टीम एबीएन, रांची। झारखंड में मानसून के शुरुआती दिनों में बारिश ने अपना कमाल नहीं दिखाया था, लेकिन इसके विदाई लेने के दिनों में मानसून तेज रहा। बताया जा रहा है कि राज्य के कई हिस्सों में मौसम बदल रहा है।
मौसम विभाग की मानें तो आने वाले दिनों में आसमान साफ रहेगा। रात में ठंड दस्तक देने लगेगी। रात में ठंड महसूस होने लगेगी और कंबल निकालने की नौबत आ जायेगी। मौसम विभाग के मुताबिक, दुर्गा पूजा के दौरान भी आसमान साफ रहने का अनुमान लगाया गया है।
राज्य में धीरे-धीरे ठंड दस्तक दे रही है। हालांकि बीते घंटों में झारखंड के कुछ इलाकों में हल्की बारिश रिकॉर्ड की गयी है। गौरतलब है कि बीते कुछ दिन पहले राज्य में बारिश ने अपना कहर बरपाया हुआ था।
मानसून के शुरूआती दिनों में लोगों को अच्छी बारिश के लिए तरसना पड़ रहा था। किसानों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन मानसून के आखिरी दिनों में लोगों को अच्छी बारिश देखने को मिली।
टीम एबीएन, गुमला। दुनिया भर में तेजी से बदलते पर्यावरण प्रदूषण ऋतुओं में परिवर्तन कृषि वानिकी और वन उत्पादों में पड़ रहा इसका गहरा प्रभाव मानव जीवन की शैली में अत्यंत आमूल चूल परिवर्तन के लिए विवश कर रहा है। ऐसे मे पारिस्थितिकी के साथ-साथ मानव जीवन और उनके व्यवहार पर अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों का ध्यान उस पर केंद्रित होना स्वाभाविक है।
गुमला की भूमि आरंभ से ही यहां की जनजातीय और वनस्पतियों की विविधता के अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं को आकर्षित करती रही है। लेकिन जब से वनस्पतियों को लेकर वर्षों से लगातार शोध कर रहे प्राध्यापक प्रसनजीत मुखर्जी कार्तिक उरांव महाविद्यालय गुमला में योगदानन दिया है वनस्पति विज्ञान के छात्रों और इससे रुचि रखने वालों की जिज्ञासा को तृप्तकर उनके अरमानों पर पंख लगाने का भरपूर प्रयास किया है।
यूं तो प्रोफेसर मुखर्जी ने इस दिशा में अनेक पहल किए हैं लेकिन इथेनॉबॉटनी एनवायरमेंटल स्टेनबिलिटी एंड मल्टीडिसिंप्निरी रिसर्चस पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन करने की एक महत्वाकांक्षी पहल गुमला ही नहीं रांची विश्वविद्यालय और झारखंड प्रदेश के लिए एक माइल स्टोन होगा।
इस सम्मेलन में जनजातीय जनजीवन जैव विविधता पर्यावरण संरक्षण पर्यावरण क्षति ऋतु परिवर्तन प्रदूषण खनन और उसका प्रभाव कृषि वानिकी एवं वन उत्पाद पारितंत्र जनजातीय अधिकारों का संरक्षण आदि विषयों पर तथ्य पूर्ण चर्चा होगी ।इस सम्मेलन में देश-विदेश के 100 से अधिक वैज्ञानिक और शोधकर्ता भाग लेंगे।
इसकी जानकारी देते हुए इस सम्मेलन के आयोजन सचिव डॉक्टर प्रसनजीत मुखर्जी ने कहा कि इसमें भाग लेने वाले वैज्ञानिक अथवा शोधार्थी नवंबर तक अपना संक्षिप्त सार mailcser@ gmail.com में भेज सकते हैं। इस सम्मेलन के लिए रांची की संस्था सेंटर फॉर सोशल एंड एनवायरमेंटल रिसर्च ने सहयोग का पूरा आश्वासन दिया है।
मौके पर इथेनोबॉटनी विषय पर एक कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी जिसमें स्थानीय आयुर्वेद विधि द्वारा उपचार कर रहे चिकित्सक भी हिस्सा ले सकेंगे। मौके पर जनजातीय भोजन बनाने की प्रतियोगिता एवं औषधीय पौधों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।
इस अवसर पर उन्होंने कॉन्फ्रेंस ब्रोशर का भी विमोचन किया गया। इसकी सफलता के लिए कार्तिक उरांव महाविद्यालय के प्राचार्य ए जे खलखो, डॉ दिलीप प्रसाद, डॉ सतीश गुप्ता, प्रोफेसर टेटरु तिर्की, डॉ सीमा, डॉ कंचन और डॉक्टर संजय भोक्ता तैयारी शुरू कर दी है।
एबीएन सेंटल डेस्क। ओडिशा में चक्रवात को लेकर राज्य सरकार अलर्ट मोड पर है। इसको लेकर राज्य सरकार ने शुक्रवार को बड़े स्तर पर बैठक कर 45 दिनों के लिए अलर्ट जारी किया है। बता दें कि ओडिशा में अक्तूबर और नवम्बर महीने को चक्रवात काल कहा जाता है क्योंकि पिछले कई वर्षों से इन दिनों ही दस्तक देता है।
इस बीच एक अधिकारी ने बताया कि शुक्रवार को मुख्य सचिव पीके जेना ने चक्रवात को लेकर बड़ें स्तर पर बैठक की। इसमें कलेक्टर और सचिव अधिकारियों को 10 अक्तूबर से 45 दिनों के लिए अलर्ट जारी करते हुए तैयारियां और व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये हैं।
बैठक में भुवनेश्वर के मौसम विभाग के निदेशक एचआर विश्वास ने भी भाग लिया। इस दौरान सरकार को जानकारी देते हुए विश्वास ने कहा कि चक्रवात दक्षिण पश्चिम से 10 अक्तूबर तक वापस हो सकता है।
चक्रवात बंगाल की खाड़ी में 45 दिनों तक ही स्थिर रहते हैं। पिछले साल भी चक्रवात राज्य में 45 दिनों तक ही बने थे, इसलिए 10 अक्तूबर से राज्य में सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
टीम एबीएन, रांची। उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव का असर झारखंड में दिखने लगा है। 30 सितंबर से ही राजधानी रांची सहित राज्य के कई जिलों में बारिश होने लगी है। अगले 24 घंटे में इसके और प्रभावी होने की उम्मीद है, जिसके बाद कई जिलों में भारी बारिश होगी।
निम्न दबाव के कारण राज्य के विभिन्न जिलों में अलग-अलग दिनों में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। मौसम केंद्र ने इसको लेकर ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है।
विभाग ने राज्य के 6 जिलों में ऑरेंज अलर्ट और 7 जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है। अलर्ट के दौरान वज्रपात की काफी ज्यादा आशंका होती है। ऐसे में मौसम विभाग ने लोगों को इससे बचने की अपील की है।
एक अक्टूबर को गुमला, खूंटी, सिमडेगा, रांची, धनबाद तथा पश्चिमी सिंहभूम में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है।
दो अक्टूबर को साहिबगंज, गोड्डा, देवघर, दुमका, साहिबगंज, हजारीबाग और कोडरमा में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है।
तीन अक्टूबर को राज्य के पश्चिमी हिस्से गढ़वा, पलामू, चतरा, लातेहार, सिमडेगा जिले में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है।
4 अक्टूबर से बारिश में कमी आ सकती है, लेकिन पूरी तरह राहत नहीं मिलेगी।
टीम एबीएन, लोहरदगा। सेन्हा थाना क्षेत्र के बदला गांव स्तिथ खेत से ग्रामीणों ने एक आठ फीट के अजगर को पकड़ कर वन विभाग को सौंप दिया है।
जानकारी के अनुसार किसान बिरसा उरांव जब खेत में करम डाल लगाने गया, तो उसने वहां पर खेत में अजगर को देख कर इसकी सूचना ग्रामीणों को दी। अजगर को देखने खेत में ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी।
मौके पर मौजूद डब्लू अंसारी, लाल विक्रम नाथ शाहदेव, छोटु, सुखसागर पाण्डे,और लाल कमल नाथ सहदेव ने अजगर को खेत से बाहर निकाला। ग्रामीणों ने अजगर को पकड़ कर वन विभाग को सुपुर्द कर दिया है। पकड़े गये अजगर को वन विभाग सुरक्षित जंगल में छोड़ देगा।
टीम एबीएन, रांची। बंगाल की खाड़ी में बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन लो प्रेशर एरिया का व्यापक असर झारखंड में दिख रहा है। पिछले 24 घंटे में राज्य में लगभग सभी स्थानों पर हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश हुई जबकि कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा भी दर्ज की गयी। राज्य में मानसून सक्रिय रहा।
सबसे अधिक वर्षा 160.2 एमएम गोड्डा (सुंदरपहाड़ी) में दर्ज किया गया। वहीं सबसे अधिक उच्चतम तापमान 31.4 डिग्री सेल्सियस चाइबासा में और सबसे न्यूनतम तापमान 22.4 डिग्री सेल्सियस रांची में दर्ज किया गया।
आज भी राज्य के लगभग सभी जिलों में बारिश हो रही है। संताल परगना के कुछ जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया गया है। लो प्रशेर की वजह से 22 सितंबर को दुमका, गोड्डा, पाकुड़, और साहिबगंज में भारी से बहुत भारी बारिश के आसार हैं। इसलिए यहां ऑरेंज अलर्ट जारी है।
राज्य के उत्तर-पूर्वी और निकटवर्ती उत्तरी भागों में भी कहीं-कहीं भारी वर्षा हो सकती है। 23 सितंबर को राज्य के उत्तर पूर्वी भागों में कहीं-कहीं भारी वर्षा हो सकती है। इसके अलावा 24 से 28 सितंबर तक भी राज्य के कई जिलों में हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश की भी संभावना जतायी है।
टीम एबीएन, रांची। बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाववाला क्षेत्र बनने से इसका असर झारखंड पर भी पड़ा है। इससे झारखंड के कई इलाकों खास कर मध्य व दक्षिणी भाग में गुरुवार को अच्छी बारिश हुई है।
मौसम विभाग के अनुसार, 15 सितंबर को मध्य, पश्चिमी भाग सहित अन्य इलाकों में बारिश होगी। 16 सितंबर को बारिश में कमी आयेगी। इससे आसमान धीरे-धीरे साफ होगा, जबकि 17 सितंबर को आसमान के पूरी तरह साफ रहने की संभावना है।
मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद के अनुसार, 24 घंटे में मानसून की गति सामान्य रही है। बंगाल की खाड़ी में आनेवाले समय में फिर निम्न दबाववाला क्षेत्र बनने की संभावना है। विभाग को मुताबिक, इससे पूरे सितंबर में कुछ दिनों के अंतराल पर बारिश होने की संभावना है।
15 और 16 सितंबर को कहीं-कहीं गर्जन के साथ बारिश हो सकती है। वहीं वज्रपात को लेकर विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है।
टीम एबीएन, लोहरदगा। किस्को चौक के समीप स्थित लोहरदगा कृषि विज्ञान केंद्र के द्वारा आयोजित बीज, विक्रेताओं का 15 दिवसीय सर्टिफिकेट कोर्स के आठवीं दिन आज शनिवार को प्रशिक्षण दिया गया।
मौके पर उपस्थित मुख्य वैज्ञानिक डॉ राकेश रंजन ने फूलों की खेती के बारे में जानकारी देते हुए प्रशिक्षणार्थियों को कहा कि फूलो की खेती आपके लिए एकदम सही साबित हो सकता है।
यहां आपको बस खेती का बुनियादी ज्ञान चाहिए और आप कहीं भी फूलों की खेती शुरू कर सकते हैं। आज कल फूलों की डिमांड काफी रहती है। क्योंकि इसका इस्तेमाल सुख-दुख हर परिस्थिति में हो रहा है।
इसके अलावा अलग-अलग फूलों की अपनी विशेषताएं हैं जो किसी को इत्र के लिए तो किसी को दवा में इस्तेमाल के लिए योग्य बनाती हैं। उन्होंने कहा कि फूलों की खेती कम खर्च में बेहतर आमदनी का साधन बन सकता है। इसके अलावा समेकित कृषि प्रणाली पर भी जानकारी दी गई।
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