1600 से अधिक किसानों की सहभागिता; मृदा स्वास्थ्य, संतुलित उर्वरक प्रबंधन एवं आधुनिक कृषि तकनीकों पर हुआ संवाद
एबीएन न्यूज नेटवर्क, खूंटी। तोरपा प्रखंड के दियांकेल में किसानों को वैज्ञानिक एवं आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से फसल विचार संगोष्ठी सह पौध रोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के 1600 से अधिक किसानों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम में डॉ. प्रदीप कुमार, चीफ मैनेजर (मार्केटिंग), इफको दिल्ली, डॉ. शशिभूषण समदर्शी, राज्य विपणन प्रमुख, इफको झारखंड, डॉ. बी.के. अग्रवाल, चीफ साइंटिस्ट, मृदा विभाग, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, इतवारी देवी, तोरपा महिला कृषि बागवानी स्वावलंबी सहकारी समिति, केवीके खूंटी के वैज्ञानिक, श्रीमती मसी गुड़िया, जिला परिषद अध्यक्ष, स्थानीय जनप्रतिनिधि, मुखिया एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. बी.के. अग्रवाल ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य एवं संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक एवं असंतुलित उपयोग से मिट्टी के भौतिक, रासायनिक एवं जैविक गुणों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों के बारे में किसानों को जागरूक किया। उन्होंने किसानों को मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक प्रबंधन, संतुलित पोषक तत्वों के उपयोग तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण को खेती का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की सलाह दिये।
डॉ. प्रदीप कुमार ने किसानों को फसल की आवश्यकता के अनुरूप उर्वरकों के संतुलित उपयोग एवं पोषक तत्वों की उपयोग दक्षता बढ़ाने के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने नैनो उर्वरकों के वैज्ञानिक एवं अनुशंसित तरीके से उपयोग पर विशेष जोर देते हुए किसानों को सही समय एवं उचित मात्रा में छिड़काव करने की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने तथा वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों के माध्यम से उत्पादन क्षमता एवं संसाधन उपयोग दक्षता में सुधार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. शशिभूषण समदर्शी ने आगामी फसलों की बुवाई से पहले नैनो डीएपी द्वारा बीज उपचार एवं जड़ उपचार की विधि की जानकारी किसानों के साथ साझा की। उन्होंने उपयोग की प्रक्रिया एवं सावधानियों को सरल तरीके से समझाया। उन्होंने फसल की अवस्था एवं आवश्यकता के अनुसार नैनो उर्वरकों के पर्णीय छिड़काव के संबंध में भी जानकारी दी तथा किसानों को उर्वरकों का उपयोग निर्धारित अनुशंसा एवं वैज्ञानिक विधि के अनुसार करने के लिए जागरूक किया।
केवीके खूंटी के वैज्ञानिकों ने किसानों को कृषि के साथ पशुपालन, गौ पालन, दुग्ध उत्पादन एवं दुग्ध व्यवसाय को जोड़ने के लाभों की जानकारी दी।
वैज्ञानिकों ने चारा प्रबंधन, चारागाह विकास, पशु पोषण एवं वैज्ञानिक पशुपालन के महत्व पर प्रकाश डाला और किसानों को कृषि आधारित आय के साथ-साथ पशुपालन एवं अन्य आयवर्धक गतिविधियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
संगोष्ठी के दौरान किसानों एवं कृषि विशेषज्ञों के बीच मृदा स्वास्थ्य, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, नैनो उर्वरक, आधुनिक कृषि तकनीक, फसल प्रबंधन, पशुपालन, दुग्ध व्यवसाय एवं आयवर्धक कृषि गतिविधियों सहित विभिन्न विषयों पर संवाद हुआ। किसानों ने अपनी फसलों एवं कृषि से जुड़ी समस्याओं को विशेषज्ञों के समक्ष रखा, जिन पर उपस्थित कृषि वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों द्वारा आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के दौरान अतिथियों, जनप्रतिनिधियों एवं किसानों द्वारा पौधरोपण भी किया गया। पौधरोपण के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एवं कृषि के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, आधुनिक कृषि तकनीकों, नैनो उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग तथा कृषि आधारित आयवर्धक गतिविधियों के प्रति जागरूक करना रहा।
इफको और तोरपा महिला कृषि बागवानी स्वालम्बी सहकारी समिति और बड़ी संख्या में किसानों की सक्रिय एवं उत्साहपूर्ण सहभागिता के साथ कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम ने किसानों और कृषि विशेषज्ञों के बीच ज्ञान, तकनीक एवं अनुभव के आदान-प्रदान के लिए एक प्रभावी मंच प्रदान किया।