर कप्तान मुझमें विश्वास दिखाया ताकि मैं भारतीय क्रिकेट को आगे ले जा सकूं।
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